लेख शख्सियत साक्षात्कार आम्बेडकर, समरसता और संघ December 5, 2024 / December 5, 2024 by डॉ. सौरभ मालवीय | Leave a Comment -डॉ.सौरभ मालवीय देश में सामाजिक समता एवं सामाजिक न्याय के लिए प्रमुखता से स्वर मुखर करने वालों में डॉक्टर भीमराव आम्बेडकर का नाम अग्रणीय है। उन्होंने बाल्यकाल से ही अस्पृश्यता का सामना किया था। विद्यालय से लेकर नौकरी तक उन्होंने भेदभाव का दंश झेला। इससे उनकी आत्मा चीत्कार उठी। उन्होंने अस्पृश्यता के उन्मूलन के लिए […] Read more » Ambedkar harmony and union आम्बेडकर
लेख समाज साक्षात्कार दिव्यांगों की उपेक्षा मानवता पर कलंक December 4, 2024 / December 4, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment अन्तर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस, 3 दिसंबर, 2024 पर विशेष -ः ललित गर्ग:-हर वर्ष 3 दिसंबर का दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकलांग व्यक्तियों को समर्पित है। वर्ष 1976 में संयुक्त राष्ट्र आम सभा के द्वारा “विकलांगजनों के अंतरराष्ट्रीय वर्ष” के रूप में मनाया गया और वर्ष 1981 से अन्तर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस मनाने की विधिवत शुरुआत हुई। साल […] Read more » Ignoring the disabled is a stigma on humanity. दिव्यांगों की उपेक्षा
लेख विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थानों पर उठते सवाल December 4, 2024 / December 4, 2024 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment -प्रियंका सौरभ भारतीय संस्थानों से एसटीईएम स्नातकों के एक बड़े प्रतिशत में आवश्यक कौशल का अभाव है, जो उद्योग और अनुसंधान प्रगति में बाधा डालता है। संस्थागत रैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान आउटपुट पर ध्यान केंद्रित करने से कई शिक्षण-केंद्रित संस्थानों ने अक्सर निम्न-गुणवत्ता वाले आउटलेट में प्रकाशन पत्र और पेटेंट को प्राथमिकता […] Read more »
लेख संकट में भारतीय ज्ञान परंपरा December 3, 2024 / December 3, 2024 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment यद्यपि हमने 15 अगस्त, 1947 को तत्कालीन औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की, किंतु अंग्रेजों की लगभग 200 वर्षों की दासता का दुष्प्रभाव हमारी संस्थाओं, व्यवस्थाओं, राजनीतिक-सामाजिक प्रतीकों एवं जीवनशैली में विद्यमान है। औपनिवेशिक प्रवृत्ति एवं परंपराओं, हमारी शासन व्यवस्था, भाषा, वास्तुकला एवं जीवन के अन्यान्य क्षेत्रों में अब भी मौजूद हैं। तत्कालीन भौगोलिक परतंत्रता […] Read more »
लेख बुद्धिजीविता बनाम व्यक्ति निर्माण: संघ की दूरगामी दृष्टि December 3, 2024 / December 3, 2024 by शिवेश प्रताप सिंह | Leave a Comment लेखक: शिवेश प्रताप हाल ही में आजतक के साहित्यिक मंच पर पत्रकार राहुल देव और कवि नरेश सक्सेना ने एक गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “आरएसएस सौ साल से बौद्धिक कर रहा है, किंतु आज तक ऐसा कोई बुद्धिजीवी नहीं पैदा कर पाया, जिसका नाम संघ के बाहर कोई जानता हो।” यह सवाल जितना महत्वपूर्ण […] Read more » बुद्धिजीविता बनाम व्यक्ति निर्माण
लेख निरंतर मजबूत हो रही है भारतीय नौसेना December 3, 2024 / December 3, 2024 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment भारतीय नौसेना दिवस (4 दिसम्बर) पर विशेष Read more » भारतीय नौसेना का इतिहास भारतीय नौसेना दिवस 4 दिसम्बर
पर्यावरण लेख क्या मंडरा रहा है हम पर ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ़्लड का खतरा? December 3, 2024 / December 3, 2024 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment सुनील कुमार महला ग्लोबल वार्मिंग आज भारत ही नहीं , संपूर्ण विश्व की एक बड़ी समस्या है। आज धरती पर ग्रीन हाउस गैसों में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है। प्रदूषण में भी बढ़ोत्तरी का क्रम लगातार जारी है। ग्रीन हाउस गैसों की अधिकता, बढ़ते प्रदूषण से धरती पर कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सीएफसी की मात्रा […] Read more » glacial lake outburst flood ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ़्लड
लेख शख्सियत समाज साक्षात्कार महान पेशवा बालाजी विश्वनाथ December 3, 2024 / December 13, 2024 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment छत्रपति राजाराम के समय में पंच प्रतिनिधि का नवनिर्मित पद राजा का प्रतिनिधि होने के नाते पेशवा से ज्येष्ठ ठहराया गया था। पेशवा बालाजी विश्वनाथ 7वें पेशवा थे। इनके समय से यह पद वंश परंपरागत हो गया था। छत्रपति शाहूजी महाराज की सहमति भी इस पर रही थी। वंश व सेनापति का पद पेशवा का […] Read more » महान पेशवा बालाजी विश्वनाथ
लेख स्वास्थ्य-योग क्या टायलेट्स शर्मकथा हो गये हैं ? December 2, 2024 / December 2, 2024 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment सुनील कुमार महला भारतीय सनातन संस्कृति में महिलाओं को युगों-युगों से बहुत ही सम्माननीय स्थान दिया जाता रहा है और आज भी नारी हम सभी के लिए सम्माननीय और गौरवमयी है। हमारे वेदों में प्रथम शिक्षा ‘मातृ देवोभाव:’ से प्रारंभ किया जाता है अर्थात माता देवताओं के समान होती है लेकिन बावजूद इसके आज कुछ […] Read more »
लेख वास्तविक दुनिया से जुड़े और हरदम रहें खुश ! December 2, 2024 / December 2, 2024 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment सुनील कुमार महला युवाओं में आज सोशल नेटवर्किंग साइट्स का बहुत ज्यादा क्रेज है। वर्चुअल वर्ल्ड में युवा पीढ़ी इतनी अधिक रम-बस चुकी है कि युवा पीढ़ी को आज वास्तविक दुनिया का बिल्कुल भी अहसास ही नहीं है। कुल मिलाकर यह बात कही जा सकती है कि युवा पीढ़ी आज सोशल मीडिया का संयमित उपयोग, […] Read more » वास्तविक दुनिया से जुड़े और हरदम रहें खुश !
लेख समाज साइलेंट किलर ‘ध्वनि प्रदूषण’ के आगोश में मानवजाति December 2, 2024 / December 2, 2024 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment सुनील कुमार महला ध्वनि प्रदूषण की समस्या भारत में आज एक बड़ी शहरी समस्या है, जो एक अदृश्य प्रदूषण है। सच तो यह है कि ध्वनि प्रदूषण एक साइलेंट किलर है। बढ़ती जनसंख्या, लगातार बढ़ते शहरीकरण, अंधाधुंध औधोगिकीकरण, लगातार बढ़ते ट्रैफिक, विकास के आयामों के कारण आज ध्वनि प्रदूषण की समस्या ने बहुत ही विकराल रूप धारण कर लिया है। औधोगिक घरानों में मशीनों से होने वाला ध्वनि प्रदूषण,वाहनों के हॉर्न बजाने से होने वाला प्रदूषण, सड़क पर काम करने वाले लोगों द्वारा ड्रिलिंग करने से होना वाला प्रदूषण, डीजे, बैंड व लाउडस्पीकरों से होने वाला प्रदूषण तथा अन्य चीजों से पैदा होने वाला शोर हमारे शांत वातावरण में जहां एक ओर व्यवधान पैदा करता है वहीं दूसरी ओर जैसा कि विशेषज्ञ बताते हैं, ध्वनि प्रदूषण प्रजनन चक्र बाधित होने के साथ ही साथ प्रजातियों के विलुप्त होने को भी तेज करता है। आज प्लंबिंग, बॉयलर, जनरेटर, एयर कंडीशनर और पंखे, कूलर शोर का कारण बनते हैं।बायलर, टरबाइन, क्रशर तो बड़े कारक हैं ही, परिवहन के लगभग सभी साधन तेज ध्वनि पैदा कर, कोलाहल के साथ वायु प्रदूषण भी बढ़ाते हैं। विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्यों के पैदा होने वाला शोर भी बड़ा कारण है। इतना ही नहीं,बिना इन्सुलेशन वाली दीवारें और छतें पड़ोसी इकाइयों से आने वाले संगीत, आवाज़ें, कदमों और अन्य गतिविधियों को प्रकट करतीं हैं। विमान, ड्रिलिंग , विभिन्न आपातकालीन वाहन यथा एंबुलेंस, अग्निशमन यंत्र व गाड़ियां, पटाखों का फोड़ना भी शोर के कारण बनते हैं। मनोरंजन के साधन टीवी, रेडियो भी ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं। जेट विमान तो शोर के कारण हैं ही। विभिन्न धार्मिक, वैवाहिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक कार्यक्रमों में भी ध्वनि विस्तारकों का प्रयोग शोर को बढ़ावा देता है। इतना ही नहीं बिजली कड़कने, ज्वालामुखी, भूकंप , विस्फोट अन्य कारण हैं। यहां तक कि वैक्यूम क्लीनर और विभिन्न रसोई उपकरण शोर पैदा करते हैं। आज के समय में विवाह शादियों में खानपान, डीजे डांस और नाइटलाइफ़, आउटडोर बार, रेस्तरां और छतों पर 100 डीबी से ज़्यादा शोर सुनने को मिलता है। सच तो यह है कि पब और क्लब शोर करते हैं। यहां तक कि मस्जिदों, मंदिरों, चर्चों और अन्य संस्थानों में भी आज निश्चत डेसिबल स्तरों से ऊपर शोर सुनने को मिलता है। इतना ही नहीं,पशु-पक्षियों तक की भूमिका भी बहुत बार शोर में होती है।उल्लेखनीय है कि ध्वनि प्रदूषण एक अवांछित ध्वनि है जो पशु (वन्य जीवों ) और मानव व्यवहार को प्रभावित कर सकती है, हालांकि यह भी एक तथ्य है कि सभी शोर प्रदूषण नहीं होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन 65 डेसिबल से ऊपर के शोर को प्रदूषण के रूप में वर्गीकृत करता है। 75 डेसिबल पर शोर हानिकारक है और 120 डेसिबल पर कष्टदायक है। शोर का उच्च स्तर मनुष्य और प्राणियों दोनों के ही स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।शोर का उच्च स्तर बच्चों और बुजुर्गों में टिनिटस या बहरापन पैदा कर सकता है। चिकित्सकों का मानना है कि 80 डीबी(डेसिबल) वाली ध्वनि कानों पर अपना प्रतिकूल असर डालती है। 120 डीबी की ध्वनि कान के पर्दों पर भीषण दर्द उत्पन्न कर देती है और यदि ध्वनि की तीव्रता 150 डीबी अथवा इससे अधिक हो जाए तो कान के पर्दे फट सकते हैं, जिससे व्यक्ति बहरा हो सकता है। गौरतलब है कि मानव कान अनुश्रव्य (20 हर्ट्ज से कम आवृत्ति) और पराश्रव्य (20 हजार हर्ट्ज से अधिक आवृत्ति) ध्वनि को सुनने में अक्षम होता है। आज लगातार शोर के संपर्क में रहने से मानव कान कमजोर होते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनियाभर में लगभग डेढ़ अरब लोग इस समय कम सुनाई देने की अवस्था के साथ जीवन गुजार रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट दर्शाती है कि 2050 तक दुनिया में हर चार में से एक व्यक्ति यानी लगभग 25 प्रतिशत आबादी किसी न किसी हद तक श्रवण क्षमता में कमी की अवस्था के साथ जी रही होगी। अत्यधिक तेज, लगातार शोर के कारण श्वसन संबंधी उत्तेजना, नाड़ी का तेज चलना, उच्च रक्तचाप, माइग्रेन, गैस्ट्राइटिस, कोलाइटिस और दिल का दौरा पड़ना आदि हो सकता है। शोर परेशानी, थकान, अवसाद, चिंता, आक्रामकता और उन्माद पैदा कर सकता है। यह हमारी एकाग्रता में कमी लाता है। अध्ययन में विशेष व्यवधान पैदा करता है। 45 डेसिबल से अधिक शोर नींद में खलल(अनिद्रा की शिकायत) डालता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) 30 डेसिबल की सिफारिश करता है। बहरहाल, आंकड़े बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि हर वर्ष योरोपीय संघ में ध्वनि प्रदूषण के कारण 12 हजार लोगों की असामयिक मौत हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वायु प्रदूषण के बाद शोर स्वास्थ्य समस्याओं का दूसरा सबसे बड़ा पर्यावरणीय कारक है। शोर हमारे हमारे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के साथ ही हमारी जीवनशैली को भी प्रभावित करता है। अवांछित और अप्रिय शोर मनुष्य में तनाव, अवसाद लाता है और चिड़चिड़ापन पैदा करता है। यहां यह गौरतलब है कि वर्ष 2018 में जारी अपने दिशा-निर्देशों में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दिन के समय ध्वनि प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों के लिए पृथक मापदंड जारी किये थे, जिसके अनुसार सड़क यातायात में दिन के समय शोर का स्तर 53 डेसिबल, रेल परिवहन में 54, हवाई जहाज और पवन चक्की चलने के दौरान 45 डेसिबल से अधिक नहीं होना चाहिए। आज लोग भले ही ध्वनि विस्तारकों को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानने लगें हों लेकिन ये प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं है। वर्ष 2005 में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने लाउडस्पीकरों पर आदेश देते हुए यह कहा था कि ऊंची आवाज़ सुनने के लिए मजबूर करना मौलिक अधिकारों का हनन है। आज सार्वजनिक स्थलों पर रात दस बजे से सुबह छह बजे तक शोर मचाने वाले उपकरणों पर पाबंदी है लेकिन बावजूद इसके लोग ऐसा करते हैं। आज आबादी, अस्पताल और स्कूली क्षेत्र में प्रेशर हार्न बजाने,तेज पटाखों को छोड़ने पर रोक है।ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 के अनुसार व्यावसायिक, शांत और आवासीय क्षेत्रों के लिए ध्वनि तीव्रता की सीमा तय है।औद्योगिक क्षेत्रों में दिन में 75 और रात न 70 डेसिबल की सीमा सुनिश्चित है। व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए दिन में 65 और रात में 55, आवासीय क्षेत्रों में दिन में 55 और रात में 45 तो शांत क्षेत्रों में दिन में 50 और रात में 40 डेसिबल तीव्रता की सीमा तय है। यह ठीक है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 (1) एक मौलिक अधिकार है, जो किसी को भी बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांति से इकट्ठा होने, भारत के किसी भी हिस्से में रहने आदि की स्वतंत्रता की गारंटी देता है लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि कोई भी अपने मौलिक अधिकारों का दुरूपयोग करे। जीवन को शांति और संयम के साथ जीने का अधिकार धरती के प्रत्येक प्राणी को है, इसलिए इस धरती का सर्वश्रेष्ठ प्राणी होते हुए हमें यह चाहिए कि हम ऐसा कोई भी व्यवहार न करें जिससे दूसरों की ज़िंदगी में खलल, व्यवधान अथवा कोई परेशानियां पैदा हों। सुनील कुमार महला Read more » Mankind in the throes of 'noise pollution' the silent killer ध्वनि प्रदूषण
महिला-जगत लेख बाल विवाह मुक्ति बेटियों को खुला आसमान देगा December 2, 2024 / December 2, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – देश में बाल विवाह की प्रथा को रोकने, बढ़ते बाल-विवाह से प्रभावित बच्चों के जीवन को इन त्रासद परम्परागत रूढ़ियों की बेड़ियों से मुक्ति दिलाने के लिये सरकार ने बाल-विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरुआत करके एक सराहनीय एवं स्वागतयोग्य उपक्रम से हिम्मत और बदलाव की मिसाल कायम की है। यह […] Read more » बाल विवाह मुक्ति