कविता किसान की व्यथा July 19, 2020 / July 19, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment मैं किसान हूँअब आपने अनुमान लगा ही लिया होगाकि मेरे पिता एवं पितामह भीअवश्य ही किसान रहे होंगे आपका अनुमान सही है श्रीमानमेरे पूर्वज भी थे किसानकिसान का पुत्र किसान हो या ना होकिसान का पिता अवश्य किसान होता है किसान होना तो अभिशाप समझा जाता हैअगर विश्वास ना हो तो आप कभी किसी कोकिसान […] Read more » किसान की व्यथा
कविता पायलट V/S गहलौत July 19, 2020 / July 19, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment गहलौत ने ऐसा चक्कर चलाया,पायलट चारो खाने चित्त आया।कहता था मै सरकार गिरा दूंगा,पर ऐसा गिरा खुद उठ ना पाया।। अब पायलट कैसे हवा में उड़ेगा,उसका जहाज कहां लैंड करेगा।मन में मन वह पछता रहा होगा,अपनी करनी वह खुद ही भरेगा।। धोबी का कुत्ता घर का न घाट का,रहा वह अब सोलह दूनी आठ काबनना […] Read more »
कविता वे ही बने हैं वर्ण पर्ण! July 17, 2020 / July 17, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment वे ही बने हैं वर्ण पर्ण, वरण विभु किए; धारण किए हैं धर्म, मर्म वे ही हर छुए! हर रण में रथ उन्हीं का रहा, सारथी वे ही; हर देही चक्र शोध किए, शाश्वत वही! वे व्योम वायु ज्वाल जलधि भूतल भास्वर; उर चेतना से चित्र चित्त, बनाए अधर! साहित्य संस्कृति है रही, उनसे ही उभर; अध्यात्म ज्ञान गह्वर के, वे ही सुर प्रवर! राजा व प्रजा वे ही बने, जगत चलाए; ‘मधु’ महत मखे अहं चित्त, नाच नचाए! ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’ Read more » वे ही बने हैं वर्ण पर्ण
कविता एक हरियाणा लोक गीत July 17, 2020 / July 17, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सावन का महीना है भरतार,तू मुझे झूला झुलाने आईयो,तू मुझे झूला झुलााने आईयोमै करूंगी तेरा घना इंतजार।। हाथो की चूड़ी लाना,पैरों की बिछवे लाना,मांग का सिंदूर लाना,क्रीम पाउडर भी लाना।मै करूंगी सोलह सिंगार,सावन का महीना है भरतार।। कानों के कुंडल लाना,माथे का टीका लाना,नाक की नथ भी लानामाथे की बिंदिया लानाभूलना न गले का हार,सावन […] Read more » सावन का महीना
कविता हाय ये मास्क ! July 14, 2020 / July 14, 2020 by अजय एहसास | Leave a Comment पर्दे पे परदा कर रुख हमसे छिपाये रखिएवक्त कहता है हाय ये मास्क! लगाये रखिए।।लगा जरूरी तो आँखों से बात कर लेंगेपड़ी है परदे की आदत तो बनाए रखिएवक्त कहता है हाय ये मास्क! लगाये रखिए।। मास्क ने छीन लिया सुर्ख होंठों की लालीरबर ने छीन लिया उसके कानों की बालीहोंठ भी दिखते नहीं अब […] Read more » हाय ये मास्क
कविता कोरोना है इम्तिहानों का दौर July 14, 2020 / July 14, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment लौट आयेगी सभी खुशियां,अभी कुछ गमो का दौर है।जरा संभल कर रहो अभी,ये इम्तिहानों का दौर है।। बुरा वक़्त ये आया है,अच्छा वक़्त भी आयेगा।विश्वास कर ऊपर वाले पर,ये बुरा वक़्त भी टल जायेगा।। कर इबादत ऊपर वाले की,वहीं मदद तेरी कर पायेगा।ये बुरा वक़्त है चंद महीनों का,चन्द महीनों में कट जायेगा।। पहले भी […] Read more » कोरोना है इम्तिहानों का दौर
कविता “जिंदगी” क्या है July 14, 2020 / July 14, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आज “जिंदगी” संभल गई,कल सब कुछ संभल जायेगा।आज जिंदगी न संभली तो,कल सब कुछ बिगड़ जायेगा।। “जिंदगी” संवारने को तो,सारी जिंदगी पड़ी है।ये लम्हा संवार लो तुम,जहा जिंदगी खड़ी है।। “जिंदगी” है तो सब कुछ है,जिंदगी नहीं तो कुछ नहीं।अगर जिंदगी न रही तो,सारा जहान कुछ नहीं।। “जिंदगी” जिंदादिली का नाम है,बाकी सब बेकार के […] Read more » "जिंदगी" क्या है
कविता मौत एक सच्चाई July 12, 2020 / July 12, 2020 by आर के रस्तोगी | 2 Comments on मौत एक सच्चाई मौत का क्या भरोसा,कब तुझको आ जाए।भज ले प्रभु का नाम तूफिर समय न मिल पाए।। मौत है एक सच्चाई,ये सबको एक दिन आती।कब कहां किसको आयेगी,ये नहीं किसी को बतताती।। मौत कब किसको आ जाएये पता नहीं किसी को चलता।क्या बहाना लेकर ये आयेये आभास न किसी को होता।। बड़े बड़े योद्धाओं को भीये […] Read more » मौत एक सच्चाई
कविता मालिक एक।। July 9, 2020 / July 9, 2020 by अजय एहसास | Leave a Comment कोई गीता समझता है कोई कुरआन पढ़ता हैमगर ईश्वर की महिमा को नहीं नादाँ समझता है।वो तेरे पास ऐसे है, हृदय में श्वास जैसे हैजो उनका बन ही जाता है, ये बस वो ही समझता है।कोई गीता समझता है कोई कुरआन पढता है,मगर ईश्वर की महिमा को नहीं नादाँ समझता है।धर्म मजहब के नामों पर […] Read more » मालिक एक
कविता महाकाल मंदिर में विकास का सरेंडर July 9, 2020 / July 9, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment किया सरेंडर विकास ने,महाकाल के मंदिर में।काल न बचा सका,जब महाकाल था अन्दर में।। बुलाया था महाकाल ने उसको,केवल पकड़वाने को।महाकाल बना है केवल,ऐसे दरिंदो को मरवाने को।। महाकाल ने ही किया न्याय,जो कर सके न न्यायलय।इसलिए महाकाल कहलाता है,न्याय का शिवालय।। जो करता है सच्चे मन से पूजा,उसकी रक्षा वह करता।।जो होता है दुराचारी,उसकी […] Read more » Mahakal temple Surrender of vikas dubey Surrender of vikas dubey in Mahakal temple महाकाल मंदिर में विकास का सरेंडर
कविता मिथिला July 8, 2020 / July 8, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment हम प्रेमी पान मखान और आम केभगवती भी जहाँ अवतरित हुईंहम वासी हैं उस मिथिला धाम के संतानों को जगाने मिथिला की माएँसूर्योदय से पूर्व गाती हैं प्रभातीसुनाकर कहानियाँ ज्ञानवर्धकमिथिला की दादी बच्चों को सुलाती प्रतिभा जन्म लेती है यहाँ परकला और सौंदर्य का संसार हैदिखती यहाँ प्रेम की पराकाष्ठाविश्व प्रसिद्ध हर त्योहार है संस्कारों […] Read more » poem on mithila मिथिला
कविता कानपुर कांड July 8, 2020 / July 8, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जब थाने ही कानपुर में बिक जायेगे,फिर कैसे अपराधी पकड़े जाएंगे।जब पूछे जाएंगे ये प्रश्न प्रशासन सेतब प्रशासक भी मूक हो जाएंगे।। जब थाने में मर्डर हो जाता है,सारा थाना मूक हो जाता है।फिर कैसे मिलेगी सजा अपराधी को,न्यायधीश भी कुछ नहीं कर पाता है।। जब पुलिस ही मुखबिर बन जाती है,खबर अपराधी तक पहुंच […] Read more »