धर्म-अध्यात्म ईश्वर अनादि, जगत का कर्ता एवं जड़-चेतन जगत का स्वामी है February 25, 2021 / February 25, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यऋषि दयानन्द जी ने सत्यार्थप्रकाश के सप्तम समुल्लास के आरम्भ में ऋग्वेद के 4 और यजुर्वेद के एक मन्त्र को प्रस्तुत कर उनके अर्थों सहित ईश्वर के सत्यस्वरूप तथा गुण, कर्म व स्वभाव का प्रकाश किया है। इन मन्त्रों में तीसरा मन्त्र ऋग्वेद के दशवे मण्डल के सूक्त 48 का प्रथम मन्त्र है। […] Read more » ईश्वर
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द को शिवरात्रि को हुए बोध से विश्व से अविद्या दूर हुई February 24, 2021 / February 24, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यवर्तमान समय से लगभग 5,200 वर्ष पूर्व महाभारत का विनाशकारी युद्ध हुआ था। महाभारत काल तक वेद अपने सत्यस्वरूप में विद्यमान थे जिसके कारण संसार में विद्या व सत्य ज्ञान का प्रचार व प्रसार था। महाभारत के बाद वेदों के अध्ययन अध्यापन तथा प्रचार में बाधा उत्पन्न हुई जिसके कारण विद्या धीरे धीरे […] Read more » Avidya got away from the world due to the realization of Sage Dayanand on Shivaratri ऋषि दयानन्द को शिवरात्रि को हुए बोध से विश्व से अविद्या दूर हुई शिवरात्रि
धर्म-अध्यात्म वेदों को मानने और विश्व का उपकार करने की भावना के कारण आर्यसमाज विश्व का श्रेष्ठ संगठन है February 23, 2021 / February 23, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। ईश्वर एक सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान एवं सर्वज्ञ सत्ता है जबकि जीवात्मा एक एकदेशी, ससीम तथा अल्पज्ञ सत्ता है। अल्पज्ञ होने के कारण से जीवात्मा वा मनुष्य को अपने जीवन को सुखी बनाने एवं लक्ष्य प्राप्ति के लिये सद्ज्ञान एवं शारीरिक शक्तियों की आवश्यकता होती है। सत्यस्वरूप ईश्वर सर्वज्ञ है एवं वह […] Read more » The Arya Samaj is the best organization in the world due to the spirit of following the Vedas and favoring the world. वेद
धर्म-अध्यात्म गुरुकुल शिक्षा प्रणाली मनुष्य जीवन का सर्वांगीण विकास होता है February 23, 2021 / February 23, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्यगुरुकुल शिक्षा प्रणाली विश्व की सबसे प्राचीन शिक्षा प्रणाली है। महाभारत के समय तक इसी प्रणाली से लोग विद्याध्ययन करते थे। इसी शिक्षा पद्धति का अनुसरण कर हमें ऋषि, मुनि, योगी, धर्म प्रचारक, विद्वान, आचार्य, उच्च कोटि के ब्रह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूरवीर आदि मिला करते थे। महाभारत युद्ध के कुछ वर्षों बाद वैदिक […] Read more » Gurukul education system is the all round development of human life गुरुकुल शिक्षा प्रणाली
धर्म-अध्यात्म हमें दैनिक अग्निहोत्र यज्ञ कर अपने घर की वायु को सुगन्धित करना चाहिये February 23, 2021 / February 23, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यवैदिक धर्म एवं संस्कृति में यज्ञ का प्रमुख स्थान है। यज्ञ किसी भी पवित्र व श्रेष्ठ कार्य करने को कहा जाता है। मनुष्य जो शुभ कर्म करता है वह सब भी यज्ञीय कार्य होते हैं। माता पिता व आचार्यों सहित अपने परिवार की सेवा व पालन पोषण करना मनुष्य का कर्तव्य होता है। […] Read more » दैनिक अग्निहोत्र यज्ञ
धर्म-अध्यात्म हमें संसार के स्वामी ईश्वर की वेदाज्ञाओं का पालन करना चाहिये February 19, 2021 / February 19, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यहम परमात्मा के बनाये हुए इस संसार में रहते हैं। इस संसार के सूर्य, चन्द्र, पृथिवी सहित पृथिवी के सभी पदार्थों, वनस्पतियों एवं प्राणी जगत को भी परमात्मा ने ही बनाया है। हमारा जन्मदाता, पालनकर्ता तथा मुक्ति सुखों सहित सांसारिक सुखों का दाता भी परमात्मा ही है। यह सिद्धान्त सत्य वैदिक सिद्धान्त है […] Read more » We should obey the Vedas of the lord of the world ईश्वर की वेदाज्ञाओं का पालन
धर्म-अध्यात्म हमें जन्मना-जाति के स्थान पर ज्ञानयुक्त वेदोक्त व्यवहार करने चाहियें February 18, 2021 / February 18, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य वैदिक धर्म के आधार ग्रन्थ वेदों में प्राचीन व सृष्टि के आरम्भ काल से जन्मना जाति का उल्लेख कहीं नहीं मिलता। हमारी आर्य हिन्दूजाति के पास बाल्मीकि रामायण एवं महाभारत नाम के दो विशाल इतिहास ग्रन्थ हैं। रामायण की रचना महर्षि बाल्मीकि जी ने लाखों वर्ष पूर्व रामचन्द्र जी के जीवन […] Read more » ज्ञानयुक्त वेदोक्त व्यवहार
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द के सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ से वेदों के सत्यस्वरूप का प्रचार हुआ February 17, 2021 / February 17, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यऋषि दयानन्द के आगमन से पूर्व विश्व में लोगों को वेदों तथा ईश्वर सहित आत्मा एवं प्रकृति के सत्यस्वरूप का स्पष्ट ज्ञान विदित नहीं था। वेदों, उपनिषद एवं दर्शन आदि ग्रन्थों से वेदों एवं ईश्वर का कुछ कुछ सत्यस्वरूप विदित होता था परन्तु इन ग्रन्थों के संस्कृत में होने और संस्कृत का अध्ययन-अध्यापन […] Read more » ऋषि दयानन्द सत्यार्थप्रकाश
धर्म-अध्यात्म समाज ऋषि दयानन्द ने न्याय को दृष्टिगत पर सामाजिक सुधार कार्य किए February 16, 2021 / February 16, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यऋषि दयानन्द (1825-1883) ने अपना जीवन ईश्वर के सत्यस्वरूप तथा मृत्यु पर विजय प्राप्ति के उपायों की खोज में लगाया था। इसी कार्य के लिए वह अपनी आयु के बाइसवें वर्ष में अपने पितृ गृह का त्याग कर अपने उद्देश्य को सिद्ध करने के लिए निकले थे। अपनी आयु के 38वे वर्ष में […] Read more » Rishi Dayanand did social reform work on the view of justice ऋषि दयानन्द
धर्म-अध्यात्म जीवात्मा स्वस्थ एवं बलवान शरीर को ही धारण करती है अन्य नहीं February 15, 2021 / February 15, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यहम जानते हैं कि सभी मनुष्यों एवं चेतन प्राणियों के शरीरों मेंएक चेतन आत्मा की सत्ता भी निवास करती है। मनुष्य के जन्म व गर्भकाल में आत्मा निर्माणाधीन शरीर में प्रविष्ट होती है। मनुष्य शरीर में आत्मा का प्रवेश अनादि, नित्य, अविनाशी सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, सर्वज्ञ, सच्चिदानन्दस्वरूप ईश्वर कराते हैं। समस्त संसार, सभी […] Read more » The person carries a healthy and strong body जीवात्मा स्वस्थ एवं बलवान शरीर को ही धारण करती है अन्य नहीं
धर्म-अध्यात्म हमारी यह सृष्टि किसने, क्यों व कब बनाई है? February 15, 2021 / February 15, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य जब संसार में आता हैं और उसकी आंखे खुलती हैं तो वह अपने सामने सूर्य के प्रकाश, सृष्टि तथा अपने माता, पिता आदि संबंधियों को देखता है। बालक अबोध होता है अतः वह इस सृष्टि के रहस्यों को समझ नहीं पाता। धीरे धीरे उसके शरीर, बुद्धि व ज्ञान का विकास […] Read more » Who created this world why and when? सृष्टि किसने बनाई
धर्म-अध्यात्म ईश्वर के सत्यस्वरूप को जानकर ही उपासना करना उचित है February 10, 2021 / February 10, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यबहुत से मनुष्य ईश्वर को मानते हैं, उसमें श्रद्धा व आस्था भी रखते हैं परन्तु ईश्वर के सत्य स्वरूप को जानते नहीं है। इस कारण से वह ईश्वर की सच्ची उपासना को प्राप्त नहीं हो पाते। हम किसी भी वस्तु से तभी लाभ उठा सकते हैं कि जब हमें उस वस्तु के सत्य […] Read more » ईश्वर