व्यंग्य वर्क फ्रॉम होम March 18, 2020 / March 18, 2020 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment आये दिन अख़बारों में इश्तहार आते रहते हैं कि घर से काम करो ,घण्टों के हिसाब से कमाओ,डॉलर,पौंड में भुगतान प्राप्त करो।जिसे देखो फेसबुक,व्हाट्सअप पर भुगतान का स्क्रीनशॉट डाल रहा है कि इतना कमाया,उतना माल अंदर किया ।महीने भर की नौकरी पर एक दिन वेतन पाने वाला फार्मूला अब आदिम लगने लगा था।यूट्यूब पर भी […] Read more » work from home वर्क फ्रॉम होम
व्यंग्य डॉग लवर March 12, 2020 / March 12, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment ओमप्रकाश भारतीय उर्फ पलटू जी शहर के सबसे बड़े उद्योगपति होने के साथ ही फेमस डॉग लवर अर्थात् प्रसिद्ध कुत्ता प्रेमी भी थे। पलटू जी ने लगभग सभी नस्ल के कुत्ते पाल रखे थे। उन्हें कुत्तों से इतना प्रेम था कि कुत्तों के मल-मूत्र भी वे स्वयं साफ किया करते थे। उनके श्वान प्रेम पर […] Read more » डॉग लवर
व्यंग्य होशंगशाह किले की व्यथा March 7, 2020 / March 7, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment होशंगशाह गौरी का किला है कुछ खास खण्डहर हो चुका कभी था वह आवास नर्मदा का तट था सुल्तान को भाया सन चोदह सौ एक में किला बनवाया मंगलवारा घाट से मैं उसे अक्सर निहारू किले के अतीत का चिंतन मन में विचारु अनगिनत सवालों का सैलाब मन में होता अपने घर लौट आता ख्याल […] Read more » होशंगशाह किले की व्यथा
व्यंग्य बलम भरी मारो पिचकारी, लगाओ न गुलाल March 7, 2020 / March 7, 2020 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल अबकी अपुन की होली का सेंसेक्स धड़ाम है। बेचारी पहले ही भंग पीकर औंधे पड़ी है। क्योंकि पूरी दुनिया में मंदी और बंदी छायी है। अपन के मुलुक में भी मंदी, बंदी और गोलबंदी जड़े जमा चुकी है। इस बार की […] Read more » गुलाल
व्यंग्य ट्रेन और टॉयलट…!! February 14, 2020 / February 14, 2020 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझाट्रेन के टॉयलट्स और यात्रियों में बिल्कुल सास – बहू सा संबंध हैं। पतानहीं लोग कौन सा फ्रस्ट्रेशन इन टॉयलट्स पर निकालते हैं। आजादी के इतनेसालों बाद भी देश में चुनाव शौचालय के मुद्दे पर लड़े जाते हैं। किसनेकितने शौचालय बनवाए और किसने नहीं बनवाए , इस पर सियासी रार छिड़ी रहतीहै। देश […] Read more » sattire on toilets in train ट्रेन और टॉयलट
व्यंग्य अंकल कम्यूनलिज्म February 13, 2020 / February 13, 2020 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “वो सादगी कुछ भी ना करे तो अदा ही लगे वो भोलापन है कि बेबाकी भी हया ही लगे अजीब शख्स है नाराज हो के हँसता है मैं चाहता हूँ कि वो खफा हो तो खफा ही लगे” पोस्ट ट्रुथ के बाद ये फिलहॉल एक नया फैंसी शब्द है जो अपने को डिफेंड करते हुए […] Read more » communalism कम्यूनलिज्म
व्यंग्य बापू ! सत्याग्रह पर हैं February 4, 2020 / February 4, 2020 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल हमारे मित्र ढोंगी लाल ने काफी हाउस में चुस्कियां लेते हुए चुटकी ली। “अरे भाई ! सुना है बापू यानी गाँधी जी ने पुनः सत्याग्रह करने का ऐलान किया है। उन्हें दुःख है कि कुछ लोग उनके सत्याग्रह और आजादी मार्च […] Read more » बापू ! सत्याग्रह पर हैं
व्यंग्य साहित्य खिचड़ी बनाम बिरयानी February 4, 2020 / February 4, 2020 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “मालिन का है दोष नहीं ,ये दोष है सौदागर का, जो भाव पूछता गजरे का और देता दाम महावर का” ऐसा ही कुछ आजकल के धरना प्रदर्शनों का है जो किसी अन्य वजहों की वजह चर्चा में आ जाते हैं बजाय उसके जो वजह उन्होंने चुनी है ।धरना ,वैचारिक मतभेदों को लेकर है ,चर्चा में बिरयानी […] Read more » biryani serving to shahin bagh protester protest at shahin bagh बिरयानी
राजनीति व्यंग्य कागज़ नहीं दिखाएंगे January 21, 2020 / January 21, 2020 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “युग के युवा,मत देख दाएंऔर बाएं और पीछे ,झाँक मत बगलेंन अपनी आँख कर नीचे,अगर कुछ देखना है देख अपने वे वृषभ कंधे,जिन्हें देता निमंत्रणसामने तेरे पड़ा, युग का जुआ “युग का जुआ युवाओं को अपने कंधों पर लेने की हुंकार देने वाले कविवर हरिवंश राय बच्चन अपने अध्यापन के दिनों में डिग्री लेकर पास आउट […] Read more » कागज़ नहीं दिखाएंगे
व्यंग्य कंबल है कि पद्श्री अलंकरण ! January 18, 2020 / January 18, 2020 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल गरीबी और ठंड का रिश्ता जन्म जन्मांतर का है। जिस तरह लैला का मजनू से स्वाती का पपीहे से है। ठंड और गरीबी एक दूजे के लिए बने हैं। कहते हैं कि जोड़ियां बनकर आती हैं। भगवान ने ठंड और […] Read more » पद्श्री अलंकरण
व्यंग्य मेरा वो मतलब नहीं था January 14, 2020 / January 15, 2020 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “जामे जितनी बुद्धि है,तितनो देत बतायवाको बुरा ना मानिए,और कहाँ से लाय” देश में धरना -प्रदर्शन से विचलित ,और अपनी उदासीन टीआरपी से खिन्न फिल्म इंडस्ट्री के कुछ अति उत्साही लोगों ने सोचा कि तीन घण्टे की फिल्म में तो वे देश को आमूलचूल बदल ही देते हैं तो क्यों ना वास्तव में वो देश […] Read more » मेरा वो मतलब नहीं था
व्यंग्य हे भाय! तेरे से अच्छा मेरा वाद ? January 13, 2020 / January 13, 2020 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल ? आजकल अपन के मुलुक में वादियों का जमाना है। साहब! वादी तो वादी ही हैं। वह चाहे विचारवादी हों या अलगाववादी। काफी हाउस से लेकर शहर के टी-स्टालों और अखबार की सुर्खियों में बस एक ही चर्चा है। वह है वादियों […] Read more » अंबेडकरवादी कबंलवादी गांधीवादी गुंडावादि गोलीवादी डंडावादी नकाबवादी नेहरुवादी पटेलवादी बमवादी लाठीवादी सावरकरवादी सुभाषवादी हाकीवादी