कविता फिर कोई बुद्ध जिन ना हुए वस्त्र त्यागकर July 13, 2022 / July 13, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकईश्वर ने एक जैसा बनाया नहीं मानव को,सबके सब अलग हैं अद्वितीय हैं बेजोड़ हैं,एक सा रंगरूप मन बुद्धि ना मिले सबको,फिर क्यों तुम एक जैसे बनाने पर तुले हो? लाख चाहने पर फिर से कोई राम ना बना,कोई कृष्ण ना हुआ कोई बुद्ध ना हो पाया,कोई दूसरा महावीर ईसा पैगम्बर नहीं आया,पिता […] Read more » Then a Buddha who renounced his clothes फिर कोई बुद्ध जिन ना हुए वस्त्र त्यागकर
कविता कैसे बताऊं मेरे कौन हो तुम July 12, 2022 / July 12, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कैसे बताऊं,मेरे कौन हो तुम,मेरी जिंदगी में समाए हो तुम। मेरे चांद हो तुम मेरे सूरज हो तुम,मै तुम्हारी धरा मेरे गगन हो तुम।तुम बिन होत नही कही उजियारामेरे जीवन के प्रकाश भी हो तुम।। मेरे गीत हो तुम मेरे संगीत हो तुममेरे मीत हो तुम मेरी प्रीत हो तुम।तुम्हारे बिन सूना है सारा संसारमेरी […] Read more » कैसे बताऊं मेरे कौन हो तुम
कविता मौत का क्या भरोसा July 12, 2022 / July 12, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मौत का क्या भरोसा,कब तुझको आ जाए।भज ले प्रभु का नाम तूफिर समय न मिल पाए।। मौत है एक सच्चाई,ये सबको एक दिन आती।कब कहां किसको आयेगी,ये नहीं किसी को बताती।। मौत कब किसको आ जाएये पता नहीं किसी को चलता।क्या बहाना लेकर ये आयेये आभास न किसी को होता।। बड़े बड़े योद्धाओं को भीये […] Read more » मौत का क्या भरोसा
कविता काश ! तेरी निगाह मेरे से मिल जाती July 11, 2022 / July 11, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment काश ! तेरी निगाह मेरे से मिल जाती,मुझको तेरी पनाह भी मिल जाती।मै सुनाता तुझे के सावन के गीत,तेरी मेरी हरियाली तीज मन जाती।। नज़रों से नज़रे जो दोनो की टकराई,एक दिल से दूसरे दिल की हुई मिलाई।ये कैसी जिंदगी में प्यार की हुई घटना,जो दोनो ने जिंदगी भर एक दूजे से निभाई।। नजर को […] Read more » If only ! your eyes meet mine
कविता मानवता के धर्म से ही इंसानियत फैलेगी July 11, 2022 / July 11, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकईश्वर खोजने नही पाने की चीज है,खोजी जाती वो चीज जो खोई होती,खुद के अंदर से लेकर बाहर तक मेंहर जगह ईश्वर की उपस्थिति होती! ईश्वर से कुछ मांगना प्रार्थना नहीं है,ईश्वर की अराधना धन की चाह नहीं,ईश्वर की साधना सपना पाना नहीं है,ईश्वर को पा लो, बांकी सब सपना है! ईश्वर को […] Read more » Humanity will spread only through the religion of humanity मानवता के धर्म से ही इंसानियत फैलेगी
कविता विश्व जनसंख्या दिवस July 11, 2022 / July 11, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बढ़ेगी जब आबादी,अच्छे दिन कैसे आएंगे।होगे जब दस बच्चे,फिर बुरे दिन तो आएंगे।। बढ़ती जा रही है जनसंख्या कैसे नियंत्रण कर पाएंगे।करा नहीं नियंत्रण तुमने फिर तुम कहां हम जाएंगे।। पड़ी है बेड़ियां जनसंख्या की भारत मां के पैरों में।चलता रहा देश में ऐसा,रोड़ी चुभेगी मां के पैरों में।। बढ़ेगी जनसंख्या देश की,विकास रुक जाएगा।रोकी […] Read more » World Population Day
कविता एक ॐकार सतनाम बांकी सब सिर्फ नाम July 8, 2022 / July 8, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकएक ॐकार सतनाम, बाकी सब सिर्फ नाम,एक ॐ उच्चार सत सत्व सद् सत्य काम! एक ॐ अनाहत अनहद नाद, बांकी आहत,एक ॐ धुन निर्गुण एक ॐ ध्वनि शाश्वत! सारी ध्वनियां घर्षण से उपजती द्वंद्व आवाजएक ॐ आवाज है जो निकलती बिना साज! जब आहत होती प्रकृति ध्वनि निकलती तब,जब शांत होता व्योम तब […] Read more » एक ॐकार सतनाम बांकी सब सिर्फ नाम
कविता आदमी आज क्या क्या भूल गया। July 8, 2022 / July 8, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आदमी आज क्या क्या भूल गया।नई आने पर वह पुरानी भूल गया।। जब से टूथ पेस्ट बाजार में आया है।वह नीम की दातुन करना भूल गया है।। जब से घर में पानी नल लगवाया है।नदियों में स्नान करना वह भूल गया है।। जब से पिसा पिसाया आटा घर आया है।वह चक्की पर गेहूं पिसाना भूल […] Read more » What did the man forget today
कविता दान देकर भी प्रहलाद पौत्र बली दानव और कर्ण सूतपुत्र ही रह गए July 5, 2022 / July 5, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकयाजक जाति का दान पाने का अधिकार एक अस्त्र था,जिसके आगे राजा महाराजा निरस्त महाजन पस्त था!दान की महिमा इतनी अधिक गाई गई धर्म शास्त्रों मेंकि दान नहीं देनेवाले कृपण और विप्रद्रोही कहलाते थे! याजकों में दान की लिप्सा इतनी अधिक बढ़ गई थीकि गोधन स्वर्ण कन्या व जान भी दान मांग लेते […] Read more » Prahlad's grandson Bali Danav and Karna Sutaputra remained. प्रहलाद पौत्र बली दानव और कर्ण सूतपुत्र
कविता आस्तिक हो तो मानो सबका एक ही है ईश्वर July 4, 2022 / July 4, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकये रिश्ता है अपनापन और इंसानियत का,ये रिश्ता है आत्मीयता और रुहानियत का!इंसान हो इंसान से खुशी खुशी गले मिलो,चाहे मानते हो किसी भी धर्म मजहब को! रुह सभी जीव जन्तुओं की एक जैसी होती,आत्मा सबकी एक परमात्मा से ही निकली!मानव शरीर को पाना आत्मा की उपलब्धि,मानव देही आत्मा सचेत होती पाओ मुक्ति! […] Read more » If you are a believer it is as if there is only one God.
कविता तक्षशिला विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय पर संस्थापक कौन ज्ञात नहीं? July 4, 2022 / July 4, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअगर विश्व में भारतीय ऋग्वेद हैप्रथम काव्य कृति तो तक्षशिला भीथा विश्व का प्रथम विश्वविद्यालयभारतीय गंधर्वदेश गांधार में स्थित! तक्षशिला को गंधर्व देश गांधार मेंरामानुज भरत ने पुत्र तक्ष के लिएव दूसरे पुत्र पुष्कल हेतु पुष्कलावतदो नगर बसाया था गांधार देश में! गांधार का उल्लेख ऋग्वेद में है, लेकिनगांधार वर्णन वाल्मीकि रामायण में […] Read more » Taxila is the world's first university but who is not known to be the founder? तक्षशिला विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय
कविता आदमी हो आदमी के लिए कुछ भला करो June 30, 2022 / June 30, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकराजनीति ना करो आदमी होआदमी के लिए कुछ भला करो जीओ और मरो! जब तुम काम करते हो मरने मारने के गंदे,तब तुम हो नहीं किसी रहमदिल खुदा के बंदे! ये झूठ के सब धर्म मजहब पूजा नमाज हज,झूठ के सारे ईश्वर खुदा रब जो फैलाते नफरत! अगर कोई जीवन दे नही सकता […] Read more » be a man do something good for the man आदमी हो आदमी के लिए कुछ भला करो