शख्सियत

प्रसिद्ध व्यक्तित्व का परिचय

सावरकर

कांग्रेस के नेतृत्व की इन भूलों पर सावरकर बहुत खिन्न थे। वह ये नही समझा पा रहे थे कि जब चीन जैसे देश अणुबम बनाने की बात कर रहे हैं, तो उस समय भारत ‘अणुबम नही बनाएंगे’ की रट क्यों लगा रहा है? क्या इस विशाल देश को अपनी सुरक्षा की कोई आवश्यकता नही है? वह नही चाहते थे कि इतने बड़े देश की सीमाओं को और इसके महान नागरिकों को रामभरोसे छोड़कर चला जाए। इसलिए उन्होंने ऐसे नेताओं को और उनकी नीतियों को लताड़ा जो देश के भविष्य की चिंता छोड़ ख्याली पुलाव पका रहे थे।

“मेरा गीत मुझे गाने दो”…..स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर…..

आज राष्ट्र चेतना के धधकते अंगारे, हिन्दू राष्ट्र के प्रचंड परंतु सर्वाधिक प्रताड़ित योद्धा स्वातंत्र्यवीर

सूना हो गया नदी का घर

एक वर्ष से केंद्रीय पर्यावरण मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे अनिल माधव दवे का जन्म 6 जुलाई, 1956 को उज्जैन के भदनगर में हुआ था। उनके पिता का नाम माधव दवे और माता का नाम पुष्पा देवी था। उन्होंने इंदौर स्थित गुजराती महाविद्यालय से एमकॉम की डिग्री हासिल की। उन्होंने विद्यार्थी जीवन से ही अपने राजनीतिक और सामाजिक सफर की शुरुआत कर दी थी। अपने महाविद्यालय के छात्र अध्यक्ष चुने गए।

गणि राजेन्द्र विजय: दांडी पकडे़ आदिवासियों के ‘गांधी’

गणि राजेन्द्र विजयजी बच्चों को कच्चे घड़े के समान मानते हैं। उनका कहना है उन्हें आप जैसे आकार में ढालेंगे वे उसी आकार में ढल जाएंगे। मां के उच्च संस्कार बच्चों के संस्कार निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए आवश्यक है कि सबसे पहले परिवार संस्कारवान बने माता-पिता संस्कारवान बने, तभी बच्चे संस्कारवान चरित्रवान बनकर घर की, परिवार की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकेंगे। अगर बच्चे सत्पथ से भटक जाएंगे तो उनका जीवन अंधकार के उस गहन गर्त में चला जाएगा जहां से पुनः निकलना बहुत मुश्किल हो जाएगा। बच्चों को संस्कारी बनाने की दृष्टि से गणि राजेन्द्र विजय विशेष प्रयास कर रहे हैं।