विजय कुमार

निदेशक, विश्व संवाद केन्द्र सुदर्शन कुंज, सुमन नगर, धर्मपुर देहरादून - २४८००१

 जातिवाद पे सब बलिहारी   

– जी हां। और प्रतिभा पाटिल के बारे में तो एक कांग्रेसी नेता ने ही कहा था कि उनके हाथ की बनी चाय इंदिरा जी को बहुत पसंद थी। इसलिए वे प्रायः प्रधानमंत्री भवन पहुंच जाती थीं। इसके पुरस्कारस्वरूप ही उन्हें राष्ट्रपति बनाया गया। ये बात दूसरी है कि इतना कहने पर ही उसे कांग्रेस से बर्खास्त कर दिया गया। सुना तो ये भी गया है कि अवकाश प्राप्ति के बाद वे राष्ट्रपति भवन से काफी कुछ बटोर कर ले गयीं, जिसे फिर उंगली टेढ़ी करने पर ही वापस भेजा।

फर्क डी.एन.ए. का है

संघ का डी.एन.ए. सौ प्रतिशत भारतीय है। उसने अपने प्रतीक और आदर्श भारत से ही लिये। भगवे झंडे को गुरु माना। देश, धर्म और समाज की सेवा में अपना तन, मन और धन लगाने वाले सभी जाति, वर्ग, क्षेत्र, आयु और लिंग के महामानवों को अपने दिल में जगह दी। हिन्दू संगठन होते हुए भी अन्य मजहब या विचार वालों से द्वेष नहीं किया। उन्हें समझने तथा शिष्टता से अपनी बात समझाने का प्रयास किया। शाखा के साथ-साथ निर्धन और निर्बल बस्तियों में सेवा के लाखों प्रकल्प खोले। अतः संघ धीरे-धीरे पूरे भारत में छा गया और लगातार बढ़ रहा है।