विजय कुमार

निदेशक, विश्व संवाद केन्द्र सुदर्शन कुंज, सुमन नगर, धर्मपुर देहरादून - २४८००१

मोदी लहर में सब साफ

भा.ज.पा. को शुरू से ही बादल विरोधी रुझान दिख रहा था। फिर भी उसने साथ नहीं छोड़ा। इसके दो कारण हैं। एक तो दोनों का साथ पुराना है। दूसरा भा.ज.पा. वहां शहरी हिन्दुओं की पार्टी है, तो अकाली ग्रामीण सिखों की। दोनों का मेल वहां सामाजिक सद्भाव का समीकरण बनाता है। इसे बचाने के लिए निश्चित हार का खतरा उठाकर भी भा.ज.पा. अकालियों के संग रही।

भारत के नये पर्व 

चुनाव की आहट आते ही ये भी शुरू हो जाते हैं। राजनीतिक दल और उनके नेता घोषणाएं करने लगते हैं कि सत्ता में आकर हम ये करेंगे और वो करेंगे। कुछ लोग तो आकाश से तारे तोड़ लाने की बात करने लगते हैं, भले ही उनकी झोली में घर के वोट भी न हों। इसे ‘घोषणा पर्व’ कहते हैं। इससे मिलता हुआ ‘उद्घाटन पर्व’ है। सत्ताधारी नेता आधी हो या अधूरी, पर हर सप्ताह किसी न किसी योजना का उद्घाटन कर देते हैं।