धर्म-अध्यात्म महाभारत-३ October 17, 2014 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment संजय भी जल्दी हार माननेवाला कहां था। वह ज्ञानी भले ही न हो, जानकार तो था ही। सामान्य जन ज्ञान और जानकारी को एक ही मानते हैं। सत्य और असत्य को पहचानना उतना कठिन नहीं है, जितना ज्ञान और जानकारी में अन्तर समझना। ज्ञान प्राप्त होने के बाद मनुष्य मौन हो जाता है। उसकी […] Read more » महाभारत
धर्म-अध्यात्म धर्मस्थलों का काम वातावरण को स्वच्छ बनाना,प्रदूषित करना नहीं? October 17, 2014 / October 17, 2014 by निर्मल रानी | 3 Comments on धर्मस्थलों का काम वातावरण को स्वच्छ बनाना,प्रदूषित करना नहीं? निर्मल रानी जनता दल युनाईटेड के अध्यक्ष शरद यादव ने पिछले दिनों अपने एक बयान में कहा कि सभी धर्मस्थानों से लाऊडस्पीकर हटा दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु लोग स्वेच्छा से धर्म स्थलों को जा सकते हैं उन्हें बुलाने की कोई आवश्यकता नहीं है। यादव ने कहा कि धर्मस्थलों पर लाऊडस्पीकर के इस्तेमाल […] Read more » धर्मस्थलों का काम
धर्म-अध्यात्म महाभारत-२ October 15, 2014 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment युधिष्ठिर के धार्मिक एवं शान्तिप्रिय स्वभाव को लक्ष्य करके ही धृतराष्ट्र ने ऐसा संदेश भिजवाया था। मनुष्य जो भी करता है उसे उचित ठहराने की कोशिश अवश्य करता है। इसके लिये वह कभी धर्म का तर्क देता है, कभी सत्य का, कभी परंपरा का, कभी सिद्धान्त का, तो कभी नैतिकता का। वाकपटु मनुष्य असत्य […] Read more » महाभारत
धर्म-अध्यात्म महाभारत-१ October 14, 2014 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment महाभारत की रचना महर्षि वेद व्यास ने की। यह भारत का सर्वाधिक प्रचलित ग्रन्थ है जिसमें वह सबकुछ है जो इस लोक में घटित हुआ है, हो रहा है और होनेवाला है। यह हमें अनायास ही युगों-युगों से चले आ रहे उस संघर्ष की याद दिलाता है जो मानव हृदय को आज भी उद्वेलित कर […] Read more » महाभारत
धर्म-अध्यात्म श्रीराम के विषय मे उठाने वाले प्रश्नो के उत्तर October 7, 2014 / October 7, 2014 by संजय कुमार (कुरुक्षेत्र) | 2 Comments on श्रीराम के विषय मे उठाने वाले प्रश्नो के उत्तर संजय कुमार श्रीराम जी पर लगाए जाने आरोप कितने सही हैं? क्या श्रीराम जी शूद्र विरोधी थे? क्या उन्होने शंबूक का वध किया था ? क्या उन्होने गर्भवती सीता को छोड़ दिया था? क्या उनका या उनके भाइयों का लवकुश से युद्ध हुआ था? क्या सीता जी धरती मे समा गई थी? इसके अतिरिक्त अन्य […] Read more »
चिंतन हांफती जिंदगी और त्योहार…!! October 1, 2014 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा काल व परिस्थिति के लिहाज से एक ही अवसर किस तरह विपरीत रुप धारण कर सकता है, इसका जीवंत उदाहरण हमारे तीज – त्योहार हैं। बचपन में त्योहारी आवश्यकताओं की न्यूनतम उपलब्धता सुनिश्चित न होते हुए भी दुर्गापूजा व दीपावली जैसे बड़े त्योहारों की पद्चाप हमारे अंदर अपूर्व हर्ष व उत्साह भर देती […] Read more » हांफती जिंदगी और त्योहार
धर्म-अध्यात्म जब औघड़-श्राप से मुक्त हुआ था काशी- राजघराना September 14, 2014 by नीरज वर्मा | 1 Comment on जब औघड़-श्राप से मुक्त हुआ था काशी- राजघराना अघोर-परम्परा का उदगम, सृष्टि के निर्माण से ही है ! कहा जाता है कि भगवान शिव इस दुनिया के पहले अघोरी थे ! उत्तर-भारत में भगवान शिव को औघड़-दानी कहने का चलन बरसों पुराना है ! किसी भी समय-काल में , विधाता की सम्पूर्ण शक्ति को समाहित किये, इस पृथ्वी पर हमेशा एक अघोरी मानव-तन […] Read more » .….जब औघड़-श्राप से मुक्त हुआ था काशी- राजघराना
चिंतन ‘क्या हमें अपने साध्य और साधनों का ज्ञान है?’ September 5, 2014 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment यदि हमने साध्य को भुले हैं तो समझिये कि हमारा जीवन बर्बाद हो रहा है- साध्य लक्ष्य या उद्देश्य को कहते हैं। साधन वह है जिसकी सहायता से साध्य या लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उदाहरण के लिए यदि हमें दिल्ली जाना है तो दिल्ली हमारा साध्य कहलायेगा। दिल्ली जाने के लिए […] Read more » ‘क्या हमें अपने साध्य और साधनों का ज्ञान है?’
धर्म-अध्यात्म क्या ये जायज और इस्लाम के अनुरूप है ? September 4, 2014 by आलोक कुमार | 4 Comments on क्या ये जायज और इस्लाम के अनुरूप है ? भारत से प्रतिवर्ष औसतन सवा लाख लोग हज करने के लिए मक्का मदीना जाते हैं। इस्लामी आदेशानुसार हज यात्रा पर उसी इस्लामी – धर्मावलम्बी को जाना चाहिए, जो अपने जीवन के सभी पारिवारिक दायित्वों से मुक्त हो चुका हो और जिसके पास अपनी गाढ़ी कमाई हो और हज के निमित्त वो उसी कमाई को खर्च […] Read more » क्या ये जायज और इस्लाम के अनुरूप है ?
धर्म-अध्यात्म अघोरियों का तीर्थ- बाबा कीनाराम स्थल September 2, 2014 / September 2, 2014 by नीरज वर्मा | 2 Comments on अघोरियों का तीर्थ- बाबा कीनाराम स्थल …..लीक से हटकर अघोर या अघोरी जैसे शब्द कान में गूंजते ही अजीबो-गरीब ख्याल आते हैं ! शमशान, दारू , स्त्री-संग , चमत्कार , भय-विकृति और ना जाने क्या-क्या ! पर मजे की बात ये है कि- ज़ेहन में ये सारे सवाल बरसों पुराने मिथक पर आधारित होते हैं या फिर “काल-कपाल-महाकाल” जैसे भ्रामक सीरियल्स […] Read more » अघोरी तीर्थ बाबा कीनाराम बाबा कीनाराम स्थल
धर्म-अध्यात्म संसार के मार्गदर्शक हैं श्रीकृष्ण August 19, 2014 by अरविंद जयतिलक | Leave a Comment -अरविंद जयतिलक- परम सत्य वह है जिससे प्रत्येक वस्तु अद्भुत है। श्रीकृष्ण साक्षात परब्रह्म हैं। ईश्वर हैं। समस्त पदार्थों के बीज हैं। नित्यों के नित्य और जगत के नियंता हैं। शास्त्रों में ब्रह्म को निर्विशेष कहा गया है। श्रीकृष्ण साकार हैं। श्रीकृष्ण ध्वंस और निर्माण, क्रोध और करुणा, पार्थिकता और आध्यामिकता, सगुण और निर्गुण, राजनीति, […] Read more » कृष्णा भागवान कृष्ण श्रीकृष्ण संसार के मार्गदर्शक हैं श्रीकृष्ण
धर्म-अध्यात्म स्वस्थ मन, स्वस्थ तन और स्वस्थ समाज का द्योतक है ‘नाग पंचमी’ August 2, 2014 by रमेश पांडेय | Leave a Comment -रमेश पाण्डेय- पर्व, त्यौहार और उत्सव दो तरह के होते हैं। शाश्वत और सामयिक। शाश्वत पर्व वे हैं, जो किसी विषय वस्तु विशेष के कारण से नहीं बल्कि नैसर्गिक आवश्यकता के अनुक्रम में मनाए जाते हैं। यथा बसंत पंचमी, मकर संक्रान्ति। इसी क्रम में नाग पंचमी का भी पर्व आता है। सामयिक पर्व वे हैं […] Read more » नागपंचमी स्वस्थ तन और स्वस्थ समाज का द्योतक है ‘नाग पंचमी’ स्वस्थ मन