बच्चों का पन्ना चूहा भाई December 15, 2012 / December 15, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment सुबह सुबह चूहा भाई ने, संपादक को डांटा| “चार लेख भेजे थे मैंने, नहीं एक भी छापा|” संपादक ने एक पत्रिका, उसकी तरफ बढ़ाई| बोला”इसमें आप छपे हैं, इसको पढ़ लो भाई|” मुख्य पृष्ठ पर ज्योंहि उनको, बिल्ली पड़ी दिखाई| डर के मारे दौड़ लगाकर, भागे चूहा भाई| Read more »
बच्चों का पन्ना खुला पुस्तकालय जंगल में December 15, 2012 / December 15, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment बालवाटिका पढ़ पढ़कर, कालू बंदर हो गये विद्वान| इसी बात का हाथीजी ने ,शेर चचा का खींचा ध्यान| देखो तो यह कालू बंदर, पढ़ लिखकर हो गया महान| हम तो मात्र हिलाते रह गये ,अपने पूँछ गला और कान| बाल वटिका बुलवाने का ,खुलकर किया गया एलान| शाल ओढ़ाकर बंदरजी का, किया गोष्ठी में सम्मान| […] Read more » खुला पुस्तकालय जंगल में
बच्चों का पन्ना दहेज December 2, 2012 / December 1, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 3 Comments on दहेज अपने मम्मी पापा के संग , चुहिया पहुंची थाने| बोली चूहे के घरवाले, हैं दहेज दीवाने| शादी के पहले से ही वे, मांग रहे हैं कार| बंद करो थाने में उनको, चटपट थानेदार| इस पर भालू कॊतवाल ने, चूहे को बुलवाया| थाने में घरवालों के संग, उसको बंद कराया| Read more » poem for kids
बच्चों का पन्ना तुमको सजा मिलेगी December 1, 2012 / December 1, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment टुल्लम टुल्ला गिल्ली डंडा, खेल रहे थे गद्दू| इसी बीच में ठीक सामने, निकल पड़े थे दद्दू|| गिल्ली लगी सामने कसकर, दद्दू का सिर फूटा| डर के मारे गद्दू जी का ,इधर पसीना छूटा|| मार पड़ेगी यही सोचकर, गद्दू घर से भागे| किंतु हाय तकदीर पड़ गये ,दादीजी के आगे|| दादी ने […] Read more » poem for kids
बच्चों का पन्ना बुखार की दवा December 1, 2012 / December 1, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment कुत्ता बोला,बिल्ली दीदी, मुझको चढ़ा बुखार| यदि हो सके संभव तो ,कोई दवा करो तैयार|| बिल्ली बोली ,भौंक भौंक कर, तुम होते बीमारा| बंद रखोगे मुँह तो होगी , बीमारी की हार|| यदि छोड़ दो पीछा करना,तुम निरीह लोगोंका| कुत्ता भाई निश्चित तुम पर ,कभी न ताप चढ़ेगा|| Read more » poem for kids
कविता बच्चों का पन्ना क्म्प्यूटर पर चिड़िया November 27, 2012 / November 26, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 1 Comment on क्म्प्यूटर पर चिड़िया बहुत देर से कम्प्यूटर पर, बैठी चिड़िया रानी| बड़े मजे से टाईप कर रही, थी कोई बड़ी कहानी|| तभी अचानक चिड़िया ने ,जब गर्दन जरा घुमाई| किंतु न जाने किस कारण,वह जोरों से चिल्लाई|| कौआ भाई फुदक फुदक कर,शीघ्र वहां पर आये| तुम्हें क्या हुआ बहिन चिरैया, कौआजी घबराये|| चिड़िया बोली पता […] Read more » क्म्प्यूटर पर चिड़िया
बच्चों का पन्ना आओ बनाए बच्चों को क्रेटिव October 25, 2012 / November 3, 2012 by परमजीत कौर कलेर | Leave a Comment बच्चे मन के सच्चे – बच्चे मन के सच्चे , सारे जग की आंख के तारे ये वो नन्हें फूल हैं जो भगवान को लगते प्यारे जी हां बच्चे तो हमेशा ही मन के सच्चे रहें हैं उन्हे कोई बल या छल नहीं आता… आप उन्हें जिस रंग में रंग देते हैं …वो उसी रंग […] Read more » आओ बनाए बच्चों को क्रेटिव बच्चों को क्रेटिव
बच्चों का पन्ना नहीं बूंद भर पानी October 20, 2012 / October 20, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment दादा कहते हाती डुब्बन, जल होता था नदियों में| कहीं कहीं तो मगरमच्छ का ,डर होता था नदियों में| डुबकी जब गहरे में लेते ,थाह नहीं मिल पाती थी| बड़े बड़े मेंढक कछुओं का, डर होता था नदियों में| बीच में गहरी चट्टानों के, फँस जाने का डर होता| खून से लथपथ तैराकों का, डर […] Read more » नहीं बूंद भर पानी
बच्चों का पन्ना कंधे पर नदी October 19, 2012 / October 19, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 2 Comments on कंधे पर नदी यदि हमारे बस में होता, नदी उठाकर घर ले आते| अपने घर के ठीक सामने, उसको हम हर रोज बहाते| कूद कूद कर उछल उछलकर, हम मित्रों के साथ नहाते| कभी तैरते कभी डूबते, इतराते गाते मस्ताते| “नदी आई है”आओ नहाने, आमंत्रित सबको करवाते| सभी उपस्थित भद्र जनों का, नदिया से परिचय करवाते| […] Read more » कंधे पर नदी
बच्चों का पन्ना बच्चे सरकार चलायेंगे October 19, 2012 / October 19, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment बच्चे सरकार चलायेंगे दिल्ली जाकर अब हम तो, अपनी सरकार बनायेंगे| भरत देश के बालक हैं हम, भारत देश चलायेंगे| जब अपनी सरकार बनेगी, ऐसा अलख जगायेंगे| भय और भूख मिटेगी पल मॆं, भ्रष्टाचार हटायेंगे| अब आतंकी सीमाओं से, भीतर न घुस पायेंगे| यदि घुसे चोरी चोरी तो, सारे मारे जायेंगे| स्वच्छ […] Read more »
बच्चों का पन्ना ये त्योहारों का मौसम है October 17, 2012 / October 17, 2012 by बीनू भटनागर | Leave a Comment ये त्योहारों का मौसम है गणपति वंदन और विसर्जन नव-रात्रि मे देवी पूजन, संसकृति संगीत धर्म का संगम, कंहीं बांगला साज़ बजेगा, रामलीला का मंचन होगा, कंहीं डाँडिया रास रचेगा। विजय दशमी की धूम मचेगी, बुराई की अंगार जलेगी, रावण के परिवार के पुतले, धूं धूं धूं धूं करके जलेंगे। सुहागने करवा चौथ करेंगी, मायें […] Read more » ये त्योहारों का मौसम है
बच्चों का पन्ना लौटे घर को गंगाराम October 11, 2012 / October 10, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment लौटे घर को गंगाराम एक साथ करके कई काम, लौटे घरको गंगाराम| बैंक गये रुपया निकलाया, राशन कार्ड जमा करवाया| बीमा के आफिस में जाकर, किश्तों का पैसा भरवाया| करके कई ,कई काम तमाम, लौटे घर को गंगाराम| जब भी घर से वे जाते हैं, कई काम करके आते हैं| राशन हल्दी धनिया […] Read more » poem for kids