सिसके माँ का प्यार

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दर्ज़ हुई इतिहास में, फिर काली तारीख़। मानवता आहत हुई, सुन बच्चों की चीख़।।   कब्रगाह में भीड़ है, सिसके माँ का प्यार। सारी दुनिया कह रही, बार-बार धिक्कार।।   मंसूबे जाहिर हुए, करतूतें बेपर्द। कैसा ये जेहाद  है, बोलो दहशतगर्द।।   होता है क्यूँकर भला, बर्बर कत्लेआम। हिंसा औ’ आतंक पर, अब तो लगे… Read more »

दिवाली पर दोहे – हिमकर श्याम

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चाक घुमा कर हाथ से, गढ़े रूप आकार। समय चक्र ऐसा घुमा, हुआ बहुत लाचार।।   चीनी झालर से हुआ, चौपट कारोबार। मिट्टी के दीये लिए, बैठा रहा कुम्हार।।   माटी को मत भूल तू, माटी के इंसान। माटी का दीपक बने, दीप पर्व की शान।।   कोई मालामाल है, कोई है कंगाल। दरिद्रता का… Read more »

इसीलिये इस दौर में वही जीतेगा जो सबसे बड़ा खौआ है।।

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महाराष्ट्र में भाजपा -शिवसेना का गठबंधन टूट गया। खबर है कि कांग्रेस राकांपा का भी गठबंधन टूट गया।। हरियाणा में भी मच रही दल-दल में सत्ता की तकरार। यह विचारों का संघर्ष नहीं केवल चुनावी खुन्नस बरकरार।। ‘सामना ‘ ने लिखा है की भाजपा तो केवल श्राद्ध का कौवा है। चुनाव के बाद ही पता… Read more »

राम तुम्हें वनवास मिलेगा

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दुहराता इतिहास मिलेगा राम तुम्हें वनवास मिलेगा युग बदला पर हाल वही है लेकिन रावण खास मिलेगा मिल सकते सुग्रीव परन्तु दुश्मन का आभास मिलेगा और मिलेंगे कई विभीषण वैसा नहीं समास मिलेगा नाव बिठाये केवट शायद बदले में संत्रास मिलेगा लक्ष्मण, सीता साथ भले हों क्या वैसा एहसास मिलेगा राम अगर तुम बदल गए… Read more »

रामचरित

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धरियो, रामचरित मन धरियो तजियो, जग की तृष्णा तजियो परहित सरिस धर्म मन धरियो।। मरियो, मर्यादा पर मरियो धरियो, रामचरित…. भाई बने तो स्वारथ तजियो संगिनी बन दुख-सुख सम धरियोे। मात बने तो धीरज धरियो पुत्र बने तो पालन करियो।। धरियो, रामचरित… सेवक सखा समझ मन भजियो शरणागत की रक्षा करियो। शत्रु संग मत धोखा… Read more »

हिंदी सबको जोड़ती

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  आज़ादी बेशक़ मिली, मन से रहे गुलाम। राष्ट्रभाषा पिछड़ गयी, मिला न उचित मुक़ाम।।   सरकारें चलती रहीं, मैकाले की चाल। हिंदी अपने देश में, उपेक्षित बदहाल।।   निज भाषा को छोड़कर, परभाषा में काज। शिक्षा, शासन हर जगह, अंग्रेजी का राज।।   मीरा, कबीर, जायसी, तुलसी, सुर, रसखान। भक्तिकाल ने बढ़ाया, हिंदी का… Read more »

चुना आपने ‘आप’ को

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आम आदमी ने सुमन, काम किया है खास। खास आदमी को झटक, हिला दिया विश्वास।। दिल्ली की गद्दी मिले, हुआ अनैतिक मेल। देख सुमन गद्दी वही, ना चढ़ने का खेल।। दिल्ली को वरदान या, यह चुनाव अभिशाप। चुना आपने ‘आप’ को, सुमन भुगत लें आप।। अलग ढंग से ‘आप’ का, देखो सुमन प्रयोग। पत्रकार, नेता… Read more »

भारत दुर्दशा की ताजा तस्वीर [दोहे]

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यु पी वेस्ट में इन दिनों ,चल रहा जंगल राज। मानों अब परलोक से ,निकल पड़े यमराज।। दो वाहन टकराए क्या , झगड़ पडीं दो कौम। मजहब की तकरार में , धुन्धलाया है व्योम।। मँहगाई की मार या , भ्रष्टाचार का शूल । कोल आवंटन फायलें ,कहाँ पर खातीं धूल ।। मुद्रा का अवमूल्यन ,या… Read more »

मातृ-भूमि वन्दना -राज सक्सेना

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     भरत-भूमि,भव-भूति  प्रखण्ड | उन्नत, उज्ज्वल, भारतखण्ड | सकल-समन्वित,श्रमशुचिताम, शीर्ष-सुशोभित,श्रंग-शताम | विरल-वनस्पति, विश्रुतवैभव,  पावन,पुण्य-प्रसून,शिवाम | हरित-हिमालय, हिमनद-खण्ड | उन्नत, उज्ज्वल, भारतखण्ड | नासिक्, मथुरा,   पंच-प्रयाग् ,भक्ति-भरित,भव-भूमिप्रभाग | सोमनाथ, श्रीनगर, सांईजी,   कन्या – अन्तरीप      संभाग | धीर, धवल-ध्वज, धराप्रखण्ड | उन्नत, उज्ज्वल, भारतखण्ड | सर्व-सुलभ, श्रुत-श्रेष्ठ  विहार,  केरल,   कर्नाटक,  … Read more »

उत्तराखण्ड-विनाश पर कुछ दोहे

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डा.राज सक्सेना बोतल में गंगा भरी, बुझी न अनबुझ प्यास | नदियों को झीलें बना,अदभुत किया  विकास ||   खण्ड-खण्ड पर्वत किये, खीँच-खीँच कर खाल | कब्रगाह घाटी बनी,  होकर झील    विशाल ||   मन्दिर पूरा बच गया, बची नहीं टकसाल | बना शिवालय क्षेत्र सब, शव-आलय बेहाल ||   यह थी केवल बानगी,… Read more »