कहानी मेहमान April 28, 2025 / April 28, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment पाँच की मैगी साठ में खरीदी,सौदा भी कोई सौदा था?खच्चर की पीठ पे दो हज़ार फेंके,इंसानियत भी कोई इरादा था? बीस के पराठे पर दो सौ हँस कर,पचास टिप फोटो वाले को,हाउस बोट के पानी में बहा दिएहज़ारों अपने भूखे प्याले को। नकली केसर की खुशबू मेंअपनी सच्चाई गँवा बैठे,सिन्थेटिक शाल के झूठे रेशों मेंअपने […] Read more » मेहमान
लेख पशु सेवा, जनसेवा से कम नहीं April 26, 2025 / April 26, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment “विश्व पशु चिकित्सा दिवस पर एक विमर्श” विश्व पशु चिकित्सा दिवस हर साल अप्रैल के अंतिम शनिवार को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पशु चिकित्सकों की भूमिका को सम्मान देना और पशु स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य व पर्यावरण के आपसी संबंधों पर ध्यान केंद्रित करना है। यह लेख बताता है कि कैसे पशु चिकित्सक सिर्फ जानवरों […] Read more » पशु सेवा पशु सेवा जनसेवा से कम नहीं विश्व पशु चिकित्सा दिवस
कविता जातिवाद और साम्प्रदायिकता का जहर इस कदर फैला April 25, 2025 / April 25, 2025 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजातिवाद और साम्प्रदायिकता का जहर इस कदर फैलाकि भारत माता का आंचल हो गया दागदार व मटमैलाआज आरक्षण व अन्य सुविधाएँ इसी आधार से मिलतीमगर देश को जाति व साम्प्रदायिक व्यवस्था ही छलती! जातिवाद व साम्प्रदायिकता को नियंत्रित करना ही होगाभारत के खिलाफ साजिश करनेवाले को मसलना ही होगाये नहीं हो सकता कि […] Read more » The poison of casteism and communalism spread to such an extent
कविता मुस्कान का दान April 25, 2025 / April 25, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment कभी किसी शाम की थकी हुई साँसों में,तुम्हारा एक हल्का सा “कैसे हो?” उतरता है —जैसे रेगिस्तान में कोई बूँद गिर जाए,जैसे सूनी आँखों में उम्मीद फिर गहराए। दान क्या है?सिर्फ अन्न, जल, या स्वर्ण की गाथा नहीं,कभी-कभी वक्त का दिया पल भीकिसी की टूटती दुनिया की परिभाषा बदल देता है। तुम जब अनकहे दर्द […] Read more » gift of smile\
व्यंग्य नेताओं की मोहब्बत और जनता की नादानी April 25, 2025 / April 25, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment राजनीति की रंगमंचीय दुश्मनी और जनता की असली बेवकूफी कभी किरण चौधरी और शशि थरूर मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ़ खड़े होते हैं, कभी हिंदू-मुस्लिम के नाम पर पार्टियों की नीतियाँ बँटती हैं, और इसी बीच पिसती है आम जनता। क्या हमने कभी सोचा कि ये नेता तो एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं, कार्यक्रमों में […] Read more » The love of leaders and the ignorance of the public
कविता मैं और मेरी अलमारी में बंद किताबें ! April 24, 2025 / April 24, 2025 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment मैं और मेरी अलमारी में बंद किताबें ! आत्माराम यादव मैं बचपन से ही किताबों से बहुत प्रेम करता हूं, पहले लोटपोट, मधुर मुस्कान, नंदन गुडिया जैसी किताबों का चस्का लगा था धीरे धीरे सरिता,कादम्बिनी, माया निरोगधाम जैसी पत्रिकाओं का शौक मुझे सातवें आसमान पर पहुंचा देता था। किताबें पढ़ने के जुनून ने 10 साल […] Read more » मैं और मेरी अलमारी में बंद किताबें
लेख कोई पानी डाल दे तो मैं भी चौंच भर पीलूं: चुपचाप मरते परिंदों की पुकार April 24, 2025 / April 24, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment तेज़ होती गर्मी, घटते जलस्रोत और बढ़ती कंक्रीट संरचनाओं के कारण पक्षियों के लिए पानी और छांव जैसी बुनियादी ज़रूरतें भी दुर्लभ होती जा रही हैं। परिंदे हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं, और अगर वे गायब हो गए तो यह धरती और भी सूनी हो जाएगी। आधुनिक समाज एसी चलाने में सक्षम है […] Read more » चौंच भर पीलूं
लेख नायकों की पुनर्स्थापना की आवश्यकता April 23, 2025 / April 23, 2025 by डॉ.वेदप्रकाश | Leave a Comment डा.वेदप्रकाश हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि- हमारे राष्ट्रीय नायक महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज हैं, मुगल शासक औरंगजेब नहीं। यह हमारा नैतिक दायित्व है कि इतिहास में हुए अन्याय को हम खारिज करें। साथ ही देश के युवाओं को बताएं कि महाराणा प्रताप और शिवाजी महाराज केवल पुस्तकों […] Read more » महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज
लेख समाज नैतिक पतन की ओर बढ़ रही लिव इन की बुराई को रोकना होगा April 23, 2025 / April 23, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment लिव इन में रह रही युवती के अपहरण का प्रयास , महिला पर चढ़ाई गाड़ी ।यह खबर आज के समाचार पत्रों में प्रकाशित है । शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जिस दिन एक या एक से अधिक समाचार इस तरह की घटनाओं को लेकर प्रकाशित न होते हों । भारतीय समाज में इस […] Read more » defects of live in relation The evil of live-in relationship which is leading towards moral degradation must be stopped नैतिक पतन की ओर बढ़ रही लिव इन की बुराई को रोकना होगा
कविता अभी तो मेंहदी सूखी भी न थी April 23, 2025 / April 23, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment — पहलगाँव हमले पर एक कविता अभी तो हाथों से उसका मेंहदी का रंग भी नहीं छूटा था,कलाईयों में छनकती चूड़ियाँ नई थीं,सपनों की गठरी बाँध वो चल पड़ा था वादियों में,सोचा था — एक सफर होगा, यादों में बस जाने वाला। पर तुम आए —नाम पूछा, धर्म देखा, गोली चलाई!सर में…जहाँ शायद अभी भी […] Read more » terrorist attack in pahalgaon अभी तो मेंहदी सूखी भी न थी
कविता पहलगाम के आँसू April 23, 2025 / April 23, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment वो बर्फ से ढकी चट्टानों की गोद में,जहाँ हवा भी गुनगुनाती थी,जहाँ नदियाँ लोरी सुनाती थीं,आज बारूद की गंध बसी है। वो हँसी जो बाइसारन की घाटियों में गूँजी,आज चीखों में तब्दील हो गई।टट्टू की टापों के संग जो चला था सपना,खून में सना हुआ अब पथरीले रास्ते पर गिरा है। एक लेफ्टिनेंट — विनय,जिसने […] Read more » पहलगाम के आँसू"
कविता पहलगाम की चीख़ें April 23, 2025 / April 23, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment जब बर्फ़ीली घाटी में ख़ून बहा,तब दिल्ली में सिर्फ़ ट्वीट हुआ।गोलियाँ चलीं थी सरहद पार से,पर बहस चली—”गलती किसकी है सरकार से?” जो लड़ रहे थे जान पे खेलकर,उनकी कुर्बानी दब गई मेल में।और जो बैठे थे एयरकंडीशन रूम में,लिखने लगे बयान—”मोदी है क़सूरवार इसमें।” कब समझोगे, ये दुश्मन बाहर है,जो मज़हब की आड़ में […] Read more » पहलगाम की चीख़ें