धर्म-अध्यात्म मनुष्य की उन्नति के सार्वभौमिक 10 स्वर्णिम सिद्धान्त व मान्यतायें November 27, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनुष्य जीवन ईश्वर की जीवात्मा को अनमोल देन है। सभी मनुष्यों का कर्तव्य है कि वह इस संसार व प्राणीमात्र के बनाने व पालन करने वाले ईश्वर को जानें और साथ हि अपने कर्तव्य को जानकर उसका निर्वाह करें। हम आगामी पंक्तियों में इस विषय का उल्लेख करेंगे जिसको पूर्णतया जानकर व उनका पालन करने […] Read more » 10 स्वर्णिम सिद्धान्त व मान्यतायें Featured मनुष्य की उन्नति
जन-जागरण धर्म-अध्यात्म विज्ञान विविधा सही क्या? 84 लाख योनियां या डार्विन का विकासवाद November 27, 2015 / November 27, 2015 by राहुल खटे | Leave a Comment राहुल खटे आज के वैज्ञानिक युग में सभी डार्विन के विकासवाद से परिचित हैं| डार्विन ने अपने विकासवादी विचारधारा से यह सिद्ध करने की कोशिश की है कि विकास की बहुत बड़ी यात्रा को तय करके ही आज हम वैज्ञानिक या कंप्यूटर के युग में पहुँचे हैं| विकासवाद के सभी लक्षण आधुनिक मनुष्य में दिखाई […] Read more » 84 लाख योनियां Featured डार्विन का विकासवाद विकासवाद
धर्म-अध्यात्म मनुष्य में संस्कार व गुणों का आधान ही समाज कल्याण है November 26, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment स्वामी वेदानन्द तीर्थ (1892-1956) वेदों के शीर्षस्थ विद्वान थे। उन्होंने जो साहित्य़ सृजित किया, वह मनुष्य की उन्नति के लिए लाभकारी एवं उपादेय है। मनुष्य को शिक्षित, संस्कारित व गुणों से आपूरित करना ही उसको धार्मिक बनाना है। यदि मनुष्य विद्या व ज्ञान से युक्त नहीं होगा तो वह धर्म से विरत व पृथक […] Read more » समाज कल्याण
धर्म-अध्यात्म दया के सागर महर्षि दयानन्द November 26, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द के जीवन में अन्य अनेक गुणों के साथ ‘दया’ नाम का गुण असाधारण रूप में विद्यमान था। उनमें विद्यमान इस गुण ‘दया’ से सम्बन्धित कुछ उदाहरणों को आर्यजगत के महान संन्यासी और ऋषिभक्त स्वामी वेदानन्द तीर्थ ने अपनी बहुत ही प्रभावशाली व मार्मिक भाषा में प्रस्तुत किया है। पाठकों को […] Read more » दया के सागर महर्षि दयानन्द
धर्म-अध्यात्म महान संत गुरूनानक November 25, 2015 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment 25 नवम्बर पर विशेष:- मृत्युंजय दीक्षित सिख समाज के महान संत व गुरू नानक का जन्म 1469 ई में रावी नदी के किनारे स्थित रायभुएकी तलवंडी में हुआ था जो अब ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है। अब यह पश्चिमी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है।इनके पिता मेहता कालू गांव के […] Read more » Featured गुरूनानक महान संत गुरूनानक
धर्म-अध्यात्म भगवान परशुराम की प्रासंगिकता November 25, 2015 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी भगवान ब्रहमा भगवान रूद्र के वारूणी तथा अग्नि के तेजोमय यज्ञानुष्ठन से इस गौरवशाली वंश का अस्तित्च इस भूमण्डल पर प्रकट हुआ है। महर्षि भृगु इस वंश के आदि संस्थापक थे। बाद में महर्षि च्यवन ,और्व ,ऋचीक, जमदग्नि एवं परशुराम ने अपनी त्याग तपस्या तथा वैदिक संस्कारों से इसे पुष्पित पल्लवित और […] Read more » Featured भगवान परशुराम भगवान परशुराम की प्रासंगिकता
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म पारसी धर्मः आर्य धर्म से अनुप्राणित November 25, 2015 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी पारसी या फारसी धर्म के प्र्रवर्तक या पैगम्बर का नाम जरथुस्त्र या जोरास्टर था। यह धर्म फारस या प्राचीन ईरान में आर्यों के वैदिक धर्म से अनुप्राणित होकर निकला है। परम्परागत रुप में इसका समय 6000 ई.पू. कहा जाता है। इतिहास में सिकन्दर की विजय ( 330 ई.पू.) से 258 साल पहले […] Read more » Featured आर्य धर्म से अनुप्राणित पारसी धर्म
धर्म-अध्यात्म ईश्वर व जीवात्मा का यथार्थ उपदेश देने से महर्षि दयानन्द विश्वगुरु हैं November 25, 2015 / November 25, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment यह संसार वैज्ञानिकों के लिए आज भी एक अनबुझी पहेली ही है। आज भी वैज्ञानिक इस सृष्टि के स्रष्टा की वास्तविक सत्ता व स्वरुप से अपरिचित हैं। यदि उन्होंने महर्षि दयानन्द सरस्वती की तरह वेदों की शरण ली होती तो वह इस रहस्य को जान सकते थे। आज का संसार दोहरे मापदण्डों वाला संसार […] Read more » ईश्वर व जीवात्मा का यथार्थ उपदेश महर्षि दयानन्द महर्षि दयानन्द विश्वगुरु हैं
धर्म-अध्यात्म सच्ची गुरुता के सर्वोच्च प्रतीक गुरु नानक November 25, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधु आदि गुणों के पर्याय युगांतकारी युगदृष्टा मानवतावादी गुरू नानक सिखों के प्रथम गुरु अर्थात आदि गुरु थे, जिन्हें उनके अनुयायियों द्वारा गुरु नानक, गुरु नानक देव जी, बाबा नानक और नानकशाह आदि नामों से स्मृत और संबोधित किया जाता है ।विभिन्न आध्यात्मिक दृष्टिकोणों के […] Read more » Featured गुरु नानक सच्ची गुरुता के सर्वोच्च प्रतीक
धर्म-अध्यात्म मुक्त दयानन्द मोक्ष में आर्यसमाज की दुर्दशा से दुःखी व संतप्त November 23, 2015 / November 23, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment महर्षि दयानन्द का अजमेर में दीपावली, सन् 1883 को देहावसान हुआ था। वेद एवं वैदिक साहित्य का अध्ययन करने के बाद हमें पूरी सम्भावना लगती है कि उन्हें ईश्वर की कृपा से मोक्ष प्राप्त हुआ होगा। यदि किसी विद्वान को इसमें संशय हो कि महर्षि दयानन्द जी को मोक्ष नहीं मिला होगा, तो हमें लगता […] Read more » Featured आर्यसमाज की दुर्दशा से दुःखी मुक्त दयानन्द मोक्ष
धर्म-अध्यात्म महर्षि दयानन्द प्रोक्त वेद सम्मत ब्राह्मण वर्ण के गुण-कर्म-स्वभाव November 22, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment वैदिक वर्ण व्यवस्था के सन्दर्भ में यह जड़-चेतन संसार ईश्वर से उत्पन्न हुआ है। ईश्वर, जीवात्मायें और प्रकृति, तीन नित्य सत्तायें हैं जिनमें ईश्वर व जीवात्मा चेतन एवं प्रकृति जड़ पदार्थ हैं। ईश्वर व जीवात्मा संवेदनाओं से युक्त व प्रकृति संवेदनारहित है। जीवात्माओं के पूर्व जन्म में अर्जित प्रारब्ध वा कर्मों के फलों एवं सुख-दुःख […] Read more » ब्राह्मण वर्ण के गुण-कर्म-स्वभाव महर्षि दयानन्द
धर्म-अध्यात्म ईश्वर प्रदत्त ज्ञान वेद सरल च सुबोध हैं November 22, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य सृष्टि के आदि में मनुष्यों को ज्ञानयुक्त करने के लिए सर्वव्यापक निराकार ईश्वर ने चार आदि ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य व अंगिरा को क्रमशः ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद का ज्ञान दिया था। महर्षि दयानन्द की घोषणा है कि यह चार वेद सब सत्य विद्याओं की पुस्तकें हैं और इनका पढ़़ना, दूसरों […] Read more » Featured ईश्वर प्रदत्त ज्ञान वेद सरल च सुबोध हैं