आर्थिकी

भारत कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ा

नोटबंदी के बाद ये चर्चा है कि हिंदुस्तान कैसेलेस अर्थव्यवस्था की और बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली भी इस बारे में कह चुके है कि काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में इसे बहुत कारगर मना जा रहा है. भारत की सकल अर्थव्यवस्था के घरेलू उत्पाद में कैश जीडीपी का अनुपात 12 से 13 प्रतिशत है, जो अमरीका और यूरोप से अधिक है पर जापान से कम है.

नोट बंदी : विकास की तरफ बढ़ते भारत के कदम

करीब 35 हजार करोड़ का कालाधन बाहर आ चुका है। कश्मीर में सुरक्षा बलों पर होने वाले पथराव पर रोक लगी है। इससे यह जाहिर है कि अलगाववादी या पाकिस्तान एजेंट पांच-पांच सौ देकर युवकों को पथराव के लिए प्रेरित करते थे। यहां तक कि नक्सली आतंकी भी कह रहे है कि नोटबंदी का गरीबों के हित में निर्णय है और वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का मन बना रहे है। जनता के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू हुई है।

काला धन अपनी सत्ता खो बैठा

सरकार के इस क़दम से घबराहट तो पाकिस्तान की आई एस आई में है , पाकिस्तान के उन तस्करों में है जो नेपाल और बंगलादेश के रास्ते तस्करी में अरसे से संलग्न थे । नोटों के बन्द होने से इन की कमर टूट गई है । सीमा के उस पार भी घबराहट है और जो आतंकी अन्दर घुस चुके हैं , उनके भी हाथ पाँव फूले हुए हैं । काग़ज़ के जिन नोटों की झलक दिखा कर वे घाटी के लोगों को सड़कों पर नाच नचवाते थे उन नोटों की ताक़त अब समाप्त हो गई है । कश्मीर घाटी के आतंकी संगठनों की हालत पंचतंत्र के उस चूहे के समान हो गई है , जिस के बिल के नीचे से स्वर्ण मुद्राओं से भरा घड़ा निकाल लिया गया है और अब वह लाख ज़ोर लगाने पर भी दूर खूँटी पर लटके सत्तू के थैले तक नहीं पहुँच पा रहा है ।

नोटबंदी पर सहयोग, समर्थन और विपक्ष की राजनीति

केजरीवाल दिल्ली विधानसभा का सदुपयोग करने की बजाय उसको केवल पीएम मोदी का विरोध करने का मंत्र बना लिया हैं । जिसमें सभी संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करके तर्कहीन तरीके से मोदी विरोध किया जाता है तथा उनको जी भरकर गालियां दी जाती हैं। आज केजरीवाल व उनके साथ खड़े हाने वाले सभी नेता जनता की निगाहों में गिर रहे है।अभी तक ममता बनर्जी के गृहराज्य बंगाल से भी किसी बड़ी अराजकता का समाचार नहीं प्राप्त हुआ है। यही कारण है कि वह बौखला गयी हैं।

नोटबंदी पर काली सियासत

प्रधानमंत्री ने दो टूक कह भी दिया है कि उनका अगला निशाना बेनामी संपत्ति होगा। यानी आने वाले दिनों में ऐसे लोगों पर भी गाज गिरनी तय है जो अपनी काली कमाई को रियल इस्टेट और गोल्ड में निवेश कर रखे हैं। यह भी संभव है कि सरकार काले धन से निपटने के लिए अगले फिस्कल ईयर के अंत तक गोल्ड इंपोटर्स पर रोक लगा दे। ऐसा इसलिए कि बड़े नोट बंद होने के बाद बड़े पैमाने पर सोना की खरीदारी की गयी। अच्छी बात है कि सरकार ने रात के अंधेरे में सोना बेचने और खरीदने वालों की जांच शुरु कर दी है।

बेनामी संपत्ति पर प्रहार

नोटबंदी के चलते जिस तरह से पूंजी से जुड़ी बड़ी ताकतें संकट में आई हैं, उसी तर्ज पर बेनामी संपत्ति पर प्रहार होता है तो यह भी कालेधन को समाप्त करने का बड़ा उपाय साबित हारेगा। इस दृष्टि से उन लोक कल्याणकारी कथित ट्रस्टों पर भी चोट करनी होगी, जो हजारों एकड़ जमीन के मालिक हैं। देश के जितने भी पुर्व सामंत है, उनके ट्रस्टों के पास बीच शहरों में कई एकड़ भूमि खाली पड़ी हैं। इनकी वर्तमान कीमत अरबों रुपए है।

#नोटबन्दी: मोदी के मास्टर स्ट्रोक के बाद क्या हारी हुई बाजी खेल रही है विपक्ष

केंद्र सरकार के नोटबन्दी वाले फैसले के एक हफ्ते के बाद विपक्ष अचानक मुखर हुआ और पीएम मोदी के ऊपर एक के बाद एक हमले शुरू कर दिए ।फ़िलहाल विरोध का आलम ये है कि शीतकालीन सत्र भी नोटबन्दी की भेंट चढ़ने वाला है । ये सारे हमले गरीबों की कंधे पर बन्दूक रखकर किये जा रहे हैं क्योंकि सरकार द्वारा अचानक लिए गये इस फैसले से आम लोगो को कुछ दिक्कतों का सामना तो निःसन्देह करना पड़ रहा है लेकिन अधिकांश लोग सरकार के इस फैसलों को सही बता रहे हैं । शायद विपक्ष भी एक हारी हुई लड़ाई लड़ रही है जिसका नेतृत्व भी कांग्रेस के स्थान ममता बनर्जी कर रही हैं ।

प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का काले धन पर प्रहार और हमारा देश

मोदी जी के इस निर्णय के कारण पाकिस्तान में छपने वाली फेक करंसी का प्रचलन सर्वथा समाप्त हो जाने के कारण पाकिस्तान सहित सभी आतंकवादी, अलगाववादी, कश्मीर में सेना पर पत्थरों की वर्षा करने वाले लोग, नक्सलवादी, हवाला कारोबारी व जमीन की खरीद-फरोक्त जिसमें काले धन का अधिकाधिक प्रयोग होता है, का कारोबार पूरी तरह से ध्वस्त व समाप्त होकर रुक गया है जो मोदी जी की इस मुहिम की बहुत बड़ी सफलता है।

कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत

भारत के लोग नयी चीजों को देर से अपनाते हैं लेकिन जब अपनाते हैं तो फिर पीछे नहीं देखते! आज देश में लगभग १०५ करोड़ लोगों के पास मोबाइल फोन हैं! और हर व्यक्ति धड़ल्ले से उसका प्रयोग कर रहा है! अगर पूरे जोरशोर से प्रयास किया जाये तो निश्चय ही लोग कॅश के स्थान पर कार्ड व्यवस्था को रोजमर्रा की जिंदगी का भाग बना लेंगे और एक बार जब उन्हें इसकी सुविधा की आदत पड जाएगी तो फिर देखते ही देखते भारत भी इस क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में दिखाई देगा!