बुलैट ट्रेन : भारतीय रेलवे को मिलेगी गति


सुरेश हिन्दुस्थानी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जापान के सहयोग से हवा से बातें करने वाली उच्च गति वाली बुलेट ट्रेन लाकर भारत के विकास के लिए आधारशिला की स्थापना की है। हालांकि बुलेट ट्रैन लाने के मोदी के प्रयासों की यह कहकर आलोचना भी की जाएगी कि जब वर्तमान रेल यातायात अनियंत्रित हो रहा है, तब बुलेट ट्रैन चलाकर कौन सी प्रगति होगी। लेकिन यह सत्य है कि आगे बढ़ने के लिए खतरों का खिलाड़ी बनना होगा। यह बात एक दम सही है कि देश के इतने बड़े रेल यातायात संचालन की जिम्मेदारी रेल विभाग की होती है, सरकार को इसके नियंत्रण के लिए उचित कदम भी उठाने होंगे, लेकिन यह भी सच है कि जब उच्च तकनीक के साथ किसी विभाग का विस्तार किया जाए तो कुछ समस्याएं तो अपने आप ही दूर हो जाएंगी। इसलिए यह कहा जाना सर्वथा उपयुक्त ही होगा कि बुलेट ट्रैन रेल विभाग की कई समस्याओं का समाधान करेगा। इसके अलावा एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आज तकनीक के जमाने में आगे बढ़ने के लिए खतरों की चिन्ता न करते हुए आगे बढ़ते रहने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यकाल में आगे बढ़ने के लिए खतरों से खेला है। वे वास्तव में खतरों के खिलाड़ी कहे जा सकते हैं। आज देश की जनता सार्वजनिक रुप से इस सत्य को स्वीकारने लगी है कि नरेन्द्र मोदी जो भी काम करते हैं, उसमें भारत का उत्थान समाहित होता है। चाहे वह तकनीकी का क्षेत्र हो या फिर सांस्कृतिक क्षेत्र हो। नरेन्द्र मोदी ने हर जगह अलग अंदाज में अपने काम की प्रस्तुति दी है। जापान के सहयोग से भारत में बुलेट ट्रैन का सपना पूरा हो रहा है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने अहमदाबाद में भारत की पहली बुलेट ट्रेन की नींव रखी। इसके साथ ही देश में हवा से बातें करने वाली उच्चगति की रेलसेवा की शुरूआत की उल्टी गिनती शुरू हो गयी। अहमदाबाद के साबरमती स्थित रेलवे के एथलेक्टिस स्टेडियम में आयोजित एक भव्य समारोह में दस हजार से अधिक लोगों के समक्ष दोनों प्रधानमंत्रियों ने यहां बनने वाले मुख्य स्टेशन, यार्ड और वडोदरा में निर्मित होने वाले हाईस्पीड रेल ट्रैक प्रशिक्षण संस्थान के निर्माण की आधारशिला पट्टिका का अनावरण किया। वास्तव में यह बुलेट ट्रेन परियोजना की नहीं बल्कि नये भारत की नींव रखी गयी है। इसका गुजरात और महाराष्ट्र के लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। दोनों राज्यों के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि होगी। यह मोदी की दूरदृष्टि का परिणाम है इससे ना केवल गुजरात बल्कि देश का विकास होगा। बुलेट ट्रेन दो मित्र देशों भारत और जापान के बीच संबंधों में भाईचारे का प्रतीक होगी। यह प्रधानमंत्री मोदी के न्यू इंडिया के सपने को पूरा करेगी। बुलेट ट्रैन के माध्यम से भारतीय रेल दुनिया की आधुनिकतम तकनीक से जुड़ेगी और देश की आर्थिक तरक्की को और गति देगी। करीब 160 साल पुरानी भारतीय रेल का विगत चार पांच दशकों से तकनीक विकास जरूरत के मुताबिक नहीं हो पाने से अनेक संकटों में घिरी है। देश में शिन्कान्सेन तकनीक आने से भारतीय रेलवे तेजी से आगे बढ़ेगी। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से भारत में मेक इन इंडिया के माध्यम से सस्ती बुलेट ट्रेनें बनेंगी जिन्हें निर्यात करके पैसा कमाया जा सकेगा। बुलेट ट्रेन की लागत में कमी आने से उस तकनीक से भारतीय रेल नेटवर्क को भी उन्नत बनाया जा सकेगा। इस परियोजना के लिये भारतीय रेलवे के 300 युवा अधिकारी जापान में हाईस्पीड ट्रैक प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। जापान की सरकार ने भी मानव संसाधन विकास की जरूरतों को देखते हुये अपने देश के विश्वविद्यालयों में भारतीय रेलवे के अधिकारियों के लिये मास्टर्स प्रोग्राम के लिये 20 सीट प्रतिवर्ष आरक्षित की है। बुलेट ट्रेन परियोजना को मेक इन इंडिया कार्यक्रम से भी जोड़ा गया है। जापान इसके लिये प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भी करेगा। इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर 2023 तय किया गया था लेकिन प्रधानमंत्री ने इसके लिये 15 अगस्त 2022 की नयी समयसीमा निर्धारित की है ताकि देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर देश को यह नयी सौगात पेश की जा सके।

Leave a Reply

%d bloggers like this: