धर्म-अध्यात्म पर्यावरण गंगा और भारत September 16, 2011 / December 6, 2011 by डॉ. सौरभ मालवीय | 16 Comments on गंगा और भारत सौरभ मालवीय गंगा शब्द का अर्थ तीव्रगामनी होता है लेकिन भारत में इस शब्द का अर्थ एक पवित्र नदी के रूप में है। इसका अर्थ पुरूषार्थ चतुष्टय की प्राप्ति का साधन है यू तो संसार में हजारों नदियां हैं और भारत में भी एक सौ तेरह विपुल जल वाली नदियां है परन्तु भारतीय आस्था में […] Read more » India गंगा
पर्यावरण बाढ़ के खतरे और चुनौतियां August 22, 2011 / December 7, 2011 by डॉ0 आशीष वशिष्ठ | Leave a Comment डॉ0 आशीषवशिष्ठ तेजी से बढ़ती आबादी, मौसम चक्र में गड़बड़ी और फेरबदल, प्रदूषित पर्यावरण, अनियोजित और अनियंत्रित विकास के फलस्वरूप देष में बाढ़ का खतरा और चुनौतियां दिनों दिन गंभीर और विध्वंसक रूप धारण कर रही हैं। हर साल बाढ़ के कारण जान-माल का भारी नुकसान होता है। बावजूद इसके सरकारी मशीनरी घिसी-पिटी तकनीक और […] Read more » बाढ़
धर्म-अध्यात्म पर्यावरण प्रदूषण मुक्त गंगा, प्रदूषण मुक्त सार्वजनिक जीवन August 19, 2011 / December 7, 2011 by लालकृष्ण आडवाणी | Leave a Comment लालकृष्ण आडवाणी परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद सरस्वती उन आध्यात्मिक विभूतियों में से एक हैं जिनका मैं अत्यंत आदर करता हूं। गंगा के किनारे उनका आश्रम सचमुच में शांति, पवित्रता और दिव्यता का स्वर्ग है। मैं अपने परिवार के साथ वहां अनेक बार गया हूं। घाट पर संध्या आरती के समय जब स्वामीजी अपने […] Read more » Ganga River Pollution गंगा प्रदूषण
पर्यावरण लेह त्रासदी के एक सालः सुनो पर्यावरण कुछ कहता है! August 18, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment स्टानजिंग कुंजाग आंग्मो पिछले वर्ष लद्दाख के लेह में बादल फटने के कारण हुई तबाही अब भी लोगों की जेहन में ताजा है। 5-6 अगस्त 2010 की रात लेह पर जैसे आसमान से कहर टूट पड़ा। बादल फटने के कारण लेह में विभीषिका का जो तांडव हुआ उसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। अचानक आई […] Read more » Leh लेह
पर्यावरण कश्मीर में जंगलों का अस्तित्व खतरे में August 18, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment जीनत जीशान फाज़िल मानव सभ्यता के विकास में जंगल का अहम योगदान रहा है। मिट्टी, पानी और हवा की शुद्धता के लिए यह फायदेमंद रहा ही है वहीं आर्थिक रूप से भी यह मनुष्य के लिए हितकर साबित हुआ है। इसके कारण ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलती है। आज […] Read more » kashmir कश्मीर जंगल
पर्यावरण बस्तर के ग्रीन कमांडो August 7, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment सुजाता राघवन वीरेंद्र की इस यात्रा का लक्ष्य बारिश के पानी को बर्बादी से बचाना था। 1997 में इसकी शुरूआत करते समय उनके मन में पारंपरिक जल स्त्रोतों, कुओं, तालाबों और छोटे-छोटे झरनों में कम होती जलधारा अधिक हावी थी। छत्तीसगढ़ में धान की खेती सबसे ज्यादा होती है। इसीलिए इसे ‘चावल का कटोरा’ भी […] Read more » Bastar बस्तर
पर्यावरण प्रकृति : भारतीय चिंतन July 22, 2011 / December 8, 2011 by राजीव गुप्ता | 5 Comments on प्रकृति : भारतीय चिंतन राजीव गुप्ता यत्र वेत्थ वनस्पते देवानां गृह्य नामानि! तत्र हव्यानि गामय!! ( हे वनस्पते! हे आनंद के स्वामी! जहां तुम दोनों के गुह्य नामों को जानते हो, वहां, उस लक्ष्य तक हमारी भेटों को ले जाओ!) या आपो दिव्या उत वा स्रवंति खनित्रिमा उत वा याः स्वयंजाः ! समुदार्था याः शुचयः पवाकस्ता आपो देवीरिः मामवन्तु! […] Read more » Nature प्रकृति
पर्यावरण स्वास्थ्य-योग रहस्मय बीमारी की सुनामी में फंसा मुजफ्फरपुर June 29, 2011 / December 9, 2011 by सतीश सिंह | Leave a Comment सुशासन का दंभ भरने वाली नीतीश कुमार की सरकार बिजली के मुद्दे पर पहले ही असफल हो चुकी है और अब स्वास्थ के मामले में भी नाकारा साबित हो रही है। विगत 13 दिनों में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में 59 बच्चों की मौत एक अज्ञात बीमारी से हो चुकी है। पहले इस बीमारी को […] Read more » Tsunami मुजफ्फरपुर रहस्मय बीमारी सुनामी
पर्यावरण प्राण, परिवेश और परिवर्तन June 21, 2011 / December 11, 2011 by गंगानन्द झा | Leave a Comment गंगानन्द झा “किसी वयस्क व्यक्ति को किसी गर्म दिन बिना भोजन और पानी के सहारा मरुभूमि के एक छाँवरहित भाग में रख दिया जाए, तो रात बीतने के पहले ही वह मर जाएगा। ” उपर्युक्त अवलोकन बतलाता है कि शरीर के प्राणवंत रहने में उसका परिवेश समान रूप से महत्वपूर्ण होता है। जीव का शरीर […] Read more » changes
आर्थिकी पर्यावरण आर्थिक विकास मॉडल बदलने से बचेगा पर्यावरण June 20, 2011 / December 11, 2011 by कुन्दन पाण्डेय | 1 Comment on आर्थिक विकास मॉडल बदलने से बचेगा पर्यावरण कुन्दन पाण्डेय दुनिया भर के मानव सम्मिलित रुप से एक वर्ष में करीब 8 अरब मीट्रिक टन कार्बन पर्यावरण में उत्सर्जित करते हैं, जबकि बदले में पर्यावरण का पारिस्थितिकी तंत्र, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार विश्व मानवता को लगभग 3258 खरब रुपये से भी कही अधिक मूल्य की सेवाएं प्रदान करता […] Read more » Nature आर्थिक विकास मॉडल पर्यावरण
धर्म-अध्यात्म पर्यावरण दूसरे यतीन दास की मौत June 16, 2011 / December 11, 2011 by आर. सिंह | 2 Comments on दूसरे यतीन दास की मौत आर. सिंह आज (15 जून) सबेरे-सबेरे जब समाचार पत्र खोला तो प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित एक समाचार ने बरबस मेरा ध्यान खींच लिया और समाचार पढने के बाद तो मैं एक तरह से बुझ सा गया. समाचार था गंगा बचाओ आंदोलन का योद्धा 115 दिनों के अनशन के बाद मौत के मुँह में चला गया. समाचार […] Read more » Swamy Nigmanand गंगा बचाओ आंदोलन स्वामी निगमानंद
पर्यावरण जल संरक्षण – तीन अरब पचास करोड़ लोगों की प्यास June 15, 2011 / December 11, 2011 by मनोज श्रीवास्तव 'मौन' | Leave a Comment मनोज श्रीवास्तव ”मौन” ”क्षिति, जल,पावक, गगन, समीरा। पंच तत्व यह अधम शरीरा॥” उक्त बात इसको प्रमाणित करती है कि मनुष्य के शरीर के लिए आवश्यक तत्व में पानी भी एक अति उपयोगी तत्व है। वर्षा-जल का नियंत्रित और संवर्धित उपयोग करके हम कई शतकों से घरेलू और औद्योगिक उपभोग का लाभ उठाते आ रहे है। […] Read more » Water Conservation जल संरक्षण