कविता आयु निर्धारण सिर्फ जन्म नहीं मानसिक आत्मिक स्थिति से होती June 29, 2022 / June 29, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमानव की आयु का निर्धारणसिर्फ जन्म नहीं मानसिक स्थितिऔर आत्मा के पूर्व जन्मों सेसंग्रहित ज्ञान व यादाश्त से होती! सब मानव समकालीन होते समकाल मेंएक साथ आत्मा की सदेह उपस्थिति सेचाहे कोई उम्र से बालक हो या युवक होया वृद्धावस्था में हीं क्यों ना आ गए हों! सृष्टि के आरंभ सेपरमात्मा की उपस्थिति […] Read more » Age is determined not only by birth but by mental and spiritual condition. आयु निर्धारण सिर्फ जन्म नहीं मानसिक आत्मिक स्थिति से होती
कविता ये कैसा स्वर्ग लोक जन्नत कश्मीर है? June 27, 2022 / June 27, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकये कैसा स्वर्ग लोक जन्नत कश्मीर है?बहुत बहाया इसने मानव का रुधिर है! आरंभ में कश्मीर था जनपद गांधार का,गांधार, कम्बोज था जंबूद्वीप भारत कासोलह महाजनपद में सम्मिलित हिस्सा! कश्मीर पश्चिमोत्तर में शारदा मठ से लेकरवनिहाल तक केशर की धरती का अंत छोर,शारदा पीठ स्थित मधुमती नदी के तीर पर,आज शारदा पीठ है […] Read more » What kind of heaven is this Lok Jannat Kashmir ये कैसा स्वर्ग लोक जन्नत कश्मीर है?
कविता पहला प्यार नहीं मिलता।। June 27, 2022 / June 27, 2022 by अजय एहसास | Leave a Comment हो जाती है शादी जबरनदिल का द्वार नहीं खुलताइस दुनिया में कभी किसी कोपहला प्यार नहीं मिलता । मिला साथ ना जीवन भर काबस कुछ पल ही साथ रहेछूटने में होती है मुश्किलजब हाथों में हाथ रहेहार गए दुनिया से तोबाहों का हार नहीं मिलताइस दुनिया में कभी किसी कोपहला प्यार नहीं मिलता।। है जो […] Read more » First love is not found.
कविता स्वधर्म को जानो बुराई नहीं अच्छाई मानो June 25, 2022 / June 25, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमैं स्वधर्म को पहचानता हूंबुराई नहीं अच्छाई को जानता हूंमैं उस भगवान राम को मानता हूंजिन्होंने माता पिता की आज्ञा मानीअनुज हेतु त्याग,लघुजनों को मान दिया! मैं उस राम की निंदा करता हूंजिन्होंने अति आदर्शवाद दिखाकरपरित्याग किया धर्मपत्नी सीता का साथअबला नारी को वन-वन भटका दियाविप्र गुहार पर तपी शूद्र का संहार किया! […] Read more » consider it good not evil Know your religion स्वधर्म को जानो बुराई नहीं अच्छाई मानो
कविता आशाओं के रंग June 23, 2022 / June 23, 2022 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment बने विजेता वो सदा, ऐसा मुझे यकीन ।आँखों में आकाश हो, पांवों तले जमीन ।। तू भी पायेगा कभी, फूलों की सौगात ।धुन अपनी मत छोड़ना, सुधरेंगे हालात ।। बीते कल को भूलकर, चुग डालें सब शूल ।बोयें हम नवभोर पर, सुंदर-सुरभित फूल ।। तूफानों से मत डरो, कर लो पैनी धार ।नाविक बैठे घाट […] Read more » आशाओं के रंग
कविता पिता है तो लगता परिवार है। June 20, 2022 / June 20, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पिता है तो लगता परिवार है।वरना दुनिया में सब बेकार है।। पिता है तो सोने में सुहागा है।वरना सारा परिवार अभागा है।। पिता परिवार की धन दौलत है।घर में सब कुछ उसकी बदौलत है।। पिता परिवार की रीड की हड्डी है।जैसे शरीर में पीठ वाली हड्डी है।। पिता बाहर गर्मी में जब जलता है।तब कही […] Read more » If there is a father then there is a family.
कविता भगवान की तलास में इंसान June 18, 2022 / June 18, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment ढूंढ रहा है जंगल जंगल,मृग अपनी कस्तूरी को।देख पाया न अपनी नाभि,छिपी हुई कस्तूरी को।। ढूंढ रहा है मंदिर मंदिर,भक्त अपने भगवान को।मिल न पाया भगवान उसे इस भोले इंसान को।। बढ़ चुका है विज्ञान काफी,पाया न भगवान को।सारी सृष्टि में समाया ,फिर भी ढूंढे भगवान को।। खुद से दूर चला गया इंसान,क्या ढूंढेगा भगवान […] Read more » भगवान की तलास में इंसान
कविता पिता नीम का पेड़ June 18, 2022 / June 18, 2022 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment हम कच्चे से है घड़े, और पिता कुम्हार !ठोक पीट जो डांट से, हमको दे आकार !!★★★★सिर पे ठंडी छाँव-सा, पिता नीम का पेड़ !कड़वा लगता है मगर, है जीवन की मेड़ !!★★★★पाई-पाई जोड़ता, पिता यहाँ दिन रात !देता हैं औलाद को, खुशियों की सौगात !!★★★★पापा ही अभिमान है, पापा ही संसार !नगपति से अविचल […] Read more » पिता नीम का पेड़
कविता कहो रेणुका तुम्हारा क्या अपराध था? June 17, 2022 / June 17, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | 1 Comment on कहो रेणुका तुम्हारा क्या अपराध था? —विनय कुमार विनायककहो रेणुका तुम्हारा क्या अपराध थाजो तुम्हारे पुत्र ने तुम्हारी गर्दन काट दीशास्त्र कथन है पूत कपूत हो सकतामगर माता कुमाता कभी नहीं हो सकती! यदि ये शास्त्र कथन सही हैतो माता रेणुका कुमाता कभी नहीं हुई होगीन कल थी न आज है ना कल होगीमां रेणुका तुम्हारे साथ जरूर कोई छल हुई […] Read more » Tell Renuka what was your crime कहो रेणुका तुम्हारा क्या अपराध था?
कविता ऐसे अपूर्ण ज्ञान से नही है देश समाज का हित June 16, 2022 / June 16, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजाति तो हमेशा से बुरी होतीमगर अच्छे और बुरे होने कीसंभावना हर व्यक्ति में होती! व्यक्ति भी अक्सर जातिवादी होतेअपनी जाति के व्यक्ति को देखकरव्यक्ति हो जाते हैं हर्षित आकर्षित! दूसरी जाति के लोग हो जातेपरित्यक्त अनाकर्षक उपेक्षित विकर्षित! इस मानसिकता की कोई दवा नहींवेद शास्त्रों में भी टुकड़े टुकड़े मेंज्ञान को बांटने […] Read more » ऐसे अपूर्ण ज्ञान से नही है देश समाज का हित
कविता मेघ से प्रार्थना June 15, 2022 / June 15, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment भीषण गर्मी जेठ की,व्याकुल हृदय उदास। देख तुम्हे आकाश में,कर बैठे थे आस।। कर बैठे थे आस,अब कबहु बरसेगे, जीव जंतु व्याकुल है,सब जल को तरसेगे। कह रस्तोगी कविराय,क्यो करते शोषण, समाप्त करो अब तो,ये गर्मी भीषण।। आस जगाकर मेघ तुम,करते गए निराश। खग मृग मानव मीन जग,सबका ह्रदय हताश।। सबका ह्रदय हताश,जल को सब […] Read more » मेघ से प्रार्थना
कविता बुढ़ापा काटने के गुरु मंत्र June 15, 2022 / June 15, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बुढ़ापे को जवानी की तरह जियो,पानी को भी अमृत की तरह पियो।कट जायेगा आसानी से बुढ़ापा तुम्हारा,हर गम को खुशी की तरह तुम जियो। बुढ़ापा जीवन में सभी को आता है,जवानी आती है तो बचपन जाता है।जीवन के हर पड़ाव को मजे से जियो,तभी जीने का मजा जीवन में आता है।। बहु बेटे को दस […] Read more » बुढ़ापा काटने के गुरु मंत्र