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    भारत या इंडिया

                दुनिया की किसी भी भाषा में व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun) का अनुवाद नहीं होता है, लेकिन हमारे संविधान निर्माताओं ने सदियों पुराने हमारे देश के नाम का अनुवाद कर दिया। संविधान के अनुसार हमारा देश India that is Bharat है। कोई भी स्वाभिमानी देश अपनी गुलामी के प्रतीकों को सीने से लगाकर नहीं रखता, लेकिन हम उन प्रतीकों को सीने से लगाकर खुश हैं।

                कुछ दिन पहले मैं अपने गाँव गया था। वहाँ खेत की मेड़ पर बैठकर मोबाइल पर मैच देख रहा था। पास ही एक परती पड़े  खेत में कुछ बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे। कमेन्ट्री की आवाज़ सुन वे मेरे पास आये। एक ने पूछा —  अंकल, इंडिया का स्कोर क्या है? वे अंग्रेजी का ABCD भी नहीं जानते थे लेकिन यह जानते थे कि उनके देश का नाम इंडिया है। माई को  मम्मी ने खा लिया, बाबूजी पापा की भेंट चढ़ गए, चाचा, फूफा, मामा, मौसा — अंकल में बदल गए, चाची, ताई, बुआ, मौसी ने कब आंटी की जीन्स पहन ली, पता ही नहीं चला। संविधान निर्माताओं ने देश ही बदल दिया।

                स्वाधीनता के बाद लंका, सिलोन से श्रीलंका हो गया, बर्मा म्यामार बन गया, पूर्वी पाकिस्तान बांग्ला देश हो गया और हम इंडिया की तख्ती अपने माथे पर मुकुट की तरह लगाए रहे। युगों-युगों से इस भूखंड का नाम भारत ही रहा है। इंडिया अंग्रेजों द्वारा प्रदत्त नाम है जो हमारी दासता का प्रतीक है। भारत हमारे शौर्य, स्वाभिमान, गौरवशाली अतीत और हमारी स्वाभाविक पहचान का प्रतीक है। हम आत्म वंचना के शिकार होकर इसे खो नहीं सकते।

                इ्स इंडिया ने हमारे खान-पान, व्यवहार, भाषा, सभ्यता, संस्कृति और इतिहास पर ग्रहण लगा दिया है। स्पष्ट रूप से भारतीय समाज दो भागों में बँटा हुआ दिखाई दे रहा है — इंडियन और भारतीय। पहले बड़े शहरों और अपार्टमेन्ट में रहने वाले ही इंडियन हुआ करते थे, लेकिन अब तो इंडियन कस्बों और गाँवों तक पहुँच चुके हैं।

                            पूरे देश में राष्ट्रीयता और स्वदेशी की अलख जगाने वाले यशस्वी प्रधान मन्त्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी से विनम्र निवेदन है कि वे भारत से इंडिया को हमेशा के लिए विदा कर दें। अंग्रेजी में लिखित संविधान में India that is Bharat को संशोधित कर Bharat and only Bharat लिखा जाय।

                                        भारत माता की जय!!

    विपिन किशोर सिन्हा
    विपिन किशोर सिन्हा
    जन्मस्थान - ग्राम-बाल बंगरा, पो.-महाराज गंज, जिला-सिवान,बिहार. वर्तमान पता - लेन नं. ८सी, प्लाट नं. ७८, महामनापुरी, वाराणसी. शिक्षा - बी.टेक इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय. व्यवसाय - अधिशासी अभियन्ता, उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि., वाराणसी. साहित्यिक कृतियां - कहो कौन्तेय, शेष कथित रामकथा, स्मृति, क्या खोया क्या पाया (सभी उपन्यास), फ़ैसला (कहानी संग्रह), राम ने सीता परित्याग कभी किया ही नहीं (शोध पत्र), संदर्भ, अमराई एवं अभिव्यक्ति (कविता संग्रह)

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