पर्यावरण ग्लेशियर संरक्षण जल संकट का प्रभावी समाधान March 21, 2025 / March 21, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment विश्व जल दिवस, 22 मार्च 2025 पर विशेष ललित गर्ग दुनिया के सामने स्वच्छ जल की समस्या गंभीर से गंभीरतर होती जा रही है। जल प्रदूषण एवं पीने के स्वच्छ जल की निरन्तर घटती मात्रा को लेकर बड़े खतरे खड़े हैं। धरती पर जीवन के लिये जल सबसे जरूरी वस्तु है, जल है तो जीवन […] Read more » Glacier conservation is an effective solution to the water crisis ग्लेशियर संरक्षण जल संकट
पर्यावरण लेख वन-संस्कृति को अक्षुण्ण रखना बड़ी चुनौती March 20, 2025 / March 20, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस 2025- 21 मार्च, 2025ललित गर्ग भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता में वनों का सर्वाधिक महत्व रहा है, वन ऑक्सीजन, भोजन, ईंधन, दवाइयां, सुगंध, कागज़, और कपडे़ और कई तरह की चीज़ें देते हैं। वन जहां वैश्विक तापमान को बनाए रखने में मदद करते हैं वहीं वर्षा को नियंत्रित करते हैं। वन भूमि कटाव […] Read more » अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस 2025- 21 मार्च वन-संस्कृति
पर्यावरण लेख गोरैया: कहां गायब हो गई यह छोटी चिडिय़ा? March 20, 2025 / March 20, 2025 by अमरपाल सिंह वर्मा | Leave a Comment विश्व गोरैया दिवस 20 मार्च पर विशेष:अमरपाल सिंह वर्मा हमारे आसपास के परिवेश में हम जितने पक्षी देखते थे, उनमें से कई पक्षी गायब हो रहे हैं। पक्षियों का विलुप्त होना पर्यावरण के संतुलन के लिए एक गंभीर संकट है। ये नन्हे पंखों वाले जीव न केवल प्रकृति की शोभा बढ़ाते हैं बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र को भी बनाए रखते हैं। जंगलों की कटाई, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और शिकार के कारण परिंदों की कई प्रजातियां लुप्तप्राय: हो चुकी हैं। घरेलू चिडिय़ा गौरैया भी ऐसे पक्षियों मेंं शामिल है, जो हमारी आंखों से ओझल होते जा रहे हैं। यदि हमने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो प्रकृति का यह अनमोल खजाना हमेशा के लिए खो सकता है। पक्षियों के संरक्षण के लिए उनके प्राकृतिक आवास बचाने, कीटनाशकों के उपयोग को कम करने और जन जागृति फैलाने की जरूरत है।एक समय था जब हर घर, आंगन, खेत-खलिहान और बगीचे गोरैया की चहचहाहट से गुंजायमान होते थे। यह नन्ही चिडिय़ा हमारे बचपन की यादों का अभिन्न हिस्सा थी लेकिन अब यह प्यारी चिडिय़ा लुप्त होती जा रही है। शहरों में तो यह लगभग अदृश्य हो चुकी है और गांवों में भी इसकी संख्या तेजी से घट रही है।गोरैया की संख्या में गिरावट अचानक नहीं आई, बल्कि यह आधुनिक जीवनशैली और पर्यावरणीय असंतुलन का परिणाम है। पहले लोग मिट्टी और लकड़ी के बने घरों में रहते थे, जहां गोरैया को घोंसले बनाने के लिए पर्याप्त जगह मिलती थी पर कंकरीट के आधुनिक घरों में गोरैया के घोंसला बनाने की गुंजाइश नहीं बची है।माना जाता है कि मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंगें छोटे पक्षियों, विशेषकर गोरैया की जैविक संरचना पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं। वायु प्रदूषण और जहरीले धुएं के कारण भी इनका जीवन संकट में आ गया है। पहले खेतों और बगीचों में गोरैया को अनाज, कीड़े-मकोड़े और फसलों के अवशेष आसानी से मिल जाते थे लेकिन कीटनाशकों और रासायनिक खादों के बढ़ते प्रयोग से हालात बदल गए हैं। कंक्रीट के जंगलों के विस्तार के कारण इनके घोंसले बनाने के लिए भी जगह नहीं बची। गर्मी में पानी की कमी भी इनके अस्तित्व के लिए खतरा बन रही है।गोरैया पर संकट के बारे में अब हर कोई जानता है। हर साल 20 मार्च को दुनिया भर में विश्व गौरैया दिवस मनाए जाने से लोग इस बारे में जागरूक हुए हैं। आम लोग गोरैया के संरक्षण के लिए प्रयास कर रहे हैं मगर फिर भी भारत समे दुनिया भर में इस चिडिय़ा की तादाद घटती जा रही है। गोरैया को बचाना बहुत जरूरी है क्यों कि यह केवल एक छोटी सी चिडिय़ा नहीं बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह खेतों और बगीचों में हानिकारक कीटों को खाकर संतुलन बनाए रखती है। अगर यह विलुप्त हो गई तो कीटों की संख्या में वृद्धि होगी जिससे फसलों को नुकसान होगा और जैव विविधता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।गोरैया को बचाने के उपायों में तेजी लाए जाने की जरूरत है। इसके लिए हमें इसे घरों में घोंसले बनाने की जगह देनी होगी। हमें लकड़ी के छोटे घर, घोंसला बॉक्स तथा मिट्टी के बर्तन छतों और बालकनी में रखकर गोरैया को लौटने का न्योता देना चाहिए। जैविक खेती को बढ़ावा देकर और कीटनाशकों के सीमित उपयोग से गोरैया को बचाने में बड़ा कदम हो सकता है। हमें छतों और बगीचों में छोटे-छोटे पानी के पात्र रखने चाहिए ताकि गर्मियों में पक्षियों को पीने का पानी मिल सके। सरकार और वैज्ञानिकों को मिलकर ऐसे उपाय करने चाहिए जिससे टावरों से निकलने वाली तरंगों का प्रभाव पक्षियों पर कम पड़े। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को मिलकर गोरैया संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।गोरैया को बचाना केवल पर्यावरण की नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं और संस्कृति की भी जरूरत है। यह चिडिय़ा हमारे बचपन की साथी रही है, हमारे आंगन की रौनक रही है। इसे वापस लाना है तो इसके लिए हमें अपने घरों, दिलों और समाज में जगह बनानी होगी। यदि हम मिलकर थोड़े से प्रयास करें तो एक दिन फिर से हमारे आंगन में गोरैया फुदकती नजर आएगी और उसकी चहचहाहट से हमारी सुबहें महक उठेंगी। अमरपाल सिंह वर्मा Read more » विश्व गोरैया दिवस 20 मार्च
पर्यावरण लेख पहाड़ों के पर्यावरण, पारिस्थितिकी तंत्र पर दवाब बढ़ा रहा प्लास्टिक प्रदूषण March 5, 2025 / March 5, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment सुनील कुमार महला पहाड़ों की हवा-पानी (आबोहवा) शुद्ध व स्वच्छ मानी जाती रही है लेकिन आजकल पहाड़ों की आबो-हवा निरंतर बदल रही है। अब पहाड़ों में भी कूड़ा-करकट के ढ़ेर नजर आने लगे हैं। कहना ग़लत नहीं होगा कि आजकल पहाड़ों में बढ़ती जनसंख्या, विकास के बीच अधिकांश प्लास्टिक, पालीथीन की खाली थैलियां, विभिन्न रैपर, […] Read more » Plastic pollution increasing pressure on mountain environment and ecosystem
पर्यावरण लेख प्रकृति ओर पर्यावरण के सुरक्षा कवच वृक्षों को बचाए रखें March 4, 2025 / March 4, 2025 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव आज हमें प्रकृति की आवश्यकता है, प्रकृति का सुरक्षा कवच वनक्षेत्र है, वनों की पहचान वहाँ उगने वाले वृक्षों से है ओर यही वृक्ष हमारे पर्यावरण के लिए हमे जीवांदायिनी वायु प्रदान कर हमारी सुरक्षा के कवच बने हुये है। हम परंपरागत होली का पर्व मनाने के लिए हर साल लाखों वृक्षों का विनाश […] Read more » प्रकृति ओर पर्यावरण
पर्यावरण लेख चुनौती है बढ़ता तापमान, बदलता वायुमंडलीय पैटर्न। February 26, 2025 / February 26, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment वैश्विक समुद्री बर्फ में खतरनाक गिरावट को रोकने के लिए जलवायु कार्यवाही निर्णायक होनी चाहिए। अनुकूली नीतियों और बेहतर ध्रुवीय निगरानी से जलवायु लचीलापन बढ़ेगा। एक टिकाऊ भविष्य उत्सर्जन को कम करने और ग्रह के नाज़ुक क्रायोस्फीयर की रक्षा करने के लिए सभी के दृढ़ संकल्प पर निर्भर करता है। कई समुदायों में जलवायु परिवर्तन […] Read more » The challenge is increasing temperature and changing atmospheric patterns.
पर्यावरण लेख बजट 2025: एमएसएमई के लिए जलवायु वित्त को मजबूत करने की दिशा में कदम February 26, 2025 / February 26, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment लेखिका:नमिता विकास, संस्थापक और प्रबंध निदेशक, ऑक्टस ईएसजीस्वप्ना पाटिल, प्रबंधक, इंडिया, एसएमई क्लाइमेट हब एमएसएमई: अर्थव्यवस्था की रीढ़ और जलवायु परिवर्तन की चुनौती छोटे और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी होते हैं। भारत में इनका योगदान जीडीपी का 30% है। 2025-26 के केंद्रीय बजट में एमएसएमई को बढ़ावा […] Read more » Budget 2025: Steps towards strengthening climate finance for MSMEs एमएसएमई के लिए जलवायु वित्त
पर्यावरण लेख लॉस एंजेलेस में भीषण जंगल की आग: जलवायु परिवर्तन बना खलनायक January 29, 2025 / January 29, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment लॉस एंजेलेस में जनवरी 2025 की शुरुआत में लगी जंगल की आग ने इतिहास में सबसे विनाशकारी आग के रूप में अपनी छाप छोड़ी है। 28 लोगों की मौत, 10,000 से अधिक घरों का नष्ट होना, और लाखों लोगों का जहरीले धुएं से प्रभावित होना इस त्रासदी की भयावहता को दर्शाता है। वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन […] Read more » Climate change becomes the villain Massive wildfire in Los Angeles लॉस एंजेलेस में भीषण जंगल की आग
पर्यावरण लेख ट्रंप का दूसरा कार्यकाल और जलवायु परिवर्तन: क्या अब भी उम्मीद है? January 21, 2025 / January 21, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment 20 जनवरी, 2025 को ट्रंप फिर से राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले हैं। ट्रंप के पहले कार्यकाल में जलवायु नीति पर जो रुख था, उससे यह साफ है कि उनके आने से अमेरिका में जलवायु परिवर्तन की दिशा में और मुश्किलें आ सकती हैं। उन्होंने पेरिस समझौते से बाहर निकलने का फैसला लिया था, […] Read more » Trump's second term and climate change: Is there still hope जलवायु परिवर्तन
पर्यावरण लेख उफ्फ ये स्मॉग ! January 21, 2025 / January 21, 2025 by डॉ घनश्याम बादल | Leave a Comment डॉ० घनश्याम बादल महानगरों में इन दिनों भारी स्मॉग और कहर बरप रहे हैं. केवल दिल्ली ही नहीं अपितु देश के लगभग हर बड़े नगर के लोग हर साल दिसंबर जनवरी के महीने कोहरे व स्मॉग के शिकार होते ही हैं । जितना बड़ा शहर, उतना ही ज्यादा कोहरा और उससे ज्यादा कोहरे से […] Read more » smog स्मॉग
पर्यावरण लेख 2025 में भी जारी रहेगा तापमान बढ़ने का सिलसिला ! January 3, 2025 / January 3, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment सुनील कुमार महला बढ़ती जनसंख्या, विभिन्न मानवीय गतिविधियों और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन, वनों की अंधाधुंध कटाई, शहरीकरण, औधोगिकीकरण के कारण धरती पर निरंतर जलवायु परिवर्तन होता चला जा रहा है। कहना ग़लत नहीं होगा कि इस जलवायु परिवर्तन का असर अब पृथ्वी पर साफ दिखने लगा है। सच तो यह है कि आज […] Read more » The trend of increasing temperature will continue in 2025 also जारी रहेगा तापमान बढ़ने का सिलसिला
पर्यावरण लेख भारत में तेजगति से बढ़ती बिलिनायर (अतिधनाडयों) की संख्या December 31, 2024 / December 31, 2024 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment भारत में आर्थिक प्रगति की दर लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर भी अन्य देशों की तुलना में द्रुत गति से आगे बढ़ रही है। भारत आज विश्व की सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है एवं भारतीय अर्थव्यवस्था आज विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था है तथा शीघ्र ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। भारत का वैश्विक व्यापार भी द्रुत गति से आगे बढ़ रहा है। कुल मिलाकर, भारत आज अर्थ के क्षेत्र में पूरे विश्व में एक चमकते सितारे के रूप उभर रहा है।लगातार तेज तो रही आर्थिक प्रगति का प्रभाव अब भारत में नागरिकों की औसत आय में हो रही वृद्धि के रूप में भी दिखाई देने लगा है। हाल ही में अमेरिका में जारी की गई यूबीएस बिल्यनेर ऐम्बिशन रिपोर्ट के अनुसार भारत में बिलिनायर (अतिधनाडयों) की संख्या 185 तक पहुंच गई है और भारत विश्व में बिलिनायर की संख्या की दृष्टि से तृतीय स्थान पर आ गया है। प्रथम स्थान पर अमेरिका है, जहां बिलिनायर की संख्या 835 हैं एवं द्वितीय स्थान पर चीन है जहां बिलिनायर की संख्या 427 है। इस वर्ष भारत और अमेरिका में जहां बिलिनायर की संख्या में वृद्धि हुई है वहीं चीन में बिलिनायर की संख्या में कमी आई है। अमेरिका में इस वर्ष बिलिनायर की सूची में 84 नए बिलिनायर जुड़े हैं एवं भारत में 32 नए बिलिनायर (21 प्रतिशत की वृद्धि के साथ) जुड़े हैं तो वहीं चीन में 93 बिलिनायर कम हुए हैं। पूरे विश्व में आज बिलिनायर की कुल संख्या 2682 तक पहुंच गई है जबकि वर्ष 2015 में पूरे विश्व में 1757 बिलिनायर थे। भारत में वर्ष 2015 की तुलना में बिलिनायर की संख्या में 123 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। बिलिनायर अर्थात वह नागरिक जिसकी सम्पत्ति 100 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गई है अर्थात भारतीय रुपए में लगभग 8,400 करोड़ रुपए की राशि से अधिक की सम्पत्ति। पिछले एक वर्ष के दौरान भारत में उक्त वर्णित बिलिनायर की सम्पत्ति 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 9,560 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गई हैं। जबकि अमेरिका में बिलिनायर की सम्पत्ति वर्ष 2023 में 4 लाख 60 हजार करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2024 में 5 लाख 80 हजार करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है। चीन में तो बिलिनायर की सम्पत्ति वर्ष 2023 में एक लाख 80 हजार करोड़ अमेरिकी डॉलर से घटकर वर्ष 2024 में एक लाख 40 हजार करोड़ अमेरिकी डॉलर की हो गई है। पूरे विश्व में बिलिनायर की सम्पत्ति बढ़कर 14 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है। उक्त प्रतिवेदन में यह सम्भावना भी व्यक्त की गई है कि आगे आने वाले 10 वर्षों में भारत में बिलिनायर की संख्या में और तेज गति से वृद्धि होगी। भारत में 108 से अधिक पारिवारिक व्यवसाय में संलग्न परिवार भी हैं जो अपने व्यवसाय को भारतीय पारिवारिक परम्परा के अनुसार आगे बढ़ा रहे हैं और भारत में बिलिनायर की संख्या में वृद्धि एवं भारतीय अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दे रहे हैं। भारतीय बिलिनायर की संख्या केवल भारत में ही नहीं बढ़ रही है बल्कि अन्य देशों में निवास कर रहे भारतीय भी बिलिनायर की श्रेणी में शामिल हो रहे हैं एवं वे अपनी आय के कुछ हिस्से को भारत में भेजकर यहां निवेश कर रहे हैं और इस प्रकार अन्य देशों में निवास कर रहे भारतीय मूल के नागरिक भी भारत के आर्थिक विकास में अपना योगदान दे रहे हैं। विशेष रूप से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को द्रुत गति से बढ़ाने में भारतीय मूल के इन नागरिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहता आया है। इस समय भारतीय मूल के एक करोड़ 80 लाख से अधिक नागरिक विभिन्न देशों में कार्य कर रहे हैं एवं प्रतिवर्ष वे अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा भारत में जमा के रूप से भेजते हैं। हाल ही में वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी किए गए एक प्रतिवेदन में यह बताया गया है कि वर्ष 2024 में 12,900 करोड़ अमेरिकी डॉलर की भारी भरकम राशि अन्य देशों में रह रहे भारतीयों द्वारा भारत में भेजी गई है। भारत पिछले कई वर्षों से इस दृष्टि पूरे विश्व में प्रथम स्थान पर कायम है। वर्ष 2021 में 10,500 करोड़ अमेरिकी डॉलर, वर्ष 2022 में 11,100 करोड़ अमेरिकी डॉलर, वर्ष 2023 में 12,500 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि भारत में भेजी गई थी। प्रतिवर्ष भारत में भेजी जाने वाली राशि की तुलना यदि अन्य देशों में भेजी जा रही राशि से करें तो ध्यान में आता है कि वर्ष 2024 में मेक्सिको में 6,800 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि भेजी गई थी, जिसे पूरे विश्व में इस दृष्टि से द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है। मेक्सिको में भेजी गई राशि भारत में भेजी गई राशि की तुलना में लगभग आधी है। चीन को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है एवं चीन में 4,800 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि भेजी गई है, फ़िलिपीन में 4,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर एवं पाकिस्तान में 3,300 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि अन्य देशों में रह रहे इन देशों के नागरिकों द्वारा भेजी गई है। भारत में भारतीय नागरिकों द्वारा अन्य देशों से भेजी जा रही राशि में उत्तरी अमेरिका, यूरोप, खाड़ी के देशों एवं एशिया के कुछ देशों यथा मलेशिया एवं सिंगापुर का प्रमुख योगदान है। जैसा कि विदित ही है कि प्रतिवर्ष भारत से लाखों युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने की दृष्टि से विकसित देशों की ओर जाते हैं। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत भारतीय युवा इन देशों में ही रोजगार प्राप्त कर लेते हैं एवं अपनी बचत की राशि का बड़ा भाग भारत में भेज देते हैं। आज तक भारतीय मूल के इन नागरिकों द्वारा एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि भारत में भेजी गई है। भारत के लिए विदेशी मुद्रा भंडार के संग्रहण में यह राशि बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है। वर्ष 2024 में पूरे विश्व में 68,500 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि विभिन्न देशों के नागरिकों द्वारा अपने अपने देशों को भेजी गई है। यह राशि वर्ष 2023 में भेजी गई राशि से 5.8 प्रतिशत अधिक है। पूरे विश्व में विभिन्न देशों में निवास कर रहे नागरिकों द्वारा भेजी गई उक्त राशि में से 20 प्रतिशत से अधिक की राशि अन्य देशों में निवास कर रहे भारतीयों द्वारा ही अकेले भारत में भेजी गई है। इस प्रकार, भारतीय मूल के नागरिकों की सम्पत्ति न केवल भारत में बल्कि अन्य देशों में भी बहुत तेजी के साथ बढ़ रही है। प्रहलाद सबनानी Read more » The number of billionaires (super-rich) is increasing rapidly in India.