लेखक परिचय

महेश तिवारी

महेश तिवारी

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chinaचीन का पाकिस्तान प्रेम एक दफा पुनः जगज़ाहिर हो गया,जब वह जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी सरगना महसूद अजहर के पक्ष में वीटो का प्रयोग किया। छः माह पहले भी चीन ने उसका पक्ष लेकर अपने प्रेम को व्यक्त किया था। जब से भारत- पाकिस्तान अलग-अलग राष्ट्र बनें हैं,तब से जगज़ाहिर होता आया हैं।फ़िर बात चाहे भारत-पाक युद्ध की करें, या बांग्लादेश के विभाजन के वक्त की। सदा से चीन भारत के पीठ में ख़ंज़र घोपने का काम करता आया हैं। बीते दिनों चीन की आजादी दिवस पर हमारे प्रधानमंत्री चीन को बधाई देते हैं, और पीछे से चीन आतंकी मसूद अजहर का समर्थन करता हैं। विश्व पटल पर जब भारत आतंकवाद के खिलाफ देशों को एकजुट कर रहा हैं,तो चीन की यह नीति दर्शाती हैं कि, वह एशिया में ख़ुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करना चाहता हैं। चीन का वीटो पॉवर इस्तेमाल करने के खिलाफ अमेरिका,रूस,इंग्लैंड और फ्रांस सभी देश कर रहे हैं,फिर भी चीन अपनी हरकतों से बाज नहीँ आ रहा हैं।पाक आये- दिन उसकी धरती से हो रहें आतंकी घटनाओँ से मुँह फेरता आ रहा हैं, और कही- न-कही चीन के बल पर परमाणु बम के इस्तेमाल की धमकी देता आया हैं।
नरेन्द्र मोदी जब शी-जिन- पिंग को साबरमती के तट पर झूला झुलाते हैं,तो लोगों को यह एहसास होता हैं क़ि, चीन का बर्ताव भारत के विरुद्ध बदल गया हैं, लेकिन मौक़ा मिलते ही उसका यह नजरिया करवटे लेने लगता हैं। कभी वह भारत के लोगोँ का वीजा रद्द कर देता हैं, और कभी भारतीय सीमा में दखल करता हैं।फिर रक्षा मंत्रालय लाचारी में उसे छुपाने की कोशिश करती हैं।चीन हमेशा से लद्धाख,सिक्किम क्षेत्रों में अपना कब्ज़ा जमाने की कोशिश करती आ रही हैं, और भारत में अभी भी एक ऐसा चीनी-प्रेमी गुट बैठा हैं, जो कहता हैं कि, चीन की इस हरकत से बैचेन होंने की जरूरत नहीँ हैं।भारत शुरू से ही चीन पर अपना आगाध प्रेम बरसता आ रहा है।वह बात चाहे व्यापार की हो,या खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा संरक्षण के मुद्धे की हो। भारत सदैव चीन के साथ व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिये तत्पर रहा हैं।पाकिस्तान का उपयोग भारत के खिलाफ चीन 1962 के दौर से करता आ रहा हैं।चीन कभी भी भारत के साथ ठोस दोस्ती के पक्ष में नहीँ रहा। भारत के नाजायज हिस्सा जो अभी पाकिस्तान के पक्ष में हैं,उसके न सुलझने का कारण चीन ही है। पाकिस्तान गिलगित का हिस्सा चीन को सौंप चुका है, जिसके द्वारा चीन व्यापारिक रास्ते का निर्माण कर मध्य एशिया,और खाड़ी देशों के बीच अपनी व्यापारिक हिस्सेदारी बढाने की जुगत में हैं।
चीन के बलबूते पर ही पाकिस्तान भारत को परमाणु हथियार के इस्तेमाल का भय दिखाता हैं। चीन ने ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी की जलधारा रोककर भारत के खिलाफ जाने की कोशिश की है,और भारत के सिंधु जल संधि के पुनर्विचार को झटका पाकिस्तान के पक्ष में आकर लिया है।चीन बांध के जरिये पनबिजली बनाने के लिए जलधारा को रोकने की बात कह रहा हैं। गौर करने वाली बात यह है क़ि, जलधारा से आज के दौर प्रभवित होने वाले बल्कि कल बाधित होगा।चीन में यरलुंग और अरुणाचल प्रदेश में दियांग नाम की जिस नदी पर चीन बांध बना रहा ह, उसकी कीमत 740 मिलियन डॉलर हैं। इससे चीन 42 मेगावाट बिजली और 30 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई कर सकेगा।इस समय चीन केवल भारत के ऊपर मनोवैज्ञानिक दवाब बनाने के लिये पानी के प्रवाह को रोक रहा हैं।जो की पाक समर्पित नीति का ही एक हिस्सा माना जा सकता हैं। इस बांध का प्रभाव भारत पर 2019 में दिखेगा, जब यह बांध बनकर तैयार हो जायेगा। मिलाजुला कर कहा जाय तो चीन भारत की आर्थिक और विश्व पटल पर उभरते परिदृश्य से बैचेन हो रहा है। भारत की विकास- दर सबसे अच्छी चल रही है,और विकसित देशों की और बढ़ रहा हैं,जिससे चीन को जलन हो रही है।
दक्षिण एशिया में भारत तेजी से उभर रहा है,और प्रतिनिधित्व करने की क्षमता का विकास कर रहा हैं,इसीलिए चीन भारत का विरोध न्यूकिलियर सप्लायर ग्रुप में शामिल होने से रोकने से लेकर मसूद अज़हर के आतंकी घोषित कराने के भारत के प्रयासों को विफल करने में पाकिस्तान के साथ खड़ा दिखता हैं। जब चीन अपने स्वार्थ के लिए आंतकी देश का सहयोग कर रहा है,तो भारत को भी चीन की दोहरी नीति का करारा जवाब देना चाहिए। चीन के साथ हो रहे 60 अरब डॉलर के व्यापार से हाथ पीछे खिंच लेना होगा,और चीन निर्मित वस्तुओं पर बैन लगा देना चाहिए।मेक- इन-इंडिया के तहत चीन की कोई कम्पनी भारत में नहीँ लगने देना होगा। भारत द्वारा बलूचिस्तान का मुद्भा विश्व स्तर पर उठाना होगा,जिससे चीन काश्गर से ग्वादर तक जिस व्यासायिक गलियारे का निर्माण कर रहा हैं, वह पूर्ण न हो जिससे चीन के होश खुद-ब-खुद ठिकाने आ जायेंगे,और चीन के शह के पाकिस्तान खुद सुधर जायेगा।

One Response to “भारत के ख़िलाफ़ चीन का फ़िर दिखा दोहरा चरित्र”

  1. Himwant

    चीन अगर नीचे के तटीय राज्यो के हितों के विपरीत काम कर रहा है तो इसके नतीजे खराब भुगतने पड़ेंगे। और यदि चीन रन ऑफ रिभर प्रोजेक्ट से जल विद्युत परियोजना से विद्युत निकाल उस जल को ब्रह्मपुत्र नदी में ही पुंरप्रवाहित कर रहा है तो इस लेख को पश्चिमी शक्तियों का चीन विरुद्ध प्रोपगंडा कहा जा सकता है।

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