कविता जीव ही जीव के जन्म मृत्यु का कारण होता November 18, 2021 / November 18, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम जिसे देखते होजरुरी नहीं कि वह वही होजिसे तुमने अभी-अभी देखाएक नन्हे शिशु के रूप मेंहो सकता है पिछली बारजब तुमने उसे देखा होगातब वह कुछ और रहा होगाअभी-अभी तुम देखते होकिसी सांप बिच्छू के बच्चे कोहो सकता है कुछ दिन पूर्ववे तुम्हें दिखे हों कहीं मरते हुएबूढ़े जवान पुरुष स्त्री रूप […] Read more » Jiva is the cause of birth and death of a living being जीव ही जीव के जन्म मृत्यु का कारण होता
कविता हिन्दुत्व को समझो जिसमें सत्य अहिंसा दया है November 17, 2021 / November 17, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकवो हिन्दुत्व को क्या जाने व समझेंगे,जो पूर्वाग्रह में जीते और दुराग्रही होते,जो आक्रांताओं की हमेशा तारीफ करते,यह जानकर भी कि उन आक्रांताओं नेउनके हिन्दू पूर्वजों को घोर यातना देकरउनकी मां-बहन-बेटियों को बलात्कृत करतलवार की जोर पे उन्हें गुलाम किए थे! वे अब भी विदेशी धार्मिक गुलाम बने हैं,अनबूझ विदेशी धर्म मजहब के […] Read more » Understand Hindutva in which truth is non-violence mercy हिन्दुत्व को समझो जिसमें सत्य अहिंसा दया है
कविता जातिवादियों में न्यायिक चरित्र नहीं होता November 17, 2021 / November 17, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजातिवादियों में न्यायिक चरित्र नहीं होता,जातिवादी जन शुभसंस्कार से रिक्त होता! जातिवादी भाई भतीजावाद में लिप्त होता,जातिवादी जन दूसरों को हकवंचित करता! जातिवादी आत्ममुग्धता में स्वहित साधता,अयोग्य रिश्तेदारों के लिए पद खरीद लेता! जातिवादी एक जातिगत उपाधि ग्रहण कर,जाति एकता के नाम पराए से दूरी बनाता! कृष्ण-शिशुपाल-कंश की एक हो गई जाति,वृष्णि-चेदि-उग्रसेनी की […] Read more » Casteists do not have judicial character जातिवादियों में न्यायिक चरित्र नहीं होता न्यायिक चरित्र
कविता आह्वान November 17, 2021 / November 17, 2021 by शकुन्तला बहादुर | Leave a Comment Read more » Invocation आह्वान
कविता बचपन के वो गीत ! November 15, 2021 / November 15, 2021 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment स्याही-कलम-दवात से, सजने थे जो हाथ !कूड़ा-करकट बीनते, नाप रहें फुटपाथ !!बैठे-बैठे जब कभी, आता बचपन याद !मन चंचल करने लगे, परियों से संवाद !!मुझको भाते आज भी, बचपन के वो गीत !लोरी गाती मात की, अजब-निराली प्रीत !!मूक हुई किलकारियां, चुप बच्चों की रेल !गूगल में अब खो गए,बचपन के सब खेल !!छीन लिए […] Read more » बचपन के वो गीत
कविता ईश निंदा के बहाने दूसरे धर्म के ईश्वर की बेअदबी करना November 15, 2021 / November 15, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम अपने ईश की निंदाऔर धार्मिक किताब की बेअदबी के बहानेकरते हो दूसरे धर्म के देवी देवताओं कीमूर्तियों की तोड़फोड़ व निर्दोष लोगों की हत्या! क्या तुम ऐसा करके पराए धर्म केईश्वर रब खुदा के साथ बेअदबी नहीं कर रहे हो? आखिर तुम इतने बर्वर क्यों हो जाते होऔर निरीह अल्पसंख्यक लोगों का […] Read more » defaming a god of another religion on the pretext of blasphemy ईश निंदा के बहाने दूसरे धर्म के ईश्वर की बेअदबी करना
कविता पैरों की पूजा होती मगर मुख हाथ पेट पूज्य नहीं होते November 15, 2021 / November 15, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकपैरों की पूजा होती मगरमुख हाथ पेट पूज्य नहीं होतेपैर चाहे जिनके भी होंपैर पूजने की परंपरा है भारत भूमि मेंआखिर पैर क्यों पूजनीय हैक्योंकि पैर कभी इच्छा याचनाऔर ग्रहण नहीं करतेपैर त्यागी और पथ प्रदर्शन करतेमुख हाथ पैर ग्रहणशील होतेमुख और पेट को चाहिए भोजनब्राह्मण और बनिए की तरहएक करता है भोजन […] Read more » Feet are worshiped but mouth stomach are not worshipped. पैरों की पूजा होती मगर मुख हाथ पेट पूज्य नहीं होते
कविता अगर हिन्दुत्व बचाना है तो जातिवाद होगा मिटाना November 14, 2021 / November 14, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | 1 Comment on अगर हिन्दुत्व बचाना है तो जातिवाद होगा मिटाना —विनय कुमार विनायकआज ये जुमला उछल रहा है,वोट और बेटी जाति में देना! जहां जुगाड़ नहीं बैठ रहा हो,तो जाति समीकरण बिठाना! जाति के नाम पर इतराना,पराई जाति से दूरी बनाना! ये पतन की राह है बंधुवर,इस मुगालते में नहीं रहना! जाति, जाति में भेद करना,अपनी जाति से प्रेम करना! हिन्दू धर्म की बड़ी बुराई […] Read more » If Hindutva is to be saved then casteism will be eradicated. अगर हिन्दुत्व बचाना है तो जातिवाद होगा मिटाना
कविता खुशहाली November 14, 2021 / November 14, 2021 by प्रभात पाण्डेय | Leave a Comment अपने पन की बगिया है ,खुशहाली का द्वारजीवन भर की पूंजी है ,एक सुखी परिवारखुशहाली वह दीप है यारोंहर कोई जलाना चाहता हैखुशहाली वह रंग है यार्रोंहर कोई रमना चाहता हैखुशहाली वह दौर था यारों कागज़ की नावें होती थींमिट्टी के घरौंदे थे ,छप्पर की दुकानें होती थीकहीं सुनाई देती थी रामायणकहीं रोज अजानें होती […] Read more » happiness खुशहाली
कविता हे हिरण्यमयी मां लक्ष्मी November 5, 2021 / November 5, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे हिरण्यमयी मां लक्ष्मी हिरण सरीखीचपला चंचला चंचलता छोड़करस्वर्ण चांदी बनकर उतरो भारत भू पर! कि गोधन रत्न आभूषण रुप धरोविचरो भारत भूमि पर सत्वर निरंतरइतनी सम्पत्ति संपदा दो विपदा हरो! कि हर भारत जन हो सम्पन्न शुद्धाचरणसबके लोभ मोह लालच मत्सर दुर्गुण हरोभ्रष्टाचार का करो शमन श्री वृद्धि करो! मां श्री लक्ष्मी […] Read more » हे हिरण्यमयी मां लक्ष्मी
कविता हे मां वर दो भारत को धन्य धन्य कर दो November 5, 2021 / November 5, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे हिरण्यमयी मां लक्ष्मी हिरण सरीखीचपला चंचला मां चंचलता को छोड़करस्वर्ण-चांदी बनकर उतरो भारत भू पर! कि गोधन रत्न आभूषण रुप धारण करविचरो मां भारत भूमि पर सत्वर निरंतरमां इतनी सम्पत्ति संपदा दो विपदा हरो! कि हर भारत जन हो सम्पन्न शुद्धाचरणसबके लोभ मोह लालच मत्सर दुर्गुण हरोमां भ्रष्टाचार का करो शमन श्रीवृद्धि […] Read more » हे मां वर दो भारत को धन्य धन्य कर दो
कविता आओ हम दीप जलाएं November 4, 2021 / November 5, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल आओ हम एक दीप जलाएं!मन का अँधियारा दूर भगाएं!! आओ हम मन के दीप जलाएं!तन के तम को हम दूर भगाएं!! आओ हम एकता का दीप जलाएं!दम्भ-कपट और छल-छीद्र भगाएं!! आओ हम स्नेह का दीप जलाएं!द्वेष-राग को मिल सब दूर भगाएं!! आओ हम भाईचारे का दीप जलाएं!नफरत की खड़ी वह दिवार गिराएं!! आओ […] Read more » let's light the lamp आओ हम दीप जलाएं