कविता पैरो की है हम असली ढाल May 31, 2022 / May 31, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पैरो की है हम असली ढाल,उनकी रखते हम रखवाल।चलते चलते हम घिस जाते,तब भी हम साथ निभाते।। हमको सब बाहर छोड़ जाते,अंदर वालो को तकते रहते।खुद ड्राइंग रूम में बैठ जाते,हमको दरवाजे पर छोड़ जाते।। मार पिटाई जब कभी होती,हमारी सहायता सब है लेते।फिर क्यों करते हमारा अपमानमनुष्य से ज्यादा क्या हम शैतान ? जब […] Read more » We are the real shield of feet पैरो की है हम असली ढाल
कविता करते है प्यार कितना,ये बता सकते नहीं हम। May 31, 2022 / May 31, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment करते है प्यार कितना,ये बता सकते नहीं हम।दिल में जो बसा है,उसे हटा सकते नहीं हम।। सांसों में बसे हो तुम,धड़कनों में बसो हो तुम।तेरी चाहत को कभी मिटा सकते नहीं हम।। प्यासी हूं कब से मै,अब तो आ जाओ सनम।मेरी प्यास को कोई बुझा सकता नहीं सनम।। न मर सकते है,न जी सकते है […] Read more » How much we love we cannot tell. करते है प्यार कितना ये बता सकते नहीं हम।
कविता ले लो दुवाये अपने मां बाप की May 31, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment ले लो दुवाये अपने मां बाप की,इससे बड़ी दौलत न है आप की।जो जीवन में इससे बंछित हो पाया,उसने जीवन में कभी सुख न पाया।। जैसा बोओगे,वैसा ही तुम काटोगे,बोए पेड़ बबूल के आम कैसे खाओगे।प्रकृति का यह नियम चला आया है,इसको कोई भी झूठा कर न पाया है।। जो अपने मां बाप को दुःख […] Read more »
कविता जब हिन्दुत्व पर हुआ अत्याचार दस गुरुओं ने लिया अवतार May 30, 2022 / May 30, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजब-जब हिन्दुत्व पर हुआ था अत्याचारतब तब प्रभु राम कृष्ण बुद्ध महावीरदस सिख सद्गुरुओं ने लिए थे अवतार! हर हिन्दू पूजते हैं प्रकृति मूर्ति प्रस्तरकरते धर्मग्रंथ गुरुग्रंथसाहिब का आदरमानते बौद्ध जैन सिख आर्य धर्माचार! हिन्दुओं ने आक्रांत किया ना किसी परहिन्दुओं ने सद्व्यवहार किया सब परहमसे फैला अहिंसा धर्म संपूर्ण धरा पर! जब […] Read more » When Hindutva was persecuted ten gurus took incarnation
कविता गर्मी का ईलाज May 27, 2022 / May 27, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सूनी पड़ी सभी गली व सड़के।बाहर हो रही आग की बारिश,सारे जीव पानी को है तरसे।। सूखे पड़े है सब ताल तलैया,पशु पक्षियों का हाल है बेहाल।तरस रहे है वे सब पानी को,कोई रख रहा न उनका ख्याल।। सूख गए है सभी पेड़ और पौधे,सूख गई है सारी हरी भरी घास।सूख गए है सारे वन […] Read more » गर्मी का ईलाज
कविता चिन्ता और चिता में अन्तर May 23, 2022 / May 23, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment चिन्ता ही चिता समान है।चिता मौत का फरमान है।। चिन्ता जिंदे को जलाती है।चिता मुर्दे को जलाती है।। चिता ही अंतिम सच है।चिन्ता पहला ही सच है।। चिता को दो गज जमीन चाहिए।चिन्ता को केवल दिमाग चाहिए।। चिता में आदमी जलता है।चिन्ता में आदमी घुलता है।। चिता तो एक बार जलाती है।चिन्ता तो बार बार […] Read more » difference between pyre and anxiety चिन्ता और चिता में अन्तर
कविता तुम बनो बुद्ध करो नहीं अपनों से युद्ध May 23, 2022 / May 23, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम बनो बुद्ध करो अपने आपको शुद्ध,शुद्धि चाहिए स्वमन वचन और कर्म में! तुम बनो बुद्ध करो नहीं अपनों से युद्ध,युद्ध त्याग दो क्षुद्र स्वार्थपूर्ति के क्रम में! तुम बनो बुद्ध होना नहीं कभी भी क्रुद्ध,क्रोध का परित्याग हो मानववादी धर्म में! तुम बनो बुद्ध होना नहीं कभी भी क्षुब्ध,क्षोभ अफसोस पछतावा हो […] Read more » do not fight with your loved ones You become a Buddha
कविता जब नारी स्वर्ग पर ललचाएगी जीवन में दुख पाएगी May 20, 2022 / May 20, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकस्वर्ण मृग की चाहत में सीता माईअति दुख पाई और नारी को चेताई!जब जब नारी स्वर्ण पर ललचाएगी,तब दाम्पत्य जीवन में दुःख पाएगी! बाली रावण ने भाईयों को दुत्कारा,दुश्मन से हारा पैगाम दिया न्यारा!जब भी भाई को दुत्कार भगाओगे,तब तो शत्रु के हाथों मारे जाओगे! जब नारी तुम रुप पर इतराओगी,तब तो तुम […] Read more » she will find sorrow in life When a woman is tempted in heaven
कविता ऐसा था गौतम बुद्ध संन्यासी का कहना May 17, 2022 / May 17, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकऐसा था गौतम बुद्ध संन्यासी का कहना,आरोग्य परमं लाभ: स्वास्थ्य ही है जीवन,संतुष्टि परमं धनम् संतोष ही है परम धन,विश्वास सबसे बड़ा बंधु; विश्वास आश्वासन,निर्वाण प्राप्ति है सबसे बड़ा सुख को पाना! ऐसा था गौतम बुद्ध संन्यासी का कहना,शरीर की जरूरत रोटी कपड़ा मकान पाना,मन की आवश्यकता गीत संगीत साहित्य,आत्मा की चाह चैतन्य […] Read more » ऐसा था गौतम बुद्ध संन्यासी का कहना
कविता हरे राम हरे कृष्ण मंत्र गान से चैतन्य हो गए महाप्रभु समान May 16, 2022 / May 16, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकराम कहो या कह लो श्यामदोनों में कुछ न अंतर जान! दोनों हैं एक अन्तर्यामी प्रभुदोनों एक व्यक्त महा प्राण! राम कहो या कह लो श्यामदोनों हैं एक ही रुप भगवान! आस्था बहुत बड़ी बात होतीहिन्दू होते हैं बड़े आस्थावान! राम ने राक्षसों को संहारा थाकृष्ण संहारे रिश्तेदार शैतान! राम कहो या कह […] Read more »
कविता टूट रहे परिवार ! May 15, 2022 / May 15, 2022 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment बदल गए परिवार के, अब तो सौरभ भाव !रिश्ते-नातों में नहीं, पहले जैसे चाव !! टूट रहे परिवार हैं, बदल रहे मनभाव !प्रेम जताते ग़ैर से, अपनों से अलगाव !! गलती है ये खून की, या संस्कारी भूल !अपने काँटों से लगे, और पराये फूल !! रहना मिल परिवार से, छोड़ न देना मूल !शोभा […] Read more » Families falling apart!
कविता आदमी कितना नादान है May 13, 2022 / May 13, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आदमी स्वयं ही बुरा है,दूसरो को बुरा बताता है।वह अपने स्वार्थ के लिए,दूसरो को खूब सताता है।। आदमी कितना नादान है,मंदिर में शंख घंटा बजाता है।सोया हुआ वह स्वयं है,भगवान को जाकर जगाता है।। आदमी स्वयं कितना भूखा है,रोज भगवान से मांगने जाता है।स्वयं को माया की भूख लगी है,भगवान को भोग लगाने जाता है। […] Read more » how stupid is the man आदमी कितना नादान है