लेखक परिचय

संजय सक्‍सेना

संजय सक्‍सेना

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी संजय कुमार सक्सेना ने पत्रकारिता में परास्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद मिशन के रूप में पत्रकारिता की शुरूआत 1990 में लखनऊ से ही प्रकाशित हिन्दी समाचार पत्र 'नवजीवन' से की।यह सफर आगे बढ़ा तो 'दैनिक जागरण' बरेली और मुरादाबाद में बतौर उप-संपादक/रिपोर्टर अगले पड़ाव पर पहुंचा। इसके पश्चात एक बार फिर लेखक को अपनी जन्मस्थली लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्र 'स्वतंत्र चेतना' और 'राष्ट्रीय स्वरूप' में काम करने का मौका मिला। इस दौरान विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं जैसे दैनिक 'आज' 'पंजाब केसरी' 'मिलाप' 'सहारा समय' ' इंडिया न्यूज''नई सदी' 'प्रवक्ता' आदि में समय-समय पर राजनीतिक लेखों के अलावा क्राइम रिपोर्ट पर आधारित पत्रिकाओं 'सत्यकथा ' 'मनोहर कहानियां' 'महानगर कहानियां' में भी स्वतंत्र लेखन का कार्य करता रहा तो ई न्यूज पोर्टल 'प्रभासाक्षी' से जुड़ने का अवसर भी मिला।

Posted On by &filed under राजनीति.


संजय सक्सेना

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार शिया-सुन्नी सेंट्रल वक्फ को भंग कर माया और अखिलेश राज में अनाप-शनाप तरीके से वक्फ संपत्ति बेचने की सीबीआइ जांच कराने का मन बना रही है। सेंट्रल वक्फ काउंसिल की संस्तुति पर राज्य सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है। दोनो वक्फं बोर्ड भंग करने के लिए विधि विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा करके कानूनी राय मांगी जा रही है। बताते चलें कि सेंट्रल वक्फ काउंसिल के सदस्य सैयद एजाज अब्बास नकवी ने मार्च में प्रदेश के शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्तियों व कार्यप्रणाली का सर्वे किया था। इसमें इलाहाबाद, रामपुर, लखनऊ, कानपुर, मेरठ की औकाफ संपत्तियां खुर्द-बुर्द करने व उन पर कब्जों का विस्तार से उल्लेख किया था। एजाज ने अपनी रिपोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी व शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी पर गंभीर आरोप लगाए थे। सपा सरकार में प्रभावशाली मंत्री रहे आजम खां की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए थे। बसपा सरकार के दौरान लखनऊ के पारा क्षेत्र की वक्फ संपत्ति एक विश्वविद्यालय को दिए जाने का उल्लेख था। एजाज ने वक्फ के भ्रष्टाचार की सीबीआइ से जांच कराने की केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री व सेंट्रल वक्फ काउंसिल से संस्तुति की थी। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सचिव बीएम जमाल ने 11 अप्रैल को प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को भेजे निर्देश में कहा है कि वक्फ संपत्ति में गड़बड़ी सीबीआइ जांच के पर्याप्त साक्ष्य हैं।
यूपी में वक्फ सम्पति का दुरूपयोग हमेशा से होता रहा है,लेकिन वोट बैंक की सियासत के चलते इसके घपलों पर से कभी किसी सरकार ने पर्दा उठाने की कोशिश नहीं की,उलटे इसे दबाते रहे। इस हकीकत से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि प्रदेश में जब भी सत्ता परिवर्तन होता है, उस समय सबसे अधिक हलचल वक्फ बोर्ड में देखने को मिलती है चाहें बात शिया वक्फ बोर्ड की हो या फिर सुन्नी बोर्ड की। आज की तारीख में दोनों का ही विवाद सत्ता के गलियारों से लेकर सड़क तक पर चर्चा का विषय बना है। इसकी वजह भी हैं। वक्फ बोर्ड का कर्ताधर्ता (चेयरमैन) सियासी ताल्लुक रखता है और अक्सर सत्तारूढ़ दल इस कुर्सी पर अपना ही कोई चेहरा बैठाता है और जब सत्ता बदलती है तो यह चेहरा अप्रसांगिक हो जाता है। विवाद की वजह बन जाता है। इसको लेकर अदालत तक लोग जाते हैं। यह सिलसिला अनवरत् जारी रहता है। इस विवाद में कुछ नाम हमेशा सुर्खिंया बटोरते रहे हैं। पूर्व मंत्री और सपा के कद्दावर नेता आजम खान, शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे जव्वाद,वसीम रिजवी, बुक्कल नवाब का नाम इस श्रेणी में रखा जा सकता है।
वक्फ सम्पत्तियों पर विवाद की तह में जाने से पहले यह समझना जरूरी हैै कि वक्फ बोर्ड है क्या ? इसके काम का तरीका कैसा है ? दरअसल, हिन्दुस्तान में मुस्लिम नवाबों और अमीरों ने कभी अपनी बड़ी-बड़ी जमीनें और सम्पत्तियां आम गरीब मुसलमानों के हित में वक्फ(दान) कीं थीं। देश भर में इन्हीं वक्फ की सम्पत्तियों पर मदरसें,मस्जिदें, कब्रस्तिान आदि बने हैं। वक्फ की सम्पत्तियों पर सभी मुसलमानों का बराबर का हक है। मस्जिदों में हर आम-ओ खास मुसलमान जाकर नमाज अदा कर सकता है। मदरसों में मुसलमान बच्चों को मुफ्त तालीम की व्यवस्था है। इमामबाड़ों में हर मुसलमान मातम-मजिलस के लिए जा सकता है। कब्रस्तिान की जमीनें उनके अजीजों की लाशों को दफनाने के लिए इस्तेमाल में लायी जाती हैं। वक्फ की गई इन जमीनों की देखभाल का जिम्मा सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बेार्ड के कंधे पर होता हैं। ये वक्फ बोर्ड वक्फ की गई जमीनों की देखभाल के लिए अलग-अलग मुतवल्ली नियुक्त करते हैं। धार्मिक और सामाजिक सोच रखने वाले इन मुतवल्लियों की जिम्मेदारी रहती है कि जों वक्फ सम्पत्तियां दी गई हैं, वे उनकी ठीक तरीके से देखभाल करें और उनका उपयोग अमीर या गरीब सभी तबकों से ताल्लुक रखने वाले मुसलमानों के हित में करें।
वक्फ सम्पतियों को लेकर सबसे खास बात यह है कि वक्फ सम्पत्तियों के इस्तेमाल के लिए किसी मुसलमान से धन वसूली नहीं की जा सकती है। वक्फ की इन सम्पत्तियों के इस्तेमाल के बदले किसी प्रकार का कोई पैसा देना या लेना इस्लाम में नाजायज है, लेकिन हो इसके उलट रहा है। वक्फ सम्पतियों को कुछ ताकतवर मुस्लिमों ने कमाई का धंधा बना लिया हैं। इस पर काबिज मुतवल्लियों ने अपना-इमान रसूखदारों के पास गिरवी रख दिया है। भ्रष्टाचार के दलदल में फंस कर इनके दिल कठोर हो गये हैं,जो गरीबों के दर्द,गुरबत और आंसुओं से भी नही पिघलते।
धर्म की आड़ और सरकार पर अपने प्रभाव के चलते आज इन धर्मगुरूओं को नाजायज कामों में जरा भीं हिचक नहीं होती हैं, जिसके चलते अधिकाशं वक्फ सम्पत्तियों पर अवैध कब्जे हो चुके है। कुछ जर्जर हालत में पहंुच गये हैं, तों कुछ गैर-कानूनी तरीकोें से बेच दिये गये है। यह जानकर हैरानी होती है कि लखनऊ सहित कुछ जिलों के कब्रिस्तानों में शवों को रूपये देकर कब्रें खरीदनी पड़ती हैं। कब्र खरीदने के लिए जनाजा लेकर गये लोगों को उस वक्त मजबूर किया जाता है, जब वे मरने वाले का जनाजा लेकर कब्रगाह पहुंचते हैं। उनसे कहा जाता कि अगर वे कब्रिस्तान के मुतवल्ली को पैसे नहीं देंगे तो वे मय्यत को वहां नहीं दफना सकते हैं। यह तमाम बातें सबूत के तौर पर शिया वक्फ बोर्ड की फाइलों में कैद हैं।
बात अखिलेश सरकार के समय की है। उस वक्त शिया वक्फ बोर्ड के सामने शिया धर्मगुरू कल्बे जव्वाद के खिलाफ कई लिखित शिकायतें आयीं, जिसमें आरोप थे कि मौलाना कल्बे जव्वाद एवं उनके रिश्तेदार शिया कब्रिस्तानों में जनाजा दफनाने की एवज में गरीब शियाओं से पचास हजार से एक लाख रूपये की वसूली करते हैं। इस मामले की जांच करायी गई तो आरोपों को सच पाया गया। शिकायतें इतनी गंभीर थीं कि इसकी और भी उच्चस्तरीय जांच की मंाग की गई, लेकिन अखिलेश सरकार शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे जव्वाद को नाराज नही करना चाहती थी, उसे अपने वोट बैंक की ज्यादा चिन्ता थी।इस लिये यह मामला ठंडे बस्ते में चल गया।
कल्बे जव्वाद इस जांच को सियासी करार देकर अपना दामन बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने पलटवार करते हुए शिया वक्फ बोर्ड के खिलाफ धरना-प्रदर्शनों का सहारा लेकर अखिलेश सरकार पर इस कदर दबाव बना लिया कि तत्कालीन वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी को हताश होकर शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन पद तक से इस्तीफा देना पड़ गया। वक्फ सम्पति के विवाद से न तो बसपा के मुस्लिम नेता बन पाये न ही सपा के। सपा के कद्दावर नेता आजम खान तो वक्फ सम्पति के विवाद में हमेशा सुर्खिंयों में रहे।
समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान के खिलाफ सेंट्रल वक्फ काउंसिल की रिपोर्ट में वक्फ बोर्ड की जमीन के दुरुपयोग की बात लिखी है। इस रिपोर्ट में साफ लिखा है कि आजम खान ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए शिया वक्फ बोर्ड को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया। रिपोर्ट में आजम खान के खिलाफ जांच की सिफारिश की गई है। आजम खान जिस मामले को लेकर विवाद में हैं वह मामला वक्फ हुसैनी सराय, वक्फ नंबर 1456 से जुड़ा है। यह रामपुर की नवाब फैमिली का प्राइवेट वक्फ है। आरोप हैं कि आजम खान ने 1.5 एकड़ में वक्फ की जमीन पर बनी सराय, मुसाफिर खाना और दुकानें तुड़वा दीं। सिर्फ तीन दिन के अंदर ऐक्शन लिया गया। रिपोर्ट में लिखा है कि ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें बनी थीं। पहले और दूसरे फ्लोर पर मुसाफिरखाना और सराय थी, लेकिन इसके लिए आजम के करीबी और शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने डेवलपमेंट चार्ज के नाम पर 30 लाख रुपए वसूले थे। रिपोर्ट में लिखा है कि फॉर्मर वक्फ मिनिस्टर ने पूरी वक्फ मशीनरी का दुरुपयोग करते हुए 3 दिन के अंदर इस कंस्ट्रक्शन को तुड़वा दिया।
आरोप है कि ऐसा सिर्फ इसलिए किया गया ताकि नवाब काजिम अली को नीचा दिखाया जा सके और स्वार से चुनाव लड़ रहे आजम खान के बेटे अब्दुल्ला खान को प्रमोट किया जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मामले में प्रशासन का भारी दुरुपयोग किया गया है। वक्फ हुसैनी सराय को आजम खान के निर्देश के बाद गिराया गया। रिपोर्ट में आजम खान के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 467, 468, 211 और वक्फ ऐक्ट की धारा 52 ए के तहत एफआईआर की सिफारिश भी की गई थी।
उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान के खिलाफ सेंट्रल वक्फ काउंसिल की रिपोर्ट में वक्फ बोर्ड की जमीन के दुरुपयोग की बात लिखी है। वक्फ नंबर 1111, 1112, 1115 से जुड़े मामले के अनुसार सेंट्रल वक्फ काउंसिल की रिपोर्ट के पेज नंबर 32,33 और 34 में जो बातें लिखी गई है, वो भी आजम खान के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। यह मामला बरेली के नवाब मोहम्मद हुसैन वक्फ नंबर 11, 12 और वक्फ नंबर 1111, 1112, 1115 से जुड़ा है। ऐसे आरोप लगे हैं कि वक्फ बोर्ड की 25 एकड़ से ज्यादा की जमीन की प्लॉटिंग की गई। इसके साथ-साथ इसी वक्फ की 2 दुकानों को मार्केट रेट से काफी कम पैसे में, एक करोड़ 20 लाख की जगह सिर्फ 5 लाख रुपये में बेच दिया गया। रिपोर्ट में चीटिंग और फ्रॉड की एफआईआर कराने के साथ दुकान बेचने के मामले में आजम खान के रोल की जांच कराने को कहा गया है। इसके साथ साथ हुमा मार्केट में 42 दुकानों से 5 लाख रुपए का रेंट लिया जाना था, लेकिन हर महीने सिर्फ 5000 रुपए किराया ही वसूला गया। इसी तरह से मुनव्वर बाग मार्केट में 450 पेड़ों को काटने के मामले में भी आजम खान पर सवाल उठे हैं। ये सारे पेड़ कटवाकर इन्हें ठेकेदारों को बेच दिया गया। जो पैसा मिला उसे आजम के गुर्गों ने आपस में बांट लिया। रिपोर्ट में चीटिंग और फ्रॉड के लिए एफआईआर दर्ज करने की बात कही गई है। पेड़ों को अपने साथियों को बेचने के मामले में आजम खान के रोल की जांच की बात कही गई है।
आजम खान की सफाई
आजम खान कहते हैं उन्हें या उनके परिवार को वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी से क्या लेना देना, उन्होंने इनसे कभी फूटी कौड़ी भी नहीं ली। उन्होंने कहा कि वक्फ की जमीन पर जो स्कूल बने वे ट्रस्ट के हैं। लेकिन इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि आजम को फायदा कैसे मिला। जिन लोगों को आजम खान ने वक्फ बोर्ड में बड़े पदों पर रखवाया, उन्होंने बदले में आजम खान के बेटे के इलेक्शन में फंडिंग की। सेंट्रल वक्फ काउंसिल की यह रिपोर्ट यूपी में शिया वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टीज में घोटाले से जुड़ी हुई है। इस रिपोर्ट में यूपी में शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी को आजम खान का हेंचमैन माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक वसीम रिजवी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वक्फ की कई जमीनों को गलत तरीके से बिल्डर्स को बेच दिया और उनपर कंस्ट्रक्शन करवाया।
पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान के खिलाफ सेंट्रल वक्फ काउंसिल की रिपोर्ट में वक्फ बोर्ड की जमीन के दुरुपयोग की बात लिखी है, तो सीईओ ने भी गड़बड़ी की बात मानी है। इस रिपोर्ट में पहली शिकायत के तौर पर इलाहाबाद के शाहेनशीं इमामबाड़ा को ध्वस्त करने और उसके 200 साल पुराने पोर्चों को खत्म करने का आरोप है। इस जमीन पर कर्मशियल कॉम्प्लैक्स बनाया गया। ये सब नियम कायदों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। इतना ही नही ये भी मालूम पड़ा कि शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने वक्फ की 54 दुकानों को अनिश्चित काल के लिए लीज पर दे दिया। यहां केयरटेकर भी अवैध तरीके से नियुक्त किया गया। जांच में इन सारी ही कार्यवाही को अवैध घोषित कर दिया गया।
वक्फ बोर्ड के चेयरमेन वसीम रिजवी पर कम से कम 7 एफआईआर दर्ज की गईं, लेकिन एक पर भी भी ऐक्शन नहीं लिया गया क्योंकि वसीम रिजवी आजम खान के खासमखास थे। रिपोर्ट के मुताबिक वसीम रिजवी को ही आजम के बेटे अब्दुल्ला आजम की चुनाव फंडिंग के लिए वसूली का जिम्मा सौंपा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक जांच में शिकायतों को सही पाया गया लेकिन आजम खान के रसूख के चलते इन मामलों में वसीम रिजवी पर कोई ऐक्शन नहीं हुआ। इस रिपोर्ट में लखनऊ की एक और वक्फ की संपत्ति में घोटाले का जिक्र है। रिपोर्ट में लिखा है कि इस प्रॉपर्टी के केयरटेकर ने ही इसे दो हिस्सों में बांट दिया था और यहां की कीमती चीजों को अपनी एंटीक की दुकान कर ली थी। बड़ी बात ये है कि 2015 में उस वक्त के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इसकी शिकायत भी की गई थी लेकिन कोई ऐक्शन नहीं हुआ था।
एक और मामला- हाल ही में शिया वक्फ बोर्ड को करोड़ों के नुकसान पहुंचाने वाला एक और मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक समाजवादी पार्टी के एमएलसी बुक्कल नवाब पर अपनी बेगम को लखनऊ वक्फ की प्रॉपर्टी उपहार देने का इल्जाम लगा है। इस प्रॉपर्टी की कीमत 100 करोड़ रुपये बताई गई है। इसकी शिकायत मोती मस्जिद शिया ट्रस्ट,लखनऊ ने की थी। आरोप है कि 2012 में वक्फ की प्रॉपर्टी के रोड साइड वाले हिस्से को बुक्कल नवाब ने अपनी वाइफ महजबीं आरा के नाम ट्रांसफर कर दिया। इससे शिया वक्फ बोर्ड को करीब 100 करोड़ का नुकसान हुआ। इस मामले की शिकायत मौलाना कल्बे जव्वाद ने आजम खान से की, लेकिन आजम खान के रसूख के चलते कोई ऐक्शन नहीं हुआ। उल्टा कल्बे जव्वाब को आजम खान ने ठग करार दे दिया। ताजा हाल यह है कि वसीम रिजवी ने वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया है और उनके ऊपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। कोर्ट ने भी उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है।
बाक्स

योगी के वक्फ राज्यमंत्री मोहसिन रजा का कथन

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मुस्लिम वक्फ राज्यमंत्री मोहसिन रजा कहते हैं कि वक्फ काउंसिल ऑफ इण्डिया द्वारा प्रदेश में वक्फ सम्पत्तियों में गड़बड़ी करने की शिकायतों की जांच की है, जिसकी 36 पन्नों की रिपोर्ट में तत्कालीन वक्फ मंत्री आजम ख़ान और शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी गई है.। रजा के अनुसार शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने पिछले 10 वर्षों के दौरान वक्फ सम्पत्तियों को लेकर हुई शिकायतों की जांच की। इस दौरान लगभग पूरे समय रिजवी ही शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष रहे और पिछली अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में वह आजम ख़ान के बहुत करीब थे.।
राज्य मंत्री ने कहा कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की रिपोर्ट भी जल्द ही आ जाएगी. उसके बाद वह इन दोनों रिपोर्ट और वक्फ सम्पत्तियों के बारे में उन्हें मिल रहे शिकायती पत्रों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे और उनके निर्देश पर इस मामले में कार्रवाई की जाएगी. मंत्री ने कहा कि वक्फ सम्पत्तियों में किया गया घोटाला 500 करोड़ से एक हजार करोड़ रुपये तक हो सकता है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति अपनाने को कहा है. उन्होंने कहा कि मायावती सरकार के शासनकाल में भी वक्फ सम्पत्तियों के खुर्द-बुर्द करने वालों को भी नहीं बख्शा जाएगा
उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड को लेकर जो शिकायतें आ रही हैं, उनमें से ज्यादातर भ्रष्टाचार की हैं. अधिकारियों की बैठक में यह निर्णय हुआ कि इनकी जांच कराई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि साढ़े सात हजार वक्फ सम्पत्तियां थी, वे तीन हजार रह गई हैं. बाकी बची सम्पत्तियां कहां चली गई हैं. इसका पता लगाया जायेगा।
जौहर विश्वविद्यालय तक पहुंची आंच

आज़म खान के लिये आने वाला समय काफी मुश्किलों से भरा साबित हो सकता है। एक तरफ जहा सत्ता उनसे छिटक कर बहुत दूर जा चुकी हैं तो दूसरी तरफ उनके ऊपर अपने पद का दुरुपयोग करते हुये रामपुर के जौहर अली विश्वविद्यालय परिसर में तमाम सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा करने के मामले गर्माने लगे हैं। रामपुर के ही पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अब्दुल सलाम ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रमाणों के साथ एक शिकायत भेजी हैं जिसमे उन्होंने पूर्व मंत्री आजम खान के ऊपर आरोप लगाया हैं कि आजम खान ने ग्राम सींगनखेड़ा, तहसील सदर, रामपुर के खाता संख्या 01214 की ग्राम सभा की 14.95 एकड़ जमीन 30 वर्षों के लिये जबरदस्ती पट्टे पर ले रखी हैं और इसके साथ ही उन्होंने वहाँ की चक रोड (जिसकी खाता संख्या 01232 की 2.13 एकड़ भूमि पर जो की इस विश्वविद्यालय को दी गयी थी उस  पर भी आज़म खान ने अवैध तरीके से कब्ज़ा कर रखा हैं।
इसी प्रकार खाता संख्या 01241की 14.95 एकड़ तथा खाता संख्या 01224 की14.95 एकड़ भूमि पर भी जौहर विश्वविद्यालय ने अवैध कब्ज़ा कर रखा है। यही नहीं प्रांतीय खंड, लो०नि०वि० की खाता संख्या 00967 की 4.32 एकड़ भूमि तथा खाता संख्या 00083 की नहर खंड, लालपुर की 14.0 एकड़ भूमि पर भी जौहर विश्वविद्यालय का अवैध कब्ज़ा है। यही नहीं शत्रु सम्पत्ति अधिनियम 1968 की धारा 12 के तहत डीएम रामपुर को प्राप्त 34.20 एकड़ भूमि भी इस विश्वविद्यालय के अवैध कब्जे में है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *