धर्म-अध्यात्म परमात्मा मनुष्य का साथ कभी नहीं छोड़ता August 24, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य आर्य विद्वान अनूप सिंह जी ने 29 जून सन् 1994 को देहरादून में एक आर्यबन्धु श्री रामेश्वर प्रसाद आर्य के निवास पर एक पारिवारिक सत्संग में वैदिक प्रवचन करते हुए अपने विचार प्रस्तुत किये थे। इस आयोजन का संचालन करते हुए हमने उनके प्रवचन को यथाशक्ति नोट किया था। इस प्रवचन की […] Read more » परमात्मा परमात्मा मनुष्य का साथ कभी नहीं छोड़ता
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म श्रीकृष्ण हैं भारतीय संस्कृति के महानायक August 24, 2016 / August 24, 2016 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग सभ्यता और संस्कृति की विकास यात्रा का एक नाम है श्रीकृष्ण। वे हमारी संस्कृति के एक अद्भुत नायक हैं। उन्होंने मनुष्य जाति को नया जीवन-दर्शन दिया। जीने की शैली सिखलाई। उनकी जीवन-कथा चमत्कारों से भरी है, लेकिन वे हमें जितने करीब लगते हैं, उतना और कोई नहीं। वे ईश्वर हैं पर उससे भी […] Read more » Featured Shri krishan janmashtami जन्माष्टमी भारतीय संस्कृति के महानायक श्रीकृष्ण श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म विविधा अमरनाथ तीर्थ यात्रा पारंपरिक पूजा के साथ संपन्न August 23, 2016 / August 23, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी कैलाश पर्वत शिवजी का मुख्य समाधिस्थ होने का स्थान है और केदारनाथ विश्राम भवन है । हिमालय का कण-कण शिव-शंकर का ही स्थान है। केदारनाथ से आगे अमरनाथ है और उससे आगे है कैलाश पर्वत है । बाबा अमरनाथ को आजकल स्थानीय लोग के ‘बर्फानी बाबा’ कहते हैं। उन्हें बर्फानी बाबा इसलिए […] Read more » Amarnath tirth yatra Featured अमरनाथ तीर्थ यात्रा अमरनाथ यात्रा
धर्म-अध्यात्म संसार में किन व कौन सी मूल सत्ताओं का अस्तित्व हैं? August 22, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हमें जो मानव शरीर मिला है उसमें पांच ज्ञान इन्द्रियां और पांच कर्म इन्द्रियां हैं। इनके अतिरिक्त शरीर के भीतर स्थित मन, बुद्धि, चित्त व अहंकार अन्तःकरण चतुष्टय कहलता है। यह सभी अपना अपना काम पूरी कुशलता से करते हैं। किसी को इनके होने व कार्य करने में कोई शंका व भ्रान्ति […] Read more » god is omnipresent मूल सत्ताओं का अस्तित्व
धर्म-अध्यात्म एक विस्मृत वैदिक ऋषि-भक्त शास्त्रार्थ महारथीः पं. गणपति शर्मा August 18, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य प्राचीनकाल में धर्मिक विषयों में भ्रान्ति दूर करने वा सत्यासत्य के निर्णयार्थ शास्त्रार्थ किया जाता था। सृष्टि के आरम्भ से यह मान्यता चली आ रही प्रतीत होती है कि वेद ईश्वरीय ज्ञान होने के कारण सम्पूर्णतया सत्य विचारों, मान्यताओं एवं सिद्धान्तों के ग्रन्थ हैं और वेदानुकूल सभी शास्त्रों की बातें भी स्वीकार्य, […] Read more » पं. गणपति शर्मा
धर्म-अध्यात्म वेदस्रोत से मानवीयमूल्य August 14, 2016 by शिवदेव आर्य | Leave a Comment शिवदेव आर्य सुख शान्तिमय जीवन यात्रा तथा परमानन्द के लिए परमपिता परमेश्वर ने सृष्टि के प्रारम्भ में वेदज्ञान की ज्योति प्रदान की, जिसके आलोक में जीवन श्रेय एवं प्रेयमार्ग पर सुचारूतया संचारित होता है। वेद प्रतिपादित जीवनपद्धति ही नैतिकता का सर्वोच्च आदर्श है। इन उच्चतम जीवनमूल्यों का वैदिक वाङ्मय एवं परवत्र्ती भारतीय साहित्य में […] Read more » human values from vedas मानवीयमूल्य वेदस्रोत वेदस्रोत से मानवीयमूल्य
धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज का सदस्य बनने से जीवन की उन्नति व अनेकानेक लाभ August 10, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य ईश्वर इस सृष्टि का रचयिता व पालक है। मनुष्य व अन्य सभी प्राणियों को जन्म देने वाला भी वह ईश्वर ही है। मनुष्य का जन्म माता-पिता से एक शिशु के रूप में होता है। जन्म व उसके बाद लम्बी अवधि तक यह नवजात शिशु न बोल पाता है, न चल-फिर पाता है […] Read more » आर्यसमाज का सदस्य जीवन की उन्नति
धर्म-अध्यात्म आघुनिक काल में सभी मतों का अन्धविश्वास-ग्रस्त होना और उन्हें दूर करने में उदासीन होना महान आश्चर्य August 5, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्यों की समस्त जनसंख्या इस भूगोल के प्रायः सभी व अनेक भागों में बस्ती है। सारी जनसंख्या आस्तिक व नास्तिक दो मतों व विचारधाराओं में बटी हैं। बहुत से लोग ऐसे हैं जो ईश्वर व जीवात्मा के अस्तित्व को न तो जानते हैं और मानते हैं। वह खुल कर कहते हैं कि […] Read more » सभी मतों का अन्धविश्वास-ग्रस्त
धर्म-अध्यात्म भारत में नागपूजन की परम्परा August 5, 2016 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment -अशोक “प्रवृद्ध” वैदिक ग्रन्थों के अनुसार आदि सनातन काल में एकेश्वरवाद अर्थात एकमात्र परमात्मा के अस्तित्व पर मनुष्यों का पूर्णतः विश्वास था , परन्तु बाद में मनुष्यों का वेद और वैदिक ग्रन्थों से दुराव के कारण संसार में अनेक देवी- देवताओं का पूजन- अर्चना किये जाने अर्थात बहुदेववाद की परिपाटी प्रचलन में आ गई । […] Read more » Featured नागपूजन की परम्परा भारत भारत में नागपूजन
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द की दो मुख्य देन सत्यार्थ प्रकाश और आर्यसमाज August 5, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर् ऋषि दयानन्द महाभारतकाल के बाद उत्पन्न महापुरुषों में सत्यज्ञान व उसके प्रचार व प्रसार के कार्यों को करने वाले विश्व के सर्वोत्तम महापुरुष हैं। उनसे पूर्व इन कार्यों को करने वाला अन्य महापुरुष विश्व इतिहास में दृष्टिगोचर नहीं होता। महाभारत काल से पूर्व विश्व में सर्वत्र वेदों का प्रचार व प्रसार था, […] Read more » आर्यसमाज ऋषि दयानन्द की देन सत्यार्थ-प्रकाश
धर्म-अध्यात्म मूर्तिपूजा और जन्मना जाति प्रथा ईश्वरीय ज्ञान वेद के विरुद्ध और हिन्दू समाज के लिए हानिकारक August 3, 2016 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on मूर्तिपूजा और जन्मना जाति प्रथा ईश्वरीय ज्ञान वेद के विरुद्ध और हिन्दू समाज के लिए हानिकारक मनमोहन कुमार आर्य मूर्तिपूजा से तात्पर्य ईश्वर की वैदिक शास्त्रों के अनुसार पूजा, ध्यान व स्तुति-प्रार्थना-उपासना न कर एक कल्पित पाषाण व धातु आदि की मूर्ति बना कर उसमें रूढ़ किये गये वैदिक व कुछ संस्कृत श्लोकों से प्राण-प्रतिष्ठा की कल्पना कर उसके आगे माथा टेकना, शिर झुकाना, भजन-कीर्तन करना, मूर्ति को मिष्ठान्न आदि का […] Read more » जन्मना जाति प्रथा ईश्वरीय ज्ञान वेद के विरुद्ध मूर्तिपूजा हिन्दू समाज के लिए हानिकारक
धर्म-अध्यात्म मैं कर्म-बन्धन में फंसा एक चेतन अनादि व अविनाशी जीवात्मा हूं August 2, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य हम परस्पर जब किसी से मिलते हैं तो परिचय रूप में अपना नाम व अपनी शैक्षिक योग्यता सहित अपने कार्य व व्यवसाय आदि के बारे में अपरिचित व्यक्ति को बताते हैं। हमारा यह परिचय होता तो ठीक है परन्तु इसके अलावा भी हम जो हैं वह एक दूसरे को पता नहीं चल […] Read more » जीवात्मा