विश्ववार्ता

कौन सुनेगा बांग्लादेशी हिंदुओं की आवाज ?

भारत की राजनीति अल्पंख्यकवाद पर टिकी हुई है। लोकसभा व विधानसभा चुनाव आते ही सभी दल अल्पसंख्यकों के हितों को पूरे जोर शोर से उठाने लग जाते हैं। अल्पंसख्यकों के मुददे उठाते समय इन सभी दलों को देशहित व समाजहित की कतई चिंता नहीं रहती है। लेकिन जब हमारे ही पड़ोसी देश बांग्लादेश वा पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू अल्पंसख्यकों पर अत्याचार होते हैं तब कोई अल्पसंख्यकवादी नेता, बुद्धिजीवी व मानवाधिकारी उनके हितों की रक्षा करने के लिए आगे नहीं आता।

ट्रंप की जीत और भारत

कोई आश्चर्य नहीं कि नए ट्रंप-प्रशासन में कुछ सुयोग्य भारतीयों को प्रभावशाली पद भी मिलें। ट्रंप के भारतवंशी समर्थकों का प्रभाव उन्हें भारत की तरफ जरुर झुकाएगा। तीसरा, ट्रंप ने आतंकवाद के खिलाफ जितने जबर्दस्त बोल बोले हैं, आज तक किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहीं बोले हैं। यदि ट्रंप अपनी बात पर टिके रहे तो वे विश्व में फैले हुए आतंकवाद का समूलनाश करने में कसर उठा न रखेंगे।

डोनल्ड ट्रंप के नेतृत्व मे अमेरिका बनेगा भारत का अहम साझेदार 

डोनल्ड ट्रम्प ने अपने प्रचार अभियान के दौरान पाकिस्तान के प्रति भी अपना कड़ा रुख दिखाया था। उन्होंने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि पाकिस्तान एक अस्थिर देश है और वहां मौजूद परमाणु हथियारों से पूरी दुनिया खतरे में है। ट्रम्प ने कहा था कि पाकिस्तान ने 9/11 के बाद अमेरिका को कई बार धोखा दिया है। उन्होंने अपने राष्ट्रपति बनने पर पाकिस्तान को हर गलती के लिए सजा देने की बात भी कही थी।

एफबीआई जांच मामले में हिलेरी को बड़ी राहत

इस सब के बावजूद राष्ट्रपति पद की इस दौड़ में भारतवंशीयों की अहम् भूमिका रहने वाली है। भारतीय मतदाता फ्लोरिडा, ओहियो और कोलोराडो जैसे बड़े व महत्वपूर्ण राज्यों में हवा बदलने की सामर्थ्य रखते है। इन राज्यों में भारतीय-अमेरिकन मतदाताओं का प्रतिषत 30 से 40 है, जो हिलेरी और ट्रंप दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। दरअसल ट्रंप पूरी तरह गैरराजनीतिक पृष्ठभूमि से है।

अक्साई चीन: भारत-चीन सीमा विवाद की जड़

वह रेखा जो भारतीय कश्मीर के क्षेत्रों को अक्साई चिन से अलग करती है ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा’ के रूप में जानी जाती है। अक्साई चीन भारत और चीन के बीच चल रहे दो मुख्य सीमा विवाद में से एक है। चीन के साथ अन्य विवाद अरुणाचल प्रदेश से संबंधित है। अमेरिकी राजदूत के अरुणाचल दौरा पर विवाद:-चीन ने 24 अक्टूबर2016 को अमेरिका को चेतावनी दी कि चीन-भारत सीमा विवाद में उसका कोई भी हस्तक्षेप इस विषय को ‘और भी पेचीदा’ बनाएगा और सीमा पर कड़ी मेहनत से हासिल की गई शांति में खलल डालेगा।

डोनाल्ड ट्रंप की उलटबासियां

प ने भारत, मोदी और हिंदुओं की शान में जो कसीदे काढ़े हैं, आज तक किसी भी विदेशी नेता ने नहीं काढ़े। क्यों काढ़े हैं, ये कसीदे? ट्रंप से पूछो तो वे कहेंगे कि मैं अब से 22 माह पहले भारत गया था और वहां के लोगों से मिलकर सम्मोहित हो गया था। और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी? अरे, वे तो ‘महान व्यक्ति’ हैं। मैं राष्ट्रपति बनने पर उनके चरण-चिन्हों पर चलूंगा। भारत और अमेरिका दुनिया के ‘सर्वश्रेष्ठ’ मित्र होंगे।

गुलाम कश्मीर में पाकिस्तान के विरुद्ध तेज होता जनविद्रोह

जम्मू-कश्मीर में आजादी के बाद से ही संवैधानिक व्यवस्था है और लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकारें शासन व्यवस्था देखती हैं। इसलिए संयुक्त राष्ट्र का दायित्व बनता है कि वह गुलाम कश्मीर में इन रिपोर्टों के आधार पर वहां की जनता के आजादी के बुनियादी अधिकारों के बहाली की दिशा में उचित पहल करे। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार घोषणा-पत्र के प्रति वचनबद्ध होने के कारण भारत का भी यह कर्तव्य बनता है कि वह

हे पाकिस्तान….अब तेरा क्या होगा?

उरी हमले की निन्दा देश के सभी दल एक स्वर में कर रहे हैं। निन्दा करनी भी चाहिए । भारत अपनी बहुत-सी विशेषताओं के लिए सदा प्रसिद्ध रहा है। जिसमें यह भी है कि भारत बहुत ही सोच समझ कर प्रत्येक कदम उठाता है। क्योंकि भारत एक शान्तिप्रिय राष्ट्र है, अतः शान्ति बनाये रखना इसका परम कर्तव्य स्वतः ही बन जाता है किन्तु शान्तिप्रिय होने का तात्पर्य यह भी नहीं है कि कोई हमारे एक गाल पर थप्पड़ मारे और हम दूसरा गाल आगे बढ़ाते हुए यह कहे कि ये भी बाकि है। सहने की भी कोई सीमा होती है, जब सीमा पूर्ण हो जाती है तब कुछ निश्चयात्मक सोचना ही पड़ता है। ऐसा ही कुछ भारत को सोचना और करना पड़ा।

ब्रिक्स से पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने की जरूरत

भारत की ताजा फैसलों से पाकिस्तान घबराया-बौखलाया हुआ है। जिसका परिणाम यह हुआ है कि वहाँ के आईएसआई प्रमुख कि छुट्टी कर दी गयी है। पाकिस्तान के साथ 46 अरब डालर कि सीपेक( चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) को लेकर चीन चिंतित है।

भारत के ख़िलाफ़ चीन का फ़िर दिखा दोहरा चरित्र

चीन के बलबूते पर ही पाकिस्तान भारत को परमाणु हथियार के इस्तेमाल का भय दिखाता हैं। चीन ने ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी की जलधारा रोककर भारत के खिलाफ जाने की कोशिश की है,और भारत के सिंधु जल संधि के पुनर्विचार को झटका पाकिस्तान के पक्ष में आकर लिया है।चीन बांध के जरिये पनबिजली बनाने के लिए जलधारा को रोकने की बात कह रहा हैं।

पाक के लिए भष्मासुर बनता आतंकवाद

भारत ने बिना हिंसा के हर वो कदम उठाया जो एक शांतिप्रिय देश उठा सकता है, लेकिन पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। किसी ने ठीक ही कहा है लातों के भूत बातों ने नहीं मानते। पाकिस्तान के सामने बड़ा संकट है, यदि वह विश्व बिरादरी में इस हमले की बात उठाता है तो उसे यह स्वीकारना होगा कि उसके यहां आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर संचालित किए जाते हैं, यह उसके लिए और भी परेशानी वाली बात होगी।