कविता जब नारी स्वर्ग पर ललचाएगी जीवन में दुख पाएगी May 20, 2022 / May 20, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकस्वर्ण मृग की चाहत में सीता माईअति दुख पाई और नारी को चेताई!जब जब नारी स्वर्ण पर ललचाएगी,तब दाम्पत्य जीवन में दुःख पाएगी! बाली रावण ने भाईयों को दुत्कारा,दुश्मन से हारा पैगाम दिया न्यारा!जब भी भाई को दुत्कार भगाओगे,तब तो शत्रु के हाथों मारे जाओगे! जब नारी तुम रुप पर इतराओगी,तब तो तुम […] Read more » she will find sorrow in life When a woman is tempted in heaven
कविता ऐसा था गौतम बुद्ध संन्यासी का कहना May 17, 2022 / May 17, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकऐसा था गौतम बुद्ध संन्यासी का कहना,आरोग्य परमं लाभ: स्वास्थ्य ही है जीवन,संतुष्टि परमं धनम् संतोष ही है परम धन,विश्वास सबसे बड़ा बंधु; विश्वास आश्वासन,निर्वाण प्राप्ति है सबसे बड़ा सुख को पाना! ऐसा था गौतम बुद्ध संन्यासी का कहना,शरीर की जरूरत रोटी कपड़ा मकान पाना,मन की आवश्यकता गीत संगीत साहित्य,आत्मा की चाह चैतन्य […] Read more » ऐसा था गौतम बुद्ध संन्यासी का कहना
कविता हरे राम हरे कृष्ण मंत्र गान से चैतन्य हो गए महाप्रभु समान May 16, 2022 / May 16, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकराम कहो या कह लो श्यामदोनों में कुछ न अंतर जान! दोनों हैं एक अन्तर्यामी प्रभुदोनों एक व्यक्त महा प्राण! राम कहो या कह लो श्यामदोनों हैं एक ही रुप भगवान! आस्था बहुत बड़ी बात होतीहिन्दू होते हैं बड़े आस्थावान! राम ने राक्षसों को संहारा थाकृष्ण संहारे रिश्तेदार शैतान! राम कहो या कह […] Read more »
कविता टूट रहे परिवार ! May 15, 2022 / May 15, 2022 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment बदल गए परिवार के, अब तो सौरभ भाव !रिश्ते-नातों में नहीं, पहले जैसे चाव !! टूट रहे परिवार हैं, बदल रहे मनभाव !प्रेम जताते ग़ैर से, अपनों से अलगाव !! गलती है ये खून की, या संस्कारी भूल !अपने काँटों से लगे, और पराये फूल !! रहना मिल परिवार से, छोड़ न देना मूल !शोभा […] Read more » Families falling apart!
कविता आदमी कितना नादान है May 13, 2022 / May 13, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आदमी स्वयं ही बुरा है,दूसरो को बुरा बताता है।वह अपने स्वार्थ के लिए,दूसरो को खूब सताता है।। आदमी कितना नादान है,मंदिर में शंख घंटा बजाता है।सोया हुआ वह स्वयं है,भगवान को जाकर जगाता है।। आदमी स्वयं कितना भूखा है,रोज भगवान से मांगने जाता है।स्वयं को माया की भूख लगी है,भगवान को भोग लगाने जाता है। […] Read more » how stupid is the man आदमी कितना नादान है
कविता अज़ीब हूनर हमने इस पैसे में देखा। May 12, 2022 / May 12, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अज़ीब हूनर हमने इस पैसे में देखा।अपनो को अपनो से अलग होता देखा।। अज़ीब हूनर हमने इस माया में देखा।आज इसके पास कल दूसरे के पास देखा।। अज़ीब हूनर हमने इस वक्त में देखा।जवानी देकर बचपन को लुटते देखा।। हूनर दिखाने वाले को सड़को पर देखा।बे हूनर वालो को राज महलों में देखा।। जिस औलाद […] Read more » Strange talent we saw in this money. अज़ीब हूनर हमने इस पैसे में देखा।
कविता मातृ दिवस पर मां को समर्पित कुछ पंक्तियां May 9, 2022 / May 9, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जब जब इस धरा पर मैं आऊं,मां तेरी गोदी का स्पर्श मै पाऊं।चुका न सकता मां के ऋण को,चाहे सौ सौ जन्म लेकर मैं आऊं। मां के चरणों में मै सदा शीश झुकाऊं,कभी भी उससे मै अलग न हो पाऊं।कटे शीश अगर कभी भी मेरा,उसे अपनी भारत मां को मै चढ़ाऊं।। मातृ दिवस मै रोज […] Read more » Few lines dedicated to mother on Mother's Day मातृ दिवस पर मां को समर्पित कुछ पंक्तियां
कविता अक्सर पिता पति पुत्र समझते नहीं नारी की भाषा May 9, 2022 / May 9, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमाता व पिता में बहुत अधिक जैविक अंतर होता,‘एक्स’ मातृगुणसूत्र औ ‘वाई’ पितृगुणसूत्र कहलातापिता पुरुष का सृजन दो विजातीय गुणधर्म युक्तपिता ‘एक्स’ ‘वाई’ गुण सूत्रों के युग्मनज से होता! मां नारी का जन्म दो सजातीय एक्स गुणसूत्रों सेमाता का संतुलित होना जैविक गुण स्वभाव होता,पिता दो विपरीत गुणधर्म से अभिव्यक्ति को पाता,पिता विजातीय […] Read more » Often father and son do not understand woman's language अक्सर पिता पति पुत्र समझते नहीं नारी की भाषा
कविता बुढ़ापे का दर्द May 5, 2022 / May 5, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आज अपने ही घर से,बे घर हो गए।जो कभी अपने थे,वे पराए हो गए।। अपना घर होते हुए,वृद्धाश्रम चले गए।कोई नही पूछता,वे वृद्ध कहां चले गए।। जो जिगर के टुकड़े थे,वे दुश्मन हो गए।पता नही वे आज ऐसे क्यों हो गए।। हम मजबूत थे,आज मजबूर हो गए।कभी असरदार थे,आज बेअसर हो गए।। सुनता नही कोई […] Read more » old age pain बुढ़ापे का दर्द
कविता आप तो गुलाब है,कभी बबूल न बनिए। May 4, 2022 / May 4, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आप तो गुलाब है,कभी बबूल न बनिए।दुनिया में आप,कभी बे असूल न बनिए।। अच्छा रास्ता,सभी को दिखाओ तुम।किसी के रास्ते का,तुम सूल न बनिए।। निमटा लो हर बात को ,तुम ख़ुद ही।किसी बात के लिए,तुम तूल न बनिए।। रक्खे याद तुम्हे,ये दुनिया अब सारी।किसी के लिए भी,तुम भूल न बनिए।। रोको किसी को मत,जो कही […] Read more » आप तो गुलाब है कभी बबूल न बनिए।
कविता सच में खुदा का सौवां नाम है नेक इंसान May 4, 2022 / May 4, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकनहीं हिन्दू बनो ना हीं मुसलमान बनो,ना किसी अनदेखे परखे को खुदा कहो! न राम को खोजो मंदिर के भगवान में,तुमसे अच्छा कोई राम हो सकता नहीं! खुदा अगर कोई है, तो खुद तुम ही हो,तुमसे अच्छा कोई खुदा हो सकता नहीं! अगर कोई राम हो सकता है तो बंधुओं,तुमसे अच्छा राम बन […] Read more » Truly the hundredth name of God is a noble person सच में खुदा का सौवां नाम है नेक इंसान
कविता ईद का चांद तो तुम्हे दिखाना ही पड़ेगा। May 3, 2022 / May 3, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment ईद का चांद तो तुम्हे दिखाना ही पड़ेगा।आस्मां को ज़मीं पर तो झुकाना पड़ेगा।। कब तक रखोगे तुम दो दिलो को अलग।कभी न कभी तो उनको मिलाना पड़ेगा।। कब तक रखोगे खूबसूरत चेहरा छिपाकर।कभी न कभी तो उसको दिखाना पड़ेगा।। ईद आई है तो उसे गले लगाना ही होगा।कुछ न कुछ तो उसे हमे दिलाना […] Read more » You will have to show the moon of Eid. ईद का चांद तो तुम्हे दिखाना ही पड़ेगा।