लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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मृत्युंजय दीक्षित

उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में सत्त्तासीन होने के बाद भारतीय जनता पार्टी की नजरें अब बेहद कमजोर व चुनौतीपूर्ण राज्यों के चुनावों को जीतने में लग गयी हैं। केरल एक ऐसा राज्य है जहां राजनैतिक हत्याओं का बाजार गर्म है तथा इस हिंसक राजनीति के खिलाफ अब भारतीय जनता पार्टी व आरएसएस ने कमर कस ली है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने केरल में भाजपा व संघ के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने व यह संदेश देने के लिए की केरल के कार्यकर्ता के साथ पूरा देश खड़ा है इसलिए केरल की हिंसक राजनीति के खिलाफ जनरक्षा पदयात्रा शुरू करके एक वातावरण पैदा करना प्रारम्भ कर दिया है।

अपनी चिरपरिचित राजनैतिक शैली के अनुरूप भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी पदयात्रा प्रारम्भ करने से पहले कन्नूर जिले के तालीपरम्बा में प्रसिद्ध राज राजेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना की। यहां पर भाजपा अध्यक्ष ने 30 मिनट बिताये और उन्होंने भगवान को स्वर्ण कलश चढ़ाया। तालीपरम्बा में स्थित राजराजेश्वर मंदिर उत्तर मालाबार का प्रसिद्ध शिव मंदिर है। राजनैतिक विश्लेषको का अनुमान है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की यह पदयात्रा केरल के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए टॅानिक का काम करेगी तथा उन्हें इस बात का संबल भी मिलेगा कि अब वे अकेले नहीं है। उनके साथ पूरा देश उठ खड़ा हुआ है। यह पदयात्रा वामदल के कथित लाल आतंकवाद के खिलाफ निकाली जा रही है। ऐसी पदयात्रायें कई अन्य राज्यों की राजधानियों में भी निकाली जायेगी तथा कम्युनिस्ट हिंसा के खिलाफ धरना – प्रदर्शनो आदि का भी आयोजन किया जा रहा है।  भाजपा व संघ परिवार पहली बर केरल के लाल आतंकवाद के खिलाफ इस प्रकार से बेहद आक्रामक हमलावर हो गये हैं। वैसे भी बहुत दिनों से केरल के कार्यकर्ता जो उत्पीडन व हिंसा को झेल रहे है। वह बहुत ही दर्दनाक  व हृदयविदारक है। अब जबकि केंद्र में भाजपा की सबसे मजबूत बहुमत वाली सरकार है उस अमित शाह की पदयात्रा का असर तो पडे़गा ही। इस पदयात्रा के सहारे पूरे दक्षिण को साधने का भी प्रयास किया जा रहा है। पदयात्रा की शुरूआत के समय अमित शाह का भव्य स्वागत किया गया। यात्रा प्रारम्भ करने से पूर्व उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में वामपंथ पर निशाना साधा । इस बीच भाजपा व संघ के लगातार हमलावर होने के बीच अब वामपंथी व कांग्रेस सहित अन्य सभी सेकुलर दलों ने भी अपनी तलवारें खीचं ली है तथा केरल में राजनतिक हिंसा के लिए संघ व भाजपा को दोषी ठहराते हुए संघ को आतंकवादी संगठन कहकर एक बार फिर जहर उगलने लग गये हैं । मुख्यमंत्री विजयन ने एक बार फिर संघ को आतंकवादी संगठन कहकर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का रास्ता साफ कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने केरल में वामपंथियों के खिलाफ पदषत्रा निकाली तो ही। लेकिन उसे उसका असर व लाभ गुजरात व अन्य राज्यों में ध्रुवीकरण के सहारे होता दिखलायी पड़ रहा है। इस पदयात्रा में कई केन्द्रीय मंत्री भी शामिल होंगे।

इस बीच सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह घटित हुआ है कि केरल में आयोजित पदयात्रा के दूसरे ही दिन उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दस किमी लम्बा रोड शो आयोजित हुआ तथा उन्होंन जनसभा को भी संबोधित किया। योगी की पदयात्रा और जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ से वामपंथ के कान खड़े होना स्वाभाविक ही है। अपनी जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि केरल ईश्वर की अपनी धरती है। लेकिन दुर्भाग्य से राजनीति से प्रेरित हिंसा का गवाह बन रहा है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से हम लोगों को माकपा के खराब शासन के बारे में बतायेंगे। योगी ने कहा कि बंदूक की नोक पर सत्ता हासिल करना वामदलों की प्रकृति है। केरल में लगातार राजनैतिक हिंसा हो रही है और इसका प्रायोजन राज्य सरकार कर रही है। केरल में भाजपा की पदयात्रा को मिल रहे समर्थन से माकपा सरकार सकते में आ गयी है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का कहना भी है कि शांतिप्रिय केरल अब हिंसक हो गया है। वे जितनी हिंसा फैलायेंगे राज्य में उतना कमल खिलेगा। कार्यकर्ताओं की शहादत बेकार नहीं जायेगी और पार्टी इस लड़ाई को जीतकर दिखाएगी। शाह ने अपनी यात्रा के दौरान मानवाधिकारियों पर भी निशाना साधा। केरल की पदयात्रा में जिस प्रकार से उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शामिल किया गया उससे साफ संकेत मिल रहा है कि अब योगी ही भाजपा के नये पोस्टर ब्याव बनने जा रहे हैं तथा यह भी खबरें आ रही हैं कि गुजरात के विधानसभा चुनावों में उनको भी काम पर लगाया जायेगा। इससे हिंदू जनमानस को जो अभी तक केरल में भाजपा का नहीं हो पा रहा है उसको भाजपा की ओर मोड़़ने में सहायक हो सकता है।

वर्तमान समय में केरल में भाजपा व संघ ने वामपंथ पर हमलावर होने का समय भी बिलकुल सही चुना गया है। केरल में भाजपा व संघ के कार्यकर्ताओं पर हमले रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं।  केरल में दलित युवकों की भी हत्यायें हो रही है। लेकिन सेकुलारवादी जिन्हें गौरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा तो दिखलायी पड़ जाती है अखलाक तो दिखलायी पड़ जाते है तथा रोहित वेमुला पर जो हाय तौबा अभी मचा रखी गयी है तथा इन पर मानवाधिकारी आगे आ जाते हैं ।  तुरंत जनहित याचिकायें ंदायर होने लग जाती है।

लेकिन 1966 से लेकर अब तक  तीन सौ संघ व भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। जिसमें दलित युवकों की भी निर्मम व हृदयविदारक हत्यायें की गयीं लेकिन किसी भी टूरिस्ट प्रेमी नेता व मानवाधिकारी तथा जनहित याचिकायें दायर करने वाले ठेकेदारों का दिल नहीं पसीजा। केरल पांच दशक से माक्र्सवादी आतंकवाद की चपेट में है।  केरल का कन्नूर जिला सबसे ज्यादा हिंसा प्रभावित क्षेत्र रहा है। यह मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का क्षेत्र रहा है। अकेले कन्नूर जिले में ही जनवरी 1967 से अब तक मार्च 2008 के बीच 56 राजनैतिक हत्याएं हो चुकी हैं.  केरल में वामपंथी दलितों महिलाओं यहां तक कि बच्चों पर भी हमले कर रहे हैं तथा माकपा विरोधियों पर भय पैदा करने के लिए तालिबानी व आईएसस के आतंकियों के तरीकों के समान ही वारदतों को अंजाम दे रहे हंै। आज केरल में वास्तव में भय का वातावरण है। ऐसा नहीं है कि केरल में केवल संघव भाजपा केकार्यकर्ताओं की हत्या हो रही है। वहां पर उन सभी विरोधियो को शांत कर दिया जता है जो माकपा के शासन तंत्र को सीधे चुनौती देने की स्थिति में आ जाते हैं। लेकिन अन्य दल अपने आप को बचाकर रखने  के लिए सत्ता के आगे नतमस्तक हो जाते हैं।

आरएसएस का मानना है कि केरल में अब वामपंथ का दिया बुझने के करीब है। लोकतांत्रिक ताकतें अराजकता के खिलाफ लामबंद होने लगी हैं। संघ के कार्यकार्तओं पर बढ़ी हिंसा उनकी बौखलाहट का सबूत है। केरल में संघ का ग्राफ बढ़ रहा है तथा वामपंथियों का किला कमजोर हो रहा है जो एक धक्का और देने से ध्वस्त हो सकता है।

संघ का कहना है कि केरल में अब तक 287 लोगों की हत्या हो चुकी  है जिसमें 60 दलित 6 महिलाएं और 100 से अधिक पिछढ़े शामिल हंै। केरल में आरएसएस बनाम वामपंथी  हिंसा है केवल ऐसा प्रचार मिथ्या है वामपंथी केरल में कांग्रेसियों की भी हत्या कर कर रहे हैं। लेकिन उसमें वामपंथियो का विरोध करने का साहस नहीं है। केरल में मानव तस्करी तथा धर्मांतरण सबसे बड़ा विषय है। केरल में दलितों , पिछड़ों व महिलाओं की हत्या हुई लेकिन किसी भी सेकुलरवादी नेता के मुंह से आह तक नहीं निकली। यहां तक कि केरल की घटनाओं को कोई अधिक महत्व भी नहीं दिया जाता रहा है। स्वाभाविक रूप से ऐसी परिस्थितियों में संघ व भाजपा का वामपंथ के उसके ही गढ़ में हमलावार होना तथा उन्हें अपनी ही जन्मभूमि में घेर लेना स्वाभाविक व राजनैतिक रूप से अनिवार्य हो गया था। आज केरल के हालात दिन -प्रतिदिन गंभीर होते जा रहे हैं। वहां पर राष्ट्रपति शासन की मांग भी जोर पकड़ रही है। केरल के कम्युनिस्टों का लोकतंत्र में कतई विश्वास नही हैं । इसलिए भाजपा की यह पदयात्रा बेहद जरूरी हो गयी थी। इस यात्रा में योगी का शामिल होना तथा उसमें भारी भीड़ के  शामिल होने से यह साफ पता चल रहा है कि अब वामपंथ का दिया बुझने वाला है। जिससे तिलमिलाकर अब वामपंथी भी भाजपा व संघ के खिलाफ जहर उगलने की तैयारी कर रहे हैं। इस प्रकार के राजनैतिक ध्रुवीकरण का लाभ भाजपा को आने वाले चुनावों में कुछ सीमा तक हो सकता है।

मृत्युंजय दीक्षित

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