लेख आओ बनाएं एक स्वस्थ संसार April 7, 2025 / April 7, 2025 by डॉ घनश्याम बादल | Leave a Comment विश्व स्वास्थ्य दिवस 7 अप्रैल डॉ० घनश्याम बादल खानपान की ग़लत आदतें, फास्ट फूड की बढ़ती लत, भोजन में लगातार बढ़ती रसायन एवं कीटनाशकों की मात्रा, ज़मीन में निरंतर बढ़ते खाद एवं रसायनों के प्रयोग से उसका ज़हरीला हो जाना, भौतिक प्रगति की लालसा के चलते लगातार बढ़ते प्रदूषण एवं अन्य कारणों से दुनिया भर में करोड़ों लोगों का स्वास्थ्य ख़तरे में है।रोज नई नई बीमारियाँ पैदा हो रही हैं। पेट्रोल, डीज़ल, केरोसिन एवं कारखाने तथा वाहनों में प्रयोग होने वाले विभिन्न इंधनों से एक ओर जलवायु संकट बढ़ रहा है वहीं स्वच्छ हवा में सांस लेने के हमारे अधिकार को भी छीन रहा है,वायु प्रदूषण हर पांच सेकंड में एक जीवन का लील रहा है। डब्ल्यूएचओ का निष्कर्ष हैं कि अधिकांश देशों की बड़ी आबादी को समुचित स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त नहीं मिल रहीं है। रसायनों एवं प्रदूषण ने न हवा शुद्ध छोड़ी है और न पानी , पहाड़ों की ऊंचाई से लेकर, समुद्र व ज़मीन की गहराइयों तक उनकी उपस्थिति खतरनाक सिद्ध हो रही है। आंकड़े कहते हैं कि कम से कम 4.5 बिलियन आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से आज भी वंचित है । ऐसी ही स्वास्थ्य से संबंधित चुनौतियों से निपटने के लिए साल 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य दिवस 2025 की थीम सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी व्यक्तियों और समुदायों को वित्तीय कठिनाई का सामना किए बिना उनकी ज़रूरत की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच हो। यह स्वास्थ्य समानता, पहुँच और गुणवत्ता में अंतर को पाटने के लिए वैश्विक प्रयास का आह्वान करता है। विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के लोगों के अच्छे स्वास्थ्य के अधिकार की रक्षा करना और उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य एवं दुनिया को अपनी सेहत के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य के साथ 1950 से 7 अप्रैल के दिन दुनिया भर में विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाना शुरू किया गया था। स्वास्थ्य क्या है ? आमतौर पर माना जाता है कि जो व्यक्ति बीमार नहीं है वह स्वस्थ है परंतु स्वास्थ्य सिर्फ बीमारियों के न होने का नाम नही है । विश्व स्वास्थ्य संगठन” के अनुसार स्वास्थ्य “शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक अध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से सही होने की संतुलित स्थिति का नाम स्वास्थ्य है । हमें बहुमुखी स्वास्थ्य के बारें में नई सोच से संबंधित जानकारी अवश्य होनी चाहिए| स्वास्थ्य को मुख्य रूप से शारीरिक , मानसिक , बौद्धिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य में बांटा जाता सकता है । शारीरिक स्वास्थ्य – शारीरिक स्वास्थ्य शरीर की उस स्थिति को दर्शाता है जब शरीर के आंतरिक और बाह्य अंग, ऊतक व कोशिकाएं ठीक से काम करते हैं । इसमें शरीर की संरचना, विकास, कार्यप्रणाली और रख रखाव शामिल होता है। जब शरीर के सभी अंग सही तरह से काम करते हैं जैसे सुनाई देना, दौड़ना , चलना, दिखाई देना व अन्य सामान्य गतिविधियां| अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य के मापदंडों में संतुलित आहार की आदतें, सही श्वास का क्रम गहरी नींद । बड़ी आंत की नियमित गतिविधि व संतुलित शारीरिक गतिविधियां नाड़ी स्पंदन, ब्लडप्रेशर, शरीर का वजन व व्यायाम, सहने की क्षमता आदि सब कुछ व्यक्ति के ऊंचाई, आयु व लिंग के लिए सामान्य मानकों के अनुसार होना चाहिए। शरीर के सभी अंग सामान्य आकार के हों तथा उचित रूप से कार्य कर रहे हों। पाचन शक्ति सामान्य एवं सही हों। बेदाग एवं कोमल सुंदर त्वचा हो, आंख नाक, कान, जिव्हा, आदि ज्ञानेन्द्रियाँ स्वस्थ हों। जिव्हा स्वस्थ एवं दुर्गंध मुक्त हों। दांत साफ सुथरे व मोतियों जैसे चमकदार हों। मुंह से दुर्गंध न आती हो।समय पर भूख लगती हो। रीढ़ की हड्डी सीधी हो। चेहर पर कांति ओज तेज हो।चेहर से सकारात्मकता का आभास हो। कर्मेन्द्रियां (हाथ पांव आदि) स्वस्थ हों। मल विसर्जन सम्यक् मात्रा में समयानुसार हो।शरीर की आकार और उंचाई के हिसाब से वजन हो। शारीरिक संगठन सुदृढ़ एवं लचीला हो। मानसिक स्वास्थ्य मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ हमारे भावनात्मक और आध्यात्मिक लचीलेपन से है जो हमें अपने जीवन में पीड़ा आशाहीन और उदासी, दुःख की स्थितियों में जीवित रहने के लिए सक्षम बनाती है। मानसिक स्वास्थ्य हमारी मजबूत इच्छा शक्ति को भी दिखाती है। इसे यूं समझिए कि मन में प्रसन्नताव शांति हो, भीतर ही भीतर कोई संघर्ष न हो, भय क्रोध, इर्ष्या, से दूरी हो। मानसिक तनाव एवं अवसाद न हो तभी कहा जा सकता है कि व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य है अच्छा है। बौद्धिक स्वास्थ्य – बौद्धिक स्वास्थ्य हमारी रचनात्मकता और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करने में मदद करता है। बौद्धिक रुप से हम मजबूत होते हैं तो आलोचना को सहज स्वीकार करने की क्षमता व विषम परिस्थितियों से व्यथित न होकर सकारात्मक रहना सहज में सरल हो जाता है । किसी की भी भावात्मक आवश्यकताओं की समझ, व्यवहार में शिष्ट रहना व दूसरों के सम्मान को भी ध्यान में रखना, नए विचारों को सहजता से स्वीकार करना, आत्मनियंत्रण , डर , क्रोध, मोह, ईर्ष्या या तनाव मुक्त रहना भी अच्छे बौद्धिक स्वास्थ्य की पहचान है । आध्यात्मिक स्वास्थ्य – हमारा स्वास्थ्य आध्यात्मिक स्वास्थ्य बिना वर्ड व्यर्थ है। जीवन के वास्तविक अर्थ और उद्देश्य की खोज करना हमें आध्यात्मिकता की ओर ले जाता है। अच्छे आध्यात्मिक स्वास्थ्य को प्राप्त करने का कोई निश्चित तरीका नहीं है। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता में जीवन का सार आध्यात्मिकता के माध्यम से समझाया -कि ज़िंदगी को जो न समझे उसका जीना व्यर्थ है। तो लिए इस विश्व स्वास्थ्य दिवस पर संकल्प लें कि हमने केवल अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें अपितु हवा पानी धरती एवं आसमान के स्वास्थ्य को भी अच्छा रखने के लिए निरंतर प्रयास करें। डॉ० घनश्याम बादल Read more » विश्व स्वास्थ्य दिवस
पर्यावरण लेख हीटवेव: भारत के लिए बढ़ता हुआ सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट April 7, 2025 / April 7, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment भारत में हीटवेव अब केवल मौसमी असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुकी है। वर्ष 2024 में हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची, विशेषकर उत्तर-पश्चिम भारत में। अत्यधिक तापमान के कारण डिहाईड्रेशन, हीट स्ट्रोक, श्वसन व हृदय संबंधी बीमारियों में वृद्धि हुई है, जिससे बुजुर्गों, बच्चों, निम्न आय वर्ग […] Read more » Heatwaves: A growing public health crisis for India हीटवेव
राजनीति लेख इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (अध्याय – 13) April 4, 2025 / April 9, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment (डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी) पुस्तक से … डॉ. राकेश कुमार आर्य वेदों को लेकर भारतीय ऋषियों की मान्यता रही है कि यह सृष्टि प्रारंभ में ईश्वर प्रदत्त ज्ञान है। जो कि सृष्टि को सुव्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए दिया गया। इनमें धर्म की व्यवस्था है। भारतीय ऋषियों की इस मान्यता के विपरीत नेहरू […] Read more » Distortion of History and Nehru इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू
लेख अद्भुत भारतीय न्यायपालिका का एक अविश्वसनीय कारनामा। April 3, 2025 / April 3, 2025 by शिवानंद मिश्रा | Leave a Comment शिवानंद मिश्रा वर्ष 1997 में सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रस्ताव पारित किया था कि सभी जज अपनी संपत्ति का खुलासा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष करेंगे। इसके बाद 2005 में भारत में आरटीआई कानून लागू हुआ जिसके तहत कोई भी भारतीय नागरिक सरकार से कोई भी जानकारी प्राप्त कर सकता है। इसलिए 2007 […] Read more »
लेख जब पत्रकारिता ने चलाया गो-संरक्षण का सफल आंदोलन April 3, 2025 / April 3, 2025 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment पं. माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती प्रसंग पर विशेष – लोकेन्द्र सिंह पंडित माखनलाल चतुर्वेदी उन विरले स्वतंत्रता सेनानियों में अग्रणी हैं, जिन्होंने अपनी संपूर्ण प्रतिभा को राष्ट्रीयता के जागरण एवं स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया। अपने लंबे पत्रकारीय जीवन के माध्यम से माखनलाल जी ने रचना, संघर्ष और आदर्श का जो पाठ पढ़ाया वह आज भी हतप्रभ […] Read more » गो-संरक्षण का सफल आंदोलन पं. माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती
लेख समाज स्वास्थ्य-योग ‘ऑटिज्म’ से बच्चों को बचाने की गंभीर चुनौती? April 2, 2025 / April 2, 2025 by रमेश ठाकुर | Leave a Comment डा0 रमेश ठाकुर ‘ऑटिज्म बीमारी’ को हल्के में लेने की भूल कतई न की जाए, ये नवजात बच्चों के संग जन्म से ही उत्पन्न होती है। ऑटिज्म से बचा कैसे जाए, जिसके संबंध में प्रत्येक वर्ष 2 अप्रैल को पूरे संसार में ‘विश्व ऑटिज्म दिवस’ जागरूकता के मकसद से मनाया जाता है। मौजूदा वक्त में […] Read more » A serious challenge to save children from 'autism'?
लेख एक तराशा मां ने हीरा April 1, 2025 / April 1, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment बोल उठी – बलिदानी की,एक समाधि बोल उठी।बड़े प्रेम से बलिदानी की,सारी बातें – बोल उठी ।। एक तराशा मां ने हीरा,किया देश को अर्पित।आओ बैठो, बातें कर लो ,कर लो पुष्प समर्पित ।। वरमाला नहीं पड़ी गले में ,पड़ी थी रस्सी फांसी की ।चूमा बड़े प्रेम से उसको,जब शत्रु ने फांसी दी ।। अर्पित […] Read more » एक तराशा मां ने हीरा
लेख 1930 की चेतावनी और पकते कान: साइबर सतर्कता या शोरगुल? April 1, 2025 / April 1, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment एक ज़रूरी बचाव, लेकिन क्या लोग ऊब गए हैं? साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 और ऑनलाइन ठगी से बचाव की चेतावनियाँ इतनी बार सुनाई देने लगी हैं कि लोग अब इनसे ऊबने लगे हैं। बैंक, फोन कंपनियाँ, न्यूज़ चैनल्स, और सोशल मीडिया हर जगह साइबर फ्रॉड के अलर्ट्स छाए हुए हैं, जिससे लोग ठगी से कम […] Read more » साइबर सतर्कता
कला-संस्कृति मनोरंजन लेख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में घोष का इतिहास April 1, 2025 / April 1, 2025 by शिवानंद मिश्रा | Leave a Comment शिवानंद मिश्रा संघ की स्थापना 1925 के मात्र 2 वर्ष बाद 1927 में संघ में घोष को शामिल किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिसे आरएसएस या संघ परिवार के नाम से भी जाना जाता है, उसकी स्थापना सन 1925 में हुई। संघ के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अधिकांश लोग संघ के स्वयंसेवकों के सेवाकार्यों और शाखा पर होने वाले दंड प्रदर्शन से ही परिचित हैं किंतु संघ के ऐसे अनेकों रचनात्मक और सृजनात्मक कार्य हैं जो उसके स्वयंसेवकों की कठोर साधना से सिद्ध हुए हैं। ऐसा ही एक काम है संघ का घोष-वादन। जैसा कहा जाता है कि संघ कार्य का विस्तार देश, काल, परिस्थिति के अनुरूप समाजोपयोगी और प्रासंगिकता के अनुरूप बड़ी सहजता से हुआ है। आरंभिक समय में शाखा पर केवल व्यायाम और सामान्य चर्चा हुआ करती थी. फिर धीरे-धीरे शारीरिक और बौद्धिक कार्यक्रम होने लगे। इसी क्रम में शारीरिक अर्थात फिजिकल एक्सरसाइज में भी समता और संचलन का अभ्यास आरंभ हुआ। संचलन के समय शारीरिक विभाग ने इस बात पर विचार किया कि यदि संचलन के साथ घोष वाद्य का प्रयोग किया जाए तो इसकी रोचकता, एकरूपता और उत्साह में चमत्कारिक परिवर्तन हो सकता है। स्वयंसेवकों की इच्छा शक्ति का ही परिणाम था कि संघ स्थापना के केवल दो वर्षों बाद 1927 में शारीरिक विभाग में घोष भी शामिल हो गया। यह इतना आसान कार्य नहीं था। उस समय दो चुनौतियाँ थीं, एक तो यह कि घोष वाद्य जो संचलन में काम आ सकें, वे महँगे थे और सेना के पास हुआ करते थे। दूसरा यह कि उसके कुशल प्रशिक्षक भी सैन्य अधिकारी ही होते थे। चूँकि संघ के पास न तो इतना धन था कि वाद्य यंत्र खरीदे जा सकें और उस पर भी यह राष्ट्रभक्तों का ऐसा संगठन था जिसके संस्थापक कांग्रेस के आंदोलनों से लेकर बंगाल के क्रांतिकारियों के साथ काम कर चुके थे, इसलिए किसी सैन्य अधिकारी से स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित कराना बड़ा कठिन कार्य था। उस समय सैन्य अधिकारियों को केवल सेना के घोष-वादकों को ही प्रशिक्षित करने की अनुमति थी। इस चुनौती से निबटने के लिए संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के परिचित बैरिस्टर श्री गोविन्द राव देशमुख जी के सहयोग से सेना के एक सेवानिवृत बैंड मास्टर के सहयोग से स्वयंसेवकों को घोष वाद्यों का प्रशिक्षण दिलाया गया। शंख वादन के लिए मार्तंड राव तो वंशी के लिए पुणे के हरिविनायक दात्ये जी आदि स्वयंसेवकों ने शंख, वंशी,आनक जैसे वाद्य यंत्रों पर अभ्यास आरंभ किया। इस प्रकार संघ में घोष का एक आरंभिक स्वरूप खड़ा हुआ। पाश्चात्य शैली के बैंड पर उनके ही संगीत पर आधारित रचनाएँ बजाने में भारतीय मन को वैसा आनंद नहीं आया जैसा कि आना चाहिए था। तब स्वयंसेवकों का ध्यान इस बात पर गया कि हमारे देश में हजारों वर्ष पूर्व महाभारत युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने पांचजन्य और धनुर्धारी अर्जुन ने देवदत्त बजाकर विरोधी दल को विचलित कर दिया था। भगवान कृष्ण के समान वंशी वादक संसार में कोई हुआ नहीं, अतः हमें इन वाद्यों पर ऐसी रचनाएँ तैयार करनी चाहिए जिनमें अपने देश की नाद परंपरा की सुगंध हो। स्वर्गीय बापूराव व उनके साथियों ने इस दिशा में कार्य आरंभ किया। इस प्रकार राग केदार, भूप, आशावरी में पगी हुई रचनाओं का जन्म हुआ। स्वयंसेवकों ने घोष वाद्यों को भी स्वदेशी नाम प्रदान कर उन्हें अपनी संगीत परंपरा के अनुकूल बनाकर उनका भारतीय करण किया। इस क्रम में साइड ड्रम को आनक, बॉस ड्रम को पणव, ट्रायंगल को त्रिभुज, बिगुल को शंख आदि नाम दिए गए जो कि ढोल, मृदंग आदि नामों की परंपरा में ही समाहित होते हैं। घोष की विकास यात्रा में प्रथम अखिल भारतीय घोष प्रमुख श्री सुब्बू श्रीनिवास का नामोल्लेख भी अत्यंत समीचीन होगा। अनेक वर्षों तक सतत प्रवास करके घोष वर्ग और घोष शिविरों के माध्यम से पूरे देश में हजारों कुशल घोष वादक तैयार किये। घोष वादकों में निपुणता और दक्षता की दृष्टि से अखिल भारतीय घोष शिविर आयोजित किये जाने लगे। श्री सुब्बू जी घोष के प्रति इतने समर्पित रहे कि सतत प्रवास के कारण उनका स्वास्थ्य भी गिरने लगा किन्तु अंतिम साँस तक बिना रुके, बिना थके वे ध्येय मार्ग पर बढ़ते रहे। परंपरागत वाद्य शंख, आनक और वंशी से आरंभ हुई घोष यात्रा आज नागांग, स्वरद आदि अत्याधुनिक वाद्यों पर मौलिक रचनाओं के मधुर वादन तक पहुँच गई है। घोष वादन में मौलिक और भारतीय नाद परंपरा को समृद्ध करने की यात्रा प्रथम रचना गणेश से आरंभ होकर लगभग अर्ध शतक पूर्ण कर निरंतर बढ़ती जा रही है। शिवानंद मिश्रा Read more » History of Ghosh in RSS
लेख समाज नैतिक पतन के चलते खतरे में इंसानी रिश्ते March 31, 2025 / March 31, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment समाज में कितना पतन बाकी है? यह सुनकर दिल दहल जाता है कि कोई बेटा अपने ही माता-पिता की इतनी निर्ममता से हत्या कर सकता है? महिला ने जेठ के साथ मिलकर अपने दो वर्ष के बेटे को मरवा दिया। पत्नी ने प्रेमी सँग मिलकर मर्चेंट नेवी मे अफसर पति के टुकड़े-टुकड़े किये। पिता ने […] Read more » खतरे में इंसानी रिश्ते नैतिक पतन के चलते खतरे में इंसानी रिश्ते
लेख भूकंप के लिए अनियोजित मानवीय गतिविधियां भी हैं जिम्मेदार ! March 30, 2025 / March 31, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment 28 मार्च का दिन म्यांमार और थाइलैंड के लिए एक बहुत ही बुरा दिन था। इस दिन यहां आए जोरदार व शक्तिशाली भूकंप ने दोनों देशों को बुरी तरह से हिलाकर रख दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार रिक्टर स्केल पर 7.7 की तीव्रता वाले इस भूकंप ने म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र से लेकर थाइलैंड […] Read more » Unplanned human activities are also responsible for earthquakes! म्यांमार और थाइलैंड में भूकंप
लेख समाज वृद्धों के लिये उजाला बना सुप्रीम कोर्ट का फैसला March 29, 2025 / March 31, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- देश ही नहीं, दुनिया में वृद्धों के साथ उपेक्षा, दुर्व्यवहार, प्रताड़ना, हिंसा तो बढ़ती ही जा रही है, लेकिन अब बुजुर्ग माता-पिता से प्रॉपर्टी अपने नाम कराने या फिर उनसे गिफ्ट हासिल करने के बाद उन्हें यूं ही छोड़ देने, वृद्धाश्रम के हवाले कर देने, उनके जीवनयापन में सहयोगी न बनने की बढ़ती […] Read more » The Supreme Court's decision brought light for the elderly वृद्धों के लिये उजाला बना सुप्रीम कोर्ट