लेखक परिचय

एम०एच० बाबू

एम०एच० बाबू

स्वतंत्र लेखक

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स्वार्थ परिवारवाद और घर का झगड़ा सड़कों पर की कहावत आज छोटी सी बंद गलियों से निकलकर बड़ी जगहों पर फैल चुकी है, बल्कि ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि स्वार्थ ने अपने पैर पूरी दुनिया में फैला रखे हैं, कोई किसी का नहीं है, भाई-भाई का नहीं चचा भतीजे का नहीं, सत्ता की चाहत ने अपने पैर ऐसे पूरी पृथ्वी पर फैला रखें हैं, कि जिसको देखने के बाद इस दुनिया का पुराना इतिहास फिर से सामने आ जाता है, जब शासन एवं सत्ता की चाहत में युद्ध हुआ करते थे, बड़े-बड़े षड़यंत्रों का सहारा भी लिया जाता था। सत्ता के लिए परिवार का खून भी कर दिया जाता रहा| वही स्थिति आज फिर से अरब जैसे बड़े देशों में दिखायी दे रही है, अरब के राजा सलमान ने अपने सगे भतीजे नाईफ को सत्ता से बेदखल कर दिया। क्योंकि नाईफ उपशासक थे और आने वाले समय में अरब के नियमानुसार देश की सत्ता पर विराजमान होते। अवगत करा दें कि सलमान के शासन के अन्त के बाद नाईफ तुरंत सत्ता पर विराजमान हो जाते इसलिए शासक सलमान ने अपने अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए अपने बेटे को सत्ता का उत्तराधिकारी बना दिया जिससे एक बार फिर सत्ता प्राप्ति की लालसा उजागर हो गई। इस परिवर्तन के और कई कारण हैं।

मौजूदा कतर सरकार से अलग हुए रिश्तों के प्रति संभवत: नाईफ खासे नाराज थे वह ऐसा करना नहीं चाहते थे सूत्रों के अनुसार नाईफ कतर से संबन्ध तोड़ने का विरोध कर रहे थे। सूत्रों के अनुसार नाईफ सभी देशों को एक साथ लेकर चलना चहाते थे शासक सलमान के द्वारा लिए गए फैसले पर चिंता जाहिर की थी और नाईफ ने अपने चाचा शासक सलमान से इस फैसले पर पुन: विचार करने के लिए सलमान को सुझाव भी दे दिया था।

ऐसा लगता है कि नाईफ अमेरिका के पिछलग्गू बनने का भी विरोध कर रहे थे इसी कारण इसमें बड़ी राजनीति हुई है, कहा जा रहा है कि अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की इसमें बड़ी भूमिका है। इस पूरे खेल में ट्रम्प ने अपने रास्ते को साफ करते हुए अपनी जगह का मजबूत किया है। साथ ही ट्रम्प ने अरब परिवार को अपनी कूटनीति से आपस में लड़ाकर दो भागों में बांट दिया जिससे अब परिवार में अन्दर खाने आग भड़कना तय माना जा रहा है। दुनिया में जहां एक-दूसरे देश के प्रति सद्भावना बढ़ाने की बात सोची जा रही है, वहीं कुछ देश संकीर्णता की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं। इसके पीछे वे अपने देश के हित का बहाना बनाते हैं। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रपति बनने के बाद यह राह खोली है।  उन्होंने अपने देशवासियों से वादा किया था कि अमेरिका के लोगों की भलाई के लिए वे पूर्ववर्ती राष्ट्रपति की कई नीतियों को बदलेंगे। अमेरिका के लोगों के हिस्से की नौकरी दूसरे देशों को नहीं देंगे। इसी के चलते डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने देश की वीजा नीति में परिवर्तन किया जिससे भारत का बड़ा नुक्सान हुआ | विदेशों से आने वाले युवाओं को नौकरी देने के लिए वीजा की फीस काफी बढ़ा दी। इसका असर भी सबसे ज्यादा भारत पर पड़ा और भारत की कई आईटी कम्पनियां अब अमेरिकियों को ही महंगे वेतन पर नौकरी देने को मजबूर हुई हैं। इसी तरह सऊदी अरब ने भी अब इस प्रकार के नियम बनाने शुरू कर दिये हैं जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि वहां की सरकार अपने देशवासियों के हितों को सुरक्षित करना चाहती है। सऊदी अरब का डिपेन्डेन्ट टैक्स यही संकेत देता है और इससे भी सबसे ज्यादा भारतीय मूल के लोग प्रभावित हो रहे हैं। भारत के अधिकतर लोग सऊदी अरब में काम कर रहे हैं उसमें से कुछ लोग अपने साथ परिवार भी रखे हुए हैं। सऊदी अरब सरकार के इस कदम के बाद वहां काम करने वाले भारतीय अपने आश्रितों को भारत भेजने की बात सोचने लगे हैं। सऊदी अरब में काम करने वाले विदेशियों पर आगामी महीने जुलाई की पहली तारीख से एक नया टैक्स लगने जा रहा है।  इस टैक्स के तहत वहां काम करने वाले लोगों को अपने एक आश्रित (डिपेन्डेन्ट) के लिए सौ रियाल अर्थात करीब 1700 रुपए हर महीने टैक्स के रूप में भरने होंगे। सऊदी अरब में एक अनुमान के अनुसार 40 लाख से ज्यादा भारतीय रह रहे हैं। भारत में जिस तरह की संस्कृति है, उसके तहत लोग अपने अशक्त माता-पिता या अन्य निराश्रितों को अकेले छोड़ना पसंद नहीं करते हैं। अब मान लें कि किसी के साथ चार लोग भी आश्रित के रूप में रह रहे हैं तो उसे 6800 रुपए हर महीने आश्रित कर के रूप में भुगतान करने होंगे।  इसके बाद वह क्या खाएगा और क्या पहनेगा। सऊदी अरब में इस टैक्स के कारण भारतीयों के लिए आर्थिक रूप से मुश्किलें बढ़ने वाली है और इसी से बचने के लिए वे अपने साथ रह रहे माता, पिता, पत्नी और बच्चों को भारत भेजने की चिंता से बेहाल हैं। सऊदी अरब की सरकार ने यदि आधुनिक परिभाषा के परिवार जिसमें पति-पत्नी और बच्चे हो गिने जाते हैं, को ही इस टैक्स से मुक्त कर रखा होता, तब भी गनीमत था लेकिन पत्नी और बच्चों को कैसे दूर रखा जाए, यह जटिल समस्या है। बच्चों की संख्या सीमित करने की बात भी इस कानून में कहीं नहीं दिखाई पड़ती है। एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार कितने ही भारतीय अब अपने आश्रितों को भारत में भेजने का विचार कर रहे हैं।

भारत से सऊदी अरब में कमायी करने के लिए जाने वालों के सामने अब एक पत्थर तो रास्ते में आ ही गया है। यहां पर ध्यान देने की बात है कि सऊदी अरब में उन्हीं लोगों के परिवार को वीजा मिलता है जो महीने में कम से कम पांच हजार रियाल अर्थात करीब 86 हजार रुपए कमाते हैं। सरकार की मंशा इन लोगों से अपना खजाना भरने की है। इससे वहां यदि कोई भी व्यक्ति अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ ही रह रहा है तो उसे हर महीने 300 रियाल डिपेन्डेन्ट टैक्स के रूप में देने होंगे। उसके साथ यदि उसके माता-पिता रहते हैं तो दो सौ रियाल टैक्स और बढ़ जाएगा। इस टैक्स को लेकर डराने वाली बात यह है कि सरकार ने अभी जो टैक्स तय किया है, वह साल-दो साल के लिए नहीं है बल्कि यह टैक्स हर साल बढ़ता ही जाएगा। सऊदी अरब के शाह सलमान पिछले दिनों उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने कतर पर आतंकवादी गतिविधियां संचालित करने के आरोप में उसपर कई प्रतिबंध लगाए थे। इस्लामी जगत में सऊदी अरब का प्रतिष्ठित स्थान है, इसमें कोई संदेह नहीं लेकिन शाह सलमान की सत्ता पर पकड़ ढ़ीली होती जा रही है। इसी के चलते वह अपनी कैबिनेट में भारी फेर बदल करने पर मजबूर हुए और अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।  इससे पूर्व राजकुमार मोहम्मद बिन नाइफ युवराज के रूप में जाने जाते थे। उन्हें क्राउन प्रिंस कहा जाता था। अब शाही आदेश के बाद क्राउन प्रिंस को हटा दिया गया और मोहम्मद बिन सलमान को युवराज घोषित किया गया। मोहम्मद बिन नाइफ गृहमंत्री भी थे। उनसे यह पद भी छीन लिया गया है। मोहम्मद बिन नाइफ शाह सलमान के सगे भतीजे हैं। इस प्रकार शाही परिवार में भी झगड़े महल के बाहर आ गये हैं। मोहम्मद बिन सलमान को नया क्राउन प्रिंस बनाया गया और डिप्टी प्राइम मिनिस्टर भी नियुक्त कर दिया गया। इसके साथ ही वे रक्षामंत्री भी बने रहेंगे। स्वाभाविक है कि मोहम्मद बिन सलमान ही अगले राजा होंगे। डोनाल्ड ट्रम्प की जिस तरह अपने देश में आलोचना हो रही है, उसी तरह की परिस्थितियां शाह सलमान के सामने भी आ सकती है। लेकिन यह बात भी अपनी जगह अडिग है कि इस भारी फेर बदल ने सत्ता की चाहत की एक बार फिर पुष्टि करते हुए एक नया अध्याय लिखते हुए एक साथ कई प्रश्नों का समाधान भी कर दिया है| क्या अरब देश पर शासन का दो रूप है? क्या वास्तविक राजा परदे के पीछे है और अवास्तविक राजा परदे के बाहर? क्या दुसरे देश के प्रभाव में अरब अपनी निति एवं कानून को भी बदल देता है, और रूप भी| यह एक बड़ा प्रश्न है|

One Response to “बिखरता हुआ अरब परिवार : क्या किसी दूसरे देश की है कूटनीति ”

  1. योगी दीक्षित

    सउदी अरेबिया ने जो आश्रित कर लगाया है उसका नुकसान सउदी को होगा. अगर वहाँ बसे भारतीय अपने आश्रितों को भारत भेजते हैं तो भारत में विदेशी मुद्रा अधिक मात्रा में आयेगी क्योंकि वे परिवार के पालन-पोषण के लिए अधिक धन भारत भेजेंगे. दूसरा असर ये होगा कि सउदी के छोटे-छोटे Grocery वालों का धंधा ठप्प होगा क्योंकि काफी लोग भारत आ चुके होंगे. छोटा-मोटा व्यवसाय करने वाले ज्यादातर भारतीय ही हैं. उनका धंधा भी मंदा हो जायेगा.

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