धर्म-अध्यात्म मनुष्य मरने से क्यों डरता है? February 5, 2016 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on मनुष्य मरने से क्यों डरता है? मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य मरने से डरता क्यों है? यह प्रश्न इस लिए विचारणीय है कि हम सभी इस दुःख से यदा-कदा त्रस्त होते रहते हैं। कई बार मनुष्य को कोई रोग हो जाता है तो उसके मन में भय उत्पन्न होता है कि हो न हो, मैं जीवित रहूंगा या मर जाउगां? जब तक […] Read more » मनुष्य मरने से क्यों डरता है?
धर्म-अध्यात्म महर्षि दयानन्द ने वेदों का प्रचार और खण्डन-मण्डन क्यों किया? February 4, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द ने अपने वैदिक एवं यौगिक ज्ञान व तदनुरूप कार्यों से विश्व के धार्मिक व सामाजिक जगत में अपना सर्वोपरि स्थान बनाया है। उन्होंने सप्रमाण यह सिद्ध किया है कि ज्ञान-विज्ञान का स्रोत ईश्वर व वेद हैं। आर्यसमाज के दस नियमों में से उन्होंने पहला ही नियम बनाया कि सब सत्य […] Read more » Maharshi Dayanand
धर्म-अध्यात्म मनुष्य की चहुंमुखी उन्नति का आधार अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि February 2, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य के जीवन के दो यथार्थ हैं पहला कि उसका जन्म हुआ है और दूसरा कि उसकी मृत्यु अवश्य होगी। मनुष्य को जन्म कौन देता है? इसका सरल उत्तर यह है कि माता-पिता मनुष्य को जन्म देते हैं। यह उत्तर सत्य है परन्तु अपूर्ण भी है। माता-पिता तभी जन्म देते हैं जबकि […] Read more » अविद्या का नाश विद्या की वृद्धि
धर्म-अध्यात्म धर्म के अनुशासन बिना विज्ञान मानव जीवन के लिए अहितकारी February 2, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य आजकल विज्ञान की उन्नति ने सबको आश्चर्यान्वित कर रखा है। दिन प्रतिदिन नये नये बहुपयोगी उत्पाद हमारे ज्ञान व दृष्टि में आते रहते हैं। बहुत कम लोग जानते होंगे कि उनकी अनेक समस्ययाओं का कारण भी विज्ञान व इसका दुरुपयोग ही है। इसका सबसे मुख्य उदाहरण तो वायु, जल और पर्यावरण प्रदुषण […] Read more » धर्म के अनुशासन बिना विज्ञान मानव जीवन के लिए अहितकारी
धर्म-अध्यात्म वेद सार्वभौमिक मानव धर्म के अधिकारिक प्रतिनिधि व आदिस्रोत February 1, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य संसार के सभी मनुष्यों वा स्त्री-पुरुषों पर ध्यान केन्द्रित करें तो यह सभी एक बहुत ही बुद्धिमान व सर्वव्यापी कलाकार की रचनायें अनुभव होती हैं। संसार भर में सभी मनुष्य की दो आंखे, दो कान, नाक, मुंह, गला, शिर, वक्ष, उदर, कटि व पैर प्रायः एक समान ही हैं। सभी मनुष्यों का […] Read more » वेद सार्वभौमिक मानव धर्म के अधिकारिक प्रतिनिधि व आदिस्रोत
धर्म-अध्यात्म जीवात्मा वा मनुष्य की मृत्यु और परलोक February 1, 2016 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on जीवात्मा वा मनुष्य की मृत्यु और परलोक मनमोहन कुमार आर्य महाभारत के एक अंग भगवद्-गीता के दूसरे अध्याय में जन्म व मृत्यु विषयक वैदिक सिद्धान्त को बहुत सरल व स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया गया है। गीता के इस अध्याय में कुछ प्रसिद्ध श्लोकों में से 3 श्लोक प्रस्तुत हैं। यह तीन श्लोक गीता के दूसरे अध्याय में क्रमांक 22, 23 […] Read more » ‘जीवात्मा वा मनुष्य की मृत्यु और परलोक’
धर्म-अध्यात्म स्वामी दयानन्द प्राचीन ऋषियों की परम्परा वाले सच्चे ऋषि,संसार के सर्वोच्च गुरु एवं अपूर्व वेद-धर्म प्रचारक हैं February 1, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य हमारे लेख के शीर्षक से आर्यसमाज के अनुयायी तो प्रायः सभी सहमत होंगे परन्तु इतर बन्धु इस तथ्य को स्वीकार करने में संकोच कर सकते हैं। अतः अपने ऐसे बन्धुओं से हम प्रश्न करते हैं कि वह महर्षि दयानन्द से अधिक प्रतिभावान व योग्य ऋषि का नाम बतायें? दूसरा प्रश्न यह है […] Read more » स्वामी दयानन्द
धर्म-अध्यात्म मनुष्य और अनेक प्राणी योनियों में जीवात्माओं के जन्म का कारण January 27, 2016 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on मनुष्य और अनेक प्राणी योनियों में जीवात्माओं के जन्म का कारण मनमोहन कुमार आर्य यदि हम अतीत की बातें छोड़कर वर्तमान संसार में विद्यमान मनुष्यादि अनेक प्राणी योनियों में जीवात्माओं के जन्म पर विचार करें तो हम देखते हैं कि सभी प्राणियों में जन्म व मृत्यु का सिद्धान्त काम कर रहा है। हमसे पहले व बाद में जन्में अनेक मनुष्य और अन्य प्राणियों को हमने समय […] Read more » Featured जीवात्माओं के जन्म का कारण मनुष्य और अनेक प्राणी योनियों में जीवात्माओं के जन्म का कारण
धर्म-अध्यात्म ईश्वर का ध्यान व उपासना तथा मूर्तिपूजा January 26, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment ईश्वर व मनुष्य में क्या अन्तर है? यह प्रश्न आपको अनुपयुक्त सा लग सकता है परन्तु प्रश्न तो प्रश्न है। हम इसका उत्तर देने का प्रयास करते हैं। ईश्वर वह है जो जीवात्माओं के सुख व दुःखों के भोग के लिए सत्व, रज व तम गुण से युक्त सूक्ष्म जड़ प्रकृति के द्वारा इस दृश्यमान […] Read more » ईश्वर का ध्यान व उपासना मूर्तिपूजा
धर्म-अध्यात्म ईश्वर को जानना और उसकी स्तुति करना आवश्यक क्यों है? January 26, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य हम सभी मनुष्य जीवात्मायें हैं जिन्हें ईश्वर की कृपा से मानव शरीर मिला है। जीवात्मा के दो प्रमुख गुण है। पहला गुण इसका ज्ञान की क्षमता से युक्त होना है और दूसरा अपने ज्ञान के अनुरूप सत्यासत्य कर्मों में प्रवृत्त रहना है। अतः जहां ज्ञान व कर्म दोनों गुणों की अभिव्यक्ति हो […] Read more » ईश्वर को जानना और उसकी स्तुति करना आवश्यक क्यों है?
धर्म-अध्यात्म वेद आर्यसमाज और गणतन्त्र प्रणाली January 26, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment भारत का इतिहास उतना ही पुराना है जितना की इस सृष्टि के बनने के बाद प्राणी जगत व मानव उत्पत्ति के बाद का सृष्टि का इतिहास। सभी मनुष्यों को नियम में रखने व सभी श्रेष्ठ आचरण करने वाले मनुष्यों को अच्छा भयमुक्त व सद्ज्ञानपूर्ण वैदिक परम्पराओं के अनुरुप वातावरण देने के लिए एक आदर्श राजव्यवव्स्था […] Read more » गणतन्त्र प्रणाली वेद आर्यसमाज वेद आर्यसमाज और गणतन्त्र प्रणाली
धर्म-अध्यात्म वैदिक ग्रंथों में भारतीय राष्ट्र की कल्याण कामना January 26, 2016 / January 26, 2016 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” पुरातन भारतीय परम्परानुसार जिस प्रकार एक जीवात्मा का निवास एक शरीर में होता है और परमात्मा का निवास इस विशाल ब्रह्मांड में है, ठीक उसी प्रकार देश एक शरीर है तो राष्ट्र उसकी आत्मा है। देश भौतिक तत्व है, दृश्यमान है, स्थूल है, दृश्य अर्थात दिखता है, जबकि राष्ट्र अदृश्य है, सूक्ष्म है, […] Read more » वैदिक ग्रंथों में भारतीय राष्ट्र की कल्याण कामना