कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार लेख वर्त-त्यौहार छठ: आस्था एवं उत्साह का लोकपर्व November 17, 2023 / November 17, 2023 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment छठ पूजा (17-20 नवम्बर) पर विशेष– योगेश कुमार गोयल आस्था और निष्ठा का अनुपम लोकपर्व ‘छठ’ उत्तर भारत, विशेषकर बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाने वाला सूर्योपासना का महापर्व है। यह पर्व सूर्य, उनकी पत्नी उषा तथा प्रत्यूषा, प्रकृति, जल, वायु और सूर्य की बहन छठी मैया को समर्पित […] Read more » छठ पूजा छठ पूजा (17-20 नवम्बर)
लेख समाज क्या पुरुष भी घरेलू हिंसा के शिकार हैं? November 17, 2023 / November 17, 2023 by ललित गर्ग | Leave a Comment अन्तर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस-19 नवम्बर, 2023 पर विशेष-ललित गर्ग- अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस माता-पिता के अलगाव, पत्नी की उपेक्षा, दुर्व्यवहार, बेघर होना, रोजगार, आत्महत्या और हिंसा सहित पुरुषों द्वारा सामना किए जाने वाले कई मुद्दों के लिए एक वैश्विक जागरूकता दिवस है, जो हर साल 19 नवंबर को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य लड़कों और […] Read more » Men are also victims of domestic violence पुरुष भी घरेलू हिंसा के शिकार
लेख विविधा पेड़ के नीचे चल रहे हैं गांव के कई सरकारी स्कूल November 16, 2023 / November 16, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment सपना कुमारीमुजफ्फरपुर, बिहारबिहार के सरकारी स्कूल पिछले कई सालों से शिक्षकों एवं बुनियादी संसाधनों की कमी से जूझते रहे हैं. राज्य के 38 जिलों में सैकड़ों नवसृजित स्कूल स्थापित किए गये हैं, जिनके पास अभी तक जमीन उपलब्ध नहीं कराया जा सका है. भवन एवं जमीन के अभाव में ऐसे स्कूल झोपड़ी में चल रहे […] Read more » Many government schools of the village are running under trees.
लेख समाज पुरुष संवेदनशीलता के बिना महिला सशक्तिकरण अधूरा November 16, 2023 / November 16, 2023 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment यह कहना कि केवल महिलाएं ही इस मानसिकता की शिकार हैं, आधा सच होगा। हाल के दिनों में, पुरुषों पर पितृसत्ता के प्रभाव के संबंध में अधिक जागरूकता उत्पन्न हुई है, विशेष रूप से अनुचित मांग को देखते हुए जिसे उन्हें पूरा करना होता है। प्राचीन काल से, हमारी अधिकांश कहानियाँ एक मजबूत और गुणी […] Read more » पुरुष संवेदनशीलता महिला सशक्तिकरण
महिला-जगत लेख नारी स्मिता – सवाल भरोसे का ? November 16, 2023 / November 16, 2023 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी दुनिया के अन्य देशों की तुलना में हमारे देश में नारी स्मिता व सम्मान की सबसे अधिक दुहाई दी जाती है। बल्कि […] Read more » Nari Smita - Question of trust
मीडिया लेख चिंताजनक है अखबारों और लेखकों की स्थिति November 15, 2023 / November 15, 2023 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment समाचार पत्र और यहां तक कि लेखकों को भी अस्तित्व बचाने के लिए गूगल व फे़सबुक को मात देना होगा। बदहाल होती स्थिति पर सवाल यह है- वे ऐसा कैसे करेंगे? सबसे महत्वपूर्ण कारक है न्यूज़ कैरियर की बढ़ोत्तरी- गूगल, फे़सबुक और बाकी दूसरे। एक तरफ वे किसी अन्य द्वारा उत्पादित समाचार ले लेते हैं और दूसरी […] Read more » The situation of newspapers and writers is worrying
लेख कृषि के माध्यम से सशक्त होती ग्रामीण महिलाएं November 15, 2023 / November 14, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment तानियाचौरसों, उत्तराखंड देश में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई स्तरों पर काम किए जाते हैं। इसके लिए केंद्र से लेकर सभी राज्य सरकार विभिन्न योजनाएं भी संचालित कर रही हैं। लेकिन हमारे देश में कृषि एक ऐसा सेक्टर है जहां महिला सशक्तिकरण सबसे अधिक देखी जाती है। बल्कि यह कहना गलत नहीं होगा […] Read more » Rural women empowered through agriculture
लेख प्यार और इंसानियत रूपी दीयों की कतारे लगायें November 14, 2023 / November 14, 2023 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- दीपावली एक लौकिक पर्व है। यह आत्मज्योति जगाने एवं भीतर की दुनिया को उज्ज्वल बनाने का पर्व है, इसलिये दीपों की कतारे लगाकर केवल बाहरी अंधकार को ही नहीं, बल्कि भीतरी अंधकार को मिटाने के जतन करने होंगे। हम भीतर में धर्म का दीप जलाकर मोह और मूर्च्छा के अंधकार को दूर कर […] Read more » Make rows of lamps in the form of love and humanity
लेख मासूम और चमकती आँखों का बचपन बहदाल क्यों? November 14, 2023 / November 14, 2023 by ललित गर्ग | Leave a Comment बाल दिवस- 14 नवम्बर, 2023 -ललित गर्ग- बच्चों के अधिकारों, शिक्षा और कल्याण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए पूरे भारत में बाल दिवस मनाया जाता है। हर साल 14 नवंबर को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन के अवसर पर यह दिवस मनाया जाता है। भारत के अलावा बाल दिवस […] Read more » Why is the childhood of innocent and shining eyes ruined? बाल दिवस- 14 नवम्बर
लेख रीति रिवाज के नाम पर किशोरियों के अधिकारों का हनन November 14, 2023 / November 14, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment हेमा रावल गनीगांव, उत्तराखंड दुनिया की प्राचीन सभ्यताओं में एक भारत की सभ्यता भी है. हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की सभ्यता से पता चलता है कि भारतीय उप महाद्वीप हज़ारों साल पहले न केवल आर्थिक और वैज्ञानिक रूप से विकसित था बल्कि सामाजिक और वैचारिक रूप से भी बहुत समृद्ध था. ज़ाहिर है ऐसे विकसित समाज […] Read more »
धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार लेख वर्त-त्यौहार हिन्दू भाई-बहन के पवित्र प्यार का पर्व है भैया दूज November 14, 2023 / November 14, 2023 by ललित गर्ग | Leave a Comment भैया दूज- 15 नवम्बर, 2023 ललित गर्ग हिन्दू समाज में भाई-बहन के पवित्र रिश्तों का प्रतीक पर्व है यह भैया दूज पर्व। दीपावली पांच पर्वांे का संगम है, उसी से जुड़ा है यह पर्व। एक ऐसा पर्व जो घर-घर मानवीय रिश्तों में नवीन ऊर्जा का संचार करता है। बहनों में उमंग और उत्साह को संचरित […] Read more » Bhaiya Dooj is the festival of sacred love between Hindu brother and sister. भैया दूज
आर्थिकी कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार लेख दीपावली त्यौहार ने दी है भारत को आर्थिक ताकत November 14, 2023 / November 14, 2023 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment इस वर्ष दीपावली त्यौहार के धनतेरस के दिन भारतीयों ने विभिन्न उत्पादों की जमकर खरीद की है। भारतीय अर्थव्यवस्था को तो जैसे पंख लग गए हैं एवं भारतीय अर्थव्यवस्था अब बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी कारण से वैश्विक स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद में भारत की भागीदारी लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर वित्तीय वर्ष 2023-24 के वृद्धिगत सकल घरेलू उत्पाद में भारत की भागीदारी 15 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। भारत ने अमेरिका एवं चीन के बाद विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अपने कदम बढ़ा दिए हैं। भारत में आज आम आदमी की आमदमी बढ़ रही है, आम आदमी की तरक्की जारी हैं एवं इसे और अधिक बेहतर बनाने के प्रयास लगातार हो रहे हैं। इसी के चलते भारतीय बाजारों में दीपावली के पावन पर्व पर भारी भीड़ एवं रौनक दिखाई दे रही है। भगवान धन्वन्तरि भारतीय नागरिकों पर जैसे धन की वर्षा करते नजर आ रहे हैं। भारत में धनतेरस के दिन किसी भी प्रकार के उत्पाद की खरीददारी को शुभ माना जाता है। विशेष रूप से बर्तन, गहने, वाहन एवं मकान आदि भारी मात्रा में खरीदे जाते हैं। इस वर्ष भारतीय बाजारों में एक और शुभ संकेत दिखाई दे रहा है कि भारतीय नागरिक “वोकल फोर लोकल” एवं “आत्म निर्भर भारत” जैसे विचार से सहमत होते हुए केवल भारत में निर्मित वस्तुओं की जमकर खरीद कर रहे हैं। रीयल एस्टेट सेक्टर, कार डीलर्स, जौहरियों एवं किराना व्यवसायीयों की तो जैसे लॉटरी ही लग गई है। इस वर्ष दीपावली त्यौहार में बाजारों में उमड़ रही भीड़ अपने आप में भारत की आर्थिक शक्ति बनने की कहानी कह रही है। भारतीय ग्राहकों में उत्साह दिख रहा है। ग्राहकों का उत्साह देखकर कारोबारी एवं व्यापारी भी खुश नजर आ रहे हैं। कन्फेडरेशन आफ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज एसोसीएशन के अनुसार, इस वर्ष दीपावली के त्यौहारी मौसम में देश में 3.75 लाख करोड़ रुपए का व्यापार हुआ है। इस खरीद की विशेष बात यह रही है कि उपभोक्ताओं में चीन में निर्मित माल के स्थान पर भारत में ही निर्मित स्वदेशी सामान की जबरदस्त मांग देखने को मिली है। जबकि षठ पूजा एवं भैया दूज समेत अभी कई त्यौहार आना शेष है, इस प्रकार आगे आने वाले अन्य त्यौहारों के शुभ अवसर पर 50,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त व्यापार होने की सम्भावना भी व्यक्त की गई है। उक्त संस्थान ने “भारतीय उत्पाद – सबका उस्ताद” नामक एक कैम्पेन भी भारत में, हाल ही में प्रारम्भ हुए त्यौहारी मौसम के दौरान, चलाया था, जिसका भारतीय नागरिकों पर जबरदस्त प्रभाव दिखाई दिया है। साथ ही इस वर्ष के त्यौहारी मौसम में चीन को लगभग एक लाख करोड़ रुपए के व्यापार का नुक्सान हुआ है। क्योंकि, इसके पहिले चीन में बनी वस्तुओं की भारतीय बाजारों में 70 प्रतिशत तक बिक्री होती थी परंतु इस वर्ष भारतीय बाजारों में स्वदेशी वस्तुओं की मांग इतनी अधिक थी कि चीन में निर्मित वस्तुओं की बिक्री बहुत ही कम हो गई है। इस वर्ष भारत में दीपावली से सम्बंधित सामान का चीन से आयात नहीं के बराबर हुआ है। एक अनुमान के अनुसार, इस 3.50 लाख करोड़ रुपए के व्यापार में 13 प्रतिशत खाद्य सामग्री एवं किराना की, 9 प्रतिशत ज्वेलरी की, 12 प्रतिशत टेक्स्टायल एवं गारमेंट की, 4 प्रतिशत ड्राई फ़्रूट, मिठाई एवं नमकीन की, 3 प्रतिशत होम डेकोर की, 6 प्रतिशत कास्मेटिक्स की, 8 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मोबाइल की, 3 प्रतिशत भोजन सामग्री एवं पूजा वस्तुओं की, 3 प्रतिशत रसोई एवं बर्तन उपकरण की, 8 प्रतिशत गिफ्ट सामान की, 4 प्रतिशत फर्निशिंग एवं फर्निचर सामान की एवं 25 प्रतिशत ऑटोमोबील, हार्डवेयर सामान, खिलौने सहित अन्य अनेकों वस्तुओं एवं सेवाओं की भागीदारी रही है। भारत में मकानों की बिक्री सम्बंधी आंकड़ों से भी आभास होता है कि भारत में मिडल एवं अपर मिडल क्लास वर्ग की संख्या बढ़ी है। रीयल एस्टेट से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि इस वर्ष 1.5 लाख से अधिक लक्जरी और एफोर्डेबल घरों की बिक्री का रिकार्ड बन गया है। वर्ष 2023 की दीपावली के ठीक पूर्व के समय में 1.50 लाख घरों की बिक्री प्रदर्शित करती है कि भारत के नागरिकों की आय में तेज गति से वृद्धि हो रही है। वर्ष 2022 की दीपावली के पूर्व 1.47 लाख घरों की बिक्री हुई थी और वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 1.14 लाख रहा था। जनवरी 2023 से सितम्बर 2023 तक की अवधि में भी भारत में 2.30 लाख लक्जरी और एफोर्डेबल घरों की बिक्री हुई थी, जो पिछले साल के मुकाबले 5 प्रतिशत अधिक है। रीयल एस्टेट में बूम का मतलब है कि भारत तेज गति से तरक्की कर रहा है। भारत में आम लोगों की जेब तक पैसा पहुंच रहा है। त्यौहारी सीजन में उछाल सिर्फ रीयल एस्टेट सेक्टर में ही नहीं है, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी लगभग इसी प्रकार का त्यौहारी वातावरण दिखाई दिया है। माह अकटोबर 2023 में भारत में 3.90 लाख चार पहिया वाहनों की बिक्री हुई है। जबकि 19 लाख के करीब दोपहिया वाहन भी बिके हैं। नवम्बर 2023 के त्यौहारी मौसम में 4.25 लाख चार पहिया वाहन एवं 20 लाख दो पहिया वाहन बिकने का अनुमान लगाया गया है। इसी प्रकार, एक अन्य अनुमान के अनुसार धनतेरस 2023 के दिन भारत में 50,000 करोड़ रुपए के सोने के आभूषणों की बिक्री हुई है। पिछले वर्ष धनतेरस के दिन 45,000 करोड़ रुपए के सोने के आभूषणों की बिक्री हुई थी। इस प्रकार इस वर्ष सोने के आभूषणों की बिक्री में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत में प्रत्येक क्षेत्र में विकास स्पष्टत: दिखाई दे रहा है। नागरिकों की जेब में पैसा पहुंचा है तभी तो भारत में उक्त वर्णित समस्त क्षेत्रों में भारी तादाद में बिक्री सम्भव हो पा रही है। शादी के मौसम की शुरुआत एवं नवरात्रि त्यौहार के शुरू होने के साथ ही भारत में त्यौहारी मौसम की शुरुआत हो जाती है। दिनांक 8 अकटोबर से ऑनलाइन खुदरा बिक्री के साइट, फ्लिपकार्ट एवं अमेजोन, पर उत्पादों की बिक्री का विशेष त्यौहारी अभियान प्रारम्भ किया गया था और केवल चार दिन में ही केवल उक्त दो कम्पनियों की साइट पर 40,000 करोड़ रुपए का व्यापार कर लिया गया है। भारत के विकास की कहानी की यह तो शुरुआत भर है, आगे आने वाले समय में विकास की इस कहानी को और अधिक गति मिलने की सम्भावना है क्योंकि अभी तक तो केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे पूंजीगत खर्चों का प्रभाव ही इस विकास की कहानी पर दिखाई दे रहा है (केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में 7.50 लाख करोड़ रुपए का पूंजीगत व्यय किया था और वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए 10 लाख करोड़ रुपए का पूंजीगत व्यय करने का लक्ष्य निर्धारित किया है) जबकि निजी क्षेत्र भी अब अपने पूंजीगत खर्चों में वृद्धि करने जा रहा है क्योंकि विभिन्न कम्पनियां अपनी उत्पादन क्षमता का 75 प्रतिशत से अधिक उपयोग कर रही है, अतः उन्हें विनिर्माण के क्षेत्र में नई इकाईयों की स्थापना निकट भविष्य में करना ही होगी। साथ ही, विदेशी कम्पनियों के भी भारत में विभिन्न क्षेत्रों में विनिर्माण इकाईयों की स्थापना किये जाने के सम्बंध में सहमति पत्र लगातार प्राप्त हो रहे हैं। इस प्रकार, आगे आने वाले समय में भारत में रोजगार के करोड़ों नए अवसर निर्मित होने जा रहे हैं जिससे मिडल क्लास की संख्या में और अधिक तेज गति से विस्तार होगा और भारत में ही निर्मित उत्पादों की मांग और अधिक तेज होने जा रही है। प्रहलाद सबनानी Read more » Diwali festival has given economic strength to India