कविता भालू , राम टटोले बोले February 27, 2019 / February 27, 2019 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment हाथी दादा लिए सूंड में, मोबाइल ,भन्नाकर बोले। क्यों करते डिस्टर्ब बीच में, मुझको मिस्टर राम टटोले। नहीं फेस बुक ,अभी छुआ है, वाट्स एप में लगा हुआ हूँ। बार- बार तुम प्रश्न पूछते, कोतवाल जी! क्या उत्तर दूँ? Read more » भालू
कविता जनता की आवाज सुनो February 25, 2019 / February 25, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जनता में आक्रोश है,पहले अब इसको शांत करो गद्दारों को मार भगाओ,फिर पाक पर वार करो जे एन यु,ए एम यु, आंतकवाद की फैक्ट्री बंद करो सिद्धू जैसे दोगले नेताओ को,अब देश से बाहर करो मोदी जी अब लोहा गर्म है,इस पर तुम चोट करो अब मौका अच्छा है,धारा 370 को तुम खत्म करो संसद का तुम सत्र […] Read more » जनता की आवाज सुनो
कविता बात-चीत से कुछ नहीं होगा,अब तो सीधा वार करो | February 21, 2019 / February 21, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बात-चीत से कुछ नहीं होगा,अब तो सीधा वार करो | बात-चीत का समय खत्म है,अब तो करारी चोट करो || लातो के भूत बातो से न माने,अब तुम क्यों बात करो ?पहले भी बात हुई थी,उनके परिणामो पर जरा गौर करो || मिली है छूट अब सेना को,थोडा अब तुम इंतजार करो | बात करने इमरान भी […] Read more » बात-चीत से कुछ नहीं होगा
कविता है नमन उन शहीदों को,जो तिरंगा ओढ़ कर सो गये | February 20, 2019 / February 25, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment है नमन उन शहीदों को,जो तिरंगा ओढ़ कर सो गये | है नमन उन जवानो को,जो धरा पर नया बीज बो गये || क्या लिखू उनके बारे में अब,शब्द भी बौने हो गये | जो मात पिता के दुलारे थे,वे अब सभी के हो गये || ये धरा भी रो रही है, उनके शोर्य को […] Read more »
कविता February 20, 2019 / February 20, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मै करती हूँ नमन,मेरे भीगे है नयन,तुम कहाँ खो गये ?मुझ को रुलाकर, देश को जगा कर, तुम कहाँ सो गये ? देश पर हो के कुर्बान,मेरे बन के मेहरबान, अब तुम कहाँ चले गये ?नहा कर ये गंगा ओढ़ कर ये तिरंगा अब तुम कहाँ लुप्त हो गये ? मुझे चुनरी उढा कर अपनी दुल्हन बना करमांग में सिन्दूर भर […] Read more »
कविता फर्क February 20, 2019 / February 20, 2019 by विभोर त्रिखा | Leave a Comment फर्क कितना देखा है मैंने अपने जीवन में बार बार आते हुए बसंत में भी बार बार आम के वृक्षों में भी जब यह मँजरियों से ओत-प्रोत हुआ दिखते थे खिलखिलाते फूलों में भी रोज रोज का फर्क देखा सूरज, चांद, तारे और हवाओं में भी हर क्षण यह फर्क देखा- वह फर्क जीवन जीने […] Read more »
कविता प्रतिशोध की ज्वाला February 20, 2019 / February 20, 2019 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment जबसे हुआ है पुलवामा हमला, हर भारतवासी माँगे पाकिस्तान से बदला। प्रतिशोध की ज्वाला भड़क रही है, हर माँ अपने बेटे से फौज में जाने को कह रही है। कह रही है चुन-चुनकर बदला लेना, उन वीरों की शहादत का। जिन्होंने फर्ज निभाया भारत माता की हिफाजत का। बारम्बार नमन हैं उन वीर जवानों को, […] Read more » '' The Flame of Retribution ''
कविता प्रेम गीत कैसे लिखू,जब चारो तरफ गम के बादल छाये है | February 18, 2019 / February 18, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment प्रेम गीत कैसे लिखू,जब चारो तरफ गम के बादल छाये है |नमन है मेरा उन शहीदों को,जो तिरंगा ओढ़ कर आये है || चारो तरफ शोक लहर है,जनता में भी काफी आक्रोश है |अब तो केवल पाकिस्तान दुश्मन से,बदला लेना शेष है || पत्नियों का सिन्दूर पुछा है,बहनों का प्रेम धागा टूटा है |माताओ की […] Read more »
कविता कश्मीर समस्या के सात समाधान February 18, 2019 / February 18, 2019 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on कश्मीर समस्या के सात समाधान खत्म करो 370 धारा को,जिसने कश्मीर में कोहराम मचाया है | इसके कारण ही हमने,अपने प्यारे वीर जवानो को गवांया है || दाग दो गोली पत्थर बाजो पर,जो सैनिको पर पत्थर बरसाते है |मारो अब चुन चुन कर,जो मानव अधिकार का गुण गाते है || बसाओ उन बेचारे कश्मीरियों को,जो कश्मीर छोड़कर आये है | तितर बितर […] Read more »
कविता सुनो सिंहासन के रखवाले ! February 18, 2019 / February 18, 2019 by आलोक पाण्डेय | Leave a Comment -कवि आलोक पाण्डेय (जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतिपुरा में आतंकी हमले में हुतात्मा वीरों के याद में शासनतंत्र को कर्तव्यबोध दिलाती एक कवि की भावपूर्ण कविता –) कह रहा स्तब्धित खड़ा हिमालय, घुटता रो-रो सिंधु का नीर, हे भारत के सेवक जगो, क्यों मौन सुषुप्त पड़े अधीर ! क्रुर प्रहार झंझावातों में, जीवन […] Read more »
कविता ये गंगा के बलिदानी February 18, 2019 / February 18, 2019 by अरुण तिवारी | Leave a Comment जिस गंगा ने सगरे तारे, उस गंगा की खातिर प्यारे, हुए समर्पित गंग बलिदानी, अमिट रहेगी उनकी कहानी। रेती-पत्थर चुग-खोदकर मां से करते थे मनमानी, देख अति ये छेड़ाखानी, मातृ सदन के शिवानंद ने दे दी चुनौती इक ऐलानी। शिष्य निगमानंद तप पर बैठे, भूख-प्यास सब सहते देखे, हिल गई सत्ता, गई डेरानी, अस्पताल में […] Read more »
कविता मैं हैरां हूं, परेशां हूं, मैं मां तेरी… February 18, 2019 / February 18, 2019 by अरुण तिवारी | Leave a Comment मैं हैरां हूं, परेशां हूं, मैं मां तेरी… ग़ज़ब मूरख है तू प्रानी, चाहता है अमन अपना, सेहत धन चमन अपना, कहता है मां जिसको, करता है मलीं उसको, बांधता मां गले बेड़ी, ये नादानी, ये मनमानी, न जीने देगी कल तुझको, मैं हैरां हूं, परेशां हूं, मैं मां तेरी….. नसों से खींच सब पानी, […] Read more » परेशां हूं मैं हैरां हूं