कविता ब्राह्मण चाहेगा तभी हिन्दुओं में छुआछूत जातिभेद मिट पाएगा October 17, 2021 / October 17, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहिन्दू धर्म में एकता कैसे होकोई निदान ब्राह्मण ही बता सकता! ब्राह्मण वर्ण वो कहलातेजिन्होंने विद्या-बुद्धि से काम लिया! क्षत्रिय राजपूत उसे कहतेजिन्होंने हाथ में डंडा को थाम लिया! वैश्य कृषक वे कहलातेजिन्होंने डंडा को ही डंडी बना दिया! शूद्र उन लोगों को कहतेजिन्होंने हुनरबाजी को पहचान दिया! ये तो तब की बात […] Read more » Untouchable caste discrimination among Hindus will be eradicated only if Brahmins want it. ब्राह्मण चाहेगा तभी हिन्दुओं में छुआछूत जातिभेद मिट पाएगा
कविता मत कर नारी जाति का अपमान October 16, 2021 / October 16, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमत कर नारी जाति का अपमान,नारी मां, बहन और पुत्री समान! नारी का सब रुप परम पवित्र है,नारी है देवी-देवता और भगवान! मत कर अत्याचार नारी पर बंदे,नारी देती है नर को जीवनदान! नारी के हर रुप में सभी रुप है,नारी देवी, जीवनसाथी धर्मप्राण! नारी से ये जग उजियारा लगते,बिना नारी अस्तित्वहीन इंसान! […] Read more » मत कर नारी जाति का अपमान
कविता मैं गांधी हूं सनातनी सेकुलर राह पे चलता हूं October 11, 2021 / October 11, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमैं गांधी हूंमैं झूठ नहीं बोलूंगामैं खरा सोना बन ना सकामैं खुद को चांदी बोलता हूं! मैं गांधी हूंदेश को आजादीबिना खड्ग ढाल केनहीं मिली थीमैं इसे आज कबूलता हूं! मैं गांधी हूंदेश स्वतंत्र हुआसिर्फ अहिंसा धर्म से नहींक्रांति और जंग से भीमैं इसे कभी नहीं भूलता हूं! मैं गांधी हूंमेरी अहिंसा नीति […] Read more »
कविता गुजर जाती है उम्र,रिश्ते बनाने में। October 5, 2021 / October 5, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment गुजर जाती है उम्र,रिश्ते बनाने में।पर पल नही लगता इसे ठुकराने में।। वक्त लगता है,अपना घर बनाने में।पर पल नही लगता,इसे गिराने में।। उम्र खत्म हो जाती है,धन कमाने में।पर पल नही लगता है,उसे गवांने में।। बड़ी मुश्किलें आती है,एक सच्चा दोस्त बनाने में,पर पल भर नही लगता,उससे दुश्मनी बनाने में।। जिंदगी घटती जाती है,पल […] Read more » Age passes in making relationships. गुजर जाती है उम्र रिश्ते बनाने में।
कविता गुदड़ी के लाल : लाल बहादुर शास्त्री October 3, 2021 / October 3, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment छोटा कद पर सोच बड़ी थी,तेज सूर्य सा चमके था भाल।भारत मां के गौरव वे थे,कहलाए वे गुदड़ी के लाल।। देश के प्रति थी पूरी निष्ठा,कोई काम न करते थे टाल।जन जन के वे प्यारे थे,कहलाए वे सादगी के लाल।। जन्म हुआ था उनके भारत मै,पर मृत्यु हुई थी रूस में।विधि ने छीना उन्हें अकाल,भारत […] Read more » लाल बहादुर शास्त्री
कविता ईश्वर अल्लाह खुदा का पैगाम यही October 3, 2021 / October 3, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment This is the message of God Allah God —विनय कुमार विनायकजहां से अच्छाई मिलेउसे तुम ग्रहण कर लोदकियानूसी क्यों बनते हो? खुदा होता है कि नहींइस पचड़े में क्यों पड़ते हो? अगर खुदा होते भी होंतो वे सबके लिए होते होंगेकिसी खास धर्मवाले काकोई खुदा क्यों होने लगेंगे? जब पूरे कायनात कोबनानेवाले एक खुदा होतेफिर […] Read more » This is the message of God Allah God ईश्वर अल्लाह खुदा का पैगाम यही
कविता सच्चा धर्म वही जो मानवता से प्यार करे September 30, 2021 / September 30, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकबड़े ही गुनाहगार होते धर्मांतरण करानेवाले,आतंक के सूत्रधार ये धर्मांतरण करानेवाले! राष्ट्र के गद्दार होते धर्मांतरण करानेवाले,विदेशी हथियार होते धर्मांतरण करानेवाले! धर्मांतरण करानेवाले संत नहीं,शैतान होते,धर्मांतरित जन के ये मौत के पैगाम होते! धर्मांतरण करानेवाले होते नहीं भोले भाले,ये धर्मांतरित जनों के जान से खेलनेवाले! ये उपासक होते नहीं किसी ईश्वर खुदा के,ये […] Read more » True religion is the one who loves humanity सच्चा धर्म वही जो मानवता से प्यार करे
कविता खुदा तू भी नही,मै भी नही September 29, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment गलतियों से जुदा तू भी नही,में भी नही।दोनो इंसान है,खुदा तू भी नही मै भी नही।। गलतियां निकालते रहते है,एक दूजे की मगर।अपने गिरेबान में झांकता तू भी नही मै भी नही।। नशीहत देते रहते,एक दूजे को सुधारने के लिए।नशीहत पर अमल करता तू भी नही मै भी नही।। लड़ते रहते है हर रोज,तू तू […] Read more »
कविता धर्म से ही मनुष्य की सोच बनती September 28, 2021 / September 28, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक जब अपने धर्म को अपनाओगे, तब जीवन को सफल बनाओगे! जब विदेशी धर्म स्वीकार करोगे, तब जीवन को नरक बना लोगे! तुलनात्मक अध्ययन करके देखो तब ही तथ्य को समझ पाओगे! कुछ ईरानी पारसी धर्मी रह गए, बाकी फारसी मुसलमान हो गए! पारसी भारत में आकर बस गए, फारसी इस्लामी ईरान में […] Read more » धर्म से ही मनुष्य की सोच बनती
कविता मेरे जाने से पहले।। September 28, 2021 / September 28, 2021 by अजय एहसास | Leave a Comment थाम लो हाथ यार, मेरे जाने से पहले ।बोलो करते हो प्यार, मेरे जाने से पहले।। प्यार करते हो हमसे फिर भी क्यों छुपाते होनजर मिला के नजर हमसे क्यों चुराते होकर लो दीदार यार, मेरे जाने से पहलेबोलो करते हो प्यार मेरे जाने से पहले ।। चला गया तो फिर ना लौट के मैं […] Read more » मेरे जाने से पहले।।
कविता बड़े ही अच्छे होते हैं हुनर वाले लोग September 24, 2021 / September 24, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकबड़े ही अच्छे होते हैं हुनर वाले लोग,बड़े ही सच्चे होते हैं हुनर वाले लोग! हुनरमंद अपने हुनर के दम पर जीते,हुनर वाले अपने हुनर पे कुर्बान होते! हुनर बाज झूठे व दगाबाज नहीं होते,हुनर बाज मानवता की आवाज होते! हुनर वाले हुनर के लिए समर्पित होते,वे अपने हुनर स्वदेश को अर्पित करते! […] Read more » very good people with skills बड़े ही अच्छे होते हैं हुनर वाले लोग
कविता शकुनि मामा पाशा फेंको ना September 23, 2021 / September 23, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकशकुनि मामा पाशा फेंको ना,अपने गांधार जाकर देखो ना,गांधार में आज भी कुटिलताजस की तस पैरों को फैलाई! तुम्हारी एक बहन गांधारी नेदोनों आंख में पट्टी बांधी थी,आज तुम्हारी सारी बहू-बेटियांफिर से आंखों में पट्टी बंधाई! शकुनि मामा पाशा फेंको ना,अपने गांधार जाकर देखो ना,तुम्हारे पाशों की मनहूसियतआज भी गांधार में वैसे छाई! […] Read more » Shakuni Mama Pasha Throw Na शकुनि मामा पाशा फेंको ना