बुखारी, कांग्रेस और दिग्विजय

-लोकेन्‍द्र सिंह राजपूत

बुखारी आतंकवादी ने संपादक को पीटा, कांग्रेस ने दिल्ली के निर्देश पर की मंत्रियों से धन उगाही और दिग्विजय सिंह शुक्र करो तुम्हारा जबड़ा नहीं टूटा… क्योंकि संघ सिमी या बुखारी नहीं

गुरुवार, 14 अक्टूबर 2010 को दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ का समापन सभी प्रकार की मीडिया के लिए प्राथमिक और प्रमुख समाचार रहा वहीं एक घटना और रही जो मीडिया और हर भारतवासी के लिए अति महत्वपूर्ण रही। जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी ने मीडिया के मुंह पर तमाचा मारा, वो भी कस के। दरअसल इमाम बुखारी अयोध्या मसले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने की पैरवी करने के लिए नबाबों के शहर लखनऊ पहुंचे थे। वह एक पत्रकारवार्ता को संबोधित कर रहा था (किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो पहुंचती रहे, लेकिन मैं बुखारी के लिए किसी भी प्रकार की सम्मानीय भाषा का उपयोग नहीं करूंगा), तभी उर्दू अखबार दास्तान-ए-अवध के संपादक अब्दुल वाहिद चिश्ती ने बुखारी से एक प्रश्न पूछा। जिस पर वह भड़क गया। एक संपादक की सत्ता को ललकार बैठा। तहजीब सिखाने का ठेकेदार बदतमीजी पर उतर आया। उसकी भाषा ऐसी थी कि जैसे किसी गली के नुक्कड़ पर खड़ा होने वाला छिछोरा लौंडा बात कर रहा हो। दास्तान-ए-अवध के संपादक का सवाल इतना सा था कि सन् 1528 के खसरे में उक्त भूमि पर मालिकाना हक राजा दशरथ के नाम से है, जो अयोध्या के राजा थे। इस नाते यह जमीन उनके बेटे राम की होना स्वाभाविक है, क्यों न मुसलमान इसे हिन्दू समाज को दे दें। वैसे भी हिन्दुओं ने बहुत सी मस्जिदों के लिए जगह दी है। एक और प्रश्न था-क्या इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट लेने की आपकी राय से मुल्क के सारे मुसलमान इत्तेफाक रखते हैं? इन प्रश्नों को सुनते ही बुखारी अपने रंग में दिखे। वैसे मुझे नहीं लगता ये इतने कठोर प्रश्न थे कि बुखारी को अपनी औकात पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़। इसके बाद तो दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी संपादक को जान से मारने की धमकी देते हुए कहता है- चोप बैठ जा, नहीं तो वहीं आकर नाप दूंगा। खामोश बैठ जा, चुपचाप…… तेरे जैसे 36 फिरते हैं मेरे आगे-पीछे…….. बदमाश कहीं का, एजेंट….. इतना ही नहीं बुखारी का मन इससे भी नहीं भरा। उसने संपादक के साथ हाथापाई की। बुखारी ने अपने शागिर्दों को कहा-मार दो साले को… वरना ये नासूर बन जाएगा, अपन लोगों के लिए। यह सुनते ही बुखारी के शागिर्द टूट पड़े संपादक अब्दुल वाहिद पर।

घटना के बाद सारे पत्रकार एकजुट होकर बुखारी से पूछते हैं- आपको एक पत्रकार को मारने का हक किसने दिया। बुखारी इस पर कहते हैं-मारूंगा, तुम कर क्या लोगे। यह है महान बुखारी। वैसे बुखारी के इस कृत्य पर चौकने की कतई जरूरत नहीं। इस तरह की हरकतें करना इन महाशय की फितरत बन चुका है। सन् 2006 में भी इसने प्रधानमंत्री निवास के सामने पत्रकारों के साथ मारपीट की थी। आपको एक बात और बता देना चाहूंगा कि यह वही बुखारी है जिसने जामा मस्जिद से हजारों लोगों की भीड़ के सामने भारतीय सरकार और व्यवस्था को चुनौती देते हुए कहा था- मैं हूं सबसे बड़ा आतंकवादी। अगर है किसी में दम तो करे मुझे गिरफ्तार। उस समय सारे बुद्विजीवी और कथित सेक्युलर अपनी-अपनी मांद में छुप कर बैठ गए। किसी ने कागद कारे नहीं किए। मुझे उन लोगों पर आज भी पूरा यकीन है। वे या तो बुखारी के इस कृत्य को उचित सिद्ध करने के लिए कलम रगड़ेंगे या फिर खामोश रह कर किसी और मुद्दे की ओर ध्यान खींचेंगे, लेकिन वे एक शब्द लिखकर भी इमाम बुखारी और उसकी मानसिकता का विरोध नहीं करेंगे।

– आज की एक और घटना अधिक चर्चित रही। वह है कांग्रेस की सुपर मैम सोनिया गांधी की वर्धा रैली के लिए धन उगाही की। इस घटना का खुलासा बड़ा रोचक रहा। दरअसल किसी आयोजन के समाप्त होने के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष माणिक राव ठाकरे और पूर्व मंत्री सतीस चतुर्वेदी निश्चिंत बैठ गुफ्तगूं में मशगूल हो गए। दोनों वर्धा रैली में किस-से कितना पैसा वसूला गया, इस पर चर्चा कर रहे थे। अहा! किस्मत, तभी किसी कैमरे में दोनों रिकॉर्ड (यह कोई स्टिंग ऑपरेशन नहीं था) हो गए। माणिक राव पूर्व मंत्री सतीस से कह रहे थे कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पहले तो पैसे देने से ना-नुकुर कर रहा था, लेकिन बाद में दो करोड़ ले ही लिया। बाकी मंत्रियों से दस-दस लाख रुपया लिया गया है। इस मसले पर दोनों की काफी देर तक बात चली। सब कुछ कैमरे में कैद हो गया और खबरिया चैनलों के माध्यम से जनता के सामने आ गया। सब साफ है, लेकिन फिर भी कोई कांग्रेसी स्वीकार नहीं कर रहा कि रैली के लिए कांग्रेस धन उगाही करती है। रैली के लिए करोड़ और लाख-लाख रुपए की वसूली के निर्देश दिल्ली से आए थे, यह दोनों की बातचीत से स्पष्ट हुआ। हमारे प्रदेश के बयान वीर दिग्विजय सिंह इतना ही कह सके कि कांग्रेस में रैली व अन्य आयोजनों के नाम पर धन उगाही नहीं होती, जबकि सबूत हिन्दोस्तान की सारी जनता के सामने था। घटना के बाद बड़े सवाल पीछे छूट गए कि इतना पैसा मंत्रियों के पास आता कहां से है? जनता सवाल भी जानती है और जवाब भी, लेकिन बाजी जब जनता के हाथ होती है तो वह भूल जाती है अपना कर्तव्य।

वहीं बयानवीर दिग्विजय सिंह ने एक और अनर्गल बयान जारी किया है कि संघ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से पैसा लेता है। उनका कहना है कि उनके पास सबूत हैं। वे एक माह में सब दूध का दूध और पानी का पानी कर देंगे। दिग्विजय आपके पास तो इस बात के भी सबूत थे कि संघ पार्टी में अवैध हथियार बनते हैं, बम बनाए जाते हैं, लेकिन आप आज तक वो सबूत पेश नहीं कर पाए। दरअसल दिग्विजय को सच या तो पचता नहीं है या दिखता नहीं है। उनकी पार्टी का महान कारनामे की वीडियो फुटेज टीवी चैनल पर चल रही थी, तब भी राजा साहब कह रहे थे कि कांग्रेस धन उगाही नहीं करती। क्या दिग्विजय को इतना बड़ा सबूत नहीं दिखा। खैर मैं तो बड़ी बेसब्री से एक माह बीतने का इंतजार कर रहा हूं, जब राजा साहब एक बड़ा खुलासा करेंगे। मैंने इससे पूर्व के लेख में लिखा था कि संभवत: राहुल के कान दिग्गी ने ही भरे होंगे या फिर अपने लिए लिखा भाषण राहुल से पढ़वा दिया होगा। तभी राहुल बाबा बिना ज्ञान के संघ की तुलना सिमी से कर गए थे। उसके बाद राहुल के बचाव में दिग्विजय बड़े जोर-शोर से जुटे हैं और संघ को सिमी जैसा बताने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। दिग्गी शुक्र करो संघ इमाम बुखारी या सिमी जैसा नहीं है…. देखा होगा इमाम ने तो एक सामान्य सवाल पूछने पर ही एक उर्दू अखबार के संपादक का मुंह तोड़ दिया।

17 thoughts on “बुखारी, कांग्रेस और दिग्विजय

  1. ऐसी एक भी पार्टी का नाम बतायें जो धन उगाही नहीं करती है ? राष्ट्रीय, प्रांतीय और तो और स्थानीय पार्टी हर कोई धन उगाही करता है. जो पार्टी जितना ज्यादा धन उगाही करती है उतनी ही वो मज़बूत होती है. बुखारी जैसो के बारे में कमेन्ट करना भी उनका मान बढ़ाना है इसलिए नो कमेन्ट.

  2. वर्तमान में पूरा विश्व पानी के लिए मंथन करने में जूटा है , वहीँ दूसरी और पानी पुरुष के नाम से चर्चित व्यक्ति राजेंद्र सिंह देश के विभिन्न भागों में घूम – घूमकर पानी के महत्वों पर प्रकाश डाल रहें हैं और लोगों को जागरूक कर पानी के संरक्षण तथा प्रदूषण मुक्त करने के कई तरकीब भी बता रहें हैं | ऐसे में भूगोलिक दशाओं और क्षेत्रीय मानसिकताओं का भी उन्हें सामना करना पड़ रहा है | कई जगह तो उनकी बातों को दरकिनार कर दिया जाता है तो कई जगह अमल में लाने का प्रयास किया जाता है | बहरहाल में , पानी पुरुष राजेंद्र सिंह ‘ गंगा लोक यात्रा ‘ कर रहें हैं | इस क्रम में वे झारखण्ड राज्य की धार्मिक नगरी देवघर पहुंचे और कई बातों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला | इस क्रम में श्री सिंह ने कहा की लोकतंत्र , ठेकातंत्र में बदल गया है | सारे कार्य ठीकेदारी पर चल रहें हैं | लोकतंत्र का लोक कहीं नज़र नहीं आता है | हर जगह तंत्र ही तंत्र दिखता है | ऐसी हालात में समाज को अपनी जीविका के बारे में सोचना होगा कि हमारी आखिरी लड़ाई ‘ गंगा की अमरता ‘ को बचाने से जुडी है | गंगा बचेगा तो लोग बचेंगें , नदियाँ ठीक होगी तो हमारी सेहत , हमारे खेत और हमारे उधोग बचेंगें | गंगा का गौरव समाप्त होता जा रहा है , मैला यानि कि गन्दगी के बोझ के कारण गंगा की प्रदूषण – नाशिनी विलक्षण शक्ति नष्ट हो गयी है | गंगा तथा देश की नदियों को बचाने के लिए नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को भी आगे आना होगा | सिर्फ सरकार पर इसकी जिम्मेवारी छोड़ने से काम नहीं चलने वाला है | इसी क्रम में पानी पुरुष राजेंद्र सिंह ने देवघर के पौराणिक सरोवर शिवगंगा के प्रदूषित होने की चर्चा कर लोगों को आकर्षित करते हुए कहा कि देवघर की आस्था का केंद्र शिवगंगा है , जब आस्था के केंद्र विकृत होने लगें तो समझा जाय, हमारे बुरे दिन आ रहें हैं | उन्होंने कहा कि मात्र बीस प्रतिशत प्रदूषण उधोगों के कारण हो रहा है , ८० प्रतिशत प्रदूषण नगर पालिका और नगर निगम कर रहें है , जो गंदे नालों का पानी नदियों में बहा रहे हैं | राजेंद्र सिंह ने जिस तरह से देवघर के लोगों को पौराणिक सरोवर शिवगंगा का उदहारण देकर पानी की नितांत आवश्यकता पर प्रकाश डाला , वह अपने – आप में एक अनोखा मार्गदर्शन रणनीति है | लोगों ने देश की पवित्र नदी गंगा और देवघर की पौराणिक सरोवर शिवगंगा के बारे में सांकेतिक अध्ययन सुनकर लोग इसे अमल में लाने की कवायद में जुट गएँ हैं |
    यहाँ बस एक ही सवाल उठता है कि जो भी लोग पानी पुरुष राजेंद्र सिंह के बातों और अपील को अमल में लाने के लिए हाँ – में – हाँ किये है , क्या वे इसे धरातल में लाने का प्रयास करेंगें या फिर किसी समाचार पत्रों के पन्ने पर और किसी टेलिविजन में अपनी पब्लिसिटी करा कर वाह – वाहियाँ बटोरने का प्रयास करेंगें | क्योंकि चर्चित व्यक्ति के साथ समाज के हर कोई अपना नाम जोड़ कर अपने शानो – शौकत में चार चाँद लगाना चाहतें हैं | गौरतलब है कि देवघर भी वर्तमान में पानी के घोर संकट से गुजर रहा है , गर्मी के दिनों में यहाँ पानी के लिए लोग खून- खराबे पर उतारू हो जातें हैं , हरेक मोहल्ला में पानी के लिए लोग एक दूसरे से लड़तें नज़र आतें है | एक दूसरे का सर फोड़ते हैं और फिर खून से सने दोनों पक्ष नगर थाना पहुंचतें हैं | यह सिलसिला गर्मी भर चलता रहता है | देवघर और आसपास के क्षेत्रों में पानी की कमी को पूरा करने के लिए अति महत्वाकांक्षी पेयजलापूर्ति योजना ‘ पुनासी पेयजलापूर्ति योजना ‘ राजनितिक पचड़े में पड़कर बाधित हो रहा है | जबकि हरेक राजनितिक दलों को मालूम है कि यह जलापूर्ति योजना अति आवश्यक है | यह क्षेत्र गोड्डा लोकसभा संसदीय क्षेत्र में पड़ने के कारण वर्तमान संसद निशिकांत दूबे क्षेत्र के विकास के उद्देश्य से उक्त योजना को धरातल में लाने के लिए केंद्र सरकार से धनराशि का आवंटन कराकर और विस्थापितों को विश्वास में लेकर योजना का श्रीगणेश करने का प्रयास कर रहें हैं , किन्तु मानसिक रूप से भ्रमित विस्थापित योजना के शुरू हो जाने से पहले ही कई तरह के बाधा उत्पन्न कर रहें हैं , वो भी राजद नेता और देवघर विधानसभा के विधायक सुरेश पासवान के इशारे और समर्थन पर | विस्थापितों को भर्मित करने के प्रयास में झारखण्ड विकास मोर्चा के सुप्रीमो सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और कई छोटे और बड़े कद्दावर नेता आगे आ रहें हैं | ऐसे में उक्त योजना के श्रीगणेश होने में बाधा ही बाधा उत्पन्न होना स्वाभाविक है | सांसद निशिकांत ने इस योजना में बाधक बन रहे विधायक सुरेश पर रासुका लगाने तक का बयान दे दिया है |
    ऐसे में पानी पुरुष का देवघर आना और पानी के नितांत आवश्यकता पर प्रकाश डालना कहाँ तक धरातल में उतर सकता है , यह मंथन का विषय है | सनद रहे कि यह योजना अभिवाजित बिहार के समय ही शुरू हुआ था और अब झारखण्ड राज्य के खाते में आ जाने के कारण यह राज्य के विकास के विषय से जुड़ गया है |

  3. बुखारी का विरोध होना ही चाहिए लेकिन भाषा का उपयोग तो ठीक से किया जाये!
    क्या आर एस एस के लोगों को मुसलमान विरोध ही देश के उत्थान का रास्ता नज़र आता है? हिन्दू धर्म ग्रंथों के संरक्षकों को भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण, भेदभाव, तिरस्कार, छुआछूत आदि क्यों नहीं दिखते? यदि दिखते हैं तो बहुसंक्षक भ्रष्ट हिन्दू (ब्रह्मण-बनिया) अफसरों को फांसी पर लटकाने की बात क्यों नहीं होती?

  4. मैं मेरी समझ के अनुसार, मुसलमानों की (विवशताओं पर ) कठिनाइयों पर कुछ प्रकाश डालना चाहता हूं। यह कठिनाइयां आजके समय में उभरकर आती हुयी मुझे प्रतीत हो रही हैं।
    विचारके लिए, स्थूल रीतिसे, भारतीय मुसलमानोंको निम्न चार गुटों मे बांटा जा सकता है।
    (१) बुखारी जैसे, *कट्टर* देशद्रोही की सीमा वाले, (१क) इनके *अनुयायी* आदेशपर चलनेवाले
    (२) आधुनिक शिक्षा युक्त *सुधारवादी*
    (२क) सुधारवादी* जो सुधारका पक्ष निडरतासे खुलकर रखते हैं,
    (२ख) *मौन सुधारवादी* जो सुधार चाहते तो हैं, पर *कट्टर* गुटकी मारसे डरते हैं, इसलिए मौन रहते हैं।
    (२ग) शिक्षायुक्त चतुर जो अपनी चतुराइ से इस्लाम में कट्टर गुटका प्रभाव जानते हैं। इसी ज्ञानके आधारपर वे उपरसे नाटकीय श्रद्धा दिखाते हुए, शासक, अधिकारी, नेता इत्यादि बनकर मलाई खाने में सफल होते हैं।
    और, जब सुधारकको इस्लाम से “जातिबहार” निकाला जाता है, उसका बहिष्कार किया जाता है, फतवा निकाला जाता है, जैसा अन्वर शेख, तसलिमा, सलमान रश्दी, हमीद दलवाई इत्यादि लोगोंके साथ हुआ है।
    सारांश==> ऐसे इस्लामको सुधारने कौन आगे बढेगा?
    वास्तवमें भारत में यह सुधार होना अधिक संभव है। पर फिर कांग्रेस, कम्युनिस्ट, और लल्लु पंजु पार्टियां, इत्यादि राजनीति से प्रेरित गुट का अस्तित्व भी तो इस्लामके पीछडे रहने पर निर्भर करता है। इस विश्लेषण में भी, मीन मेख निकालने के लिए वे ही आगे बढ जाएंगे। फिर भी मुझे यही सच्चाई प्रतीत होती है। अन्य विचार, सच प्रतीत होनेपर स्वीकारने में मुझे कोई कठिनाइ नहीं।

  5. आपने अतयंत समसामायिक लिखा है,ये १५ करोड मुसलमानों का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि उनके नेता बुखारी जैसे व्यक्ती होते है,बहुत सामान्य शिष्टाचार को भुल कर बुखारी जैसी गालिया बक रहे थे वो इस बात को प्रमाणित करता है कि वो निश्चय ही धर्म गुरु होने के कतेयी योग्य नही है,वो सारे सेक्युलर पत्रकार कहा गये??छाती पीटने वाले वामपंथी कहा गये??खुले आम धमकी देने वाले के खिलाफ़ अभी तक मेने एक भी सम्पादकिय नही पढा किसी सेक्युलर अखबार मे,क्यों???क्या जो पीटा वो पत्रकार नही था??या मुस्लिम कट्टर्पंथियॊ के सामने बोलने या लिखने का साहस ही नही है???हिन्दुओं के खिलाफ़ लगातार गालिया बकने वाले एक दिगवंत लेखक ने “गलती” से एक लेख पाकिस्तान के खिलाफ़ लिख दिया था जिसके लिये हिन्दी साहित्य के उस बहुत बडे लेखक को माफ़ी मागनी पडी थी,नाम तो नही बताउंगा क्योकी उनका देहान्त हो गया है लेकीन इस घटना से एक बात मेरे दिमाग मे आज से ७-८ साल पहले ही स्पष्ट हो गयी थी की भारत लोगतंत्र नही एक “भीडतंत्र” है,भीड भी अगर गैर हिन्दु हो तो बहुत ही पुजनीय है………………………….

  6. बुखारी, कांग्रेस और दिग्विजय – by -लोकेन्‍द्र सिंह राजपूत

    इमाम बुखारी अयोध्या मसले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने की पैरवी करने के लिए लखनऊ पहुंचे थे.

    उनका यह ध्येय सफल हो गया है. उनकी इच्छा का निर्णय हुआ है.

    बोनस में, उन्होने अपना परिचय भी सभी को स्मरण करवा दिया है.

    Nothing succeeds like success.

  7. लोकेन्द्र राजपूत जी की लेखनी में दम है और घटनाओं को विश्लेषित करने व समझने की समझ है. प्रभावी, सही, सटीक लेख है.
    – पता नहीं कि कुछ लोग मुद्दों को सही परिप्रेक्ष्य में क्यों नहीं समझ पाते और कहलाते हैं बुधीजीवी. बुखारी की गद्दारी की चर्चा करते हुए कांग्रेस के दुष्टता की चर्चा करना नागवार क्योंकर लगना चाहिए ? कांग्रेस की कृपा के बिना व कम्युनिस्टों के सहयोग के बिना कोई गद्दार कैसे स्वतंत्र घूमता रह सकता है ? बुखारी जैसों की रक्षक यही भ्रष्ट कांग्रेस और लेफ्टिस्ट हैं. अतः इनकी चर्चा एकसाथ होजाना स्वाभाविक है.इस पर ऐतराज़ करने वालों को अपने पूर्वाग्रहों से बाहर निकलने का प्रयास करना चाहिए.

  8. ये जानकार अच्छा लगा की वाहिद चिश्ती जैसे मुसलमान भी यहाँ पर हैं. मैं उनको नमस्कार करता हूँ. चिश्ती साहब अभिव्यक्ति की आजादी के प्रतिक हैं. चिश्ती साहब क्षमा करें मेरे लेख पूरी तरह से इन नरपिशाचों पर केन्द्रित है.
    कांग्रेस पार्टी को इस देश से धक्के मार्के बहार निकल देनी चाहिए.

  9. इन दो कौड़ी के लोगों – राहुल, दिग्विजय और बुखारी को औकात दिखाना जरुरी है.

  10. इस आलेख में कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा है ….लोकेन्द्र ने कांग्रेस की चुटिया पकड़कर करोड़ा है …चलिए आपको आज़ादी है अभिव्यक्ति की सो अपनी योग्यता का सदुपयोग करें …किन्तु इमाम बुखारी के प्रकरण में ..vardha ..रेली ,सोनिया जी .दिग्गी राजा ये सब टाट- पटोरे ये कुछ जाचे नहीं ……रही बात बुखारी की तो उसे इस देश में कोई भी आदमजात पसंद नहीं करता …कांग्रेस ने आजादी के बाद हर मजहब और धरम के क्षत्रप तैयार किये थे -वे अपने स्वार्थों के परवान चढ़ने में भस्मासुर बनकर कांग्रेस की मुसीवत बनते चले गए …भिन्द्रान्वाला ,वीरप्पन से लेकर अजा-जजा ,अगड़ा -पिछड़ा ,हिन्दू -मुस्लिम सभी में नाम cheenh वोट कमाऊ पूत पाले गए …अब इनके दिन लड़ चुके हैं …वाहिद चिस्ती इस देश का भारत रत्न होगा और इमाम बुखारी जैसे कोम के दुश्मन धिक्कारे जायेंगे ….

  11. मुझे शर्म आती है बुखारी जैसे लोग जिंदा कैसे हैं? उसको औकात दिखाना जरुरी है.
    राहुल गाँधी अभी बच्चा है. कांग्रेस पार्टी वसूली करती है यह कोई नई बात नहीं है. हर पार्टी वसूली करती है. हाँ कांग्रेस इसकी उस्ताद है. ऐसे पचास साल शासन नहीं किया है!
    यह पार्टी हरामखोरों से भरी पड़ी है.
    दिग्विजय सिंह वसूली का मास्टर था. इसके समय जो वसूली हुई वो बेसिमल है १० साल शासन म. प्र में ऐसे ही नहीं किया. इतिहास गवाह है की लालू और दिग्विजय में टक्कर था की किसने अपने राज्य को ज्यादा बर्बाद किया. बगैर कोई काम किये दिग्विजय ने दस साल और लालू ने १५ साल गुजर दिया. ऐसे लोगों को जुटे से पीटा जाना चाहिए. हाँ आजकल दिग्विजय और राहुल की गाढ़ी छान रही है. दिग्विजय शायद राजनीती में घाघ बनाने के गुर राहुल को शिखा रहा है. बेस्ट ऑफ़ लुक राहुल. आशा है की देश को लूटने में बड़ा नाम कमाओगे.

  12. बुखारी जैसे लोगों को औकात दिखाई जनि चाहिए. ऐसे जमा मस्जिद और बुखारी दोनों को जमिन्दोज़ कर देनी चाहिए. देश का कानून क्या कर रही है. बुखारी जैसे मद***द खुले आम घूम रहे हैं. बुखारी जैसों को नंगा करके सरे आम सड़क में पीता जाना चाहिए उसके बाद शरीअत के अनुसार पत्थरों से मार दिया जाना चाहिए. बुखारी इस्लाम का सच्चा प्रतिनिधि है उसको जन्नत की सैर करने का समय आ गया है. इस इस्लाम पर थूकता हूँ मै.

  13. लोकेन्द्र भाई बिलकुल सही और तथ्य पूर्ण लेख है| जैसा कि सुरेश भाई ने भी कहा है कि बुखारी के लिये इससे उपयुक्त और कोई संबोधन नहीं हो सकता| किन्तु दुःख की बात है इतना कूछ होने के बाद भी बुखारी का बाल भी बांका नहीं होगा, वही अपने ही देश में एक ईदगाह पर तिरंगा फहराने पर साध्वी को साम्प्रदायिक घोषित किया जा सकता है| अजीब लोकतंत्र है हमारा|

  14. बुखारी को उसके सही नाम से सम्बोधन के लिये धन्यवाद.
    भ्रष्टाचार कान्ग्रेस और देश की जनता के लिये नया नही. लेकिन मैकाले प्रायोजित शिछा द्वारा दिग्भ्रमित एवम आत्मशून्य जनता कान्ग्रेस के छणिक बहकावे मे आकर अपना भविष्य को अपने पैरो से रोन्द रही है.
    म.प्र. की राजनीति मे अप्रासन्गिक दिग्गी राजा हाशिये पर है अत: चाटुकरिता कर एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश करते है.
    सन्घ को गाली देकर वह अपने आप को चर्चा मे बनाये रखते है, नेहरु राजवन्श की चापलुसी हो जाती है और मुस्लिमो का तुष्टीकरण भी हो जाता है. इसके सिवा और उनका कोइ लछ्य नही.

  15. आपने बिलकुल ठीक कहा है. इन्हें आस्तीन का सांप कहना ज्यादा उपयुक्त होगा.

  16. Bahut Accha Alekh,
    Diggi ka halat yah hai ;Dhobi ka kutta na ghar ka na ghat;
    Use MP me to koi poonchata nahi hai isliye dilli me chamchagiri kar raha hai

  17. बुखारी के लिये एकदम सही शब्द और सम्बोधन प्रयुक्त किया है आपने…
    शानदार, ऊर्जावान लेखन के लिये बधाई…

    प्रमोद मुतालिक के समय अपनी बाँबी से बाहर आये हुए सेकुलर-वामपंथी और कांग्रेसी अब अपने-अपने बिल में छिपे बैठे हैं… 🙂 🙂
    ये लोग ऐसे ही होते हैं, तसलीमा नसरीन पर हुए हमले के समय भी इन लोगों के मुँह में दही जम गया था।

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