धर्म-अध्यात्म पाप दूर करने का वैदिक साधन अघमर्षण के तीन मन्त्र व उनके अर्थ February 12, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य जाग्रत अवस्था में कोई न कोई कर्म अवश्य करता है। यह कर्म दो प्रकार के होते हैं जिन्हें शुभ व अशुभ अथवा पुण्य व पाप कह सकते हैं। मनुष्य का जन्म ही पूर्वजन्मों के शुभ व अशुभ कर्मों के फलों के भोग के लिए हुआ है। शुभ व सत् कर्मों का […] Read more » ‘पाप दूर करने का वैदिक साधन अघमर्षण के तीन मन्त्र व उनके अर्थ’ ‘पाप दूर करने के तीन मन्त्र व उनके अर्थ’
धर्म-अध्यात्म पृथिवी पर श्रेष्ठ धर्म वैदिक धर्म और श्रेष्ठ संगठन आर्यसमाज February 10, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य ईश्वर, जीवात्मा और प्रकृति का अस्तित्व सत्य है। किसी भी विषय में सत्य केवल एक ही होता है। जिस प्रकार दो व दो को जोड़ने से चार होता है, कुछ कम व अधिक नहीं हो सकता इसी प्रकार ईश्वर, जीव, प्रकृति, सृष्टि, धर्म, समाज, मानवीय आचार व विचार आदि सिद्धान्त व मान्यतायें […] Read more » पृथिवी पर श्रेष्ठ धर्म वैदिक धर्म श्रेष्ठ संगठन आर्यसमाज
धर्म-अध्यात्म ईश्वर का साक्षात्कार समाधि अवस्था में ही सम्भव February 9, 2016 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on ईश्वर का साक्षात्कार समाधि अवस्था में ही सम्भव संसार के अधिकांश मत-सम्प्रदाय और लोग ईश्वर के अस्तित्व को मानते हैं और यह भी स्वीकार करते हैं कि इस संसार को उसी ने बनाया है। यह बात अलग है कि सृष्टि रचना के बारे में वेद मत के आचार्यों व अनुयायियों के अतिरिक्त अन्य मत के आचार्यों व अनुयायियों को वैसा यथार्थ ज्ञान […] Read more » ईश्वर का साक्षात्कार समाधि अवस्था में ही सम्भव
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म समाज धर्म और हिन्दू संस्कृति के विभिन्न रूप February 9, 2016 / February 10, 2016 by डा. संतोष राय | 1 Comment on धर्म और हिन्दू संस्कृति के विभिन्न रूप संतोष राय धर्म का अनुवाद जब से Religion हुआ है तब से यही प्रचलित हो गया है की धर्म का अर्थ एक पूजा पद्धति से है अथवा किसी सम्प्रदाय से है जिसका मैं पूर्ण रूप से खंडन करता हूँ । धर्म एक संस्कृत शब्द है और धर्म का अर्थ तो बहुत व्यापक है और […] Read more » Featured धर्म हिन्दू संस्कृति के विभिन्न रूप
धर्म-अध्यात्म वैदिक ग्रंथों में प्रातःभ्रमण February 9, 2016 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” यह एक सर्वसिद्ध बात है कि आदि काल से ही प्रकृति और मानव में जन्मजातसाहचर्य रहा है और मानव प्रकृति की शस्य-श्यामल-गोद में जन्म लेता,पलता और उसी के विस्तृत प्रांगण में क्रीड़ा कर अंतर्लीन हो जाता है। मानव शरीर का निर्माण भी पाँच प्राकृतिक तत्त्वों – पृथ्वी (मिट्टी),जल,अग्नि,आकाश और वायु से हुआ है। […] Read more » Featured importance of morning walk as per vaidik granth morning walk
धर्म-अध्यात्म स्वर्ग व मोक्ष का यथार्थ स्वरूप February 8, 2016 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on स्वर्ग व मोक्ष का यथार्थ स्वरूप मनमोहन कुमार आर्य प्रायः सभी मतों के अनुयायी व विद्वान किसी न किसी रूप में स्वर्ग की चर्चा करते हैं और मानते हैं कि इस पृथिवी से अन्यत्र किसी स्थान विशेष पर ‘स्वर्ग’ है जहां ईश्वर की कृपा से मनुष्य जीवन में अच्छे व श्रेष्ठ काम करने वाले मनुष्य जाकर सुखपूर्वक निवास करते हैं। इस […] Read more » Featured स्वर्ग व मोक्ष का यथार्थ स्वरूप
धर्म-अध्यात्म सत्याचरण से अमृतमय मोक्ष की प्राप्ति मनुष्य जीवन का लक्ष्य February 6, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment हमारी जीवात्माओं को मनुष्य जीवन ईश्वर की देन है। ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान होने के साथ सर्वज्ञ भी है। उससे दान में मिली मानव जीवन रूपी सर्वोत्तम वस्तु का सदुपयोग कर हम उसकी कृपा व सहाय को प्राप्त कर सकते हैं और इसके विपरीत मानव शरीर का सदुपयोग न करने के कारण हमें नियन्ता ईश्वर […] Read more » Featured अमृतमय मोक्ष सत्याचरण से अमृतमय मोक्ष की प्राप्ति मनुष्य जीवन का लक्ष्य
धर्म-अध्यात्म विविधा रामकथा का विश्वजनित प्रभाव February 5, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधे श्याम द्विवेदी ’नवीन’ रामकथा श्रीराम की कहानी है जो आज से हजारों साल पहले त्रेता युग में भगवान विष्णु के अवतार के रूप में प्रकट हुआ है। संस्कृत भाषा में आदि कवि बाल्मीकि ने इसे मूल रूप से लिखा है। यह कथा ना केवल भारतीय भाषा में अपितु विश्व के हर प्रमुख भाषाओं […] Read more » Featured रामकथा रामकथा का विश्वजनित प्रभाव
धर्म-अध्यात्म मनुष्य मरने से क्यों डरता है? February 5, 2016 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on मनुष्य मरने से क्यों डरता है? मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य मरने से डरता क्यों है? यह प्रश्न इस लिए विचारणीय है कि हम सभी इस दुःख से यदा-कदा त्रस्त होते रहते हैं। कई बार मनुष्य को कोई रोग हो जाता है तो उसके मन में भय उत्पन्न होता है कि हो न हो, मैं जीवित रहूंगा या मर जाउगां? जब तक […] Read more » मनुष्य मरने से क्यों डरता है?
धर्म-अध्यात्म महर्षि दयानन्द ने वेदों का प्रचार और खण्डन-मण्डन क्यों किया? February 4, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द ने अपने वैदिक एवं यौगिक ज्ञान व तदनुरूप कार्यों से विश्व के धार्मिक व सामाजिक जगत में अपना सर्वोपरि स्थान बनाया है। उन्होंने सप्रमाण यह सिद्ध किया है कि ज्ञान-विज्ञान का स्रोत ईश्वर व वेद हैं। आर्यसमाज के दस नियमों में से उन्होंने पहला ही नियम बनाया कि सब सत्य […] Read more » Maharshi Dayanand
धर्म-अध्यात्म मनुष्य की चहुंमुखी उन्नति का आधार अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि February 2, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य के जीवन के दो यथार्थ हैं पहला कि उसका जन्म हुआ है और दूसरा कि उसकी मृत्यु अवश्य होगी। मनुष्य को जन्म कौन देता है? इसका सरल उत्तर यह है कि माता-पिता मनुष्य को जन्म देते हैं। यह उत्तर सत्य है परन्तु अपूर्ण भी है। माता-पिता तभी जन्म देते हैं जबकि […] Read more » अविद्या का नाश विद्या की वृद्धि
धर्म-अध्यात्म धर्म के अनुशासन बिना विज्ञान मानव जीवन के लिए अहितकारी February 2, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य आजकल विज्ञान की उन्नति ने सबको आश्चर्यान्वित कर रखा है। दिन प्रतिदिन नये नये बहुपयोगी उत्पाद हमारे ज्ञान व दृष्टि में आते रहते हैं। बहुत कम लोग जानते होंगे कि उनकी अनेक समस्ययाओं का कारण भी विज्ञान व इसका दुरुपयोग ही है। इसका सबसे मुख्य उदाहरण तो वायु, जल और पर्यावरण प्रदुषण […] Read more » धर्म के अनुशासन बिना विज्ञान मानव जीवन के लिए अहितकारी