कविता अंधियारे उर में भरे, मन में हुए कलेश !! November 4, 2021 / November 5, 2021 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment मन को करें प्रकाशमय, भर दें ऐसा प्यार !हर पल, हर दिन ही रहे, दीपों का त्यौहार !!दीपों की कतार से, सीख बात ले नेक !अँधियारा तब हारता, होते दीपक एक !!फीके-फीके हो गए, त्योहारों के रंग !दीप दिवाली के बुझे, होली है बेरंग !!दीये से बात्ती रुठी, बन बैठी है सौत !देख रहा मैं […] Read more » अंधियारे उर में भरे मन में हुए कलेश !!
कविता इंसानियत से प्यार मुझे November 3, 2021 / November 5, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमैंने जहां से इश्क किया है,इंसानियत से प्यार मुझे! धर्म व मजहब में आडम्बर,कभी नहीं स्वीकार मुझे! धर्म वहां तक जायज लगते,जहां लगे सब यार मुझे! मानव मानव में भेदभाव हो,वह धर्म लगे बेकार मुझे! धर्म मजहब की बुराइयों से,सदा से है तकरार मुझे! धर्म नहीं वो जो हथियार हो,नापसंद ये औजार मुझे! […] Read more » इंसानियत से प्यार मुझे
कविता दशकों पहले गांव से निकला था शहर October 31, 2021 / October 31, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकदशकों पहले गांव से निकला था शहरअपनी खिचड़ी आप पकाने के लिएअपना एक आशियाना बनाने के लिए! पर अबतक कोई अपना बन न सकाअब भी हूं अनजानापन को साथ लिएआत्ममुग्ध होकर जिए खुद के लिए! एक शहर से कटकर दूसरा महानगरआता-जाता रहा हूं स्थानांतरित होकरपद प्रतिष्ठा की चाहत में छूटा घर! क्वार्टर से […] Read more » Decades ago the city came out of the village दशकों पहले गांव से निकला था शहर
कविता धार्मिक जन होते हैं ईश्वर के शांति दूत October 29, 2021 / October 29, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | 2 Comments on धार्मिक जन होते हैं ईश्वर के शांति दूत —विनय कुमार विनायकधर्म में दिखावे की कोई चीज होती नहीं,धर्म में अलगाववाद का बीज होता नहीं! धर्म है धारण करने की मानवीय शक्ति,धर्म है मानवता की सफल अभिव्यक्ति! धर्म में मजहबी फिरकापरस्ती नहीं होती,धर्म है मानव की उच्च मानसिक स्थिति! धार्मिक जन होते हैं ईश्वर के शांति दूत,धार्मिक हस्ती होते ईश्वर के सच्चे सपूत! धर्मप्राण […] Read more » धार्मिक जन होते हैं ईश्वर के शांति दूत
कविता एक नारी की अभिलाषा करवाचौथ पर October 25, 2021 / October 25, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मेरी मांग के सिन्दूर भी तुम,मेरी आंख के काजल भी तुम,मेरी उम्र लग जाए अब तुमको,मेरे सर के सरताज भी तुम।। मेरे बालो के गजरे हो तुम,मेरी नाक की नथनी हो तुम।सजधज के आई तुम्हारे लिए,बताओ अब मेरे कौन हो तुम ? मेरे माथे की बिंदिया भी हो तुम,मेरी रातों की निंदिया भी हो तुम।रह […] Read more » A womans wish on Karva Chauth एक नारी की अभिलाषा करवाचौथ पर
कविता तुम सीधे हो सच्चे हो मगर उनकी नजर में अच्छे नहीं हो October 21, 2021 / October 21, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम सीधे हो सच्चे होमगर उनकी नजर में अच्छे नहीं होक्योंकि तुम उनकी विरादरी के नहीं हो! वो बातें करते हैं हमेशावसुधा भर लोगों के मानवाधिकार कीपर परे होते हैं पड़ोसी के दुख दर्द से! उन्हें तुम्हारी उपस्थिति भीतथाकथित उनकी दुनिया में पसंद नहीं! उनकी धर्मपोथी के अनुसारतुम उनके चिन्हित जानी दुश्मन हो! […] Read more » You are straight but you are not good in their eyes तुम सीधे हो सच्चे हो मगर उनकी नजर में अच्छे नहीं हो
कविता मैं ना हासिल होउंगा। October 21, 2021 / October 21, 2021 by अजय एहसास | Leave a Comment बंद हुए दिल के दरवाजे रूह से दाखिल होउंगामुझे पता है तेरी दुआओं में मैं शामिल होऊंगाले आई है चाहत तेरी मुझको यार तेरे दर परलेकिन इतनी आसानी से मैं ना हासिल होउंगा दिल ये साफ हो रूह पाक हो मन में मैल कभी ना हो वह कहती है यार तभी मैं उसके काबिल होउंगायाद […] Read more » मैं ना हासिल होउंगा।
कविता पति पत्नी की नोक झोंक October 21, 2021 / October 21, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment क्या बताऊं मैं तुमको दोस्तो,मेरी पत्नी क्या क्या करती है।सुबह सुबह रामायण पढ़ती है,सारे दिन महाभारत करती है।। जब उससे तू तू मै मै होती है,या उससे मेरी हाथापाई होती है।सारे घर के दरवाजे बंद करके,वह बेलन से मेरी खबर लेती है।। व्यस्त रहती है वह मोबाइल पर,जरा भी उसे फुर्सत न मिलती है।संगीत की […] Read more » पति पत्नी की नोक झोंक
कविता ब्राह्मण के चाहने से हिन्दुत्व उभरेगा या डूब जाएगा October 21, 2021 / October 21, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहिन्दू धर्म में एकता कैसे होकोई निदान ब्राह्मण ही बता सकता!ब्राह्मण वो कहलातेजिन्होंने विद्या-बुद्धि से काम लिया!क्षत्रिय उसे कहतेजिन्होंने हाथ में डंडा को थाम लिया!वैश्य वे कहलातेजिन्होंने डंडा को ही डंडी बना दिया!शूद्र उसे कहतेजिन्होंने हुनरबाजी को पहचान लिया!ये तो तब की बात थीजब वर्ण व्यवस्था की पराकाष्ठा थी!अब बदली है स्थितिवर्णवाद कुछ […] Read more » ब्राह्मण के चाहने से हिन्दुत्व उभरेगा या डूब जाएगा
कविता शरद पूर्णिमा October 21, 2021 / October 21, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment वैसे तो हर मास पूर्णिमा होती है,पर शरद पूर्णिमा विशेष होती है।करती यह शरद ऋतु का स्वागत,जब चांद की चांदनी से बात होती है।। जब शरद पूर्णिमा की रात होती है,बिछड़े दिलो की मुलाकात होती है।चांद चांदनी होते है मिलन के मूड में,तभी तो प्यार की बरसात होती है।। इस रात चांदनी चांद के होगी […] Read more » शरद पूर्णिमा
कविता मरते दम तक तुम याद आओगे मुझको October 20, 2021 / October 20, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment वादा किया था मेरे ख्वाबों में आया करो।इस तरह से मुझे तुम कभी न सताया करो।फुर्सत नही थी तुम मुझे साफ मना कर देते।मेरे जख्मों पर नमक इस तरह लगाया न करो।। वादा करके जल्दी ही तुम मुकर जाते हो।पता नही मुझे तुम अब किधर जाते हो।क्या कोई दूसरा घर देख लिया है तुमने।मुझे बर्बाद […] Read more » मरते दम तक तुम याद आओगे मुझको
कविता मनुष्य क्यों इतना अधिक हिंसक होता है? October 17, 2021 / October 17, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमनुष्य क्यों इतना अधिक हिंसक होता है?आजीवन मनुष्य के मनुष्य बने होने पर भी,मनुष्य को इतना अधिक क्यों शक होता है? मानव, मानव के बीच मतभेद, धर्मभेद होता है,सांप्रदायिक और वैचारिक अंतर बेशक होता हैं,पर यहां किसे जान से मारने का हक होता है? मनुष्य मनुष्य के साथ सृष्टि के आरम्भ से ही,किसी […] Read more » Why are humans so violent मनुष्य क्यों इतना अधिक हिंसक होता है