मनोरंजन संगीत बरेली में गिरे ‘झुमके’ की अनसुलझी कहानी का सच? August 1, 2025 / August 1, 2025 by रमेश ठाकुर | Leave a Comment डॉ. रमेश ठाकुर बरेली में गिरे ‘झुमके’ वाला विश्व प्रसिद्ध किस्सा काल्पनिक है या वास्तविक? दरअसल, ये ऐसी अनसुलझी कड़ी है जो दशकों बीतने के बाद भी नहीं सुलझ सकी। असल सच्चाई पर पर्दा आज भी पड़ा हुआ है। बरेली में जन्में ख्याति प्राप्त शायर वसीम बरेलवी साहब से लेकर तमाम बुजुर्ग-युवा इतिहासकार भी झुमके […] Read more » बरेली में गिरे ‘झुमके’ की अनसुलझी कहानी
खेल जगत एशिया कप : भारत-पाक के बीच “बैट” और “बुलेट” साथ नहीं July 31, 2025 / July 31, 2025 by प्रदीप कुमार वर्मा | Leave a Comment प्रदीप कुमार वर्मा यह सही है कि क्रिकेट भगवान नहीं है लेकिन यह भी सही है कि क्रिकेट खेलप्रेमियों के लिए भगवान से कम भी नहीं है। भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट को लेकर दीवानगी और जीने मरने की कसम किसी से छुपी नहीं है लेकिन इस बार क्रिकेट को लेकर भारत में दीवानगी की वजाय “रोष” अधिक है। वजह है जम्मू-कश्मीर की बैसारन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद पाक के विरुद्ध भारत की सभी मोर्चों पर निर्णायक करवाई और यही वजह है कि एशिया कप क्रिकेट में एक बार फिर से भारत- पाक के मैच के शेड्यूल को लेकर अब विरोध के स्वर उभर रहे हैं। इन स्वरों में देश के क्रिकेट प्रेमियों से लेकर नेता, अभिनेता तथा आम नागरिक तक शामिल है। कुल मिलाकर देश की सरकार और बीसीसीआई से मांग इस बात की है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब पाकिस्तान के साथ सभी तरह के संबंध खत्म है तो फिर क्रिकेट का संबंध क्यों जारी रहे? पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने को लेकर हालिया विवाद सितंबर महीने में होने वाले एशिया क्रिकेट कप को लेकर है। एशियन क्रिकेट काउंसिल ने शनिवार को ढाका में हुई बैठक के बाद एशिया कप 2025 की तारीखों का ऐलान किया है। शेड्यूल के अनुसार भारत-पाकिस्तान मुकाबला 14 सितंबर को संयुक्त अरब अमीरात में होने वाला है। संभावना इस बात की अधिक है कि दोनों चिर-प्रतिद्वंद्वी टीमें टूर्नामेंट में फाइनल तक तीन बार एक-दूसरे से भिड़ सकती हैं। एशिया क्रिकेट कप में कुल मिलाकर एशिया की नौ देशों की टीम में भाग ले रही है। एशिया क्रिकेट कप के ग्रुप में ग्रुप-ए में भारत, पाकिस्तान, यूएई और ओमान तथा ग्रुप-बी में श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, हॉन्गकॉन्ग एवं चीन शामिल हैं।उधर,गली मोहल्ला से लेकर संसद तक एशिया कप 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मुकाबला दो महीने पहले से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच को लेकर विरोध का आलम यह है कि संसद तक में यह मुद्दा गूंजा और अधिकांश विपक्षी नेताओं ने भी पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच को लेकर सवाल खड़े किए हैं। संसद में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कड़े शब्दों में विरोध जताया है और उन्होंने कहा कि जिसकी अंतरात्मा जिंदा है, वह पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच नहीं देख सकते। विपक्ष के कई अन्य सांसदों ने भी भारत- पाक के बीच क्रिकेट मैच पर सवाल उठाए हैं। एशिया कप में पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच को लेकर उठे विरोध तथा बवाल को पहलगाम आतंकी हमले के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। जम्मू- कश्मीर की वैसारन घाटी में इसी साल 22 अप्रैल को पाकिस्तान के तीन आतंकवादियों ने 26 पर्यटकों की गोली मारकर नृशंस हत्या कर दी। इस आतंकी कार्रवाई में आतंकवादियों ने गोली मारने से पहले पर्यटकों का न केवल धर्म पूछा बल्कि उनकी हिन्दू के रूप में पहचान सुनिश्चित करने के लिए उन्हें कलमा पढ़ने को भी कहा। पाकिस्तान द्वारा प्रेषित और पोषित आतंकियों की इस कायराना हरकत के बाद भारत में पाकिस्तान के विरुद्ध कई निर्णायक कार्रवाई की। पहलगाम के आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारत में शुरुआत सिंधु जल समझौते के निरस्त करने से की। इसके बाद भारत ने चिनाब का पानी भी रोक दिया। यही नहीं, भारत ने अटारी बॉर्डर को बंद करके पाकिस्तान के साथ सभी प्रकार के आयात और निर्यात पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी है। भारत ने एक कूटनीतिक कदम उठाते हुए पाकिस्तान के दूतावास में अधिकारियों की संख्या में कटौती कर दी। इसके साथ ही भारत में पाकिस्तान के जहाजों की आवाजाही पर पूर्ण पाबंदी के साथ-साथ पाकिस्तान के पोतों के लिए भारत के बंदरगाहों को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इस आर्थिक मोर्चाबंदी के बाद पहले से ही गरीबों की मार झेल रहे पाकिस्तान में अब कंगाली के हालात है तथा पाकिस्तान के लोग वहां की सेवा और सरकार को कोस रहे हैं। पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेते हुए भारत में पाकिस्तान के फिल्मी कलाकारों की एंट्री भारत में बैन करने के साथ ही पाकिस्तान के कई चैनलों और यूटयुबरों को भी भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है। पाकिस्तान के जहाज के लिए भारत ने अपना और स्पेस बंद कर रखा है। हालात ऐसे हैं कि भारत में पाकिस्तान के आतंकवाद परस्त रवैया की जानकारी देने के लिए अपने सांसदों को विभिन्न देशों में भेजा और पहलगाम आतंकी हमले की सच्चाई उन देशों की सरकारों के सामने बयां की। इन सब उपाय के अमलीजामा पहनाने के बाद अब इस बात को लेकर चर्चा जोरों पर है कि जब भारत ने पाकिस्तान के साथ अपने सभी प्रकार के संबंध खत्म कर लिए हैं तो फिर पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच क्यों? देश के हर आम और खास नागरिक के जुबान पर अब एक ही बात है कि जब आतंकवाद और बातचीत, आतंकवाद और व्यापार, आतंकवाद और सिंधु जल तथा आतंकवाद और मनोरंजन साथ नहीं चल सकते तो फिर बैट और बुलेट एक साथ क्यों चलें? पहलगाम में आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारतीय सेना ने सधी हुई रणनीति अपनाते हुए “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया। इस विशेष ऑपरेशन में भारत की सेना ने पीओके तथा पाकिस्तान के अन्य इलाकों में आतंकवादियों के नों ठिकानों तथा पाकिस्तान सेना के 11 ठिकानों तथा एयरबेस को मिसाइल और ड्रोन हमले में तबाह कर दिया। यही नहीं, भारत की ओर से यह भी ऐलान किया गया है कि “ऑपरेशन सिंदूर” अभी बंद नहीं हुआ है, केवल रोका गया है। भविष्य में भारत के विरुद्ध कोई भी आतंकी कार्रवाई को अब “एक्ट आफ वार” माना जाएगा तथा भारत अपने हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र होगा। फिलहाल देश के आम नागरिक से लेकर पहलगाम आतंकी हमले में पीड़ित परिवार भी सरकार से यही सवाल पूछ रहे हैं कि क्या उनके परिजनों की “शहादत” की कीमत पर भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप में क्रिकेट मैच “जरूरी” है? प्रदीप कुमार वर्मा Read more »
सिनेमा फिल्म ‘बॉर्डर 2’ में सोनम बाजवा की एंट्री July 31, 2025 / July 31, 2025 by सुभाष शिरढोनकर | Leave a Comment सुभाष शिरढोनकर कई पंजाबी फिल्मों में नजर आ चुकी एक्ट्रेस सोनम बाजवा का जादू हर किसी के सिर पर चढ़कर बोलता है। जल्द ही वह नेशनल अवॉर्ड विजेता निर्देशक विजय कुमार अरोड़ा की, महिलाओं और पुरुषों की असमानता पर बनने वाली पंजाबी फिल्म ‘गोड्डे गोड्डे चा’ में नजर आएगी । कई वर्षों से पंजाबी फिल्म […] Read more » Sonam Bajwa's entry in the film 'Border 2' सोनम बाजवा
मनोरंजन सिनेमा कीर्ति सुरेश के करियर का दूसरा फेज़ July 24, 2025 / July 24, 2025 by सुभाष शिरढोनकर | Leave a Comment सुभाष शिरढोनकर तमिल, मलयालम और तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री में जाना-माना नाम बन चुकी एक्ट्रेस कीर्ति सुरेश साउथ इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस में से हैं। उन्हें लीड रोल वाली फिल्म ‘महानती’ (2018) के लिए नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है। कीर्ति के खाते में एक नेशनल अवार्ड के अलावा पांच एसआईआईएमए और दो फिल्मफेयर अवार्ड दर्ज […] Read more » The second phase of Keerthy Suresh's career कीर्ति सुरेश
मनोरंजन बदन की नहीं, बुद्धि की बनाओ पहचान बहनों: अश्लीलता की रील संस्कृति पर एक सवाल July 20, 2025 / July 24, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment प्रियंका सौरभ हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ स्क्रीन पर दिखना असल में जीने से ज़्यादा जरूरी हो गया है। जहां ज़िंदगी कैमरे के फ्रेम में सिमट गई है, और इंसान का मूल्य उसके ‘लाइक’, ‘फॉलोवर’ और ‘व्यूज़’ से तय होता है। इसी डिजिटल होड़ में स्त्रियों की अभिव्यक्ति भी एक अजीब […] Read more » अश्लीलता की रील
मनोरंजन विधि-कानून निरंकुश अभिव्यक्ति से जुड़े सुप्रीम फैसलों का स्वागत हो July 18, 2025 / July 18, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग-सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की आजादी एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एंटी सोशल अभिव्यक्ति की सुनवाई करते हुए समय-समय पर जो कहा, वह जहां संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिहाज से खासा अहम है वहीं एक संतुलित एवं आदर्श राष्ट्र एवं समाज व्यवस्था का आधार भी है। सोशल मीडिया मंचों पर एंटी सोशल अभिव्यक्ति […] Read more » निरंकुश अभिव्यक्ति से जुड़े सुप्रीम फैसलों का स्वागत
सिनेमा सलमान के साथ फिर नजर आएंगी रश्मिका मंदाना ? July 15, 2025 / July 15, 2025 by सुभाष शिरढोनकर | Leave a Comment सुभाष शिरढोनकर रश्मिका मंदाना ने साल 2016 में कन्नड़ फिल्म ‘किरिक पार्टी’ से एक्टिंग में डेब्यू किया था। 4 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म ने लगभग 36.8 करोड़ की कमाई की और यह ब्लॉकबस्टर साबित हुई। रश्मिका मंदाना की 7 करोड़ के बजट वाली फिल्म ‘चमक’ (2017) ने 22.3 करोड़ की कमाई की और […] Read more » रश्मिका मंदाना
सिनेमा बोल्ड और ग्लैमरस एक्ट्रेस सोनाली राऊत July 14, 2025 / July 14, 2025 by सुभाष शिरढोनकर | Leave a Comment 23 दिसंबर 1990 को मुंबई में पैदा हुई, हिंदी फिल्मों और टीवी रियलिटी शो की एक्ट्रेस सोनाली राऊत ने मुंबई के मिठीबाई कॉलेज से बेचलर डिग्री हासिल की है। सोनाली की बड़ी बहन उज्ज्वला राऊत भारत की सफल सुपरमॉडल हैं और पिता मुंबई में पुलिस उपायुक्त हैं। खुद सोनाली भी एक्टिंग में आने के पहले […] Read more » Bold and glamorous actress Sonali Raut सोनाली राऊत
मनोरंजन सिनेमा ‘जटाधारा’ में नजर आएंगी शिल्पा शिरोडकर July 10, 2025 / July 10, 2025 by सुभाष शिरढोनकर | Leave a Comment सुभाष शिरढोनकर 20 नवंबर 1973 को मुंबई में एक मराठी परिवार में पैदा हुई एक्ट्रेस शिल्पा शिरोडकर पूर्व मिस इंडिया और तेलुगु स्टार महेश बाबू की पत्नी नम्रता शिरोडकर की बड़ी बहन हैं। नम्रता खुद भी हिंदी और साउथ फिल्म इंडस्ट्री की एक्ट्रेस रह चुकी हैं। शिल्पा की दादी, मीनाक्षी शिरोडकर, 1930 के दशक की जानी-मानी अभिनेत्री थीं जिन्होंने एक वक्त […] Read more » Shilpa Shirodkar will be seen in 'Jatadhara' शिल्पा शिरोडकर
सिनेमा रिटायरमेंट के बारे में सोच रहे हैं आमिर खान ? July 3, 2025 / July 3, 2025 by सुभाष शिरढोनकर | Leave a Comment सुभाष शिरढोनकर एक्टर आमिर खान की फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म के जरिए आमिर खान ने लगभग तीन साल बाद सिल्वर स्क्रीन पर कमबैक किया हैं। फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ (2025), साल 2007 में आई फिल्म ‘तारे जमीन पर’ का सीक्वल है जिसे आमिर खान और किरण राव […] Read more » आमिर खान
मनोरंजन महत्वपूर्ण लेख समाज साक्षात्कार सुनता नहीं कोई हमारी, क्या जमाना बहरा हो गया July 1, 2025 / July 1, 2025 by डा. विनोद बब्बर | Leave a Comment डा. विनोद बब्बर गत दिवस देश की राजधानी से सटे नोएडा के एक ओल्डऐज होम में लोगों की दुर्दशा के समाचार ने मानवता के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया। वृद्धाश्रम पहुंची पुलिस और समाचार कल्याण विभाग की टीम हैरान थी। एक बुजुर्ग महिला को बांध के रखा गया था तो बेसमेंट के कमरों में जो वृद्ध पुरुष कैद थे, उनके वस्त्र मल मूत्र से सने हुए और दुर्गंध दे रहे थे। पूरा दृश्य किसी नर्क से बढ़कर था। विशेष यह कि इस ओल्ड होम में दयनीय हालत रहने वाले वृद्धों के परिजनों की ओर से मासिक शुल्क भी दिया जा रहा था। प्रश्न यह है कि जब परिजन हजारों रुपया प्रतिमा शुल्क देने की स्थिति में है तो वे अपने बुजुर्ग माता-पिता को अपने साथ क्यों नहीं रखते? जिन माता-पिता ने उन्हें पाला संभाला, शिशुपन में उनके मल मूत्र साफ किया और स्वयं कष्ट सहकर भी उनके सुख सुविधा का पूरा ध्यान रखा, उन्हें अपने से अलग करते हुए क्या उन कलयुगी संतानों ने जरा भी नहीं सोचा? पाषाण हृदय संतानों को स्वतंत्रता पसंद है या वे अपने वृद्ध अभिभावकों को बोझ मानते हैं? दुखद आश्चर्य यह है कि जिस भारत में बुजुर्गो की सेवा-सम्मान की परम्परा रही है। जहां लगातार गाया, दोहराया जाता है- अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः। चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम।। जो अपने बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करते हैं उनकी आयु, विद्या, कीर्ति और बल में वृद्धि होती है। वहाँ तेजी से वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ रही है। इस नैतिक पतन के लिए कुछ लोग ऋषि संस्कृति की भूमि भारत में पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव को जिम्मेवार ठहराते हैं तो अधिकांश लोगों के मतानुसार विखण्डित होते संयुक्त परिवार, शहरीकरण, बेलगाम सोशल मीडिया और उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण स्थित बदली है। आश्चर्य है कि आज शहर से गांव तक प्रत्येक व्यक्ति दिन में कई कई घंटेअपने स्मार्टफोन को देता है लेकिन उनके पास अपने ही वृद्ध माता-पिता के पास बिताने के लिए कुछ मिनट भी नहीं है। शायद मान्यताओं में बदलाव के कारण बुजुर्गों को बोझ बना दिया है। उन्हें न अच्छा खाना दिया जाता है न ही साफ-सुथरे कपड़े। यहां तक कि उनके उपचार को भी जरूरी नहीं समझा जाता। उचित देखभाल के अभाव में वृद्धों को शारीरिक व मानसिक कष्ट बढ़ जाता है। वे छोटे-छोटे कामों और जरूरतों के लिए दूसरों के मोहताज हो जाते हैं। हर कली अपने यौवन में फूल बनकर अपनी सुगंध बिखेरती है तो एक सीमा के बाद उसमें मुरझाहट दिखाई देने लगती है। मनुष्य जीवन भी प्रकृति के इस चक्र के अनुसार ही चलता है। बचपन, जवानी के बाद वृद्धावस्था प्रकृति का सत्य है। वृद्धावस्था को जीवन का अभिशाप मानते हैं क्योंकि इस अवस्था के आते-आते शरीर के सारे अंग शिथिल पड़ जाते हैं और इंसान की जिंदगी दूसरों की दया-कृपा पर निर्भर करती है। दूसरों पर आश्रित जिंदा रहना उस बोझ महसूस लगने लगता है और वह चाहता है कि उसे जितनी जल्दी हो सके, ज़िंदगी से छुट्टी मिल जाए। प्रत्येक व्यक्ति जीवन भर कड़ी मेहनत कर जो कुछ भी बनाता है ताकि जीवन की सांझ सम्मान सहित कम से कम कठिनाई से बीते। लेकिन, जब हम अपने परिवेश में नजर दौड़ाते हैं तो इसके विपरीत दृश्य देखने को मिलते हैं। अनेक बुजुर्गों को बुढ़ापे में दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। उन्हें न तो सिर छिपाने के लिए छत, खाने को दो जून की रोटी और तन ढकने के लिए कपड़ा भी उपलब्ध नहीं हो पाता। बुढ़ापा आते ही वह अकेला पड़ने लगता है जहां उसकी सुनने वाला कोई नहीं होता। यहाँ तक कि जिन बच्चों की खातिर वह अपना सब कुछ लुटाता है, वही उसे सिरदर्द समझने लगते हैं। उसकी उपेक्षा करते हं। यह दृश्य किसी एक घर, गाँव, या नगर की विेशेष समस्या नहीं है बल्कि हर तरफ ऐसा या लगभग ऐसा देखने, सुनने को मिलता है। वर्तमान की संस्कारविहीन शिक्षा के कारण अपनी संतान ही अपनी नन्हीं अंगुलियां थामने वाले बूढ़े माँ-बाप से छुटकारा पाने के बहाने तलाशने लगी है। उन्हें यह स्मरण नहीं रहता कि वह उन्हीं माँ-बाप की कड़ी मेहनत, त्याग, समर्पण के कारण ही किसी मुकाम तक पहुंचे हैं। जिन्होंने अपनी संतान को सुखी, समृद्ध, सम्मानपूर्वक जीवन जीने के योग्य बनाने का सपना साकार करने के लिए अपना जीवन होम किया हो, यदि वे जीवन की संध्या में असहाय, अभावग्रस्त है तो लानत है उस संतान पर। वास्तव में वे संताने अधम हो धरती पर बोझ हैं। वृक्ष जब तक छायादार और फलदार रहता है, अपनी सेवाएं देता है। सूखने और जर्जर होने पर भी वह जाते जाते लकड़ी देकर जाता है। वृद्धावस्था जीवन का अखिरी चरण है, जब परिवार को उन्हें ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए जिससे उन्हें अपनी संतति पर गर्व हो। उनके पास अनुभवों, संस्मरणों, स्मृतियों की अमूल्य धरोहर हैं जिसे प्रापत कर सुरक्षित, संरक्षित करना उनके बाद की पीढ़ी का कर्तव्य है। ऐसा भी नहीं है कि समाज से वृद्धों के सम्मान की भावना लृप्त हो चुकी है। आज भी अनेकानेक ऐसे परिवार है जहां अपने बुजुर्गों का बहुत सम्मान होता है। लेकिन ऐसे परिवारों की संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है। आज विवाह के पश्चात ‘पति-पत्नी ही संसार है, शेष सब बेकार है’ की अवधारणा बलवती हो रही है। वृद्धों के सम्मान की श्रेष्ठ मानवीय गुणों को प्रसारित करने वाली भारतीय संस्कृति से विचलित होने के दुष्परिणाम समाज को उस रहे हैं। श्रवण कुमार के देश में आत्मकेन्द्रित होती पीढ़ी संयुक्त परिवार के तमाम गुणों और लाभों को समझने को तैयार ही नहीं है। एकाकी परिवार भी लगता है पीछे छूट रहा है। हर व्यक्ति एकाकी हो रहा है। क्योंकि उन्हें स्वतंत्रता नहीं, ‘स्वच्छन्दता’ चाहिए। सुविधाएं तो सारी चाहिए लेकिन जिम्मेवारी एक भी नहीं। ऐसे में वृद्धावस्था उपेक्षित हो रही है। यह स्थिति केवल वृद्धों के लिए ही कष्टकारी नहीं है बल्कि भावी पीढ़ी के साथ भी बहुत बढ़ा अन्याय और अत्याचार है। आज जब माता-पिता दोनो कामकाजी हैं ऐसे में बच्चे क्रैच में या नौकरों के हवाले। उन्हें लाड़ और संस्कार कौन दें? यदि हम दादा-दादी को पाते-पोतियों से जोड़ दें तो ‘विवशता’ और ‘आवश्यकता’ मिलकर समाज की ‘कर्कशता’ को काफी हद तक दूर कर सकते हैं। शहरों की इस नई आधुनिक शैली में लोग अपने-आपको इतना व्यस्त पाते है कि उनके पास परिवार में एक-दूसरे से बात करने का समय तक नहीं है या वे एक- दूसरे के साथ बैठकर बातचीत करने की जरूरत ही नहीं समझते। बूढ़ों से बातचीत करना तो आज के युवक समय की बर्बादी ही समझते हैं तो क्या वृद्धों की समाज में उपयोगिता नहीं? पूरे जीवन में अनगिनत कष्ट उठाकर अर्जित किया गया अनुभव क्या समाज के किसी काम का नहीं? यह सही है कि आज के जीवन में मनुष्य की व्यस्तताएं बहुत बढ़ गई हैं। लेकिन सोशल मीडिया और टीवी में डूबे रहने वाले समय की कमी का बहाना नहीं बना सकते। आज बुजुर्गों की स्थिति उस कैलेण्डर जैसी हो गई है जिसे नये वर्ष का केलेण्डर आते ही रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता है या फिर कापी किताबों पर जिल्द चढ़ाने के काम में लिया जाता है। इसे ‘पीढ़ियों का अंतर’ कहकर अनदेखा करना मानव होने पर प्रश्नचिन्ह है। तेजी से स्मार्ट (?) हो रहे दौर में परिवार के मुखिया रहे व्यक्ति की दुर्दशा स्मार्टनेस का नहीं, शेमलेस होने का प्रमाण है। दुर्भाग्य की बात यह है कि यह किसी एक परिवार, एक नगर, प्रदेश अथवा देश की कहानी नहीं है।पूरे विश्व में बुजुर्गों के समक्ष न केवल अपने आपको बचाने बल्कि शारीरिक सक्रियता, आर्थिक विपन्नता की बढ़ी चुनौती है। यूरोप के विकसित देशों में वृद्धों को सरकार की ओर से अनेक प्रकार की सुविधा दी जाती है लेकिन हमारे अपने देश में रेल यातायात में मिलने वाली छूट को हटाने की ताक में बैठे नौकरशाहों को कोरोना ने अवसर उपलब्ध करा दिया। आज देश भर में बुजुर्गों को यातायात के नाम पर कोई छूट नहीं है। गुजरात सहित कुछ राज्यों में तो राज्य परिवहन की बसों में महिलाओं के लिए तो कुछ सीटे आरक्षित है परंतु वृद्धों के लिए एक भी सीट आरक्षित नहीं है। भारत जैसे देश में जहां वृद्धों की संख्या तेजी से बढ़ रही है परंतु उनकी समस्याओं की ओर समाज और सरकार का ध्यान बहुत कम है। पश्चिम के समृद्ध देशों की छोड़िये, भारतीय मूल के छोटे देश मॉरीशस में भी वृद्धों के कल्याण के लिए अनेक कार्यक्रम है। वहां प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को आकर्षक पेंशन, आजीवन निःशुल्क यातायात और स्वास्थ्य सेवाएं सहित अनेक सुविधाएं प्रदान की जाती है जबकि दूसरी ओर हमारे यहां बुजुर्ग महिलाओं तथा ग्रामीण क्षेत्र में रहनेवाले बुजुर्गो आर्थिक संकटों से जूझने को विवश है। यदि कही पेंशन योजना है भी तो नाममात्र की राशि के साथ बहुत सीमित लोगों को ही उपलब्ध है। ऐसे में वे किसी तरह जीवन को घसीट रहे हैं। अकेले रहने को विवश बुजुर्गों को नित्य प्रति बढ़ रहे अपराधों से हर समय खतरा बना रहता है। इधर सर्वत्र ऑनलाइन लेन-देन के कारण उनके विरूद्ध साइबर क्राइम भी बढ़ रहे है। यह संतोष की बात है मोदी सरकार ने 70 से अधिक आयु वाले सभी नागरिकों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आयुष्मान योजना लागू की है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से पांच लाख रुपए तक के वार्षिक उपचार निजी अस्पताल में करने का प्रावधान है। दिल्ली सहित कुछ राज्यों ने इस योजना में अपना अंशदान देते हुए उपचार की राशि को 5 से बढ़कर 10 लख रुपए कर दिया है लेकिन सरकार स्वयं 60 वर्ष के व्यक्ति को सेवानिवृत्ति कर देती है तो असंगठित क्षेत्र की स्थिति को समझा जा सकता है। अच्छा हो यदि इस योजना का लाभ सभी वरिष्ठ नागरिकों को दिया जाए। इस योजना के अंतर्गत अस्पताल में दाखिल होने पर ही उपचार के प्रावधान को बदल जाना चाहिए ताकि जीवन भर परिवार समाज को अपना श्रेष्ठ देने वाले वरिष्ठ नागरिकों की नियमित जांच सुनिश्चित हो सके। कुछ राज्य सरकारें कुछ वरिष्ठ नागरिकों को बुढ़ापा पेंशन देती है जबकि आवश्यकता है कि प्रत्येक वृद्ध व्यक्ति को बुढ़ापा पेंशन के साथ-साथ, अकेले वृद्धों का पुनर्वास सुनिश्चित करना चाहिए। वृद्धाश्रम (ओल्डहोम) में रहने वालों के लिए देहदान का नियम हो ताकि माता-पिता की उपेक्षा करने वालों को उनकी मृत्यु के बाद नाटक करने और नकली टस्सुए बहाने का मौका ही न मिलें। जीते जी माँ-बाप को न पूछने वालों द्वारा आयोजित दिखावे के श्राद्ध का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों को भी अपनी सक्रियता और वाणी में मधुरता बरकरार रखनी चाहिए। यदि वे समाज ‘उपयोगी’ बने रहेंगे तो उनकी स्थिति निश्चित रूप से बेहतर होगी। अपने पास यदि कुछ धन, सम्पत्ति है तो उसकी वसीयत जरूर करें लेकिन सब सौंपने से पूर्व भावना के बहाव में बहने से बचते हुए गंभीर होकर निर्णय करें। डा. विनोद बब्बर Read more » नोएडा के एक ओल्डऐज होम में लोगों की दुर्दशा
सिनेमा ‘भगवान शिव’ के किरदार में मोहित रैना July 1, 2025 / July 1, 2025 by सुभाष शिरढोनकर | Leave a Comment सुभाष शिरढोनकर फिल्म मेकर नितेश तिवारी की अपकमिंग फिल्म ‘रामायण’ का हर किसी को बेसब्री से इंतजार है। फिल्म दो पार्ट में आने वाली है जिसमें से पहला पार्ट दिवाली 2026 को सिनेमाघरों में आएगा और दूसरा पार्ट साल 2027 की दिवाली पर रिलीज होगा। फिल्म में रनबीर कपूर भगवान श्रीराम और साउथ एक्ट्रेस साई पल्लवी सीता का किरदार निभा रही […] Read more » मोहित रैना