सच्चाई की अभिव्यक्ति पर प्रहार क्यों

सुदर्शन न्यूज चैनल के प्रधान श्री सुरेश चौहान के. जी की साहसिक पत्रकारिता का अद्भूत पराक्रम वर्षों से देशभक्तों को प्रेरित कर रहा हैं। जबकि देश विरोधी शक्तियां इनकी सच्ची अभिव्यक्ति पर प्रहार करने से कभी भी नहीं चूकती। इनके “बिंदास बोल” कार्यक्रम में वर्षों से राष्ट्र हित के विषयों को प्रमुखता से उठाया जाता आ रहा हैं। जिससे राष्ट्रवादी समाज में व्याप्त अनेक भ्रांतियाँ दूर होने से भारत व भारतीयता का पराभव आज चारों ओर सकारात्मक वातावरण बनाने में सफल हो रहा हैं।
भारतीय प्रशासकीय व प्रदेशीय सेवाओं में प्रवेश हेतू होने वाली परीक्षाओं में पिछ्ले कुछ वर्षों से उर्दू भाषा के कारण अयोग्य मुस्लिम युवकों की घुसपैठ बढ गयी है। इससे देश में जिहादियों को अपने भारत विरोधी षडयंत्रों में सफल होने की सम्भावना अधिक हो सकती है। इसलिये इससे सम्बंधित कुछ विशेष तथ्यों का प्रसारण किये जाने वाले कार्यक्रम के विरुद्ध भारत विरोधी टोलियों ने सक्रिय होकर सुदर्शन न्यूज चैनल के विशिष्ट कार्यक्रम “बिंदास बोल” के इस परिशिष्ट को रुकवाने का दुसाहस किया और श्री सुरेश चौहान जी के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की अनुचित मांग भी की है।
यह चिंता का विषय है कि एक विशेष षडयंत्र के अन्तर्गत भारतीय प्रशासकीय सेवाओं में जब से इस्लामिक शिक्षाओं का विषय सम्मलित किया गया है और उर्दू को माध्यम बनाने की छुट दिये जाने से मुस्लिम समाज के मदरसे से शिक्षित युवाओं का चयन बढ रहा है। जबकि यह सर्वविदित ही है कि मदरसा शिक्षा प्रणाली के कारण ही कट्टरपन बढने से इस्लामिक आतंकवाद बढता है। जिसके कारण पाकिस्तान सहित कुछ मुस्लिम देशों में भी ऐसे मदरसे प्रतिबंधित कर दिये गए हैं,जहां मुसलमानों को आतंकी बना कर जिहाद के लिये तैयार किया जाता था। ऐसे षडयंत्र द्वारा प्रवेश पाये हुए प्रशासकीय अधिकारियों से जिनको किसी विशेष लक्ष्य के लिये जीने व मरने की शिक्षा मिली हो तो वह क्यों कर मानवतावादी व राष्ट्रवादी समाज के साथ न्याय कर पायेंगे?
प्राय: भारत विरोधी, आतंकवादी, अलगाववादी, नक्सलवादी,वामपन्थी, अवार्ड वापसी व टुकडे-टुकडे गैंग आदि सब राष्ट्रवादी समाज को सतत् जागृत करने वाले श्री सुरेश जी के विरुद्ध बार-बार सक्रिय हो कर माँ-भारती के कष्टों को बढाने के षड्यंत्र रचते रहते है।ये लोग देश में साम्प्रदायिकता के लिये केवल हिन्दुओं को ही दोषी ठहराते हैं और स्वयं को लिबरल व सेकूलर के बुर्के में छिपा लेते हैं। जबकि इन सबको राष्ट्रवादी समाज के देशहित कोई भी विचार स्वीकार नहीं होते। राष्ट्रहित के कार्यों के विरुद्ध तुरंत प्रतिकार करने वाली इन टोलियों को लिबरल सहिष्णु माना जाने में धोखा स्पष्ट होते हुए भी ये अपने विचारों को फैलाने में सफल हो जाते है। “प्रस्तावित साम्प्रदायिक लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक (2011)” जिसमें बहुसंख्यक हिन्दुओं को अपराधी मान कर जेलों में डाले जाने का प्रावधान किया गया था, पर आज तक इन लिबरलों ने कोई आपत्ति नहीं की, बल्कि 2016 में जे.एन.यू. में “भारत की बर्बादी तक जंग करेंगे जंग करेंगे” के राष्ट्रद्रोही नारे लगाने वालों के समर्थन ये लोबी आज तक खड़ी है।
हमें आज यह भी स्मरण होना चाहिये कि सन् 2004 में लश्करे-तोईबा की फिदाईन ईशरतजहां व उसके तीन अन्य आतंकी साथियों ने मोदी जी को मछली न.5 कोड देकर उन पर आत्मघाती हमले का षडयंत्र रचा था। सौभाग्य से गुजरात प्रशासन की सुझबूझ से इन चारों आतंकियों को ढेर करने में पुलिस सफल रही थी। ऐसे षड्यंत्रकारी व आतंकवादी अभी भी देश में सक्रिय हैं। क्योंकि ये राष्ट्रवाद विरोधी समूह आतंकी ईशरतजहां को ही अति विशिष्ट श्रेणी में रखकर गुजरात सरकार व उस समय के मुख्य मन्त्री मोदी जी को ही फेक एन्काउंटर के नाम पर घेरने में लगभग 15 वर्षों से दु:साहस करता रहा है। संभवत: पिछ्ले वर्षों में भी हमारे जनप्रिय प्रधानमन्त्री मोदी जी की हत्या का षड्यन्त्र रचने वाले नक्सलवादियों व भारत विरोधियों के षडयंत्र भी अभी उजागर होने शेष है।यहां यह सब लिखने का मुख्य ध्येय यह है कि भारत विरोधी अभी भी सक्रिय हैं। ऐसा वर्ग या समूह या लॉबी अनेक प्रलोभनों के कारण चीन व पाकिस्तान में बैठे अपने विदेशी आकाओं को प्रसन्न करने के लिये देश में कुछ भी कर सकती हैं। ऐसे हिन्दू विरोधियों को अपने भारत विरोधी आकाओं के चांदी के टुकड़ों के लिये अपनी आत्मा को मारने में भी कोई आत्मग्लानि नहीं होती।
हमको यह ध्यान नहीं होता कि मन मस्तिष्क पर जो गलत धारणायें शिक्षा व मीडिया के माध्यम से थोप दी जाती है, उन्हें मिटाना सरल नहीं होता। इसलिये न जाने कितना कुछ असत्य छिपा कर गहरे अंधेरे में हमें रखा गया। जिससे हमारी सोच और समझ को निरंतर गलत दिशा मिलने से हम धर्म और राष्ट्र के प्रति कभी गौरवान्वित न हो सके। यहां एक उदाहरण देने से समझ सकते हैं कि जैसे बार-बार हमको सिखाया जाता हैं कि “सभी धर्म एक समान है एवं सभी धर्म प्रेम व शान्ति की शिक्षा देते है।” क्या आज तक के भारतीय व वैश्विक इतिहास में ऐसा कुछ ढूँढने पर भी मिल सकता है? संभवतः कदापि नहीं। सभी के ग्रंथ, साहित्य, दर्शन एवं देवता व महापुरुष आदि सभी अलग-अलग हैं। भौगौलिक भिन्नता के कारण सभ्यता, संस्कृति व रीति रिवाजों में भी कोई समानता नहीं होती। सभी धर्मों का उद्गम स्थल व समय आदि भी भिन्न भिन्न होने से उनमें असमानता का होना स्वाभाविक ही हैं।
अत: सब धर्म एक समान कहने व समझने वाले केवल और केवल अज्ञानवश अन्धकार में ही जीते हैं। जबकि विश्व की विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों में परस्पर वैमनस्य व घृणा के कारण संघर्ष को रोकना असम्भव हो रहा है। फिर भी सभी धर्म एक समान के भ्रमित करने वाले असत्य का बार-बार प्रचार किया जाना विशेषतौर पर हम भारत भक्तों को दिग्भ्रमित किये हुए है। जिस कारण हम अपनी एतिहासिक तेजस्विता व ओजस्विता को भूल चूके हैं। हमें अपने इतिहास के स्वर्णिम युग का कोई ज्ञान ही नहीं। मध्यकालीन मुगल साम्राज्य व ब्रिटिश शासन के परतंत्रता काल का महिमा मण्डन करके हमारे मन-मस्तिष्क पर ऐसी छाप थोप दी गयी हैं, जिससे आज स्वतंत्रता के 73 वर्ष बाद भी मुक्त होना एक जटिल समस्या बनी हुई हैं।
ऐसी विपरीत स्थितियों में सुदर्शन न्यूज द्वारा प्रस्तुत सत्य का ज्ञान देने वाले “बिंदास बोल” कार्यक्रम की जितनी सराहना व प्रशंसा की जाय उतनी कम है। श्री सुरेश जी एक ऐसे कर्मयोगी है जो धर्म व संस्कृति की रक्षा हेतू कटिबद्ध है। इनके साहसी व निडर व्यक्तित्व का ही परिणाम हैं कि आज इनके द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों से भी देश में व्याप्त अनेक जिहादी समस्याओं और भ्रांतियों से धीरे-धीरे पर्दा उठ रहा हैं। इतना ही नहीं इनके प्रयासों के कारण आज युवाओं में देश व धर्म के प्रति अनुराग व समर्पण का भाव जाग रहा हैं। दिग्भ्रमित युवा समाज अब सेकुलरवाद व लिबरल लॉबी के भारत विरोधी रूप को समझ कर माँ भारती की रक्षा के लिये सतर्क हो रहा हैं।
ऐसे अनेक सत्य के ज्ञान से जब हम सबकी भ्रांतियाँ दूर होगी तो हम भारत विरोधी समस्याओं की जड़ों तक प्रहार करके उनका समाधान करने में सक्षम होंगे। यही हमारा राष्ट्रीय धर्म और दायित्व हैं। हमको यह स्पष्ट होना चाहिये कि हम “सत्यमेव जयते” के उपासक हैं और सच्चाई की अभिव्यक्ति पर प्रहार करने वाले ही पराजित होंगे। इसी अभियान के लिये समर्पित अनेक देशविरोधी षडयंत्रों को उजागर करने वाले कार्यकर्मों के प्रसारण द्वारा देशवासियों को सत्य से अवगत कराने के अथक प्रयासों पर दृढता से डटे रहने वाले धर्मयोद्धा श्री सुरेश जी को बार-बार साधुवाद।

विनोद कुमार सर्वोदय

1 thought on “सच्चाई की अभिव्यक्ति पर प्रहार क्यों

  1. राष्ट्रविरोधी अवधारणाएं व कृत्य इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा १८६१ और १९४७ के बीच पारित अधिनियमों पर आधारित नेहरु की इंडिया में ही पनप पाए हैं | हर प्रकार के भ्रष्टाचार और अनैतिकता का अखाड़ा बने उस इंडिया को संवारने के दुर्गम कार्य से पहले आज राष्ट्रवादी परिस्थितियों में राष्ट्र का नाम भारत होना चाहिए ताकि राजनीतिक सामाजिक व मनोवैज्ञानिक रूप में राष्ट्रवाद की भावना सभी भारतीय नागरिकों को साथ ले उन्हें उनके विकास की ओर अग्रसर कर पाए |

    मैं चाहूँगा प्रवक्ता.कॉम, सुदर्शन न्यूज़ चैनल व अन्य मीडिया राष्ट्र के नाम में शीघ्र-अतिशीघ्र परिवर्तन हेतु संगठित अभियान चलाएं | धन्यवाद |

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