कविता आदमी की फितरत June 9, 2022 / June 9, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment भावना में बह जाता है जब आदमी।दिल की बात कहता है तब आदमी।। परख लेता है जब किसी को भी आदमी।दिल में बसा लेता या बस जाता आदमी।। मनमुटाव पर कहता कुछ नही आदमी।दूर हो जाता है जो पास होता आदमी।। पढ़ लेता है जब किताब कोई आदमी।अच्छी चीजे ग्रहण कर लेता है आदमी।। दर्द […] Read more » आदमी की फितरत
कविता आज की सियासत June 7, 2022 / June 7, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सियासत में अब शराफत रही कहां है,अच्छे इंसान की जरूरत रही कहां है।अब सियासत में झूठे का बोलबाला है,नेक नेताओ की हिफाजत रही कहां है।। सियासत में भ्रष्टाचार का बोल बाला है,बुरे नेताओ का मुंह यहां बहुत काला है।सत्ता के लिए वे कुछ भी कर सकते है,अच्छे नेताओ के मुंह पर लगा ताला है।। जिसके […] Read more » today's politics आज की सियासत
कविता मोहनजोदड़ो की नारियां जो साड़ी सिंदूर पहनती थी वही आर्या सीता सावित्री व हिन्दू भार्या पहनती June 4, 2022 / June 4, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम दस हजार साल की पुरानी भारतीय सभ्यताव संस्कृति की बात किस मुंह से करते?दस हजार साल की धर्म संस्कृति सभ्यता की बातवही कर सकते जो सनातन धर्म केकिसी मत पंथ से जुड़े वंश परम्परा को मानते! तुम तो खुद को खुदा बाबा आदम के पोतेअरबी फारसी तुर्की के पिंजरबंध रट्टू तोते समझते! […] Read more » Arya Sita used to wear Savitri and Hindu Bharya. The women of Mohenjodaro who used to wear vermilion
कविता दशमेश पिता गुरु गोविंद सिंह सोढ़ी की गाथा June 2, 2022 / June 2, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक जब देश धर्म खतरे में था, हिंदुत्व कर रहा था चीत्कार औरंगजेब ध्वस्त कर रहा था मठ मंदिर देवालय गुरु दरवार हिन्दुओं का कर रहा था धर्मांतरण या भीषण संहार! ऐसे ही संकट की घड़ी में सोढ़ी राय गुरु गोविन्द ने प्रभु राम की मर्यादा भक्त्ति, भगवान कृष्ण का गीता ज्ञान और सहस्त्रबाहु की ले तलवार, लिया था असिधर सिंह अवतार! एक संत,सिपाही, साहित्यकार बनकर, तीन पुश्त परपितामह गुरु अर्जुनदेव पिता गुरु तेग बहादुर माता गुजरी चार पुत्र अजित, जुझार, फतेह, जोरावर और स्वयं सर्वबंश की बली देकर देश-धर्म-जाति का किया था उद्धार! ये कथा है तबकी जब कश्मीरी हिन्दुओं पर औरंगजेब का सुनकर एक ऐसा फरमान “छः माह में मुस्लिम बन जा नहीं तो होगा कत्लेआम” नवम गुरु तेग बहादुर हुए परेशान ये जानकर कि देश धर्म को चाहिए किसी महान आत्मा का बलिदान! तब दशम गुरु बालक गोविंद ने अपने गुरु पिता को […] Read more » दशमेश पिता गुरु गोविंद सिंह सोढ़ी की गाथा
कविता राम कृष्ण बुद्ध जिन दस गुरुओं के दरबार एक June 1, 2022 / June 1, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकबुद्ध का मत, वैदिक धर्म में सुधार था,बौद्ध कोई अलग धर्म नहीं, विचार था,बुद्ध राम कृष्ण का अगला अवतार था,बुद्ध-महावीर,राम-कृष्ण का विस्तार था! बुद्ध ने वही किए जो राम कृष्ण ने किए,राम ने वेद विकृतिकर्ता रावण संहार दिए,कृष्ण ने पशुबलिग्राही इन्द्र पूजा बार दिए,तीर्थंकर नेमीपंथी कृष्ण ने गौ उद्धार किए! बुद्ध ने राम […] Read more » Rama Krishna Buddha whose court is one of the ten gurus राम कृष्ण बुद्ध जिन दस गुरुओं के दरबार एक
कविता पैरो की है हम असली ढाल May 31, 2022 / May 31, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पैरो की है हम असली ढाल,उनकी रखते हम रखवाल।चलते चलते हम घिस जाते,तब भी हम साथ निभाते।। हमको सब बाहर छोड़ जाते,अंदर वालो को तकते रहते।खुद ड्राइंग रूम में बैठ जाते,हमको दरवाजे पर छोड़ जाते।। मार पिटाई जब कभी होती,हमारी सहायता सब है लेते।फिर क्यों करते हमारा अपमानमनुष्य से ज्यादा क्या हम शैतान ? जब […] Read more » We are the real shield of feet पैरो की है हम असली ढाल
कविता करते है प्यार कितना,ये बता सकते नहीं हम। May 31, 2022 / May 31, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment करते है प्यार कितना,ये बता सकते नहीं हम।दिल में जो बसा है,उसे हटा सकते नहीं हम।। सांसों में बसे हो तुम,धड़कनों में बसो हो तुम।तेरी चाहत को कभी मिटा सकते नहीं हम।। प्यासी हूं कब से मै,अब तो आ जाओ सनम।मेरी प्यास को कोई बुझा सकता नहीं सनम।। न मर सकते है,न जी सकते है […] Read more » How much we love we cannot tell. करते है प्यार कितना ये बता सकते नहीं हम।
कविता ले लो दुवाये अपने मां बाप की May 31, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment ले लो दुवाये अपने मां बाप की,इससे बड़ी दौलत न है आप की।जो जीवन में इससे बंछित हो पाया,उसने जीवन में कभी सुख न पाया।। जैसा बोओगे,वैसा ही तुम काटोगे,बोए पेड़ बबूल के आम कैसे खाओगे।प्रकृति का यह नियम चला आया है,इसको कोई भी झूठा कर न पाया है।। जो अपने मां बाप को दुःख […] Read more »
कविता जब हिन्दुत्व पर हुआ अत्याचार दस गुरुओं ने लिया अवतार May 30, 2022 / May 30, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजब-जब हिन्दुत्व पर हुआ था अत्याचारतब तब प्रभु राम कृष्ण बुद्ध महावीरदस सिख सद्गुरुओं ने लिए थे अवतार! हर हिन्दू पूजते हैं प्रकृति मूर्ति प्रस्तरकरते धर्मग्रंथ गुरुग्रंथसाहिब का आदरमानते बौद्ध जैन सिख आर्य धर्माचार! हिन्दुओं ने आक्रांत किया ना किसी परहिन्दुओं ने सद्व्यवहार किया सब परहमसे फैला अहिंसा धर्म संपूर्ण धरा पर! जब […] Read more » When Hindutva was persecuted ten gurus took incarnation
कविता गर्मी का ईलाज May 27, 2022 / May 27, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सूनी पड़ी सभी गली व सड़के।बाहर हो रही आग की बारिश,सारे जीव पानी को है तरसे।। सूखे पड़े है सब ताल तलैया,पशु पक्षियों का हाल है बेहाल।तरस रहे है वे सब पानी को,कोई रख रहा न उनका ख्याल।। सूख गए है सभी पेड़ और पौधे,सूख गई है सारी हरी भरी घास।सूख गए है सारे वन […] Read more » गर्मी का ईलाज
कविता चिन्ता और चिता में अन्तर May 23, 2022 / May 23, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment चिन्ता ही चिता समान है।चिता मौत का फरमान है।। चिन्ता जिंदे को जलाती है।चिता मुर्दे को जलाती है।। चिता ही अंतिम सच है।चिन्ता पहला ही सच है।। चिता को दो गज जमीन चाहिए।चिन्ता को केवल दिमाग चाहिए।। चिता में आदमी जलता है।चिन्ता में आदमी घुलता है।। चिता तो एक बार जलाती है।चिन्ता तो बार बार […] Read more » difference between pyre and anxiety चिन्ता और चिता में अन्तर
कविता तुम बनो बुद्ध करो नहीं अपनों से युद्ध May 23, 2022 / May 23, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम बनो बुद्ध करो अपने आपको शुद्ध,शुद्धि चाहिए स्वमन वचन और कर्म में! तुम बनो बुद्ध करो नहीं अपनों से युद्ध,युद्ध त्याग दो क्षुद्र स्वार्थपूर्ति के क्रम में! तुम बनो बुद्ध होना नहीं कभी भी क्रुद्ध,क्रोध का परित्याग हो मानववादी धर्म में! तुम बनो बुद्ध होना नहीं कभी भी क्षुब्ध,क्षोभ अफसोस पछतावा हो […] Read more » do not fight with your loved ones You become a Buddha