कविता साहित्य कविता ; सुमन अंत में सो जाए – श्यामल सुमन April 28, 2012 / April 28, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन कैसा उनका प्यार देख ले आँगन में दीवार देख ले दे बेहतर तकरीर प्यार पर घर में फिर तकरार देख ले दीप जलाते आँगन में मगर अंधेरा है मन में है आसान उन्हीं का जीवन प्यार खोज ले सौतन में अब के बच्चे आगे हैं रीति-रिवाज से भागे हैं संस्कार ही […] Read more » poem Poems कविता कविता सुमन अंत में सो जाए
कविता साहित्य कविता ; भाई से प्रतिघात करो – श्यामल सुमन April 28, 2012 / April 28, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन मजबूरी का नाम न लो मजबूरों से काम न लो वक्त का पहिया घूम रहा है व्यर्थ कोई इल्जाम न लो धर्म, जगत – श्रृंगार है पर कुछ का व्यापार है धर्म सामने पर पीछे में मचा हुआ व्यभिचार है क्या जीना आसान है नीति नियम भगवान है न्याय कहाँ नैसर्गिक […] Read more » poem Poems कविता कविता भाई से प्रतिघात करो
कविता महत्वपूर्ण लेख रघुनाथ सिंह की दो कविताएं April 27, 2012 / June 6, 2012 by रघुनाथ सिंह | Leave a Comment सत्यमेव जयते सत्यमेव जयते, सत्यमेव जयते मच रहा है शोर घोर और चारों ओर हमारे सेक्यूलरवादियों में हमारे अंगरेजी मीडिया में और हमारी अफसरशाही में दण्डित करो करो दण्डित बच न पावे भाग न जाये धूर्त है यह बड़ा भारी बोल कर सच कलुषित कर दिया है इसने हमारा सुन्दर प्यारा नारा सत्यमेव जयते, सत्यमेव […] Read more » धर्मनिरपेक्षता सत्यमेव जयते हिंदू
कविता साहित्य कविता ; चिंता या चेतना – मोतीलाल April 27, 2012 / April 27, 2012 by मोतीलाल | Leave a Comment मोतीलाल अपना कोई भी कदम नए रुपों के सामने कर्म और विचार के अंतराल में अनुभव से उपजी हुई कोई मौलिक विवेचना नहीं बन पाता है और विचार करने की फुर्सत में ज्यादा बुनियादी इलाज उपभोक्ताओं की सक्रियता के बीच पुरानी चिंता बनकर रह जाती है शून्य जैसी हालत मेँ स्वीकृति के विस्तार को […] Read more » poem Poems कविता चिँता या चेतना कविता
कविता साहित्य कविता ; मंत्र – श्यामल सुमन April 27, 2012 / April 27, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन लोकतंत्र! जिसकी आत्मा में पहले “लोक”, बाद में “तंत्र”। मगर अब नित्य पाठ हो रहा- “तंत्र” का नया मंत्र। परिणाम! नीयत, नैतिकता बेलगाम मानव बना यंत्र और तंत्र – स्वतंत्र, लोक – परतंत्र। Read more » poem Poems कविता श्यामल सुमन कविता
कविता कविता – चिँता या चेतना-मोतीलाल April 26, 2012 / April 26, 2012 by मोतीलाल | Leave a Comment मोतीलाल अपना कोई भी कदम नए रुपोँ के सामने कर्म और विचार के अंतराल मेँ अनुभव से उपजी हुई कोई मौलिक विवेचना नहीँ बन पाता है और विचार करने की फुर्सत मेँ ज्यादा बुनियादी ईलाज उपभोक्ताओँ की सक्रियता के बीच पुरानी चिँता बनकर रह जाती है शून्य जैसी हालात मेँ स्वीकृति के विस्तार को […] Read more » poem by motilal कविता- चिँता या चेतना-मोतीलाल
कविता साहित्य कविता ; अंधेरी गलियों में………… – नवल किशोर शर्मा April 15, 2012 / April 15, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment प्रस्तुत कविता अंधेरी गलियों में………… उस जन-समूह को समर्पित है जो कि विभिन्न फसादों एवं मानवीय विद्रूपताआं के कारण अपना अमन-चैन खो चुके हैं। अंधेरी गलियों में………………. अंधेरी गलियों में भटकना फिर रहा मेरा ये मन, ढूंढता हूं एक पल कि शांति,चैन और अमन।। सोचता हूं जब कभी बन्द करके अपने नयन, किस […] Read more » poem Poems अंधेरी गलियों में............कविता नवल किशोर शर्मा
कविता कविता-हमको बिरासत में झुकी गरदन मिली-प्रभुदयाल श्रीवास्तव April 13, 2012 / April 13, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 6 Comments on कविता-हमको बिरासत में झुकी गरदन मिली-प्रभुदयाल श्रीवास्तव हमको बिरासत में झुकी गरदन मिली वह शेर हम बकरी बने जीते रहे मिल बैठकर तालाब को पीते रहे| वह बाल्टियों पर बाल्टियां लेते रहे हम चुल्लुओं को ही फकत सींते रहे| पाबंदियों के गगन में हमको उड़ा मन मुताबिक डोर वे खींचे रहे| शोर था कि कान कौआ ले गया […] Read more » poem poem by Prabhudayal Srivastav कविता कविता-प्रभुदयाल श्रीवास्तव
कविता गजल-श्यामल सुमन- दीपक April 13, 2012 / April 14, 2012 by श्यामल सुमन | 2 Comments on गजल-श्यामल सुमन- दीपक श्यामल सुमन जिन्दगी में इश्क का इक सिलसिला चलता रहा लोग कहते रोग है फिर दिल में क्यों पलता रहा आँधियाँ थीं तेज उस पर तेल भी था कम यहाँ बन के दीपक इस जहाँ में अनवरत जलता रहा इस तरह पानी हुआ कम दुनियाँ में, इन्सान में दोपहर के बाद सूरज जिस […] Read more » poem Poems कविता दीपक कविता
कविता गजल-श्यामल सुमन- इंसानियत April 13, 2012 / April 14, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन इंसानियत ही मज़हब सबको बताते हैं देते हैं दग़ा आकर इनायत जताते हैं उसने जो पूछा हमसे क्या हाल चाल है लाखों हैं बोझ ग़म के पर मुसकुराते हैं मजबूरियों से मेरी उनकी निकल पड़ी लेकर के कुछ न कुछ फिर रस्ता दिखाते हैं खाकर के सूखी रोटी लहू बूँद […] Read more » poem Poems कविता कविता इंसानियत
कविता गजल-श्यामल सुमन- पहलू April 13, 2012 / April 14, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन मुस्कुरा के हाल कहता पर कहानी और है जिन्दगी के फलसफे की तर्जुमानी और है जिन्दगी कहते हैं बचपन से बुढ़ापे का सफर लुत्फ तो हर दौर का है पर जवानी और है हौसला टूटे कभी न स्वप्न भी देखो नया जिन्दगी है इक हकीकत जिन्दगानी और है ख्वाब से […] Read more » poem Poems कविता पहलू कविता
कविता गजल-श्यामल सुमन- आदत April 12, 2012 / April 14, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन मेरी यही इबादत है सच कहने की आदत है मुश्किल होता सच सहना तो कहते इसे बगावत है बिना बुलाये घर आ जाते कितनी बड़ी इनायत है कभी जरूरत पर ना आते इसकी मुझे शिकायत है मीठी बातों में भरमाना इनकी यही शराफत है दर्पण दिखलाया तो कहते […] Read more » poem Poems आदत कविता कविता