धर्म-अध्यात्म ईश्वर सबको हर क्षण देखता है और सभी कर्मों का यथोचित फल देता है December 20, 2015 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on ईश्वर सबको हर क्षण देखता है और सभी कर्मों का यथोचित फल देता है मनमोहन कुमार आर्य बहुत से अज्ञानियों के लिए यह संसार एक पहेली है। संसार की जनसंख्या लगभग 7 अरब बताई जाती है परन्तु इनमें से अधिकांश लोगों को न तो अपने स्वरुप का और न हि अपने जीवन के उद्देश्य व लक्ष्य का ज्ञान है। उन्हें इस संसार को बनाने वाले व हमें व अन्य […] Read more » Featured ईश्वर सबको हर क्षण देखता है सभी कर्मों का यथोचित फल देता है
धर्म-अध्यात्म महर्षि दयानन्द और आर्यसमाज के दलितोद्धार कार्य December 18, 2015 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on महर्षि दयानन्द और आर्यसमाज के दलितोद्धार कार्य महर्षि दयानन्द और आर्यसमाज के दलितोद्धार कार्यों पर स्वामी वेदानन्द तीर्थ जी का प्रेरणादायक उपदेश सृष्टि के आरम्भ से महाभारत काल तक सभी वैदिक सनातनधर्मी स्वयं आर्य कहलाने में गौरव का अनुभव करते थे। तब तक हिन्दुओं शब्द का अस्तित्व भी संसार में नहीं था। मुस्लिम आक्रमणकारियों के भारत आने पर यह शब्द […] Read more » आर्यसमाज दलितोद्धार कार्य महर्षि दयानन्
धर्म-अध्यात्म मर्यादा पुरुषोत्तम राम का विश्व के महापुरुषों में सर्वोत्तम स्मरणीय चरित्र December 18, 2015 / December 18, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य यदि किसी मनुष्य को धर्म का साक्षात् स्वरुप देखना हो तो उसे वाल्मीकि रामायण का अध्ययन करना चाहिये। श्री राम का चरित्र वस्तुतः आदर्श धर्मात्मा का जीवन चरित्र है। महर्षि दयानन्द ने आर्यसमाज की स्थापना करके वस्तुतः श्री रामचन्द्र जी के काल में प्रचलित धर्म व संस्कृति को ही प्रचारित व प्रसारित […] Read more » Featured मर्यादा पुरुषोत्तम राम मर्यादा पुरुषोत्तम राम का विश्व के महापुरुषों में सर्वोत्तम स्मरणीय चरित्र
धर्म-अध्यात्म आर्य जाति नहीं गुण सूचक शब्द है। December 17, 2015 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on आर्य जाति नहीं गुण सूचक शब्द है। सृष्टि के आदि काल व उसके बाद के समय में आर्य, दास तथा दस्यु आदि कोई मुनष्यों की जातियां नहीं थीं, और न ही इनके बीच हुए किसी युद्ध व युद्धों का वर्णन वेदों में है। वेद में आर्य आदि शब्द गुणवाचक हैं, जातिवाचक नहीं। जाति तो संसार के सभी मनुष्यों की एक है और […] Read more » Featured आर्य जाति नहीं गुण सूचक शब्द है।
धर्म-अध्यात्म समाज प्रगति का सूचक है बुद्धिवाद December 15, 2015 / December 15, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | 1 Comment on प्रगति का सूचक है बुद्धिवाद अशोक “प्रवृद्ध” मजहब और धर्म भिन्न-भिन्न हैं । धर्म का सम्बन्ध व्यक्ति के आचरण से होता है और मजहब कुछ रहन-सहन के विधि-विधानों और कुछ श्रद्धा से स्वीकार की गई मान्यताओं का नाम है ।आचरण में भी जब बुद्धि का बहिष्कार कर केवल श्रद्धा के अधीन स्वीकार किया जाता है तो यह मजहब ही […] Read more » Featured प्रगति का सूचक बुद्धिवाद
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म एक देव में त्रिदेव भगवान दत्तात्रेय December 14, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | 1 Comment on एक देव में त्रिदेव भगवान दत्तात्रेय अशोक “प्रवृद्ध” पौराणिक मान्यतानुसार एक देव में त्रिदेव कहे जाने वाले भगवान के चौबीस अवतारों में छठा अवतार हैं भगवान दत्तात्रेय। सप्तऋषि मंडल के तेजोदीप्त तारों में दमकने वाले एकमात्र युगल सती-अनसूया और महर्षि अत्रि के पुत्र दत्तात्रेय में ईश्वर और गुरु दोनों रूप समाहित हैं इसीलिए उन्हें परब्रह्ममूर्ति सद्गुरु और श्रीगुरुदेवदत्त भी कहा […] Read more » Featured एक देव में त्रिदेव एक देव में त्रिदेव भगवान दत्तात्रेय भगवान दत्तात्रेय
धर्म-अध्यात्म पुराणों के अग्राह्य विधानों पर स्वामी दयानन्द व स्वामी वेदानन्द के उपदेश December 14, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य का जीवन सत्य व असत्य को जानकर सत्य का पालन व आचरण करने तथा असत्य का त्याग करने का नाम है। परमात्मा ने मनुष्यों को वेदों का ज्ञान व बुद्धि सत्यासत्य के निर्णयार्थ वा विवेक के लिए ही दी है जिसका सभी को सदुपयोग करना चाहिये। जो नहीं करता वह मनुष्य […] Read more » Featured पुराणों के अग्राह्य विधानों पर स्वामी दयानन्द स्वामी वेदानन्द के उपदेश
धर्म-अध्यात्म शख्सियत पंडित सत्यानन्द शास्त्री का परिचय और उनकी साहित्य साधना December 13, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment एक दिन प्रा. राजेन्द्र जिज्ञासु जी की मेहता जैमिनी पर पुस्तक में स्वामी वेदानन्द तीर्थ जी पर कुछ शब्द पढ़े जिसमें कहा गया था कि आर्य संन्यासी विज्ञानानन्द जी ने उनसे एक बार स्वामी वेदानन्द जी का जीवनचरित लिखने का आग्रह किया था। वह भी इसे तैयार करना चाहते थे परन्तु अपनी व्यस्तताओं के कारण […] Read more » ‘पंडित सत्यानन्द शास्त्री साहित्य साधना
धर्म-अध्यात्म संसार के सभी मनुष्यों के पूर्वज एक थे व वैदिक धर्मानुयायी थे December 13, 2015 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on संसार के सभी मनुष्यों के पूर्वज एक थे व वैदिक धर्मानुयायी थे मनमोहन कुमार आर्य सृष्टि का यह अनिवार्य नियम है कि इसमें मनुष्य की उत्पत्ति वा जन्म माता-पिताओं से ही होता है। माता-पिता के बिना शिशु रूप में मनुष्य का जन्म असम्भव है। अतः इससे यह सिद्ध होता है मनुष्य के माता-पिता अवश्य होते हैं। इस सिद्धान्त के आधार पर मनुष्य के पूर्वज सृष्टि के आरम्भ […] Read more » Featured वैदिक धर्मानुयायी संसार के सभी मनुष्यों के पूर्वज एक थे
धर्म-अध्यात्म कैकेय नरेश महाराज अश्वपति की सार्वजनिक घोषणा December 11, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment प्राचीन भारत का स्वर्णिम आदर्श इतिहास- मनमोहन कुमार आर्य भारत विगत लगभग पौने दो अरब वर्षों से अधिक तक वैदिक धर्म व वैदिक संस्कृति का अनुयायी रहा है। भारत वा आर्यावर्त्त का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितना कि यह ब्रह्माण्ड। सृष्टि की आदि, लगभग 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख, 53 हजार वर्ष, से […] Read more » कैकेय नरेश महाराज अश्वपति की सार्वजनिक घोषणा’
धर्म-अध्यात्म शख्सियत पं. गणपति शर्मा का वैदिक धर्म December 10, 2015 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on पं. गणपति शर्मा का वैदिक धर्म पं. गणपति शर्मा का वैदिक धर्म व महर्षि दयानन्द के प्रति श्रद्धा से पूर्ण प्रेरणादायक जीवन प्राचीनकाल में धर्म विषयक सत्य-असत्य के निणर्यार्थ शास्त्रार्थ किया जाता था। अद्वैतमत के प्रचारक स्वामी शंकराचार्य के बाद विलुप्त हुई इस प्रथा का उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में महर्षि दयानन्द ने पुनः प्रचलित किया। इसी शास्त्रार्थ परम्परा को पं. […] Read more » Featured पं. गणपति शर्मा का वैदिक धर्म
धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज की स्थापना और इसके नियमों पर एक दृष्टि December 9, 2015 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on आर्यसमाज की स्थापना और इसके नियमों पर एक दृष्टि मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द सरस्वती (1825-1883) उन्नीसवीं शताब्दी के समाज व धर्म-मत सुधारकों में अग्रणीय महापुरुष हैं। उन्होंने 10 अप्रैल सन् 1875 ई. (चैत्र शुक्ला 5 शनिवार सम्वत् 1932 विक्रमी) को मुम्बई में आर्यसमाज की स्थापना की थी। इससे पूर्व उन्होंने 6 या 7 सितम्बर, 1872 को वर्तमान बिहार प्रदेश के ‘आरा’ स्थान पर […] Read more » आर्यसमाज की स्थापना