विजय कुमार

निदेशक, विश्व संवाद केन्द्र सुदर्शन कुंज, सुमन नगर, धर्मपुर देहरादून - २४८००१

 जातिवाद पे सब बलिहारी   

– जी हां। और प्रतिभा पाटिल के बारे में तो एक कांग्रेसी नेता ने ही कहा था कि उनके हाथ की बनी चाय इंदिरा जी को बहुत पसंद थी। इसलिए वे प्रायः प्रधानमंत्री भवन पहुंच जाती थीं। इसके पुरस्कारस्वरूप ही उन्हें राष्ट्रपति बनाया गया। ये बात दूसरी है कि इतना कहने पर ही उसे कांग्रेस से बर्खास्त कर दिया गया। सुना तो ये भी गया है कि अवकाश प्राप्ति के बाद वे राष्ट्रपति भवन से काफी कुछ बटोर कर ले गयीं, जिसे फिर उंगली टेढ़ी करने पर ही वापस भेजा।

फर्क डी.एन.ए. का है

संघ का डी.एन.ए. सौ प्रतिशत भारतीय है। उसने अपने प्रतीक और आदर्श भारत से ही लिये। भगवे झंडे को गुरु माना। देश, धर्म और समाज की सेवा में अपना तन, मन और धन लगाने वाले सभी जाति, वर्ग, क्षेत्र, आयु और लिंग के महामानवों को अपने दिल में जगह दी। हिन्दू संगठन होते हुए भी अन्य मजहब या विचार वालों से द्वेष नहीं किया। उन्हें समझने तथा शिष्टता से अपनी बात समझाने का प्रयास किया। शाखा के साथ-साथ निर्धन और निर्बल बस्तियों में सेवा के लाखों प्रकल्प खोले। अतः संघ धीरे-धीरे पूरे भारत में छा गया और लगातार बढ़ रहा है।

केरल में बढ़ती हिंसा चिंताजनक

केरल के मुसलमान आज भी बड़ी संख्या में खाड़ी देशों में काम के लिए जाते हैं। इससे उनके घर तथा मस्जिदें सम्पन्न हुई हैं। उनकी भाषा, बोली और रहन-सहन पर भी अरबी प्रभाव दिखने लगा है। यह चिंताजनक ही नहीं, दुखद भी है। देश विभाजन की अपराधी मुस्लिम लीग को देश में अब कोई नहीं पूछता, पर जनसंख्या और धनबल के कारण केरल में आज भी उनके विधायक और सांसद जीतते हैं।

पुनर्मूषको भव :

अखिलेश हों या मायावती या फिर केजरीवाल। सबको खोट अपनी नीतियों में नहीं, वोट मशीनों में लग रहा है। कांग्रेस के सुपर लीडर तो अभी चुप हैं; पर उनके कुछ साथी इसका विरोध कर रहे हैं। राहुल बाबा ने चुनाव में काफी काम किया है। इसके परिणाम उनके लिए तो नहीं, पर देश के लिए अच्छे रहे। सुना है अभी वे थकान उतार रहे हैं। जब वे काम के मूड में आएंगे, तब देखेंगे कि क्या कहते हैं ?

स्वच्छ भारत अभियान : अभियानों से नहीं सुधरेगी व्यवस्था

बाजारों में एक अजीब दृश्य दिखता है। लोग सुबह दुकान खोलते समय सफाई करते हैं और फिर कूड़ा सड़क पर डाल देते हैं। घरों में भी प्रायः ऐसा होता है। अब कई जगह नगरपालिकाएं सप्ताह में दो बार कूड़ागाड़ी भेजने लगी हैं; पर लोगों को आज नहीं तो कल समझना होगा कि सफाई करने की नहीं रखने की चीज है। ऐसी वस्तुएं प्रयोग करें, जो फिर काम आ सकें। घर का कूड़ा घर में ही खपाना या नष्ट करना होगा। वरना समस्या बढ़ती ही जाएगी।