साहित्‍य

भ्रष्टाचार पोषक चांडाल चौकडि सावधान हो जाओ जनता आती है।

आनन्द स्वरूप यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्वभवथि भारतह अभ्युथानम अधर्मस्य तदात्मानम स्रिजामि अहम। भगवान नें…