विश्ववार्ता

अमेरिका हमले आतंकवाद मिटाने को करता है या आतंक पैदा करने को…….

परमाणु हथियारों से लैस उत्तर कोरिया का सनकी तानाशाह किम जोंग लंबे समय से अमेरिका की आंखों में खटक रहा है. उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट और रासायनिक हथियारों को लेकर ट्रंप किम जोंग को चेतावनी दे चुके हैं, लेकिन किम जोंग ने दो टूक शब्दों में कहा कि वो अमेरिका से डरने वाला नहीं हैं. सीरिया पर अमेरिकी हमले को लेकर भी उत्तर कोरिया ने ट्रंप पर निशाना साधा था.इस हमले के बाद उत्तर कोरिया से अमेरिका के रिश्ते में भी कोई बड़ा बदलाव देखा जा सकता है.क्यो कि अमेरीका ने जो अफगानिस्तान में बम गिराया है

चीन की बेचैनी

दीगर मुल्कों में भारतीय प्रोडक्ट क्वालिटी और साख में चीन के माल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं, जिससे चीन बुरी तरह चिढ़ा हुआ है। चीन की चीप-टाइप बिजनेस ट्रिक्स के कारण कई मुल्कों के साथ तो उसके कारोबार और मुनाफे में गिरावट भी आई है। कुछ माह पहले, चीन ने कुछ अफ्रीकी देशों में अपने कारोबार को भारत से कड़ी चुनौती मिलने के बाद वहां भारतीय प्रोडक्ट्स को बदनाम करने की मुहिम छेड़ दी थी, और ‘मेड इन इंडिया’ के नकली ठप्पे लगाकर बड़े पैमाने पर अपना घटिया माल बाज़ार में उतार दिया था। ज़ाहिर है बिजनेस में सीधे ढंग से भारत का मुकाबला न कर पाने के कारण चीन खामख्वाह अरुणाचल जैसे मुद्दे उठाकर इसकी बांहें मरोड़ने की चाल चल रहा है।

भारत-बांग्ला प्रेमालाप

उनका मानना है कि 2011 में मनमोहनसिंह इस जल-संधि को संपन्न करने पर इसीलिए उतारु थे कि उधर दोनों देशों के बीच यह संधि हो और इधर ममता सरकार गिर जाए। ममता बनर्जी का कहना है कि यदि तीस्ता का पानी बांग्लादेश को दिया गया तो हमारे खेत सूख जाएंगे। लाखों किसान भूखे मर जाएंगे। इसीलिए इस बार भी यह संधि नहीं हो पाएगी। फिर भी ममता दिल्ली आकर हसीना को दिए जा रहे भोज में भाग लेंगी।

दलाई लामा पर चीन की चिढ़न

चीन को यह गलतफहमी हो गई है कि भारत उससे सख्त नाराज हो गया है। एक तो मसूद अजहर को संयुक्तराष्ट्र संघ में आतंकवादी घोषित करने का विरोध करने के कारण, दूसरा भारत को परमाणु सप्लायर्स ग्रुप का सदस्य नहीं बनने देने के कारण और तीसरा, पाकिस्तान के कब्जाए कश्मीर में से सड़क निकालने के कारण। अपनी नाराजी जाहिर करने के लिए भारत ने अब दलाई लामा को उछाला है, ऐसा चीन मानता है।

“आई एस आई” आतंकवाद का पोषक

पिछले दिनों मोदी जी के “नोटबंदी” संबंधित कठोर निर्णय का स्वागत होना चाहिये क्योंकि आईएसआई के वर्षो पुराने “जाली मुद्रा” से सम्बंधित षडयंत्रो की विस्तृत जानकारी देश की जनता को है ही नही। जिसके अंतर्गत पिछले लगभग 25 वर्षो से ‘जाली मुद्रा’ के माध्यम से हमारी अर्थव्यवस्था को क्षति पहुँचाने के साथ साथ आतंकवादियों की भी आर्थिक सहायता होती आ रही है। जिससे आतंकवादियों के सैकड़ो संगठन अपने हज़ारों स्लीपिंग सेलो द्वारा लाखों देशद्रोहियो को पाल रहे है।

क्या वाकई खुश है बांग्लादेश ?

क्या वाकई खुश है बांग्लादेश ? – रोहित पाण्डेय – पूर्णतः घटना एक सामाजिक प्रतिबिम्ब है जो यह दिखाता है कि समाज किस दिशा में अग्रसर है । धर्म से बढ़ कर धर्म की रक्षा करना कर्तव्यता का मानक है ,पर वही यदि धर्म की रक्षा से मनावत का रुन्दन हो तो धर्म की मान्यता समाप्त हो जाती है ।

गिलगिट-बाल्टिस्तान : पाकिस्तान के गाल पर करारा तमाचा

ब्लूचिस्तान ने 70 साल पहले हुए पाक के कब्जे को कभी स्वीकार नहीं किया। लिहाजा वहां अलगाव की आग निरंतर बनी हुई है। नतीजतन 2001 में यहां 50 हजार लोगों की हत्या पाक सेना ने कर दी थी। इसके बाद 2006 में अत्याचार के विरुद्ध आवाज बुलंद करने वाले 20 हजार सामाजिक कार्यकर्ताओं को अगवा कर लिया गया था, जिनका आज तक पता नहीं है। 2015 में 157 लोगों के अंग-भंग किए गए। फिलहाल पुलिस ने जाने-माने एक्टिविस्ट बाबा जान को भी हिरासत में लिया हुआ है। पिछले 16 साल से जारी दमन की इस सूची का खुलासा वाॅशिगटंन में कार्यरत संस्था “गिलगिट-बाल्टिास्तान नेशनल कांग्रेस” ने किया है।

नेपाल एक बार फिर गृहयुद्ध की ओर

नेपाल में मानवाधिकार बार-बार आरोपों के घेरे में घिरती रही है। और एक बार फिर सप्तरी कांड से मानवाधिकार के ऊपर प्रश्नचिह्न खड़ा हुआ है। सप्तरी कांड में जिस प्रकार शहीदों व घायलों को गोली लगी है उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि नेपाली पुलिस नियम-कानून जानती ही नहीं है। या जानती है तो नियम-कानून को ताक पर रखकर वहां काम करती है। अधिकतर को कमर के ऊपर पेट, छाती, गर्दन, मस्तिश्क में गोली व चोट लगा है।

अरुणाचल पर चीन का बार-बार दुस्‍साहस नेहरू की देन

चीन लगातार यह दावा पेश कर रहा है कि अरुणाचल प्रदेश चुंकि तिब्बत से लगा क्षेत्र है, इसलिए वह भारत का नहीं उसका हिस्‍सा है, जबकि सत्‍य यही है कि चीन का क्षेत्र तो तिब्‍बत भी नहीं है, वहां की निर्वासित सरकार भारत में शरणार्थी के रूप में इजरायलियों की तरह अच्‍छे दिन आने का इंतरजार करते हुए स्‍वतंत्र तिब्‍बत इस दिशा में विश्‍व जनमत तैयार करने के लिए प्रयास कर रही है।