आलोचना राजनीति खामोश ….अभी पटना कर रहा अपने गुमशुदा सांसद की तलाश है August 30, 2016 by आलोक कुमार | Leave a Comment दशकों से सांसदों को जनता के बीच जाने और उनकी समस्याओं से रूबरू होने की बातें होती आ रही हैं , लोकतन्त्र का तकाजा भी यही है l सुनने – सुनाने में अच्छी लगने वाली इन बातों का बाकियों पर क्या असर हो रहा है ये तो मैं नहीं जानता लेकिन हमारे ,पटना साहिब के, […] Read more » Shatrughan Sinha गुमशुदा सांसद की तलाश
आलोचना साहित्य परसाई के जबलपुर में शक्तिपुंज …!! August 20, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा प्रख्यात व्यंग्यकार स्व. हरिशंकर परसाई , चिंतक रजनीश और फिल्मों के चरित्र अभिनेता रहे प्रेमनाथ के गृह शहर जबलपुर जाने का अवसर मिला तो मन खासा रोमांचित हो उठा। अपने गृह प्रदेश उत्तर प्रदेश में रोजी – रोजगार के सिलसिले में महाकौशल के जबलपुर और आस – पास के जिलों में बस […] Read more » Featured जबलपुर परसाई शक्तिपुंज
आलोचना साहित्य कैसे रहे याद कब हुए आजाद! August 14, 2016 by जगदीश यादव | Leave a Comment जगदीश यादव कोलकाता। पन्द्रह अगस्त को भारतवासी आजादी की 70 वीं वर्षगांठ मानएगें। लेकिन शायद यह जानकर हैरत होगी कि देश की एक आबादी को यह नहीं पता है कि देश किस वर्ष में आजाद हुआ। एक सर्वेक्षण में सिर्फ दो ही सवाल पूछे गये। पहला सवाल था कि 15 अगस्त क्यों मनाया जाता है […] Read more »
आलोचना साहित्य बरखा जी! आप पहले भारतीय हैं या पत्रकार? August 3, 2016 / August 3, 2016 by विश्व गौरव | 1 Comment on बरखा जी! आप पहले भारतीय हैं या पत्रकार? बरखा दत्त के नाम खुला पत्र बरखा जी नमस्ते, आशा है राष्ट्रवाद और निष्पक्षता की बहस को नए आयाम देने के लिए आपका अध्ययन जारी होगा। मैडम, हाल ही में आपके द्वारा की गई फेसबुक पोस्ट को पढ़ा। उसे पढ़कर मन में एक सवाल उठा कि आप और आपके कुनबे के लोग पहले भारतीय हैं […] Read more » आप पहले भारतीय हैं पत्रकार बरखा जी.featured
आलोचना साहित्य गांधी पर राहुल की महापंडिताई! July 22, 2016 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment नेहरु राजवंश के युवराज राहुल गांधी अपने ही शब्द-जाल में फंस गए हैं। मार्च 2014 में देश को चुनाव का बुखार चढ़ा हुआ था। महाराष्ट्र की एक सभा में उन्होंने एक जुमला दे मारा। उन्हें यह बुरा लगा कि नरेंद्र मोदी-जैसा आदमी अपनी सभाओं में गांधी और पटेल की दुहाई दे रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक […] Read more » गांधी राहुल गांधी की महापंडिताई
आलोचना साहित्य दहशतगर्द से हमदर्दी July 13, 2016 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव मजहबी कट्टरपंथ से प्रेरित होकर आतंकवाद के रास्ते पर निकले एक गुमराह युवक की मौत पर कश्मीर में मातम और समर्थन हैरानी में डालने वाला है। इससे साफ होता है कि पीडीपी और भाजपा गठबंधन की सरकार से कश्मीर में शांति बहाली की जो उम्मीद थी, उस पर पानी फिरता लग रहा है। […] Read more » Featured दहशतगर्द से हमदर्दी
आलोचना विविधा साहित्य बुरहान वानी : आतंकियो के लिए कितने आँसू… July 12, 2016 by अजीत कुमार सिंह | Leave a Comment -अजीत कुमार सिंह कभी आतंकवादियों के मारे जाने पर किसी देश में मातम मनाते देखा है…। नहीं न ! हाँ! आतंकवादियों के मारे जाने पर हमारे देश में मातम मनाया जाता है। नमाज-ए-जनाजा होता है। इसका ताजातरीन उदाहरण कश्मीर मुठभेड़ में मारे गये कुख्यात आतंकी बुरहान वानी के बाद का दृश्य है। 8 जुलाई को […] Read more » Featured terrorist Burhan Vani आतंकवाद आतंकवादी बुरहान वानी
आलोचना साहित्य नेता तो नेता, अब जज भी! June 18, 2016 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment नेता तो नेता, अब न्यायाधीश भी पीछे क्यों रहे? सरकारी माल है। सूंत सके तो सूंत। नरेंद्र मोदी ने विदेश-यात्राओं पर दो साल में करीब एक अरब रु. खर्च कर दिए तो हमारे सर्वोच्च न्यायालय के जज करोड़-आधा करोड़ भी खर्च न करें क्या? मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने पिछले तीन साल में 36 […] Read more »
आलोचना साहित्य नेताओं की फोटोबाजी May 27, 2016 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डा. वेद प्रताप वैदिक आजकल के नेताओं ने अभिनेताओं और सुंदरियों को भी मात कर दिया है। वे खूब बन-ठनकर अपने फोटो खिंचवाते हैं। फिर उन्हें अखबारों के मुखपृष्ठों और टीवी के पर्दों पर सजवा देते हैं। यह ‘छपास’ और ‘दिखास’ की बीमारी अब महामारी बन गई है। एक-एक नेता अपने फोटो छपवानें के […] Read more » नेताओं की फोटोबाजी
आलोचना राजनीति साहित्य ‘बाप का माल’ में ही नेहरू-गांधी के नाम! May 22, 2016 by शंकर शरण | 3 Comments on ‘बाप का माल’ में ही नेहरू-गांधी के नाम! अभिनेता ऋषि कपूर ने देश में महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों को नेहरू परिवार के नाम से बाँधने के अन्याय पर ऊँगली उठाई है। सारी जगहों को नेहरू, इंदिरा, राजीव, आदि मय कर देने पर उन का सवाल हैः इस देश को ‘बाप का माल समझ रखा था?’ देश की स्मृति पर ऐसे पारिवारिक कब्जे पर पहले […] Read more » Featured नेहरू-गांधी
आलोचना साहित्य मान भी जाईये साहब ! ‘शोषण’ ही आज का नया ‘पेशा’ है… March 30, 2016 by हिमांशु तिवारी आत्मीय | Leave a Comment गजब है सियासत भी। आज राजनीतिक पार्टियों के इतर आम जिंदगियों में भी उतर आई है। कहीं न कहीं हर पेशे में अब सियासत दिखाई देने लगी है। दरअसल कुछ लोग अपने सह कर्मचारियों के साथ ही निचले तबके में कार्यरत् लोगों का भी शोषण एकदम जनता सरीखे करना चाहते हैं। जैसे कि कल तक […] Read more » exploitation is the new proffession नया 'पेशा' शोषण
आलोचना साहित्य रिश्ता: ‘आधुनिक अध्यात्म’ और व्यवसाय का ? March 26, 2016 by निर्मल रानी | 2 Comments on रिश्ता: ‘आधुनिक अध्यात्म’ और व्यवसाय का ? निर्मल रानी भारतवर्ष को अध्यात्म के क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा देश माना जाता है। हमारे देश में अनेक ऐसे तपस्वी व त्यागी,महान अध्यात्मवादी,पीर-फ़क़ीर, सूफ़ी-संत गुज़रे हैं जिन्होंने नि:स्वार्थ रूप से समाज में मानवता के परोपकार हेतु तमाम ऐसे कार्य किए जिसकी बदौलत उनके अनुयाईयों की संख्या तथा उनके प्रति श्रद्धा इस हद तक […] Read more » Featured आधुनिक अध्यात्म व्यवसाय