धर्म-अध्यात्म जीव शुभाशुभ कर्म करने में स्वतन्त्र और उनका फल भोगने में ईश्वर के अधीन है। March 31, 2021 / March 31, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्ययदि वेद न होते तो संसार के मनुष्यों को यह कदापि ज्ञान न होता कि मनुष्य कौन है व क्या है? यह संसार क्यों, कब व किससे बना, मनुष्य जीवन का उद्देश्य क्या है और उस उद्देश्य की प्राप्ति के साधन क्या-क्या हैं? वेद एक प्रकार से कर्तव्य शास्त्र के ग्रन्थ हैं जो […] Read more » जीव शुभाशुभ कर्म
धर्म-अध्यात्म परमात्मा ने हमारे सुख के लिये इस विशाल ब्रह्माण्ड को बनाया हैः स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती March 31, 2021 / March 31, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून की पर्वतीय इकाई तपोभूमि में दिनांक 7 मार्च से 28 मार्च तक चतुर्वेद पारायण एवं गायत्री महायज्ञ सम्पन्न हुआ। इस अवधि में योग एवं ध्यान शिविर भी संचालित हुआ। यह आयोजन स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती जी की प्रेरणा, उनके संरक्षण एवं पोषण सहित उनके मार्गदर्शन में हुआ। […] Read more » God has created this huge universe for our happiness: Swami Chitteswaranand Saraswati परमात्मा ने हमारे सुख के लिये इस विशाल ब्रह्माण्ड को बनाया हैः
धर्म-अध्यात्म स्वामी श्रद्धानन्द के जन्मना जाति व्यवस्था पर उपयोगी विचार March 31, 2021 / March 31, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य स्वामी श्रद्धानन्द महर्षि दयानन्द के अनुयायी, आर्य समाज के नेता, प्राचीन वैदिक शिक्षा गुरूकुल प्रणाली के पुनरुद्धारक, स्वतन्त्रता संग्राम के अजेय सेनानी तथा अखिल भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा के प्रधान थे। हिन्दू जाति को संगठित एवं शक्तिशाली बनाने के लिए आपने एक पुस्तक ‘हिन्दू संगठन – क्यों और कैसे?’ का प्रणयन […] Read more » Useful thoughts on the birth caste system of Swami Shraddhanand स्वामी श्रद्धानन्द
धर्म-अध्यात्म महात्मा बुद्ध ईश्वर में विश्वास रखने वाले आस्तिक थे? March 30, 2021 / March 30, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य महात्मा बुद्ध को उनके अनुयायी ईश्वर में विश्वास न रखने वाला नास्तिक मानते हैं। इस सम्बन्ध में आर्यजगत के एक महान विद्वान पं. धर्मदेव विद्यामार्तण्ड अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘‘बौद्धमत एवं वैदिक धर्म” में लिखते हैं कि आजकल जो लोग अपने को बौद्धमत का अनुयायी कहते हैं उनमें बहुसंख्या ऐसे लोगों की […] Read more » Was Mahatma Buddha a believer in God? महात्मा बुद्ध ईश्वर में विश्वास रखने वाले आस्तिक
धर्म-अध्यात्म मनुष्य की चहुंमुखी उन्नति का आधार अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि March 24, 2021 / March 24, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य के जीवन के दो यथार्थ हैं पहला कि उसका जन्म हुआ है और दूसरा कि उसकी मृत्यु अवश्य होगी। मनुष्य को जन्म कौन देता है? इसका सरल उत्तर यह है कि माता-पिता मनुष्य को जन्म देते हैं। यह उत्तर सत्य है परन्तु अपूर्ण भी है। माता-पिता तभी जन्म देते हैं […] Read more » अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि
धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्म के अनुसार आचरण बनाकर जीवन को सफल बनायें March 22, 2021 / March 22, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमहाभारत के बाद वैदिक धर्म का सत्यस्वरूप विलुप्त हो गया था और इसमें अनेक अन्धविश्वास, पाखण्ड एवं मिथ्या परम्परायें सम्मिलित हो गई थी जिससे आर्य जाति का नानाविध पतन व पराभव हुआ। ऋषि दयानन्द ने वेदों का पुनरुद्धार करने सहित वेद प्रचार करते हुए आर्यसमाज की स्थापना कर वैदिक धर्म को देश देशान्तर […] Read more » वैदिक धर्म
धर्म-अध्यात्म स्वामी शंकराचार्य के ईश्वर के अस्तित्व पर शास्त्रार्थ का खोजपूर्ण वर्णन March 21, 2021 / March 21, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य लगभग 23-24 सौ वर्ष पूर्व सनातन धर्म लुप्त प्रायः होकर देश में सर्वत्र नास्तिक मत छा गया था। इस अवधि में देश में स्वामी शंकराचार्य जी का प्रादुर्भाव होता है। वह वेद ज्ञान व विद्या से सम्पन्न थे। उन्होंने जैनमत के आचार्यों से उनकी अविद्यायुक्त मान्यताओं और वैदिक मत की सत्य […] Read more » स्वामी शंकराचार्य
धर्म-अध्यात्म अनादि, सर्वव्यापक व सर्वज्ञ ईश्वर हमारा सनातन मित्र व सखा है March 20, 2021 / March 20, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हमें मनुष्य का जन्म मिला और हम जन्म से लेकर अब तक अपने पूर्वजन्मों सहित इस जन्म के क्रियमाण कर्मों के फल भोग रहे हैं। हम जीवात्मा हैं, शरीर नहीं है। जीवात्मा चेतन पदार्थ है। चेतन का अर्थ है कि यह जड़ न होकर संवेदनशील है और ज्ञान प्राप्ति एवं कर्म […] Read more » God eternal omnipotent and omniscient is our eternal friend and friendgod सर्वव्यापक व सर्वज्ञ ईश्वर
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म लेख सनातन धर्म की ओर आकर्षित हो रहा है विश्व March 18, 2021 / March 18, 2021 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment भारत में सनातन धर्म का गौरवशाली इतिहास विश्व में सबसे पुराना माना जाता है। कहते हैं कि लगभग 14,000 विक्रम सम्वत् पूर्व भगवान नील वराह ने अवतार लिया था। नील वराह काल के बाद आदि वराह काल और फिर श्वेत वराह काल हुए। इस काल में भगवान वराह ने धरती पर से जल को हटाया […] Read more » Sanatan Dharma The world is attracted towards Sanatan Dharma भारत में सनातन धर्म
धर्म-अध्यात्म ईश्वर ने हम जीवात्माओं को मनुष्य क्यों बनाया? March 16, 2021 / March 16, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।हम मनुष्य कहलाते हैं। वस्तुतः सदाचार को धारण कर ही हम मनुष्य बन सकते हैं परन्तु सदाचारी व धर्मात्मा मनुष्य बनने के लिये सद्ज्ञान प्राप्त करने सहित पुरुषार्थ वा आचरण भी करना होता है। क्या हम सब ज्ञानी वा विद्यावान हैं? इसका उत्तर ‘न’ अक्षर व शब्द में मिलता है। जब हम […] Read more » ईश्वर ने हम जीवात्माओं को मनुष्य क्यों बनाया?
धर्म-अध्यात्म वेद अपौरुषेय ज्ञान एवं भाषा के ग्रन्थ हैं March 14, 2021 / March 14, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यवेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद की संहिताओं में निहित मंत्रों व इनके सभी मन्त्रों में निहित ज्ञान को कहते हंै। वेदों का इतिहास उतना ही पुराना है जितनी की यह सृष्टि पुरानी है। हमारे प्राचीन काल के मनीषियों से लेकर ऋषि दयानन्द (1825-1883) तक ने वेदों की उत्पत्ति, इसके रचयिता व ज्ञान […] Read more » The Vedas are texts of inauspicious knowledge and language. वेद
धर्म-अध्यात्म हमें धर्म और उपासना के यथार्थस्वरूप व रहस्य को जानना चाहिये March 13, 2021 / March 13, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यआजकल सामाजिक जगत तथा राजनीति जगत में धर्म के नाम की खूब चर्चा होती है परन्तु लगता है कि इसकी चर्चा करने वाले लोगों को धर्म का यथार्थस्वरूप व धर्म शब्द का अर्थ ज्ञात नहीं होता। धर्म संस्कृत का शब्द है जो यथावत् हिन्दी भाषा में भी प्रयोग किया जाता है। मनुष्य एक […] Read more » धर्म और उपासना