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    Homeआर्थिकीबाज़ार का बड़ा बाज़ीगर : मुकेश अंबानी

    बाज़ार का बड़ा बाज़ीगर : मुकेश अंबानी

    • श्याम सुंदर भाटिया

    दुनिया का बाज़ार बेजार है। कोविद-19 की सुनामी के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था की हांफन-कंपन थम नहीं रही है। बड़े-बड़े दिग्गजों के गले सूख गए हैं। कारिंदों को पगार देने में पसीने छूट रहे हैं। कुछेक की नीयत साफ है तो कुछेक की नीयत में वाकई खोट है। कहने का अभिप्राय यह है, कुछेक ने पगार देने के नाम पर हाथ खड़े कर दिए हैं तो कुछेक अपने स्टाफ की रोजी – रोटी का संजीदगी से ख़्याल रख रहे हैं,भले ही वे वेतन कटौती करके दे रहे हों। जॉब छूटने के बाद चौतरफा भुखमरी का आलम है। किरायेदारों की बेदखली देखी और सुनी जा सकती है। सड़कों पर नंगे पांव, भूखे –  प्यासे हजारों कामगारों को अपने गांव लौटने के दृश्य किसी बुरे सपने की मानिंद आज भी जहन में ज़िंदा हैं। एटलस सरीखी देश की जानी-मानी साइकिल कंपनी ने लॉकडाउन का एलान कर ही दिया है। एक झटके में 450 कर्मी सड़क पर आ गए हैं। कोरोना वायरस की दस्तक से वैश्विक बाजार का खौफनाक मंजर अमूमन ऐसा ही है। देश और दुनिया में ख़राब माली हालात से उपजे अवसाद, आत्महत्या और जघन्य अपराध की चर्चा तो फिर कभी करेंगे। फिलहाल अर्थव्यवस्था के इस सूर्य ग्रहण में रिलायंस घराने ने मुस्कराने, हंसने-हंसाने, गुदगुदाने और ठहाका लगाने की बड़ी ख़बर दी है। सच में, हर भारतीय का सीना फूलकर 56 इंच चौड़ा हो गया है। रिलायंस इंडस्ट्री लिमिटेड -आरआईएल ने अपनी ऊँची छलांग से दुनिया के उद्योग जगत में धमाकेदार एंट्री दर्ज कराई है। रिलायंस समूह के चेयरमैन श्री मुकेश धीरुभाई अम्बानी दुनिया के टॉप-10 धन कुबेरों की सूची में 9वें स्थान पर काबिज को गए हैं।  यह अम्बानी के रातों -रात संकल्प और समर्पण का प्रतिफल नहीं है बल्कि सालों-साल की दूरदर्शिता और पॉजिटिव फैसलों का सबब है,इसीलिए श्री अंबानी बड़े गर्व से कहते हैं,यह तो मेरे डीएनए में है।

     डेढ़ दशक पूर्व 18 जून, 2005 को फादर्स डे पर बिना किसी कानूनी विवाद के श्री मुकेश अम्बानी और श्री अनिल अम्बानी के बीच रिलायंस कारोबारी साम्राज्य का मां कोकिला बेन अंबानी ने बंटवारा कर दिया। रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह की मूल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्री और     आईपीसीएल बड़े बेटे के हिस्से में आईं तो रिलायंस इंफोकॉम , रिलायंस एनर्जी और रिलायंस कैपिटल छोटे बेटे के हिस्से में आईं। बड़े भाई औद्योगिक पिच पर टेस्ट मैच के खिलाड़ी के तौर पर उतरे तो उनके अनुज ने 20-20 की पिच को चुना। नतीजन श्री अनिल अंबानी बड़े भाई की तुलना में 2007 तक कारोबारी दौड़ में आगे रहे। 2006 में तो श्री अनिल अंबानी अमीरों की लिस्ट में बड़े भाई को पछाड़कर देश के तीसरे सबसे धनवान बन गए । श्री अनिल अंबानी से आगे उस वक़्त सिर्फ श्री लक्ष्मी मित्तल और श्री अज़ीम प्रेमजी थे, लेकिन फिर धीरे-धीरे दोनों के बीच दौलत का अंतर घटता चला गया। फोर्ब्स की लिस्ट के मुताबिक 2007 में श्री मुकेश अंबानी ने अपने अनुज भ्राता श्री अनिल अंबानी को पीछे छोड़ दिया। हांलाकि तब भी अंतर बहुत ज्यादा नहीं था। बड़े भाई की दौलत 49 अरब डॉलर थी तो छोटे भाई की 45 अरब डॉलर थी। अब तेरह बरसों बाद दोनों भाई जुदा – जुदा दिशा में हैं। श्री मुकेश अम्बानी का साम्राज्य अर्श के भी पार है, जबकि श्री अनिल अम्बानी फर्श पर हैं क्योंकि उन्होंने हाल ही में अदालत में एक केस की सुनवाई के दौरान अपनी नेटवर्थ जीरो बताई।

    किसी भी इंडस्ट्री में रिलायबिलिटी और क्रेडिटिबिलिटी के ख़ास मायने हैं। इसे लेकर श्री अनिल अंबानी की तुलना में उनके बड़े भाई बेहद संजीदा हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज के बॉस श्री मुकेश अम्बानी ने 12 अगस्त, 2019 को अपने शेयर होल्डर्स से वायदा किया था, मार्च 2021 तक उनकी कंपनी कर्ज मुक्त हो जाएगी। हालांकि फौरी तौर पर यह एलान ग्राहय नहीं हुआ,  लेकिन उन्होंने नौ महीने पहले ही इस बड़े लक्ष्य को पार करके न केवल दुनिया के बड़े-बड़े घरानों हतप्रभ कर दिया बल्कि मजह 58 दिनों में श्री मुकेश अम्बानी ने दुनिया के सबसे अमीर लोगों के क्लब – फोर्ब्स रियल टाइम बिलेनरीज रैंकिंग्स  में शामिल होकर चमत्कृत कर दिया है। ख़ास बात यह है, दुनिया को अपनी दादागीरी, झूठ और फरेब के जरिए हमदर्दी जताने वाले चीन का एक भी अरबपति इस टॉप – 10 सूची में शामिल नहीं है। 

    कर्जमुक्त होने के बाद से रिलायंस  शेयर का भाव आल टाइम हाई पर ट्रेड कर रहा है। इससे श्री मुकेश अंबानी की संपत्ति में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। वह एशिया के एक मात्र अमीर तो बन ही गए हैं, विश्व के टॅाप-10 धनकुबेर क्लब में भी शामिल हो गए हैं। श्री मुकेश अंबानी  की कंपनी ने अपनी संपत्ति में दो तरफा इजाफा किया है। कंपनी ने दस निवेशकों के ग्यारह प्रस्तावों और राइट इश्यू से कोराना वायरस की महामारी से लाॅकडाउन के चलते मात्र 58 दिनों में 1.68 लाख करोड़ जुटा लिए हैं। कंपनी ने जियो प्लेटफार्म्स में ग्यारह निवेश प्रस्तावों में 24.70 प्रतिशत इक्विटी बेचकर 1.16 लाख करोड़ जुटाए जबकि 30 वर्षों में पहली बार लाए राइट इश्यू से 53 हजार करोड़ मिले। इस वर्ष मार्च तक समूह पर 1.61 लाख करोड़ का शुद्ध ऋण था।

    दुनिया में बादशाहत हासिल होने के बावजूद श्री मुकेश अंबानी की कंपनी के प्रति उदारता की मिसाल बेमिसाल है। श्री मुकेश अंबानी ने 2020-21 में कोविड 19 के चलते वेतन नहीं लेने का फैसला किया है। कार्यकारी निदेशकों ने भी 50 प्रतिशत तक अपना मेहनताना छोड़ने का फैसला किया है। श्री अंबानी का 2008-2009 से भत्ते और कमीशन आदि मिलाकर 15 करोड़ सालाना वेतन है। 12 सालों से वह इतना ही वेतन ले रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज  की कुल संपत्ति बढ़कर अब 64.50 अरब डाॅलर हो गयी है। फोर्ब्स की रियल टाइम अरबपतियों की सूची में अमेजन के मालिक श्री जेफ बोजेस अव्वल हैं। टॉप – 10 की इस सूची में सात धनकुबेर अमेरिकन हैं तो एक फ्रांस तो एक स्पेन के हैं। रिलायंस को समय से पहले कर्जमुक्त करने में फेसबुक समेत दस निवेशकों के निवेश का मुख्य योगदान है। नतीजन रिलायंस 11 लाख करोड़ रुपए बाज़ार पूंजीकरण वाली पहली कंपनी भी बन गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की फिलहाल सालाना कमाई छह अरब डॉलर है। विश्व में 58वें स्थान पर है, लेकिन धनकुबेर श्री मुकेश अंबानी का सपना रिलायंस को जल्द से जल्द दुनिया की टॉप – 50 कंपनियों की सूची में पहुंचाने का है।

    श्याम सुंदर भाटिया
    श्याम सुंदर भाटिया
    लेखक सीनियर जर्नलिस्ट हैं। रिसर्च स्कॉलर हैं। दो बार यूपी सरकार से मान्यता प्राप्त हैं। हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने में उल्लेखनीय योगदान और पत्रकारिता में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए बापू की 150वीं जयंती वर्ष पर मॉरिशस में पत्रकार भूषण सम्मान से अलंकृत किए जा चुके हैं।

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