कविता अब तो पुराने दिन याद कर लेते है | March 14, 2019 / March 14, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अब तो पुराने दिन याद कर लेते है |अपनी ख्वासियो के चराग बुझा देते है || कभी सोलह आने स्वपन सच होते थेअब तो एक आने भी सच नहो होते है || बस अब तो मन मसोस कर रह जाते है |फिर से पुरानी यादे ताजा कर लेते है || पहले समय में पुडिया में […] Read more » अब तो पुराने दिन याद कर लेते है |
कविता साहित्य इलेक्शन आ गया… !! March 13, 2019 / March 13, 2019 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment चुनावी चकल्लस पर पेश है खांटी खड़गपुरिया कविता… इलेक्शन आ गया… !! समझा मत मैं समझ गियाइलेक्शन आ गियादामी गाड़ी घूम रहाकैडर लोग झूम रहाअफिसर लोग सुंघ रहानेता लोग चूम रहागरीब लोग खट रहाकपड़ा – साड़ी बंट रहाफोकट का चा – सिंघाड़ालड़का लोग कूट रहासमझा मत मैं समझ गियाइलेक्शन आ गिया————————— Read more »
कहानी साहित्य मां तुझे सलाम March 12, 2019 / March 12, 2019 by अल्का श्रीवास्तव | 1 Comment on मां तुझे सलाम र “इक़बाल भाई! ये देखो अमन की चिट्ठी आई है। ज़रा पढ़कर बताना तो, क्या लिखा है उसने? वह होली पर घर तो आ रहा है न? कहीं पिछली बार की तरह इस बार भी उसकी छुट्टियां रद्द तो नहीं हो गयीं?” कमला देवी एक साँस में बोलती चली गयीं। “अरे कमला बहन! अमन होली वाले […] Read more »
कविता आ गया है बुढ़ापा March 12, 2019 / March 12, 2019 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on आ गया है बुढ़ापा आ गया है बुढ़ापा,शरीर अब चलता नहीं |चेहरा जो गुलाब था,वह अब खिलता नहीं || हो गयी आँखे कमजोर,अब दिखता नहीं |काँपने लगे है हाथ,अब लिखा जाता नहीं || हो गये है कान कमजोर,अब सुना जाता नहीं |लगा लिया चश्मा भी,उससे काम चलता नहीं || टूट गये सभी दाँत,अब खाना खाया जाता नहीं |लगा लिया […] Read more » आ गया है बुढ़ापा
कहानी अनिका एक पहेली March 12, 2019 / March 12, 2019 by विजय हरित | Leave a Comment कभी कभी जीवन में कुछ ऐसा घटित होता है जिसका पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता। मैं हॉस्पिटल अपने एक परिचित को देखने गया था, परिचित को देखने के बाद मैं थोड़ी देर के लिए रिसेप्शन के सामने एक कुर्सी पर बैठ गया, तभी मुझे डॉक्टर से बात करती एक लड़की दिखाई थी, जो बेहद सिंपल […] Read more » अनिका
कविता नारी तू है एक ,पर तेरे रूप है अनेक March 11, 2019 / March 11, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment –आर के रस्तोगी नारी तू है एक,पर तेरे नाम है अनेक \ विद्या की दायनी सरस्वती कहलाती तू धन की दायनी लक्ष्मी भी कहलाती mनारी तू है एक,पर तेरे नाम है अनेक जब तू सुबह सुबह आती उषा कहलातीrr जब तू शाम को जाती संध्या है बन जाती कैसे तू दोनों टाइम बन जाती है […] Read more » नारी तू है एक पर तेरे रूप है अनेक
व्यंग्य उपानह प्रहार का हाईप्रोफाइल प्रचलन March 11, 2019 / March 11, 2019 by भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी | Leave a Comment अस्त्र और शस्त्र में अन्तर को लेकर काफी अरसे से जानकारों द्वारा अपने-अपने तरीके से व्याख्यान दिये जाते रहे हैं। फागुन के महीने में जब लोग मस्ती के मूड में रहते हैं तब विश्लेषक अस्त्र और शस्त्र के उदाहरण के रूप में हर घर की रसोई में उपलब्ध बेलन का जिक्र किया करते हैं। गुझिया, […] Read more »
कविता उठो जवानो ! भारत को आंतकवाद से मुक्त करना होगा | March 11, 2019 / March 11, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment उठो जवानो ! भारत को आंतकवाद से मुक्त करना होगा | होगा जो राष्ट हित में उसको तुम सबको अब करना होगा || आस्तीन के साँपों को अब उनके फ़न को कुचलना होगा | जो पिलाते है उनको दूध उन को भी अब जहर पीना होगा || कम करते है जो सेना का मनोबल,उनको अब […] Read more »
व्यंग्य जूता है तो सबकुछ मुमकिन है March 11, 2019 / March 11, 2019 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल भारतखंडे आर्यावर्ते जूता पुराणे प्रथमो अध्यायः। मित्रों! अब तो आप मेरा इशारा समझ गए होंगे, क्योंकि आप बेहद अक्ल और हुनरमंद हैं। आजकल जूता यानी पादुका संस्कृति हमारे संस्कार में बेहद गहरी पैठा बना चुकी है। इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए हम आपको इसकी महत्ता बताने जा रहे हैं। कहते हैं कि […] Read more »
लेख ऑनलाइन ट्रेनिंग आपके करियर के लिए कैसे हो सकता है फायदेमंद March 6, 2019 / March 6, 2019 by सर्वेश अग्रवाल | Leave a Comment ग्रेजुएशन की पढ़ाई के बाद, कृति अवसरों की तलाश में थी, लेकिन निरंतर प्रयासों के बाद भी उसे सफलता प्राप्त नहीं हुई। कृति को अहसास हुआ की यह असफलता का कारण पर्याप्त अनुभव न होना और कौशल की कमी है। दुर्भाग्य से, कृति जैसे अनेकों छात्र और छात्राएं हैं जो इस परेशानी से जूझ रहे […] Read more »