लेख पैट्रोल के दाम बार बार क्यों बढ़ा रही है सरकार? October 9, 2011 / December 5, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी रूपये का मूल्य गिरने से इंटरनेषनल मार्केट में सस्ता हो रहा तेल भी मिल रहा है महंगा! आज देश में पैट्रोल की कीमत बढ़ते बढ़ते 70 रूपये तक जा पहुंची है लेकिन हमारी सरकार एक व्यापारी की तरह अधिक से अधिक मुनाफा टैक्स के रूप में कमाने से परहेज़ करने को तैयार नज़र […] Read more » petrol price पैट्रोल सरकार
लेख भाजपा में वरिष्ठ नागरिकों की दशा October 9, 2011 / December 5, 2011 by वीरेन्द्र जैन | Leave a Comment वीरेन्द्र जैन पिछले दिनों विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित एक गैर सरकारी संस्था ‘सम्पूर्णा’ की ओर से वरिष्ठ नागरिकों क सम्मान किया गया था। इस सम्मान समारोह में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा था कि न केवल समाज सेवी संस्थाएं और सरकार अपितु औद्योगिक घरानों […] Read more » Bhajpa old people वरिष्ठ नागरिक
लेख तेलंगाना पर घिरती कांग्रेस……………. October 9, 2011 / December 5, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment शादाब जफर “शादाब’’ आंध्र प्रदेश से दिल्ली तक तेलंगाना के मुद्दे पर देश में एक बार फिर से चुनावी आग भडकाई जा रही है। आंध्र प्रदेश में रोज रोज बंद, हिंसक रेल रोको आन्दोलन, अहम यह है कि तेलंगाना अलग राज्य का मसला आज आंध्र प्रदेश के लोगो के लिये एक गंभीर राजनीतिकआर्थिक-सामाजिक मुद्दा बन […] Read more » Congress Telangana कांग्रेस तेलंगाना
लेख गरीबी के बदलते पैमाने और मायने October 6, 2011 / December 5, 2011 by राजेश कश्यप | Leave a Comment राजेश कश्यप गत दिनों सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई अपनी एक रिपोर्ट में योजना आयोग ने कहा कि शहर में 32 रूपये और गाँव में 26 रूपये प्रतिदिन खर्च करने वाला व्यक्ति गरीबी रेखा (बीपीएल) की परिधि में नहीं आता है। कमाल की बात तो यह रही कि देश की शीर्ष अदालत में दाखिल […] Read more » poverty गरीबी गरीबी के बदलते पैमाने और मायने
लेख सरकार के विरोध से विपक्ष को लाभ मिले तो अन्ना का क्या क़सूर October 6, 2011 / December 5, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 1 Comment on सरकार के विरोध से विपक्ष को लाभ मिले तो अन्ना का क्या क़सूर इक़बाल हिंदुस्तानी जनता के दबाव में बदल रहा है बीजेपी का एजेंडा ? अन्ना हज़ारे ने एक बार फिर जनलोकपाल बिल को लेकर हुंकार भरी है। हज़ारे का यह कहना बिल्कुल ठीक है कि उनको इस बात का विश्वास होता जा रहा है कि कांग्रेस की नीयत यह बिल पास करने की नहीं है। अन्ना […] Read more » Anna Hazare Janlikpal Bill अन्ना का क्या क़सूर अन्ना हज़ारे जनलोकपाल बिल बीजेपी का एजेंडा राइट टू रिकाल
लेख शिव के राज में माता के वाहन पर संकट! October 4, 2011 / December 5, 2011 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे भगवान शिव बेहद भोले हैं वे थोड़ी सी ही भक्ति में प्रसन्न हो जाते हैं। मध्य प्रदेश में शिव का ही राज है। ये हैं पांव पांव वाले भईया शिवराज सिंह चौहान। शिव के गणों में वनों की देखभाल का जिम्मा है सरताज सिंह के कांधों पर। सरताज तो सरताज हैं उनकी देखरेख […] Read more » shiv ke raj शिव के राज
लेख चिलमन को जलाता सूचना का अधिकार October 4, 2011 / October 4, 2011 by डॉ0 शशि तिवारी | 3 Comments on चिलमन को जलाता सूचना का अधिकार डॉ. शशि तिवारी चिलमन न केवल कुरूपता को ढंकता है बल्कि रहस्यों को भी छिपाता है, जिसके परिणामस्वरूप उत्सुकता की प्यास भी और भी बढ़ती है। चिलमन अर्थात् पर्दा पारदर्शी या अपारदर्शी भी हो सकता है। पर्दा कभी भी हकीकत से रूबरू नहीं होने देता और राज, राज ही रहता है, कभी-कभी तो ये राज […] Read more » RTI सूचना का अधिकार
लेख आरक्षण: दलितों में क्रीमीलेयर तो अभी गिनती के हैं! October 2, 2011 / December 5, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 1 Comment on आरक्षण: दलितों में क्रीमीलेयर तो अभी गिनती के हैं! इक़बाल हिंदुस्तानी पिछड़ों का कोटा कम होने से इसकी ज़रूरत वहां वाजिब थी! देश में एक वर्ग ऐसा मौजूद है जो इस सच को आज भी समझने को तैयार नहीं है कि आरक्षण उसके साथ अन्याय नहीं बलिक उनके साथ आंशिक न्याय है जिनके साथ सदियों से या तो जानबूझकर नाइंसाफी की गयी है या […] Read more » Reservation आरक्षण दलितों में क्रीमीलेयर
लेख योगगुरू बाबा रामदेव ने सरकार को औक़ात बतादी है! October 2, 2011 / October 2, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 7 Comments on योगगुरू बाबा रामदेव ने सरकार को औक़ात बतादी है! इक़बाल हिंदुस्तानी बाबा को घेरने का षडयंत्र नाकाम होने से सरकार नतमस्तक! सरकार अब बाबा रामदेव के अभियान पर सफार्इ देती नज़र आ रही है। उसका कहना है कि कालेधन के प्रवाह पर नज़र रखने के लिये 16 देशों से बातचीत पूरी हो चुकी है। हालांकि सरकार ने अभी यह साफ नहीं किया है कि […] Read more » Baba Ramdev योगगुरू बाबा रामदेव
लेख एकात्म मानववाद के प्रणेता पं0 दीनदयाल उपाध्याय October 1, 2011 / December 6, 2011 by बृजनन्दन यादव | 2 Comments on एकात्म मानववाद के प्रणेता पं0 दीनदयाल उपाध्याय बृजनन्दन यादव वे एक ऐसे राजनेता थे जिन्हें सत्ता में कोर्इ आकर्षण नहीं था। फिर भी अपने अनुयायियों के दिलों पर राज करते थे। वे राजनीति को राष्ट्रसेवा का अंग मानते थे। पंडित दीनदयाल जी का जन्म 25 सितम्बर 1916 को मथुरा के निकट नगला चन्द्रभान नामक गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। […] Read more » pt. deendayal upadyay एकात्म मानववाद के प्रणेता पं0 दीनदयाल उपाध्याय
लेख नवजागरण काल में लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रतिष्ठा और हिन्दी पत्रकारिता October 1, 2011 / December 6, 2011 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment डा. मयंक चतुर्वेदी नव जागरण से तात्पर्य है भारत में आधुनिकता का प्रवेश, वैज्ञानिक दृषिटकोण का विकसित होना और किसी भी घटना के परिप्रेक्ष्य में तार्किक मीमांसा के लिए तैयार हो जाना अर्थात तर्क-विर्तक की खुली परम्परा का प्रारंभ। भारतीय सन्दर्भ में इस नवजागरण काल का श्रेय हम अंग्रेजों को दे सकते है, क्योंकि प्राचीन […] Read more » hindi journalism लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रतिष्ठा हिन्दी पत्रकारिता
लेख श्रीलाल शुक्ल और रागदरबारी September 29, 2011 / December 6, 2011 by वीरेन्द्र जैन | 4 Comments on श्रीलाल शुक्ल और रागदरबारी वीरेन्द्र जैन इसमें कोई सन्देह नहीं कि हिन्दी व्यंग्य के भीष्मपितामह हरिशंकर परसाई ही माने जाते हैं किंतु गत शताब्दी के सातवें दशक में अपने व्यंग्य उपन्यास रागदरबारी के प्रकाशन के बाद श्रीलाल शुक्लजी ने अपनी कुर्सी परसाई जी के बगल में ही डलवा ली थी। यह बिल्कुल वैसा ही था जैसे कि मतभेद निराकरण […] Read more »