लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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ban on alcoholडॉ. वेदप्रताप वैदिक

 

सर्वोच्च न्यायालय ने केरल की राज्य सरकार द्वारा की गई शराबबंदी का समर्थन किया है। केरल की सरकार ने समस्त होटलों और शराबखानों में शराब परोसने पर पाबंदी लगा दी है। सिर्फ उसने पांच सितारा होटलों को छूट दी है। वे चाहें तो शराब पिला सकती हैं। अब केरल के लगभग 400 शराबखाने बंद हो जाएंगे। वे वहां बीयर और वाइन भी नहीं परोस सकेंगे। पांच-सितारा होटलों को छूट देने के दो कारण बताए गए हैं। पहला तो यह कि कुल मिलाकर जितनी शराब केरल में बिकती है, उसकी सिर्फ वहां डेढ़-दो प्रतिशत ही बिकती है। इतनी-सी बिक्री को छूट देने से खास कुछ बनता-बिगड़ता नहीं है। इसके अलावा पांच-सितारा होटलों की शराब इतनी मंहगी होती है कि मध्यम वर्ग के लोग भी वहां पीने की हिम्मत नहीं करते। यदि वहां पीने की छूट होगी, तब भी कौन जाकर पी सकेगा। पांच-सितारा होटलों को इसलिए भी छूट देनी जरुरी है कि उनमें विदेशी पर्यटक ठहरते हैं। उनसे वे पैसा क्यों न कमाएं?

सर्वोच्च न्यायालय ने शराबबंदी के पक्ष में जो तर्क दिए हैं, वे बेजोड़ हैं। उसने केरल राज्य के लोगों के स्वास्थ्य और संपन्नता के बारे में जो चिंता जताई है, वह भी सराहनीय है। उसके आदेश का अनुकरण अन्य सभी प्रांत करें, यह भी जरुरी है। लेकिन पांच-सितारा होटलों को छूट देने की उसकी बात समझ में नहीं आई। कानून तो सबके लिए समान होना चाहिए। इस छूट का मतलब क्या हुआ? पैसेवालों को छूट है और गरीबों को तरसना है। प्रतिबंध हो तो सब पर हो। शराब की लत तो ऐसी है कि उसे पूरी करने के लिए गरीब डाका डालेगा, चोरी करेगा, जेब कतरेगा और पांच सितारा में जाकर पिएगा। अपराध बढ़ेंगे। पांच-सितारा होटलें शराब के ब्लेकमार्केटिंग सेंटर बन जाएंगी। वे होटलें कम रह जाएंगे, शराबखाने ज्यादा बन जाएंगी।

लेकिन मुख्य प्रश्न यह है कि क्या अदालतों के फरमान शराब की बोतलों के ढक्कन बन सकते हैं? नहीं। यदि बन सकते होते तो दुनिया के सारे मुस्लिम देशों में शराब का नामो-निशान भी नहीं होता लेकिन उन देशों में मैंने कई नामी-गिरामी लोगों के घरों में बाकायदा विराट शराबखाने बने हुए देखे हैं। जहां कानून सख्त होता है,वहां लोग ठर्रा, जहरीला पेय और तेजाब तक पीने को मजबूर होते हैं। आप होटलों और शराबखानों पर पाबंदी लगा दीजिए लेकिन जब तक शराब की बिक्री और खरीद जारी है। लोग घरों में बैठकर पिएंगे। जरुरी यह है कि शराब बनाने, खरीद फरोख्त करने, पीने-पिलाने, यहां तक कि रखने-रखाने पर भी सख्त पाबंदी होनी चाहिए। शराबखोरी की वजह से सबसे ज्यादा घृणित अपराध होते हैं। शराबबंदी के लिए देश में एक व्यापक नैतिक अभियान की शुरुआत होनी चाहिए। शराब मनुष्य की चेतना हर लेती है। मनुष्य और पशु में कोई फर्क नहीं रह जाता। मनुष्य, मनुष्य बना रहे, इसीलिए शराबबंदी निहायत जरुरी है

One Response to “शराबबंदी ज़रा जोर से हो”

  1. Himwant

    शराब पीने से समाज सुखी होता है तो लोग पिए, दुखी होता है तो ना पिए। वैसे शराब बंदी में शराब पीने में पियक्कड़ को अधिक आनन्द आता होगा, इसलिए उनके लिए अच्छा है। पुलिस को भी आम्दानी का अच्छा और निरापद श्रोत मिल जाता है, अच्छा है और अधिक बुरे काम में लिप्त होने से बचेंगे। सरकार का राजस्व कम हो जाता है, उनके लिए अर्थतन्त्र के लिहाज से खराब प्रतीत होती है। लेकिन सराब नही पीने से नागरिको की बचत बढ़ेगी और वे अन्य विलासी चीजे खरीदेंगे जिससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है जो शराबबंदी से राजस्व उठती की कमी की भरपाई करेगा। जिन लोगो ने शराब बनाने की फैक्ट्रियां खोली थी उनके धंधे चौपट हो जाएगे, उनके लिए रूपांतरित या स्थान्तरित होने का विकल्प बचेगा। अतिथि देवो भव, उन्हें तो 5 सितारा होटलो में उपलब्ध हो ही जाएगी। कुल मिला कर सब ठीक है, लेकिन ध्यान रहे की पियक्कड़ शराब की जगह ड्रग्स ना लेना शुरू कर दे। वे बूट पालिस, कफ सिरप और नजाने क्या क्या खाना पीना शुरू कर देते है।

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