कविता कौन सा दीया किसके नाम है बताऊंगा April 6, 2020 / April 6, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आज नो बजे,नो दीये जलाऊंगा |कौन सा किसके नाम है दीया ,यह सबको खुले आम बताऊंगा || पहला दीया उन सब डाक्टरों के नाम |जो करते है सबका इलाज निष्काम ||दूसरा दीया उन बेचारी नर्सो के नाम |जो तुम्हारी सेवा करती है सुबह शाम ||तीसरा दीया पुलिस कर्मियों के नाम |जो परिवार छोड़ 24 घंटे […] Read more » Which diya will I tell whose name is कौन सा दीया किसके नाम
कविता साहित्य लॉकडाउन के दिनों में April 5, 2020 / April 5, 2020 by अलका सिन्हा | Leave a Comment अलका सिन्हा बहुत गुरूर था जिन्हें अपने होने काबीमारी में भी नहीं लेते थे छुट्टीकि कुदरत थम जाएगी उनके बिनासफेद तौलिए से ढकी पीठ वाली कुर्सी पर बैठकरजो बन जाते थे खुदाआज वे सब हाथ बांधे घर में बैठे हैं। असेंशियल सेवाओं में नहीं है कहींउनके काम की गिनती! अलबत्ता उसका नाम है जिसके […] Read more » लॉकडाउन के दिनों में
कविता क्या कहानी हो गई । April 5, 2020 / April 5, 2020 by अजय एहसास | Leave a Comment प्रेम की बातें अचानक बेइमानी हो गई आजकल तो प्रेम करना जान जानी हो गई। ना करूं स्पर्श उनका ना लगाएं अब गले पहले क्या था और देखो क्या कहानी हो गई।। देखकर मुझको वो खुद मेरी दिवानी हो गई लत मोहब्बत की लगी और वो रुहानी हो गई। अब वो कहती एक मीटर का […] Read more » क्या कहानी हो गई
कविता पलायन का जन्म April 5, 2020 / April 5, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment हमने गरीब बन कर जन्म नहीं लिया था हां, अमीरी हमें विरासत में नहीं मिली थी हमारी क्षमताओं को परखने से पूर्व ही हमें गरीब घोषित कर दिया गया किंतु फिर भी हमने इसे स्वीकार नहीं किया कुदाल उठाया, धरती का सीना चीरा और बीज बो दिया हमारी मेहनत रंग लाई, फसल लहलहा उठी प्रसन्नता […] Read more » पलायन का जन्म
कविता आओ घर घर दीप जलाये | April 5, 2020 / April 5, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आओ घर घर दीप जलाये |कोरोना को देश से दूर भगाये || जब हर घर में प्रकाश होगा |नई चेतना का आवास होगा ||तिमिर का तो विनाश होगा |आशा का आगमन ही होगा ||निराशा का निर्गमन होगा |हर घर घर एक विकास होगा ||विकास से घर खुशाहाली आये |आओ घर घर दीप जलाये ||कोरोना को […] Read more » light the lamp at home. आओ घर घर दीप जलाये |
कविता सबने एक दीप जलाना है घर मे | April 4, 2020 / April 6, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सबने एक दीप जलाना है घर मे |सब जगह प्रकाश हो जाएगा ||सारे संसार से यह कातिल कोरोना |स्वत: ही सम्पात हो जाएगा || बड़े दौर गुजरे है जिन्दगी में |यह दौर भी रूक जाएगा ||रोक लो अपने पावों को घरो में |कोरोना का दौर भी थम जाएगा || माना कि,संघर्ष काफी विकट है |किन्तु […] Read more » Everyone has to light a lamp in the house. सबने एक दीप जलाना है घर मे |
कविता एक नया सबेरा April 1, 2020 / April 1, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अगर शाखे रही तो,नये पत्ते भी आयेंगे |ये दिन बुरे है तो, अच्छे दिन भी आयेंगे || कुछ दिन कट गये और दिन भी कट जायेंगे |नया सबेरा आयेगा,धुंध के बादल छट जायेंगे || हर अँधेरी रात के बाद आता है नया प्रभात |सूखे पत्ते के बाद आते है तरु पर नये पात || यही […] Read more » एक नया सबेरा
कविता लाक डाउन बला नहीं,ये है सम्पूर्ण कला | April 1, 2020 / April 1, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment लांक डाउन बला नहीं,ये है सम्पूर्ण कला |घर से बाहर न निकले ,ये है मेरी सलाह || हाथ मिलाने की जगह, जोड़ो दोनों हाथ |बार बार धोते रहिये,साबुन से अपने हाथ || पीते रहिये गर्म पानी,ये छोटा सा उपचार |इससे ही कम होगा कोरोना का अधिकार || घर से बाहर न निकलिए, इससे फैलता रोग […] Read more » lock down लाक डाउन
कविता जाने क्यों लोग,घरो से निकला करते है | April 1, 2020 / April 1, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जाने क्यों लोग,घरो से निकला करते है |मोदी जी की बात को,क्यों अनसुना करते है || ये बीमारी नही महामारी हैजो सारे संसार में फ़ैल रही |इसको देख कर गगन क्याधरती भी है अब दहल रही ||चारो तरफ हाहाकार मचा है ,फिर भी कानो में न जू रंग रही |अपने पैरो कुल्हाड़ी मार रहे हो […] Read more » Know why people leave the house. घरो से निकला करते है | जाने क्यों लोग
कविता साहित्य प्रकृति March 28, 2020 / March 28, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment विध्वंसक धुंध से आच्छादित दिख रहा सृष्टि सर्वत्र किंतु होता नहीं मानव सचेत कभी प्रहार से पूर्वत्र सदियों तक रहकर मौन प्रकृति सहती अत्याचार करके क्षमा अपकर्मों को मानुष से करती प्यार आती जब भी पराकाष्ठा पर मनुज का अभिमान दंडित करती प्रकृति तब अपराध होता दंडमान पशु व पादप को धरा पर देना ही […] Read more » Nature प्रकृति
कविता साहित्य कोरोना पर माननीय मोदी जी के विचार March 26, 2020 / March 26, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment करे सम्मान हम उन सबका,जो हमारी सेवा करते है | अपनी जान जोखिम में डालकर, कोरोना से लड़ते है || रहकर घर में बन्द ही, कोरोना से हम लड़ सकते है | अंत में हमारी विजय होगी,कोरोना को हरा सकते है || नहीं बनी कोई औषधि अभी,कोरोना के इलाज़ की | घर से बाहर न […] Read more » Honorable Modis thoughts on Corona कोरोना पर माननीय मोदी जी
कविता बहन March 26, 2020 / March 26, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment दिखती है जिसमें मां की प्रतिच्छवि वह कोई और नहीं होती है बान्धवि जानती है पढ़ना भ्राता का अंतर्मन अंतर्यामी होती है ममतामयी बहन है जीवन धरा पर जब तक है वेगिनी उत्सवों में उल्लास भर देती है भगिनी आलोक कौशिक Read more »