कविता आओ भारत को स्वच्छ बनाये October 5, 2018 by अभिलेख यादव | Leave a Comment आओ भारत को स्वच्छ बनाये बापू के सपनों को साकार कराये तन मन धन से इसमें जुट जाये गन्दगी को भारत से दूर भगाये भारत को एक सुंदर राष्ट्र बनाये और भारत को स्वच्छ बनाये स्वच्छ भारत का अभियान चलाये पूज्य बापू को श्रद्धा सुमन चढ़ाये उनके अधूरे कामों को पूरा कर पाये उनकी […] Read more » आओ भारत को स्वच्छ बनाये सुंदर राष्ट्र सुंदर राष्ट्र स्वच्छभारत
कविता एक नई मुलाकात October 5, 2018 by अभिलेख यादव | Leave a Comment मैं जब भी फरोलता हूँ अलमारी में रखे अपने जरूरी कागजात तो सामने आ ही जाती है एक चिट्ठी जो भेजी थी वर्षों पहले मेरे दिल के महरम ने भले ही उससे मुलाकात हुए हो गए वर्षों पर चिट्ठी करा देती है अहसास एक नई मुलाकात का -विनोद सिल्ला Read more » अलमारी एक नई मुलाकात चिट्ठी दिल
कविता हर तरफ़ प्यार को फैलाना होगा October 4, 2018 by अभिलेख यादव | Leave a Comment डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ हर तरफ़ प्यार को फैलाना होगा कुछ रिश्तों को मिल-जुल के बचाना होगा ये दुनिया आबाद है प्यार से नफ़रत को हर हाल में भुलाना होगा चाँदनी तो होती ही है महज़ चार पल की चाहत के शजर ता-उम्र उगाना होगा मेरी आँखों में भी वही सपने हैं हमें मिल के इन्हें अपनाना […] Read more » आंखों चाँदनी रिश्तों हर तरफ़ प्यार को फैलाना होगा
कविता गांधी जी का जन्म दिवस या भारत का मरण दिवस October 2, 2018 by आर के रस्तोगी | 7 Comments on गांधी जी का जन्म दिवस या भारत का मरण दिवस माना गाँधी ने कष्ट सहे थे अपनी पूरी निष्ठां से भारत विख्यात हुआ है उनकी अमर प्रतिष्ठा से किन्तु अहिंसा सत्य कभी अपनों पर ही ठन जाता है माना घी और शहद अमृत है पर मिलकर विष बन जाता है अपने सारे निर्णय हम पर थोप रहे थे महान गाँधी जी पर तुष्टिकरन में खुनी […] Read more » आजादी गाँधी जिन्ना पंजाब पिस्टल शेखर सिंध
कविता धारा 497 की समाप्ति पर समाज में प्रभाव October 1, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पशु-पक्षी और मनुष्य में अब फर्क क्या रह जायेगा जब किसी का हर किसी के साथ सम्भोग हो जायेगा 497 की समाप्ति पर शादी का क्या औचित्य रह जायेगा शादी के बाद भी स्त्री पुरुष सम्भोग में स्वतंत्र हो जायेगा रहेगे न कोई समाजिक नियम जब कानून ही बन जायेगा कानूनी कपड़ा पहन कर,अब समाज […] Read more » पशु-पक्षी पुरुष शादी रजिस्ट्रेशन स्त्री
कविता श्राद्ध , श्रद्धा है या आडम्बर October 1, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जीवन में अजीब अचम्भा देखा जीते जी आदमी को भूखा देखा मरने के बाद उसको खाते देखा सदियों से चलती इस रीति को देखा श्राद्ध के नाम पर इस श्रद्धा को देखा देख रहे है आज उसे अनदेखा देखा वर्तमान की चिंता आज नहीं कर रहा भविष्य की चिंता आज किये जा रहा मानव किस […] Read more » भविष्य श्रद्धा है या आडम्बर श्राद्ध
कविता श्राद्ध पर कुंडलिया September 28, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जब तक श्रद्धा न हो,श्राद्ध करना है बेकार किसी ने हाल न पुछा,जब था बाँप बीमार जब था बीमार,किसी ने दवाई को न पूछा मर गया बेचारा बाँप,पहने हुए एक कच्छा कह रस्तोगी कविराय,रिवाज ऐसे बनाओ श्राद्ध मत करो तुम,जीते जी खाना खिलाओ जीते जी बाँप के साथ करते दंगम दंगा मरने पर सारे बेटे […] Read more » दवाई बाँप बेटे श्राद्ध पर कुंडलिया
कविता दर्द भी दिया अपनों ने September 28, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ भी दिया अपनों ने उम्मीद भी अपनों से जाएँ कहा बिना उनके अपने तो अपने होते हैं। वो दूर चले गए कितने या हम पास न रह पाए कहने को तो बहुत है पर अपने तो अपने होते हैं। गिला-शिकवा अपनों से आस लगा के छोड़ देना आख़िर भुलाएँ तो कैसे अपने तो अपने होते हैं। Read more » दर्द भी दिया अपनों ने
कविता दुआ-ए-सलामती September 27, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | 3 Comments on दुआ-ए-सलामती डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ रखता हूँ हर कदम ख़ुशी का ख़याल अपनी डरता हूँ फिर ग़म लौट के न आ जाए अब भुला दी हैं रंज से वाबस्ता यादें यूँ आके ज़िंदगी में ज़हर न घोल जाएँ इक बार जो गयी तो फिर न आएगी यहाँ शौक महँगा है लबों पे हँसी रखने का अपनी आबरू का ख़याल […] Read more » कश्ती साहिल जहर हँसी
कविता हुनरमंद है वो September 26, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment विनोद सिल्ला वो भिगो लेता है शब्दों को स्वार्थ की चाशनी में रंग जाता है अक्सर अवसरवादिता के रंग में वो धार लेता है मौकाप्रसती के आभूषण ओढ़ लेता है आवरण आडम्बरों का नहीं होता विचलित रोज नया रंग बदलने में आगे बढ़ने के लिए रख सकता है पाँव अपने से अगले के गले पर […] Read more » रंग हुनरमंद है वो
कविता माँ का स्थान कोई नहीं ले सकता — September 25, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी माँ का स्थान कोई नहीं ले सकता माँ का ऋण कोई चुका नहीं सकता कितने भी लाख करो दान व तीर्थ माँ के बिना उद्धार नहीं हो सकता माँ के बैगेर कोई तुम्हे जन्म नहीं दे सकता माँ के बैगेर कोई कोख में रख नहीं सकता लेती है माँ,कितनी प्रसव पीड़ा जन्म […] Read more » माँ माँ बाँप शिक्षक स्वर्ग
कविता सबसे अच्छा खिलौना September 25, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment विनोद सिल्ला बचपन में मेरे मित्र थोड़ी सी अनबन होने पर दुखाने के लिए मेरा दिल मेरे मिट्टी के खेल-खिलौने तोड़ देते थे लेकिन आजकल के मित्र थोड़ी सी अनबन में दिल ही तोड़ते हैं शायद आजकल यही सबसे अच्छा खिलौना है Read more » सबसे अच्छा खिलौना